NBSE Class-10| Hindi | Chapter-5 भारतीय संस्कृति में गुरु-शिष्य सम्बन्ध

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NBSE Class-10| Hindi | Chapter-5 भारतीय संस्कृति में गुरु-शिष्य सम्बन्ध

Here You can learn or understand this chapter’s notes and question answer for NBSE Syllabus, all the materials are given in the basic and easy to learn for the students. We describe all the questions answer briefly in every state.

गद्य भाग (क)

प्रश्न और उत्तर 

I. क) यूरोप के प्रभाव के कारण आज गुरु-शिष्य सम्बन्ध में क्या अन्तर आ गया है ?

उत्तर : यूरोप के प्रभाव के कारण आज गुरु-शिष्य के सम्बन्ध में यही परिवर्तन आया है कि पैसे देकर विद्या खरीदने का यह क्रय- विक्रय शुरु हो गया है। अव्यवस्थित व्यावसायिक संस्कृति में गुरु-शिष्य का सम्बन्ध पिता-पुत्रवत नहीं रहा ।

ख) पुजारी की शक्ति मूर्ति में कैसे विकसित होने लगती है ? 

उत्तर : जिस प्रकार किसी भी देव मंदिर में मूर्ति की शक्ति उतनी मात्रा तक ही सम्भव है जितनी मात्रा तक उसके पुजारी की भाव-पूजा में नैवेद्य की भावना। मूर्ति में स्वयं कुछ भी नहीं है यह तो पुजारी की शक्ति है जो मूर्ति में विकसित होने लगती है ।

ग) विवेकानन्द और रवीन्द्रनाथ ठाकुर को अधिक महत्व बाद में क्यो मिला ?

उत्तर : विवेकानन्द और रवीन्द्रनाथ ठाकुर को बाद में अधिक महत्व इसलिए मिला कारण यहाँ के लोगों को अपनी खूबसूरती नजर नहीं आती और पराये सौन्दर्य को देखकर मोहित हो जाते है। जब विवेकानन्द को अमेरिका में नाम मिला और रवीन्द्रनाथ को नोबल पुरस्कार मिला तब भारतवासी मालाएँ लेकर दौड़े और इन लोगों को महत्व मिला।

II. निम्नलिखित वाक्यांशो को सन्दर्भ सहित व्याख्या कीजिये। 

क) सम्मान पानेवाले से सम्मान देनेवाला महान होता है। 

संदर्भ : प्रस्तुत वाक्यांश “भारतीय संस्कृति में गुरु-शिष्य सम्बन्ध” नामक पाठ से ली गयी है। इसके लेखक है आनन्द शंकर माधवन जी। 

प्रसंग : लेखक कलाकार की नहीं अपितु कला के पुजारी को श्रेष्ठ बताया है। 

व्याख्या : लेखक कहता है कि कला का पुजारी श्रेष्ठ हे कारण कला का महत्व तभी होता है जब पुजारी कला की प्रशंशा करे। जिस प्रकार कविता लिखनेवाले से अधिक महान है कविता का रसास्वाद करनेवाले।

गानेवाले से महान हैं जो गाने के तर्ज पर झूमते है। अतः सम्मान पाने वाले महान नहीं है महान वह है जो सम्मान देता है कारण सम्मान देने के कारण ही सम्मान पानेवाला श्रेष्ठ है नहीं तो यदि कोई सम्मान न दे तो श्रेष्ठ की श्रेष्ठता जाती रहेगी।

ख)ऐसे लोगो को प्राचीन गुरु-शिष्य • हो सकता है।

संदर्भ : प्रश्न II (क) के ही जैसा। 

प्रसंग : लेखक उनकी बात करता है जिन्हें स्वदेश-प्रेम नहीं। अथवा जिन्हें अपने देश की खूबसूरती नजर नहीं आती।

