NBSE Class-10| Hindi | Chapter-4 वापसी

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NBSE Class-10| Hindi | Chapter-4 वापसी

Here You can learn or understand this chapter’s notes and question answer for NBSE Syllabus, all the materials are given in the basic and easy to learn for the students. We describe all the questions answer briefly in every state.

गद्य भाग (क)

अभ्यास प्रश्न और उत्तर

I. नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर दीजिये.

1. गजाधर बाबू पैंतीस वर्षो तक कहाँ कार्यरत थे ? 

उत्तर : गजाधर बाबू पैंतीस वर्षों तक रेलवे में कार्यरत थे।

2. गणेशी कौन था ? वह किसका बिस्तर बाँध रहा था ? 

उत्तर : गणेशी रेलवे स्टेशन पर चाय, पूड़ी एवं जलेबी बेचता था । वह गजाधर बाबू का बिस्तर बाँध रहा था।

3. गजाधर बाबू को अकेले क्यों रहना पड़ा था ?

उत्तर : गजाधर बाबू प्रायः छोटे स्टेशनों पर रहे। बच्चों की पढ़ाई एवं उनके भविष्य के लिए उन्होने परिवार को शहर भेज दिया और अकेले रहने लगे। 

4. गजाधर बाबू को देखते ही कहाँ सन्नाटा छा गया और क्यों ?

उत्तर : गजाधर बाबू को देखते ही उनके अपने मकान (जो उन्होनें शहर में बनवाया था) में सन्नाटा छा गया कारण बच्चे उनसे डरते थे। 

5. गजाधर बाबू के आने से पहले कौन क्या कर रहा था ?

उत्तर : गजाधर बाबू के आने से पहले नरेन्द्र कमर पर हाथ रखे नाच रहा था और बसन्ती हँस हँस कर दोहरी हुई जा रही थी। अमर की बहू को अपने तन-बदन या आँचल का होश न था । 

6. गजाधर बाबू से उनकी पत्नी ने क्या पूछा ?

उत्तर : गजाधर बाबू की पत्नी ने उनसे पूछा कि वे अकेले क्यों बैठे हैं ? बाकी सब कहाँ गये।

7. नरेन्द्र ने खाने के सम्बन्ध में क्या कहा ? 

उत्तर : नरेन्द्र खाने के सम्बन्ध में कहा –

“मैं ऐसा खाना नहीं खा सकता।” 

8. खाना बनानेवाले ने नरेन्द्र की बात का उत्तर किन शब्दों में दिया ?

उत्तर : खाना बनानेवाले ने नरेन्द्र की बात का उत्तर इन शब्दों में दिया “तो न खाओ ! कौन तुम्हारी खुशामद करता है ?”

II. नीचे लिखे प्रश्नो के उत्तर तीन चार वाक्यों में दीजिये। 

1.गजाधर बाबू को अपनी पत्नी की कौन कौन सी बाते याद आती थी? 

उत्तर : गजाधर बाबू की पत्नी दोपहर में दो बजे तक आग सुलगा कर उनके लिए खाना गरम रखती और बड़े प्यार से खिलाती। जब वे आते तो उनकी आहट से चौके से निकल कर मुस्कुरा कर उनका स्वागत करती। गजाधर बाबू को यही बाते याद आती थी। 

2. पत्नी ने जूठे बरतनों को देखकर अपने पति से क्या शिकायत की ?

उत्तर : जूठे बरतनों को देखकर पत्नी ने पति से यही शिकायत की कि – इस घर में धरम-करम कुछ नहीं। पूजा करके फिर वही जूठा – सकरा छुओ। किसी से इतना भी नहीं होता कि खाये-पिये बर्तन ही समेट दे। 

3. उनकी पत्नी का कमरा कैसा था ?

उत्तर : उनकी पत्नी का कमरा छोटा था जिसका एक कोना अचारों के मर्तबान, दाल-चावल के कनस्तरों और घी के डिब्बे से घिरा था। दूसरी ओर पुरानी दरियों में लपेटी और रस्सी से बँधी रजाइयाँ रखी थी। 

4.उनकी पत्नी की नींद कैसे खुल गयी ? भीतर से लौटकर आने पर उसका मुँह क्यों फूला हुआ था ?

