NBSE Class-10| Hindi | Chapter-9 बिहारी के दोहे

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NBSE Class-10| Hindi | Chapter-9 बिहारी के दोहे

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पद्य भाग (ख)

अभ्यास प्रश्न उत्तर

1. बिहारी के प्रमुख ग्रंथ का नाम बताइये ।

उत्तर : बिहारी का प्रमुख ग्रंथ सतसई है।

2. अपनी रचनाओं में बिहारी ने किस भाषा का प्रयोग किया है ?

उत्तर : अपनी रचनाओं में बिहारी ने ब्रज भाषा का प्रयोग किया है पर कहीं कहीं बुन्देलखण्डी शब्द भी मिल जाते हैं।

3. बिहारी के अनुसार समाज में कैसे लोगों को सम्मान मिलता है ? 

उत्तर : बिहारी के अनुसार समाज में उसी को सम्मान मिलता है जिसके तन में बुराई बसती है अर्थात जो दुष्ट लोग हैं।

4. बिहारी ने मनुष्य एवं जल की प्रकृति को क्यों समान माना है ? 

उत्तर : बिहारी ने मनुष्य एवं जल की प्रकृति को समान इसलिए माना है कारण जल तथा मनुष्य दोनो जितने नीचे जाते हैं वे उतने ही उँचे उठ जाते हैं अर्थात नम्रता एवं लघुता से प्रभुता मिलती है। 

5. नीच मनुष्य की प्रकृति में बदलाव कैसे नहीं आता ?

उत्तर : नीच मनुष्य की प्रकृति में बदलाव नहीं आता जिस प्रकार नल का जल चाहे जितना भी उपर चढ़ा दिया जाय, अंत में उस जल को नीचे ही आना है। उसी प्रकार नीच अपनी नीचता नहीं छोड़ता। 

6. नाम बड़ा होने से गुणवान नहीं होता, यह किस प्रकार बिहारी ने सिद्ध किया है ?

उत्तर : “कनक” नाम है सोने का तथा “कनक” नाम है धतूरे का । परन्तु धतूरे का नाम बड़ा होने पर भी उससे गहना नहीं बन पाता । गहना केवल सोने से ही बनता है। इस प्रकार नाम बड़ा होने से कोई गुणवान नहीं होता।

7. कनक- कनक ते सौ गुनी में कनक शब्द का अर्थ दो रूपों में किया गया है इससे कवि क्या स्पष्ट करना चाहता है ? 

उत्तर : कनक कनक ते सौ गुनी में कनक शब्द का दो अर्थ है -एक कनक सोने के लिए तथा दूसरा कनक धतूरे के लिए। आदमी धतूरा खाने से पागल हो जाता है परन्तु सोना (धन) पाने से ही पागल हो जाता है। कहने का अर्थ यह है कि धन में धतूरे से अधिक मादकता है।

8. निम्नलिखित पंक्तियों की सन्दर्भ तथा प्रसंग सहित व्याख्या कीजिये………। 

क) संगति दोषु लगे सबनु

………. कुटिल बग गति नैन ।। 

सन्दर्भ : प्रस्तुत दोहा “बिहारी के दोहे” नामक पाठ से ली गई है इसके रचना कार है बिहारी जी ।

प्रसंग : कवि ने इस दोहे में संगति से दोष लगता है ऐसा बताया है। 

व्याख्या : कवि कहता है कि संगति दोष सभी को लगता है अर्थात जैसी संगति में हम रहेगें वैसा ही बन जाते है यह बात सत्य है। जिस प्रकार जब भृकुटि टेढ़ी हो जाती है तो आँख भी टेढ़ी हो जाती है। कारण आँख भृकुटि के साथ ही रहती है।

ख) बड़े न हूजे गुनन बिनु – बिरद बड़ाई पाई ।।

संदर्भ : प्रस्तुत दोहा “बिहारी के दोहे” नामक पाठ से ली गई है इसके रचना कार है बिहारी जी ।

