NBSE Class-10| Hindi | Chapter-6 व्यवहार कुशलता

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NBSE Class-10| Hindi | Chapter-6 व्यवहार कुशलता

Here You can learn or understand this chapter’s notes and question answer for NBSE Syllabus, all the materials are given in the basic and easy to learn for the students. We describe all the questions answer briefly in every state.

गद्य भाग (क)

II. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर

1. विद्यार्थी के भाषण पर श्रोताओं ने तालियाँ क्यों पीटीं ?

उत्तर : विद्धार्थी के भाषण पर श्रोताओं ने तालियाँ पीटी कारण जब विद्यार्थी भाषण देने के लिए खड़ा हुआ तब उसका भाषण जमा नहीं वह घबरा गया और बोल नहीं पाया। उसकी खिल्ली उड़ाने के लिए श्रोताओं ने तालियाँ पीटी ।

2. भाषण देने में असफल विद्यार्थी की हिम्मत लेखक ने किस प्रकार बढ़ायी ?

उत्तर : भाषण देने में असफल विद्यार्थी की हिम्मत लेखक ने यह कहकर बढ़ाई कि शुरु शुरु में तो ऐसा होता ही है पर बाद में आदत होने से यह सब दूर हो जाता है। 

3.लेखक के प्रोत्साहन का विद्यार्थी पर क्या प्रभाव पड़ा ?

उत्तर : लेखक के प्रोत्साहन का विद्यार्थी पर यही प्रभाव पड़ा कि उसकी हिम्मत लौट आयी और आगे चल कर वह काफी अच्छा वक्ता हो गया। 

4. लोगों को हमारी सहानुभूति की सबसे अधिक आवश्यकता क होती है ?

उत्तर : जब लोग त्रस्त होते हों, पराजित हों या शोक-ग्रस्त हों तभी उन्हें हमारी सहानुभूति की सबसे अधिक आवश्यकता होती है। 

5. मनुष्य की किन दो मूल प्रवृत्तियों की ओर लेखक ने ध्यान दिलाया है ?

उत्तर : मनुष्य की दो मूल प्रवृत्तियाँ होती हैं एक तो यह कि लोग हमारे गुणों की कद्र करें, हमारा दाद दें और हमारा आदर करें और दूसरे वे हम पर प्रेम करे, हमारा अभाव महसूस करें, उनके जीवन में हम कुछ महत्व रखते हैं – ऐसा अनुभव करें |

6. किसी व्यक्ति के हृदय को जीतने के लिए हमें किस तरह का व्यवहार करना चाहिए ?

उत्तर : किसी व्यक्ति के हृदय को जीतने के लिये दूसरों के सुख-दुःख अन्तःकरण से दिलचस्पी लेना, जिसमें रंच मात्र भी बनावटी पन न हो और भावना सच्ची हो, तथा उनके साथ सच्चाई एवं स्नेह का व्यवहार करना ही हृदय को बाँध सकती है।

III. व्यवहार कुशलता के उपयुक्त लक्षण आहे सही (V) का निशान लगाइये –

क) दूसरों के प्रति शिष्टाचार का निर्वाह करना ।

ख) दूसरों की भावना को समझ कर चुप रहना ।

ग) आत्मप्रशंसा के लिए अवसर के अनुकूल आचरण करना ।

घ) किसी को दुःखी देखकर अपना दुःख प्रकट करना ।

उत्तर : क) दूसरों के प्रति शिष्टाचार का निर्वाह करना ।

IV. निम्नलिखित वाक्यांशों की सन्दर्भ सहित सप्रसंग व्याख्या कीजिये- 

1. “ऐसा! तब तो तुमने बड़ी – • यह सब दूर हो जाता है”

सन्दर्भ: प्रस्तुत अवतरण “व्यवहार कुशलता” नामक पाठ चयनित है। इसके रचनाकार है अनन्त गोपाल शेवड़े जी ।

प्रसंग : एक साहित्यिक सभा में जब एक विद्यार्थी भाषण नहीं दे पाया और घबरा गया और लेखक के पूछने पर कहा कि यह उसका पहला भाषण था तब लेखक ने सहानुभूति प्रकट की।

व्याख्यया : जब विद्यार्थी लेखक से कहता है कि दस-पाँच वाक्य ही बोल पाया तब लेखक ने उसकी हिम्मत की दाद दी कारण लेखक स्वयं पहले भाषण में केवल तीन वाक्य भी ठीक से नहीं बोल पाया था । अतः लेखक ने विद्यार्थी का हिम्मत बढ़ाते हुये कहा शुरु शुरु में ऐसा होता है पर धीरे धीरे तब ठीक हो जाता है अतः हिम्मत नहीं हारना चाहिये।