व्याख्या : हमारे यहाँ अपूर्व चीजं पड़ी है किन्तु उनको महत्व नहीं दिया जाता। जब दूसरे देश हमारे देश के निधि की पहचान करते हैं तब हमारी आँखे खुलती है। विवेकानन्दजी एवं गुरु रविन्द्रनाथजी को जब विदेश के लोगों ने सम्मान दिया तो हम भी हाथ में मालाए लेकर स्वागत करने दौड़ पड़े। हमें अपनी खूबसूरती दिखाई नहीं देती। हम जर्मनी और विलायत जाने में स्वर्ग जैसा अनुभव करते है यह नहीं जानते कि कितने ही विदेशी भारत में आने को लालायित रहते है। ऐसे लोगों को समझाना गधे को गणित सिखाना है अर्थात इनको समझाना व्यर्थ है।

III. प्राचीन भारत में गुरु-शिष्य सम्बन्ध बहुत उत्तम क्यों थे ? उचित उत्तर के सामने (V) का निशान लगाइये।

क) गुरु शिष्यों को पुत्र जैसा मानते थे।

ख) गुरु पेट पालने के लिए शिक्षा दान करते थे।

ग) प्राचीन शिक्षा पद्धति बहुत कठिन थी। 

घ) गुरु जाति-पाँति में विश्वास करते थे।

उत्तर :क) गुरु शिष्यों को पुत्र जैसा मानते थे।

IV. निम्नलिखित शब्दों के अर्थ लिखकर वाक्यों में प्रयोग कीजिये 

तदनुरुप (उसके अनुसार) – उसने मुझे पढ़ने कहा तदनुरुप मैं पढ़ रहा हूँ। 

चेष्टा (कोशिश) ख्याति (यश) 1 – सफलता प्राप्त करने की चेष्टा करो। विवेकानन्द की ख्याति चारो ओर फैल गई।

क्षितिज (वह स्थान जहाँ आकाश एवं पृथ्वी मिले दिखते है) सूरज क्षितिज में डूब जाता है। –

रसास्वादन (रस का स्वाद लेना) रसास्वादन किया। – भोजन का उन्होने खूब

रँगजाना (डूबजाना) तुम भी उन्ही के रंग में रंग गये। फरक (अन्तर) – कौआ और कोयल में क्या फरक है ?

अभ्यास प्रश्न

1. कारक किसे कहते है ?

उत्तर : संज्ञा या सर्वनाम के जिस रूप से उसका सम्बन्ध वाक्य में अन्य शब्दों से जाना जाता है कारक कहलाता है। 

2. कारक के सभी भेद अर्थ सहित लिखिये।

उत्तर : कारक के आठ भेद है –

कर्त्ताकारक क्रिया को करनेवाला ने – 

कर्मकारक – जिसपर क्रिया का प्रभाव पड़े को

करणकारक – जिस साधन से क्रिया हो – से, के, द्वारा 

सम्प्रदानकारक – जिसकी हित पूर्ति क्रिया से हो – को, के लिए 

सम्बन्धकारक – सम्बन्ध बतानेवाला का, की, के

अधिकरणकारक क्रिया का आधार में, 

अपादानकारक – • जिससे अलगाव हो से पर

सम्बोधनकारक – जिससे पुकारा जाय हे, ओ, अरे – 

 3.निम्नलिखित वाक्यों में कारक सम्बन्धी अशुद्धिया दूर कीजिये ।

क) मैने पास हो गया हूँ। 

मैं पास हो गया।

ख) बकरी से दूध लाओ।

बकरी का दूध लाओ।

ग) उधर राम का पिता जी आया। 

उधर राम के पिता जी आये।

घ) तुमने कौन को सन्देश दिया ? 

तुमने किसको सन्देश दिया ?

ङ) जूते कहाँ को रखे है ?

जूते कहाँ रखे हैं ? 