प्रसंग : कवि कहना चाहता है कि नाम बड़ा होने से कोई गुणवान नहीं बन जाता।

व्याख्या : कवि कहता है कि कोइ नाम बड़ा पा जाने पर बड़ा नहीं बन जाता चाहे लोग कितनी ही बड़ाई कर ले। धतूरे का नाम भी कनक है और सोने का नाम भी कनक है। अतः सोना धतूरे से कहता है तुम्हारा नाम भी कनक है किन्तु तुमसे गहना नहीं बनता। अर्थात नाम के साथ गुण भी जरुरी है।

ग) बसे बुराई जासु तन, खोटे ग्रह जप दान ।।

संदर्भ : प्रस्तुत दोहा “बिहारी के दोहे” नामक पाठ से ली गई है इसके रचना कार है बिहारी जी ।

प्रसंग : कवि कहता है कि आज के युग में दुष्ट प्रकृति के लोगों को सम्मान मिलता है।

व्याख्या : कवि बिहारी कहते हैं कि आज के युग में जिसके तन में बुराई बसती है अर्थात जो दुष्ट प्रकृति वाले है उन्ही को आदर सम्मान मिलता है अतः ऐसे लोगों से बैर मत करो इनको भला भला कहकर इनसे दूर रहो जिस प्रकार लोग खोटे ग्रह (शनि और

राहू) को जप-दान, पूजा-पाठ करके अपने से दूर रखते हैं। नीचे लिखे शब्दों के दो दो पर्यायवाची शब्द लिखिये –

भाषा अध्ययन

1.नीचे लिखे शब्दों के विलोम शब्द लिखिये

आसमान –आकाश, अम्बर

अनुपम-अनूठा, अनोखा

पेड़ –माता तरु, वृक्ष 

माता -जननी, माँ 

लहर- प्रवाह, बहाव 

सोना -कनक, कंचन 

पहाड़ -गिरि, पर्वत

फूल -सुमन, कुसुम 

मछली – अनूठा, मत्स्य

2. नीचे लिखे शब्दो के विलोम शब्द लिखिये – 

भूत = भविष्य 

बाढ़ = सूखा

पुरस्कार = दण्ड

प्रकाश = अंधकार

पतन उत्थान

पवित्र अपवित्र

प्राचीन = नवीन 

नीति = अनीति 

मालिक = नौकर 

रक्षक = भक्षक 

रक्षा = हत्या 

3.नीचे लिखे शब्दों के अर्थ भेद करते हुए वाक्य बनाइये

कनक (सोना) कनक (धतूरा) – कनक से गहना बनता है। 

कनक (धतूरा) कनक नशीला फल है।

कोटि (श्रेणी) वह किस कोटि का आदमी है।

अर्थ (मतलब) अर्थ (धन) इस दोहे का क्या अर्थ है ?

मुझे अर्थ की चाह नहीं। अर्क की पूजा करो। अर्क (सूर्य) –

अर्थ (मतलव) इस दोहे का क्या अर्थ है ? 

अर्थ (धन)मुझे अर्थ की चाह नहीं।

अर्क (सूर्य) अर्क की पूजा करो। 

अर्क (रस) – मुझे जामुन का अर्क दो

अम्बर (कपड़ा) पीताम्बर ले आओ। 

अम्बर (आकाश) अम्बर में तारे हैं।

जन (लोग) भारत की जन संख्या कितनी है ? 

जन (जाति)आपकिस जन से हैं ?