उत्तर : अन्दर कुछ गिरने की आवाज से उनकी पत्नी की नीद खुल गयी। भीतर से लौटकर आने पर उसका मुँह फूला हुआ था कारण वहू रसोई खुली छोड़ आई थी और बिल्ली ने दाल की पतीली गिरा दी थी। 

5.गजाधर बाबू के आने से पहले अमर ने अलग होने की बात क्यों नहीं सोची ?

उत्तर : गजाधर बाबू के आने से पहले अमर ने अलग होने की बात इसलिए नहीं सोची क्यों कि पहले अमर घर का मालिक बनकर रहता था। बहू को कोई रोक टोक न थी। अमर के दोस्तों का प्रायः यहीं अड्डा था और अन्दर से चाय नश्ता जाता था। परन्तु गजाधर बाबू के आने के बाद सब कुछ बन्द हो गया।

6. गजाधर बाबू के व्यवहार में क्या परिवर्तन हो गया था ?

उत्तर : गजाधर बाबू के व्यवहार में यही परिवर्तन आया कि पहले वे किसी भी बात में दखल देते थे और घर के सदस्यों से अनायास प्रश्न पूछा करते किन्तु अब वे किसी बात में हस्तक्षेप नहीं करते थे। 

7. घर में अपनी स्थिति के बारे गजाधर बाबू क्या सोचने लगे ?

उत्तर : अपनी स्थिति के बारे में गजाधर बाबू यही सोचने लगे कि वे पत्नी व बच्चों के धनोपार्जन के एक निमित्त मात्र हैं। उनकी उपस्थिति उस घर में असंगत लगने लगी। उनकी सारी खुशी गहरी उदासीनता में डूब गयी।

8. नरेन्द्र ने अपनी माँ से बाबूजी के बारे में क्या शिकायत की ?

उत्तर : नरेन्द्र ने अपनी माँ से बाबूजी के बारे में यही शिकायत की कि बाबूजी को बैठे-बिठाये कुछ काम नही तो नौकर को छुड़ा दिया। अब साइकिल पर गेहूँ रख कर वह आटा पिसाने नहीं जायेगा। 

9.बसन्ती ने उसकी हाँ में हा मिलाते हुए क्या कहा ? 

उत्तर : बसन्ती ने उसकी हाँ में हाँ मिलाते हुये कहा “हाँ अम्माँ, मैं कॉलेज भी जाँऊ और लौटकर झाड़ू भी लगाऊँ, यह मेरे बस की बात नहीं।”

10. बच्चों की माँ ने भी उनकी बात का समर्थन करते हुए क्या कहा ? 

उत्तर : बच्चों की माँ ने भी उनकी बात का समर्थन करते हुये कहा ” और कुछ नहीं सूझा तो तुम्हारी बहू (अमर की बहू) को ही चौके में भेज दिया। वह गयी तो पन्द्रह दिन का राशन पाँच दिन में ही खत्म कर दिया। “

11. गजाधर बाबू को क्यों लगा कि वे जिन्दगी द्वारा ठगे गये हैं ? 

उत्तर : गजाधर बाबू को लगा कि वे जिन्दगी द्वारा ठगे गये हैं कारण उन्होनें जो कुछ चाहा उसमें से उन्हें एक बूँद भी न मिली। जिन बच्चों के भविष्य के लिए उन्होनें अपनी जिन्दगी गवाँ दी उन बच्चों की जिन्दगी में गजाधर बाबू के लिए कोई स्थान नहीं था। अपने ही घर में वे परदेशी की तरह पड़े थे।

III. नीचे लिखे शब्दों एवं मुहावरों का अर्थ लिखकर वाक्यों में प्रयोग कीजिये ।

क) आन्तरिक (भीतरी) –बच्चों के व्यवहार से गजाधर बाबू को आन्तरिक चोट लगी। 

ख) विस्मित (हैरान) – जब अमर ने अलग होने की बात कही तो गजाधर बाबू विस्मित हो उठे।

ग) आहत (धक्का लगना) • बहू के व्यंग भरे वचन ने गजाधर बाबू को आहत कर डाला।

घ) सलज्ज (लज्जा के साथ) • घर की बहू को सलज्ज होना चाहिए। 

ङ) आघात (चोट) – परिवार के सदस्यों के दुर्व्यवहार ने गजाधर बाबू के दिल को आघात पहुँचाया।