च) नदी पहाड़ में निकलती है।

नदी पहाड़ से निकलती है।

छ) पुस्तक मेज में है। 

पुस्तक मेज पर है।

ज) पुस्तक मेज में रख दो।

पुस्तक मेज पर रख दो।

झ) चिड़ियाँ आकाश पर उड़ती है । 

चिड़ियाँ आकाश में उड़ती है ।

ञ) मैं नेत्रों को देखता हूँ। 

मैं नेत्रों से देखता हूँ।

4. निम्नलिखित वाक्यों में करण और अपादान के वाक्य छाँटकर लिखिये – 

क) कच्ची सब्जी खाने से दाँत मजबूत होते है।

करण कारक

ख) अवेद बस से गिर पड़ा।

अपादान कारक

ग) उसने जेब से पेन निकाला।

करण कारक

घ) मैं नेत्रों से देखता हूँ।

करण कारक

ङ) वृक्ष से पत्ते गिरते हैं।

अपादान कारक

“विज्ञान : वरदान या अभिशाप”

“विज्ञान बरदान है या अभिशाप” यह एक गम्भीर प्रश्न है। विज्ञान न हमारा शत्रु है और न हमारा मित्र। इसकी शत्रुता मित्रता इसके उपयोग पर निर्भर करती है। विज्ञान एक छोटे बच्चे के हाथ में माचिस का बक्स थमा देना है। माचिस का गलत उपयोग विनाश लीला भी कर सकता है।

चाहे जो हो आज हमारे जीवन में विज्ञान महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। कल जो असंभव था उसे विज्ञान ने संभव कर दिया। हवाई जहाज के अविष्कार ने संसार को छोटा बना दिया है कहीं से कहीं की यात्रा पल भर में किया जा सकता है। सुबह से शाम तक हम वैज्ञानिक उपकरणों पर निर्भर है घर घर में टी. भी. कुलर, गैस स्टोव, कूकर, रेफ्रीजरेटर, इन्भेटर, गीजर, मोटर- साईकिल, मोबाईल फोन आदि वैसे ही जरुरी बन गये है जैसे भोजन और पानी ।

इतना ही नहीं कम्प्यूटर विज्ञान की अदभुद देन है। चिकित्सा के क्षेत्र में विज्ञान का अपूर्व योगदान है यह डाक्टर को रोग की पहचान और निदान में सहायक है।

विज्ञान का एक दूसरा रूप भी है यहीं विज्ञान टैंक, मशीनगन, मिसाईल तथा बम बनाने में भी सहयोग करता है। न जाने कितने निरीह प्राणी इन्हीं उपकरणों द्वारा अपने प्राणः गँवा लेते है। आज कई देशों के बीच शीतयुद्ध चल रहा है। ऐसे देश हथियार जमा करने में लगे है यदि तीसरा विश्व युद्ध हुआ तो यही विज्ञान सम्पूर्ण विश्व को निगल जायेगा।

विज्ञान लाभप्रद तभी होगा जब उसका उपयोग समझदारी से करेगें अन्यथा विज्ञान अभिशाप बन बैठेगी। इसलिये हमें अपनी स्वार्थवृत्ति का परित्याग कर विज्ञान को उपयोगी एवं कल्याणकारी बनाना चाहिए जिससे मानवमात्र की भलाई हो । विज्ञान शांति के लिए है न कि युद्ध के लिए। अतः विज्ञान को बरदान ही रहने दे।

NBSE Class-10 Hindi Notes/Solutions

Chapter No.Chapter’s Name
गद्य भाग (क)
पाठ 1मिठाईवाला
पाठ 2अकेली
पाठ 3बुढ़िया का बदला
पाठ 4वापसी
पाठ 5भारतीय संस्कृति में गुरु-शिष्य सम्बन्ध
पाठ 6व्यवहार कुशलता
पाठ 7भेड़ें और भेड़िये
पद्य भाग (ख)
पाठ 8नीति के दोहे
पाठ 9बिहारी के दोहे
पाठ 10कर्मवीर
पाठ 11गीत मेरे
पाठ 12अकाल और उसके बाद
पाठ 13पुजारी, भजन, पूजन और साधन
व्याकरण (ग)
1.संधि और उसके भेद
2.समास और विग्रह
3.पर्यायवाची / विलोम शब्द
4.कारक भेद और प्रयोग
5.काल और उसके भेद
6.वाच्य और उसके भेद
7.वचन और लिंग
8.मुहावरे और लोकोत्तियाँ
9.Translate (Hindi to English)
10.Easy Writing
11.पत्र लेखन
12.संक्षेपण
13.भाव पल्लवन

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