2. “जब लोग त्रस्त होते हों लड़खड़ा जाता है।”

संदर्भ : प्रश्न IV (1) ही जैसा।

प्रसंग : लेखक यहाँ यह बताता है कि कब लोगों को हमारी सहानुभूति की सबसे अधिक आवश्यकता पड़ती है।

व्याख्या : लेखक कहता है कि लोगों को हमारी सहानुभूति की आवश्यकता

सबसे अधिक तब पड़ती है जब लोग भयभीत हो, या पराजित हो कर अपने आप को कमजोर महसूस कर रहे हों या किसी आफत के कारण दु:खी हो, कारण इन परिस्थितियों में मनुष्य का आत्मविश्वास लड़खड़ा जाता है और वह अधीर हो उठता है। ऐसे समय में उसे किसी के संबल की जरुरत महसूस होती है।

3. “मानव की दो मूल प्रवृत्तियाँ – अनुभव करे । ‘ “

संदर्भ : प्रश्न IV (1) के ही जैसा। 

प्रसंग : लेखक यहाँ मनुष्य के दो मूल प्रवृत्तियों अर्थात दो जन्मजात गुणों का वर्णन कर रहा है।

व्याख्या : लेखक कहता है कि हमारे अन्दर दो जन्मजात गुण है पहला यह कि प्रत्येक मनुष्य यह चाहता है कि लोग हमारे गुणों की कर्द करें, हमारी बड़ाई करें, हमारा आदर करे। दूसरा गुण यह है कि प्रत्येक मनुष्य यह चाहता है कि लोग हमसे प्रेम करें, हमारा अभाव महसूस करें तथा हम उनके जीवन में कुछ महत्व रखते है ऐसा दूसरे लोग अनुभव करें।

V. शब्द के अर्थ लिखकर वाक्यों में प्रयोग कीजिये 

आश्वस्त (जिसे भरोसा दिलाया गया हो) – लेखक के बात से विद्यार्थी आश्वस्त हुआ।

प्रोत्साहन (उत्साह बढ़ाना) – लेखक के प्रोत्साहन वह अच्छा वक्ता बन गया।

त्रस्त (भयभीत) – जब लोग त्रस्त हों तो उन्हें हमारी सहानुभूति चाहिए।

अन्तःकरण (हृदय) – हमें अन्तःकरण से प्रेम करना चाहिए। 

प्रवृत्तियाँ (गुण) – मनुष्य की यह प्रवृत्ति है कि वह चाहता है लोग उसका आदर करे।

निमन्त्रण (बुलावा) – उसने मुझे विवाह में शामिल होने का निमन्त्रण दिया। 

अनुभव (व्यावहारिक जीवन से प्राप्त ज्ञान) – वह अनुभवी व्यक्ति है। 

अभ्यास प्रश्न-उत्तर

1. लिंग किसे कहते है ? उदाहरण सहित समझाइये 

उत्तर : संज्ञा शब्द के जिस रुप से पुरुष या स्त्री जाति का ज्ञान हो उसे लिंग कहते हैं। जैसे – दादा-दादी ।

2. निम्नलिखित शब्दों के लिंग बताइये.

