NBSE Class-10| Hindi | Chapter-13 पुजारी भजन पूजन और साधन

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In This chapter NBSE Class-10| Hindi | Chapter-13 पुजारी भजन पूजन और साधन which is a part of the class 10 syllabus of Hindi for students studying under Nagaland Board of School Education:

NBSE Class-10| Hindi | Chapter-13 पुजारी भजन पूजन और साधन

Here You can learn or understand this chapter’s notes and question answer for NBSE Syllabus, all the materials are given in the basic and easy to learn for the students. We describe all the questions answer briefly in every state.

पद्य भाग (ख)

प्रश्न अभ्यास

I. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजीये – –

1. कवि ने पुजारी से भजन, पूजन छोड़ने की बात क्यों कही ?

उत्तर: कवि ने पुजारी से भजन पूजन छोड़ने की बात कही है कारण ईश्वर का बास देवालय में नहीं अपितु कर्मभूमि में है जहाँ किसान और मजदूर अपना पसीना बहा रहे है।

2. “तेरा देवता वहीं चला गया है” पंक्ति से कवि का क्या अभिप्राय है ? 

उत्तर : “तेरा देवता वहीं चला गया है” से कवि का अभिप्राय यही है तेरा देवता मंदिर छोड़ कर उस कर्मभूमि में चला गया है जहाँ उत्पादन में लगे लोग अपनी मेहनत मजदूरी से नया मार्ग प्रशस्त कर रहें है। स्वयं प्रभुजी भी अपने सृजन कर्म से बंधे है।

3. कविता में किसान और मजदूर के बारे में क्या कहा गया है ? 

उत्तर : कविता में किसान और मजदूर के बारे में कहा गया है कि किसान और मजदूर धूल-मिट्टी की परवाह किये बिना, फटे वस्त्रों में पसीने से लतफत, धूप एवं बरसात से बेखबर, कड़ी मेहनत में लग्न रहते हैं।

II. निम्नलिखित पद्यखण्ड का सन्दर्भ सहित सप्रसंग व्याख्या कीजीये। 

क) मुक्ति! मुक्ति अरे कहाँ है ?

………………………..

अपने सृष्टि-बन्ध से प्रभु स्वयं बँधे हैं।

संदर्भ :प्रस्तुत पद्यखण्ड “पुजारी, भजन, पूजन और साधन” नामक पाठ से ली गई है। इसके कवि रवीन्द्रनाथ ठाकुर जी हैं। 

प्रसंग : कवि पुजारी से कहता है कि भजन पूजन और आराधना छोड़ दो कारण तेरा प्रभु देवालय में नहीं है।

व्याख्या : कवि के अनुसार प्रभु देवालय में नहीं अपितु कर्मक्षेत्र में है। वह पुजारी से कहता है कि मंदिर में पूजा से मुक्ति नहीं मिलेगी । तू भी कर्मक्षेत्र मे उतर कारण तेरे भगवान भी दिन रात सृजन कर्म में रत हैं।

अतः यदि मुक्ति चाहिऐ तो कर्म पथ पर चल जिस पर प्रभु चल रहे हैं। सच्ची आराधना “परिश्रम” है।

ख) फूल की डाली की छोड़ दे

………..  . ……………..

उनके साथ काम करते हुए पसीना बहने दे।

सन्दर्भ : प्रश्न I (क) के ही जैसा। 

प्रसंग : कवि पुजारी से कहता है कि मंदिर में बैठकर पूजा पाठ से तुझे मुक्ति नहीं मिलनेवाली ।

व्याख्या : कवि कहता है कि हे पुजारी पूजा हेतु लाये फूल की डाली को किनारे रख कर कर्मभूमि की ओर चल और धूल मिट्टी की परवाह किये बिना, वस्त्रों की ओर ध्यान दिये बिना, कड़ी मेहनत से अपने किस्मत को सँवार। किसानों और मजदूरों के साथ तू भी अपना पसीना बहा, कारण भगवान भी कर्म से बँधे है और सत्कर्म में उनका निवास है।

