NBSE Class-10| Hindi Grammar | भाव पल्लवन

Get here the notes/solutions/extras of NBSE Class-10| Hindi Grammar | भाव पल्लवन, However, the study materials should be used only for references and nothing more. The notes can be modified/changed according to needs.

In This chapter which is a part of the class 10 syllabus of Hindi for students studying under Nagaland Board of School Education:

NBSE Class-10| Hindi Grammar | भाव पल्लवन

Here You can learn or understand this chapter’s notes and question answer for NBSE Syllabus, all the materials are given in the basic and easy to learn for the students. We describe all the questions answer briefly in every state.

1. ‘अधजल गगरी छलकत जाय”

1.घड़े को जल से भर मस्तक पर रख मीलों चले जायँ पर जल छलक कर बाहर नहीं गिरता किन्तु यदि घड़े में पानी पूरा नहीं होगा तो वह जल छलक छलक कर गिरता जाता है ठीक उसी प्रकार विद्वान लोग गंभीर और शांत होते है कारण वे भरे हुये घड़े की तरह है दूसरी ओर कम पढ़ा लिखा व्यक्ति अपने पांडित्य का पर्दशन करता है कि मैं यह जानता हूँ मैं वह जानता हूँ और जहाँ तहाँ बक बक करता है।

2.”जहाँ चाह, वहीं राह”

यदि इच्छा शक्ति प्रबल हो तो मनुष्य के लिये कोई भी काम असंभव नहीं है। मन से लगन होनी चाहिए, सफलता अपने आप कदम चूमने लगेगी। प्रबल इच्छा के आगे बाधा विघ्न दम तोड़ देते है। भगीरथ ने चाहा तो गंगा को उतार दिया, राम मे चाहा तो समुद्र पर पुल बाँध

दिया, गाँधी ने चाहा तो देश को आजाद करा दिया। अतः कितना भी कठिन राह हो हमें आगे की ओर बढ़ना चाहिए। सच ही कहा गया है चाह एवं राह में अटूट रिस्ता है।

3.”ऐसी बानी बोलिए मन का आपा खोय” 

वाणी अर्थात वचन में अपार शक्ति है। वाणी द्वारा मनुष्य अपने मन के विचारों को प्रकट करता है। वाणी सुख और दुःख का कारण बनती है मधुर वचन से प्रेम बढ़ता है एवं कटु वचन से शत्रुता बढ़ती वाणी से ही मनुष्य की पहचान होती है अहंकारी व्यक्ति के वचन में मिठास नहीं होती उसे सुनकर मन मे रोष और घृणा पैदा होती है वही सज्जन व्यक्ति के वचन में मिठास होती है जिसे सुनकर मन शीतल हो जाता है इसीलिए तुलसी ने कहा है • तुलसी मीठे वचन से सुख उपजत चहुँ ओर अतः मधुर वचन बोलो।

4.”दैव देव आलसी पुकारा”

आलस मनुष्य का परम शत्रु है। आलसी व्यक्ति भाग्य के भरोसे हाथ पर हाथ रख बैठे रहते है। धीरे धीरे एक दिन ऐसा आता है। कि उसकी सारी कार्यक्षमता नष्ट हो जाती है और रोग ग्रसित हो उठता है। कायरता, भय, विवशता, निष्क्रियता उसके आस पास मडराते है। आलसी व्यक्ति केवल देव देव पुकारता है अर्थात केवल ईश्वर भरोसे बैठा रहता है किन्तु उसे यह नहीं पता कि ईश्वर उसी की मदद करता है जो अपनी मदद स्वयं करता है। अतः आलस का परित्याग कर कर्मठ बन मानव जीवन को सफल करो।

5.”लालच बुरी बला है’

यह सच ही कहा गया है कि लालच बुरी बला है कारण लोभ से मनुष्य पाप करता है और पाप से दुःख होता है। एक किसान के पास एक मुर्गी थी जो रोज एक सोने का अण्डा देती थी किन्तु किसान इससे सन्तुष्ट नहीं था। उसने सोचा यदि एक ही साथ मुझे सारे अण्डे मिल जाते तो कितना अच्छा होता। अतः लालच में आकर उसने एक दिन मुर्गी को मार डाला किन्तु उसे एक भी अण्डा प्राप्त नहीं हुआ और वह सिर पीट कर पछताने लगा। अतः हमें लोभ या लालच नहीं करना ताहिये।

NBSE Class-10 Hindi Notes/Solutions

Chapter No.Chapter’s Name
गद्य भाग (क)
पाठ 1मिठाईवाला
पाठ 2अकेली
पाठ 3बुढ़िया का बदला
पाठ 4वापसी
पाठ 5भारतीय संस्कृति में गुरु-शिष्य सम्बन्ध
पाठ 6व्यवहार कुशलता
पाठ 7भेड़ें और भेड़िये
पद्य भाग (ख)
पाठ 8नीति के दोहे
पाठ 9बिहारी के दोहे
पाठ 10कर्मवीर
पाठ 11गीत मेरे
पाठ 12अकाल और उसके बाद
पाठ 13पुजारी, भजन, पूजन और साधन
व्याकरण (ग)
1.संधि और उसके भेद
2.समास और विग्रह
3.पर्यायवाची / विलोम शब्द
4.कारक भेद और प्रयोग
5.काल और उसके भेद
6.वाच्य और उसके भेद
7.वचन और लिंग
8.मुहावरे और लोकोत्तियाँ
9.Translate (Hindi to English)
10.Easy Writing
11.पत्र लेखन
12.संक्षेपण
13.भाव पल्लवन

Leave a Reply