च) फूहड़ (भद्दा) वह फूहड़ गालियाँ बक रही है। 

छ) ताने देना (आक्षेप करना) सास अपने बहू को ताने दे रही है।

ज) पेटकाटना (बचत करना) उसने अपना पेटकाट कर अपने बच्चों को पढ़ाया।

झ) हाथबटांना (मदद करना) सास अपने बहूँ के हाथ बटाती है।

ञ) दखल न देना (हस्तक्षेप न करना) – कृपया मेरे काम में दखल न दें। 

IV. यह कथन किसने किससे और क्यों कहे 

क) “कभी कभी हम लोगों की भी खबर लेते रहियेगा”

उत्तर : यह कथन गणेशी ने गजाधर बाबू उस समय कहा जब गजाधर बाबू नौकरी से सेवानिवृत्त होकर अपने घर जा रहे थे। 

ख) क्यों नरेन्द्र, “क्या नकल हो रही है।”

उत्तर : यह कथन गजाधर बाबू ने नरेन्द्र से उस समय कहा जब नरेन्द्र कमर पर हाथ रखे नाच रहा था। 

ग) हाँ, बड़ा सुख है न बहू से। आज रसोई करने गयी है, देखो क्या होता है।

उत्तर : यह कथन गजाधर बाबू की पत्नी ने गजाधर बाबू से उस समय कहा जब गजाधर बाबू अपनी पत्नी से कहते है कि अमर की माँ तुम्हे किस बात की कमी है। घर में बहू है।

घ) क्या कह दिया बसन्ती से ? शाम से मुँह लटकाये पड़ी है, खाना भी नहीं खाया।

उत्तर : यह कथन गजाधर बाबू की पत्नी ने गजाधर बाबू से उस समय कहा जब बसन्ती कही जा रही थी और गजाधर बाबू ने उसे टोक दिया कि वह कहाँ जा रही है और उसे बाहर जाने नहीं दिया जायेगा।

V. निम्नलिखित पंक्तियों की संदर्भ सहित व्याख्या कीजिये ।

क) रेलवे क्वार्टर का वह कमरा उठकर लीन हो गया। 

संदर्भ: प्रस्तुत अवतरण “वापसी” नामक पाठ से ली गई है इसकी लेखिका है उषा प्रियंवदा ।

प्रसंग : गजाधर बाबू पैंतीस साल की लम्बी नौकरी के बाद रिटायर हो रेलवे क्वार्टर खाली कर अपने घर जाने को तैयार है। गजाधर बाबू क्वार्टर के बारे में सोचते हैं।

व्याख्या : जिस रेलवे क्वार्टर में गजाधर बाबू ने कितने ही वर्ष विता दिये अब सामान हट जाने के कारण वीरान और कुरुप लग रहा था। क्वार्टर के सामने जो गजाधर बाबू ने पौधे रोपे थे जो घर की शोभा बढ़ा रहे थे उसे पड़ोसियों ने उखाड़ कर अपने यहाँ ले गये और जहाँ तहाँ गड्ढे बन गये। यह सब बाल बच्चों से मिलने का कल्पना में क्वार्टर की सूनसान छवि उठकर लीन हो गयी। 

ख) सारा दिन इसी खिच खिच- नहीं बँटाता

संदर्भ : प्रश्न V(क) के ही जैसा।

प्रसंग : गजाधर बाबू की पत्नी गजाधर बाबू जी से अपने काम के बोझ की शिकायत करती है।

व्याख्या : गजाधर बाबू की पत्नी कहती है कि उसका सारा दिन गृहजंजाल में निकल जाता है। नौकर है तो भी मदद नहीं करता। घर गृहस्थी का काम करते करते सारी उमर निकल गयी पर केई ऐसा नहीं जो गजाधर बाबू की पत्नी का काम में हाथ बटाये।