पानी (जल) पानी ही जीवन हैं। 

पानी (इज्जत) मनुष्य को पानी बचा कर रखना चाहिए

4.नीचे लिखे वाक्यों में खाली जगहों को भरिये – 

क) कोहिमा एक …. है। (शहर, सहर)

ख) तेमजन बड़ा ही …..है। (दीन, दिन)

ग) मेरे मित्र के पास …..है। (कृपण, कृपाण

घ) वह बहुत ……है। (कृपण, कृपाण

ङ) यह मेरा ……है। (गृह, ग्रह)

च) उसके कपड़े से ….की गन्ध आ रही है। (इत्र, इतर)

छ)….. भीख माँगता है। (कंकाल, कंगाल) 

ज)……के तीन भेद है। (कल, काल)

5. चीने लिखे हिन्दी वाक्यों का अंग्रेजी अनुवाद ।

क) किसी व्यक्ति की पहचान उसकी संगति से होता है। 

Any man is known by the company he keeps. 

ख) अनुशासन ही देश को महान बनाता है।

Descipline makes a nation great.

ग) संघर्ष ही जीवन है। Struggle is life.

घ) जल ही जीवन है। Water is life.

ङ) सभी चमकने वाली वस्तुएँ सोना नहीं होती। All that glitters is not gold.

च) भारतीय संस्कृति पुरानी है। Indian culture is old.

छ) हमे बाढ़ पीड़ितों की सहायता करनी चाहिए। We should help the flood victims.

NBSE Class-10 Hindi Notes/Solutions

Chapter No.Chapter’s Name
गद्य भाग (क)
पाठ 1मिठाईवाला
पाठ 2अकेली
पाठ 3बुढ़िया का बदला
पाठ 4वापसी
पाठ 5भारतीय संस्कृति में गुरु-शिष्य सम्बन्ध
पाठ 6व्यवहार कुशलता
पाठ 7भेड़ें और भेड़िये
पद्य भाग (ख)
पाठ 8नीति के दोहे
पाठ 9बिहारी के दोहे
पाठ 10कर्मवीर
पाठ 11गीत मेरे
पाठ 12अकाल और उसके बाद
पाठ 13पुजारी, भजन, पूजन और साधन
व्याकरण (ग)
1.संधि और उसके भेद
2.समास और विग्रह
3.पर्यायवाची / विलोम शब्द
4.कारक भेद और प्रयोग
5.काल और उसके भेद
6.वाच्य और उसके भेद
7.वचन और लिंग
8.मुहावरे और लोकोत्तियाँ
9.Translate (Hindi to English)
10.Easy Writing
11.पत्र लेखन
12.संक्षेपण
13.भाव पल्लवन

बिहारी के दोहों के अर्थ

1. संगति दोषु लगौ सबनु…… कुटिल बंक गति नैन । ।

उत्तर : सन्दर्भ : प्रस्तुत दोहा “बिहारी के दोहे” नामक पाठ से ली गई है इसके रचना कार है बिहारी जी ।

प्रसंग : कवि ने इस दोहे में संगति से दोष लगता है ऐसा बताया है। 

व्याख्या : कवि कहता है कि संगति दोष सभी को लगता है अर्थात जैसी संगति में हम रहेगें वैसा ही बन जाते है यह बात सत्य है। जिस प्रकार जब भृकुटि टेढ़ी हो जाती है तो आँख भी टेढ़ी हो जाती है। कारण आँख भृकुटि के साथ ही रहती है।

2.बढ़त बढ़त सम्पति…..बरु समूल कुम्हिलाई ।

उत्तर : कवि बिहारी कहते हैं कि सम्पत्ति रुपी जल बढ़ते-बढ़ते जब बढ़ जाता है तो मन रुपी कमल भी बढ़ जाता है। किन्तु जब सम्पति रूपी जल घट जाता है तब भी मन रुपी कमल अर्थात मन नहीं घटता अर्थात मनुष्य की शान वही रहती है।

3. बड़े न हूजै गुनन बिनु – गहनो गढ़यौ न जाई ।।

उत्तर : संदर्भ : प्रस्तुत दोहा “बिहारी के दोहे” नामक पाठ से ली गई है इसके रचना कार है बिहारी जी ।