उत्तर : बह्मपुत्र पुलिंग

पक्षी- पुलिंग

जलज – पुलिंग

विद्वान – पुलिंग

विधुर – पुलिंग

प्रिया स्त्रीलिंग –

सेविका स्त्रीलिंग

शुभा – स्त्रीलिंग

विधवा स्त्रीलिंग

4. निम्नलिखित वाक्यों की लिंग सम्बधी अशुद्धियों को 1 दूर करके शुद्ध वाक्य बनाइये 

क) उसकी टाँग टूट गया। x 

उसकी टाँग टूट गयी।

ख) बुआजी आ रहे हैं। 

X बुआजी आ रही हैं। V

ग) वह ग्यारहवें कक्षा में पढ़ती है। 

x वह ग्यारहवें कक्षा में पढ़ता है।

घ) तुम्हारा आत्मा अपवित्र है। x 

तुम्हारी आत्मा अपवित्र है।

ङ) दीपक के लौ जगमगा उठी। x 

दीपक का लौ जगमगा उठा। V

च) आपने यह पुस्तक लिख डाला। x 

आपने यह पुस्तक लिख डाली।

छ) लड़की पत्र लिख रहा था। x

लड़की पत्र लिख रही थी।

ज) हर एक ने चप्पल पहन रखा था। x

हर एक ने चप्पल पहन रखी थी।

NBSE Class-10 Hindi Notes/Solutions

Chapter No.Chapter’s Name
गद्य भाग (क)
पाठ 1मिठाईवाला
पाठ 2अकेली
पाठ 3बुढ़िया का बदला
पाठ 4वापसी
पाठ 5भारतीय संस्कृति में गुरु-शिष्य सम्बन्ध
पाठ 6व्यवहार कुशलता
पाठ 7भेड़ें और भेड़िये
पद्य भाग (ख)
पाठ 8नीति के दोहे
पाठ 9बिहारी के दोहे
पाठ 10कर्मवीर
पाठ 11गीत मेरे
पाठ 12अकाल और उसके बाद
पाठ 13पुजारी, भजन, पूजन और साधन
व्याकरण (ग)
1.संधि और उसके भेद
2.समास और विग्रह
3.पर्यायवाची / विलोम शब्द
4.कारक भेद और प्रयोग
5.काल और उसके भेद
6.वाच्य और उसके भेद
7.वचन और लिंग
8.मुहावरे और लोकोत्तियाँ
9.Translate (Hindi to English)
10.Easy Writing
11.पत्र लेखन
12.संक्षेपण
13.भाव पल्लवन

गृहकार्य

1. चेक बुक खो जाने सम्बन्ध में बैंक मैनेजर को एक पत्र लिखिये ।

सेवा में,

मैनेजर

स्टेट बैंक, कोहिमा

बिषय : नया चेक बुक जारी करने हेतु आवेदन पत्र । महोदय,

मैं आपके बैंक का बचत खाता धारक हूँ। मेरा पास बुक न० है बचत खाता न० 5555। मैने इसी न० पर चेक बुक लिया था परन्तु वह कहीं खो गया हैं।

अतः श्रीमान से निवेदन है कि मुझे एक नया चेक बुक

प्रदान करें।

धन्यवाद ।

भवदीय 

कोहिमा नागालैण्ड

दिनांक 17-05-08

2.”देशाटन से लाभ ” विषय पर 200 शब्दों का एक निबन्ध लिखिये ।

उत्तर : देशाटन का अर्थ है देश-विदेश का भ्रमण करना। स्वभाव से मनुष्य नई नई बाते जानने के लिए उत्सुक रहता है विभिन्न देशवासियों के रहन-सहन, आचार-विचार से अवगत होने, इतिहास प्रसिद्ध नगरों, तीर्थ स्थानों, कला-केन्द्रों, प्राकृतिक सौन्दर्य-स्थलों आदि की यात्रा करने में मनुष्य को असीम सुख मिलता है इसलिये मनुष्य देशाटन करता है। देशाटन से अनेक लाभ

मनोरंजन मनुष्य एक स्थान पर रहते रहते उब जाता है चाहे वह 1 कश्मीर के रमणीय घाटी का ही निवासी क्यों न हो। वह चाहता है कि रोजभरी की जिन्दगी से हट कर कहीं भ्रमण करे तथा ताजमहल, लालकिला, अजन्ता एलोरा, स्वर्ण मंदिर, सागर की लहरों आदि का प्रत्यक्ष अवलोकन कर अपनी आँखो की थकान दूर करें।

ज्ञान • देशाटन ज्ञान की कुंजी है हम पुस्तकों में ताजमहल, चारमीनर, कुतुब मीनार आदि ऐतिहासिक भवनों के बारे में पढ़ते है। गंगा यमुना के उदग्म, सागर की लहरो, चट्टानों तथा पहाड़ो के बारे में पुस्तकीय ज्ञान प्राप्त करतें है किन्तु जब हम जाकर अपने आँखो से प्रत्यक्ष इन चीजों को देखते है तो हमारा ज्ञान व्यापक और स्थायी हो जाता है।

स्वास्थ्य आज प्रदूषण दिन दूनी रात चौगुनी बढ़ रही है शहरों में रहने वाले मुक्त हवा तथा धूप के अभाव में रोग ग्रस्त हो रहे है। ऐसे में यदि लोग देशाटन करें तथा नैनीताल, दार्जिलिंग, अल्मोड़ा, पंचमढ़ी आदि पर्वतीय स्थानों का भ्रमण करें तो निश्चय नयी शक्ति एवं नयी ताजगी प्राप्त होगी।

अन्तर्राष्ट्रीय सम्बन्ध कलाकौशल, ज्ञान-विज्ञान, वाणिज्य व्यवसाय – के लिये देशविदेश का देशाटन जरुरी है देशाटन से अन्तराष्ट्रीय सम्बन्ध में सुधार होते ही है साथ ही साथ राष्ट्र प्रगति के पथ

पर आगे बढ़ता है। अतः देशाटन आवश्यक है।

उपसंहार • देशाटन हमें कूप मंडूकता से मुक्त करता है अतः जब भी अवसर मिले देशाटन करना चाहिए।

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