III. इस कविता का मूल संदेश क्या है ? सही उत्तर छाँटिये । 

क) परिश्रम ही सच्ची उपासना है।

ख) एकान्त आराधना ही सच्ची उपासना है। 

ग) भजन करना ही सच्ची उपासना है।

घ) देवालय में बैठना ही सच्ची उपासना है।

उत्तर : (क) परिश्रम ही सच्ची उपासना है।

भाषा-अध्ययन

1.निम्नलिखित शब्दों का अर्थ-भेद करते हुये वाक्य वनाइये – 

सृष्टि (संसार) – यह सृष्टि प्रभु की रचना है।

सृष्टि रचना) प्रभु सृष्टि करते है। 

वन (जंगल) – यह सघन वन है। 

वन (मजदूरी) – मजदूर को वन दो।

हार (फूलो का माला) – मंत्री जी को हार पहनाया गया।

हार (परास्त) – खेल में मैं हार गया।

मूल (जड़) – वृक्ष मूल पर खड़ा है।

मूल (एक नक्षत्र का नाम) – तुलसी दास का जन्म मूल नक्षत्र में हुआ था।

मित्र (साथी) – वह मेरा मित्र है।

मित्र (प्रिय) – मेरा सम्बन्ध मित्रवत है।

2.निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द लिखिये।

अनुज -अग्रज 

आकाश- पाताल

उत्तर – दक्षिण

अमृत – विष

अभिमान -निरभिमान

वन-शहर

आय- व्यय

ग्राम्य- शहरी

प्रेम -नफरत

सामान्य- विशेष

समर्थन – विरोध 

त्रासदी- शान्ति

3.निम्नलिखित शब्दों के पर्यायवाची शब्द लिखिए।

अनुपम-अतुल, अनोखा

असुर – दावन, राक्षस 

उजाला -आलोक, प्रकाश 

कपड़ा- चीर, बस्त्र 

कौआ- कागा, काक

खल- दुष्ट, शठ

गृहकार्य

1. अंग्रेजी में अनुवाद कीजिये

क) रामायण हिन्दुओं का पवित्र ग्रन्थ है। 

Ramayan is the holy book of the Hindus. 

ख) श्री पी. शीलू नागालैण्ड के प्रथम मुख्यमन्त्री थी।

Sri P. Silu was the first chief minister of Nagaland. 

ग) सारामती नागालैण्ड की सबसे ऊँची चोटी है। 

Saramati is the highest peak in Nagaland.

घ) डा० राजेन्द्र बाबू साधारण व्यक्ति थे।

Dr. Rajendra Babu was a simple man. 

ङ) बच्चे मैदान में खेल रहे है।

Children are playing in the field. 

2. ‘परिश्रम ही ईश्वर की उपासना है’ भाव पल्लवन कीजिये –

उत्तर : परिश्रम ही ईश्वर की सच्ची आराधना है कारण कर्म से विमुख व्यक्ति ईश्वर को पा ही नहीं सकता है ईश्वर तो मंदिर में नहीं अपितु खेत खलिहान तथा मजदूरों के श्रम में है। श्री कृष्ण ने गीता में कर्म को सर्वोपरि बताया है। जो कर्म अर्थात परिश्रम करते है ईश्वर उसी की सहायता करते है अतः ईश्वर की सच्ची भक्ति होगी जब हम “कर्म ही पूजा के सिधान्त पर चलेगें।

3. नीचे लिखे वाक्यों के प्रश्नवाचक वाक्य बनाईये क) कोहिमा नागालैण्ड की राजधानी है। -कोहिमा किसकी राजधानी है ? 

ख) तेमजन कल दिल्ली जायेगा।

तेमजन कब दिल्ली जायेगा ?

ग) उसने अपने भाई को पाँचसौ रुपये दिये।

उसने अपने भाई को कितने रुपये दिये ?

घ) बच्चे फुटबाल खेलने के लिए मैदान में खड़े है। 

बच्चे मैदान में क्यों खड़े है ? 

4. निम्नलिखित वाक्यों में परसगों की अशुद्धियों हैं उन्हे शुद्ध किजीये।

क) अंकुर भावना को भोजन लाया। x 

अंकुर भावना के लिए भोजन लाया।✅

ख) घाव में मरहम लगा दिया। x 

घाव पर मरहम लगा दिया। ✅

ग) तुम्हें उसको बताया। x 

तुम्हें उसने बताया।✅

घ) यह ग्रन्थ उसने दे दो। x

यह ग्रन्थ उसे दे दो। ✅

ङ) चाकू खरबूजा काट लो। X

चाकू से खरबूजा काट लो।✅

च) मैना डाली में बैठी है। X 

मैना डाली पर बैठी है।✅

छ) खान को कोयला निकलता है। 

x खान से कोयला निकलता है।✅

ज) श्याम रेल को बम्बई गया। x 

श्याम रेल से बम्बई गया। ✅

झ) कलमदान मेज में रख दो। x

कलमदान मेज पर रख दो।✅

ञ) सियाली पेड़ पर नीचे बैठी है। x 

सियाली पेड़ के नीचे बैठी है।✅

NBSE Class-10 Hindi Notes/Solutions

Chapter No.Chapter’s Name
गद्य भाग (क)
पाठ 1मिठाईवाला
पाठ 2अकेली
पाठ 3बुढ़िया का बदला
पाठ 4वापसी
पाठ 5भारतीय संस्कृति में गुरु-शिष्य सम्बन्ध
पाठ 6व्यवहार कुशलता
पाठ 7भेड़ें और भेड़िये
पद्य भाग (ख)
पाठ 8नीति के दोहे
पाठ 9बिहारी के दोहे
पाठ 10कर्मवीर
पाठ 11गीत मेरे
पाठ 12अकाल और उसके बाद
पाठ 13पुजारी, भजन, पूजन और साधन
व्याकरण (ग)
1.संधि और उसके भेद
2.समास और विग्रह
3.पर्यायवाची / विलोम शब्द
4.कारक भेद और प्रयोग
5.काल और उसके भेद
6.वाच्य और उसके भेद
7.वचन और लिंग
8.मुहावरे और लोकोत्तियाँ
9.Translate (Hindi to English)
10.Easy Writing
11.पत्र लेखन
12.संक्षेपण
13.भाव पल्लवन

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