TT) तुम्हें किस बात उठते थे।

संदर्भ :प्रश्न V(क) के ही जैसा। 

प्रसंग : जब गजाधर बाबू की पत्नी ने गजाधर बाबू से शिकायत की कि घर में तंगी है घर गृहस्थी की गाड़ी ठीक नहीं चल रही तो गजाधर बाबू समझाते हैं।

व्याख्या : गजाधर बाबू अपनी पत्नी को समझाते हैं कि उसे किसी बात की कमी नहीं है। घर में बहू है, लड़के बच्चे है। फलाफूला परिवार है। इन्सान रुपयों से अमीर नहीं होता किन्तु गजाधर बाबू समझ रहे थे कि उनकी पत्नी यह सब नहीं समझ सकती कारण . यह गजाधर बाबू के आन्तरिक भावना थी। ऐसी बातें अपनी पत्नी को तो वे समझा रहे थे किन्तु स्वयं को अकेला महसूस कर रहे थे। 

घ) जिस व्यक्ति के – दुनियाँ बन गयी।

संदर्भ : प्रश्न V(क) के ही जैसा।

प्रसंग : अपने बच्चों के व्यवहार से आहत गजाधर बाबू को लगा कि वे पत्नी एवं बच्चों के धनोपार्जन के एक निमित्त मात्र हैं। जब वे अपनी पत्नी की ओर नजर उठा कर देखते हैं तो सोचते है।

व्याख्या : पत्नी माँग में सिन्दूर डालने की अधिकारिणी तब तक है जब तक पति का अस्तित्व दुनियाँ में है किन्तु उसी पति के सामने वह पत्नी दो वक्त का भोजन परोस कर अपने कत्तर्व्य से मुक्ति पा जाती हैं। उसके बाद अपने गृहजंजाल में इस प्रकार उलझ जाती है कि वही उसकी दुनिया बन जाती है। उसके बाद वह इतना रम जाती है कि पति के सेवा को दर किनारे कर देती है।

VI. खाली स्थानों को भरिये –

क) पैतीस साल की लम्बी नौकरी के बाद रिटायर होकर घर जा रहे थे। 

ख) गजाधर बाबू प्रायः छोटे स्टेशनों पर रहे।

ग) गजाधर बाबू चाय और नाश्ता का इन्तजार करते रहे।

घ) हाँ बड़ा सुख है न बहू से।

ङ) बच्चों की माँ ने बड़े व्यंग्य से कहा।

अभ्यास प्रश्न

1.पुनरुक्ति से आप क्या समझते है उदाहरण द्वारा स्पष्ट करें।

उत्तर : ऐसा शब्द जिसे दुबारा या बार बार कहा जाय पुनरुक्ति कहलाता है

जैसे बार बार, कभी कभी आदि।

2. पुनरुक्ति के भेंदो को सोदाहरण लिखिये। 

उत्तर : पुनरुक्ति के तीन भेद हैं –

पूर्ण पुनरुक्ति, अपूर्ण पुनरुक्ति, अनुकरण पुनरुक्ति । 

1) पूर्ण पुररुक्ति जब किसी शब्द को लगातार बार बार कहा – जाय। जैसे- देश देश, घर घर ।

2) अपूर्ण पुनरुक्ति जब एक शब्द सार्थक तथा दूसरा उसके अनुरूप हो। जैसे- पूछ-ताछ, चाय-वाय