प्रसंग : कवि कहना चाहता है कि नाम बड़ा होने से कोई गुणवान नहीं बन जाता।

व्याख्या : कवि कहता है कि कोइ नाम बड़ा पा जाने पर बड़ा नहीं बन जाता चाहे लोग कितनी ही बड़ाई कर ले। धतूरे का नाम भी कनक है और सोने का नाम भी कनक है। अतः सोना धतूरे से कहता है तुम्हारा नाम भी कनक है किन्तु तुमसे गहना नहीं बनता। अर्थात नाम के साथ गुण भी जरुरी है।

4.कोटि जतन कोऊ करौ….अंत नीच कौ नीचु ।। 

अर्थ : कवि बिहारी कहते है कि चाहे कोइ लाख जतन करले किन्तु नीच मनुष्य की प्रकृति में बदलाव नहीं आता जिस प्रकार नलके के जल को बल द्वारा उपर चढ़ा दिया जाय परन्तु वह जल अन्त में नीचे की ओर ही आता है। उसी प्रकार नीच मनुष्य भी कितना भी बड़ा बन जाय पर अपनी नीचता नहीं छोड़ता।

5.जगत जनायौ जिहि सकल • आँखि न देखी जाहि । ।

अर्थ : कवि बिहारी कहते है जिसने हमे इस संसार से परिचित कराया अर्थात जिस ईश्वर ने हमें बनाया हम उसके बारे में नही जान पाते ठीक उसी प्रकार जिस प्रकार हम अपनी आँख से सब कुछ देख पाते हैं किन्तु हम अपनी आँख को ही नहीं देख पाते।

6. कनक कनक ते सौ….• इहि पाये बौराई ।।

अर्थ : कवि बिहारी कहते है कि एक कनक का अर्थ है सोना तथा दूसरे कनक का अर्थ है धतूरा। सोना अर्थात धन में धतूरा से सौ गुना अधिक नशा है कारण धतूरा खाने पर आदमी पागल हो जाता है। किन्तु सोना पाने से ही आदमी पागल हो जाता है।

7. नर की अरु नल नीर…… तेते ऊँचो होइ ।।

अर्थ : कवि बिहारी कहते है कि नर अर्थात मनुष्य एवं नल के जल की गति एक जैसी है। नलके का जल जितना नीचे जाता है उतना ही उठता है और मनुष्य जितना नम्र हो कर रहता है उसे उतना ही बड़प्पन मिलता है।

8. बसे बुराई जासु – खोटे ग्रह जप दान ।।

अर्थ :संदर्भ : प्रस्तुत दोहा “बिहारी के दोहे” नामक पाठ से ली गई है इसके रचना कार है बिहारी जी ।

प्रसंग : कवि कहता है कि आज के युग में दुष्ट प्रकृति के लोगों को सम्मान मिलता है।

व्याख्या : कवि बिहारी कहते हैं कि आज के युग में जिसके तन में बुराई बसती है अर्थात जो दुष्ट प्रकृति वाले है उन्ही को आदर सम्मान मिलता है अतः ऐसे लोगों से बैर मत करो इनको भला भला कहकर इनसे दूर रहो जिस प्रकार लोग खोटे ग्रह (शनि और

राहू) को जप-दान, पूजा-पाठ करके अपने से दूर रखते हैं। नीचे लिखे शब्दों के दो दो पर्यायवाची शब्द लिखिये –

9. अरे हंस या नगर……कोकिल हई बिडार

अर्थ : कवि बिहारी कहते हैं कि अरे हंस नगर में जाने से पहले सोच बिचार कर जाना कारण नगर में रुप की पूजा है गुण की नहीं। लोग कोयल को तो मार कर भगा देते हैं और कौए से प्रेम करते हैं। यहाँ हंस और कोयल सज्जन व्यक्ति का प्रतीक है तथा कौआ दुर्जन व्यक्ति का प्रतीक है।

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