3) अनुकरण पुनरुक्ति जब शब्द ध्वनि के अनुरुप हो ।जैसे टन टन, टप टप

3.निम्नलिखित शब्दों से एक एक वाक्य बनाइये ।

आसपास – घर के आस-पास साफ सुथरा रक्खो ।

गड़गड़ाहट – बादल की गड़गड़ाहट से बच्चा डर गया।

बाल-बच्चा वह बाल बच्चे वाला है।

काला कलूटा वह काला कलूटा है पर मन का साफ सुथरा है। 

अपना-अपना चलते बनिये। आपलोग अपना अपना समान उठाइये तथा

 घर-घर – घर घर में दीपावली के दिन दीप जले।

बूँद-बूँद – बूँद-बूँद से घट भरता है।

4. निम्नलिखित वाक्य को शुद्ध कीजिये

क) मुझे केवल दस रुपये मात्र मिले। 

मुझे केवल दस रुपये मिले।

ख) मैं सप्रमाण बता रहा हूँ। 

मैं सप्रमाण कर रहा हूँ।

ग) सब यहाँ कुशलतापूर्वक हैं। यहाँ सभी कुशलतापूर्वक हैं।

घ) कृपया कल का अवकाश देने की कृपा करें। 

कृपया कल अवकाश देने की कृपा करे।

ङ) वे परस्पर एक दूसरे से उलझ पड़े।

वे एक दूसरे से उलझ पड़े।

NBSE Class-10 Hindi Notes/Solutions

Chapter No.Chapter’s Name
गद्य भाग (क)
पाठ 1मिठाईवाला
पाठ 2अकेली
पाठ 3बुढ़िया का बदला
पाठ 4वापसी
पाठ 5भारतीय संस्कृति में गुरु-शिष्य सम्बन्ध
पाठ 6व्यवहार कुशलता
पाठ 7भेड़ें और भेड़िये
पद्य भाग (ख)
पाठ 8नीति के दोहे
पाठ 9बिहारी के दोहे
पाठ 10कर्मवीर
पाठ 11गीत मेरे
पाठ 12अकाल और उसके बाद
पाठ 13पुजारी, भजन, पूजन और साधन
व्याकरण (ग)
1.संधि और उसके भेद
2.समास और विग्रह
3.पर्यायवाची / विलोम शब्द
4.कारक भेद और प्रयोग
5.काल और उसके भेद
6.वाच्य और उसके भेद
7.वचन और लिंग
8.मुहावरे और लोकोत्तियाँ
9.Translate (Hindi to English)
10.Easy Writing
11.पत्र लेखन
12.संक्षेपण
13.भाव पल्लवन

गृहकार्य

1. दो विद्यालय के बीच होनेवाले फुटबाल मैच-प्रतियोगिता के बारे में बार्तालाप लिखिये |

राजन : अरे राकेश ! सेन्ट्रल स्कूल वाले तो बहुत उछल रहे हैं।

राकेश : अरे उछलने दो। अपना मोडल स्कूल ही जीतेगा।

राजन : देखों रेफरी हरगोपाल जी टोस कर रहे हैं। राकेश : चलो टोस अपने ही तरफ गया।

राजन : गोलकीपर बड़ा तगड़ा दिखता है। 

राकेश : दिखने दो, जब चेतन और गोगा बाल किक करेगें तब पता चलेगा। 

राजन : लो देखो, खेल शुरु हो गया।

राकेश : यार! बड़ा मजा आ रहा है।

राजन : लेकिन यार । सेन्द्रल वाले तो हमे पीट रहे है।

राकेश : हाफ टाईम होने वाला है, मेरा मन तो घबड़ा रहा है। 

राजन : लो हाफ टाईम भी हो गया।

राकेश : चलो, अपने मित्रों का हौसला बढ़ाये।

राजन : लो खेल शुरु हुआ ।

राकेश : अरे अपना मोडल स्कूल तो अच्छा जबाब दे रहा है। 

राजन : शाबास, गोगा, मारा एक गोल ।

राकेश : अरे दूसरा गोल भी । 

राजन : लो समय भी समाप्त।

राकेश : चलो हम 2-1 से जीत गये।

राजन : चलो खुशियाँ मनायें।

2. “परहित सरिस धर्म नहिं भाई” का पल्लवन कीजिये।

उत्तर : ‘परहित सरिस धर्म नहि भाई’ ऐसा तुलसी दास जी ने कहा है। अर्थात परोपकार के समान दूसरा धर्म नहीं। मनुष्य वही है जो मनुष्य के लिए मरे और मनुष्य मात्र के सुख-दुःख का सहभागी बने। परोपकारी व्यक्ति उस वृक्ष की भाँति है जो अपने मधुर फलों स्वयं न खाकर दूसरों को खिलाकर उनकी भूख मिटाता है। शिवि, दधीचि, ईसा, आदि महामानवों ने मानवता की भलाई के लिए अपना सब कुछ त्याग दिया और स्वयं अमर बन गये। अपने लिये तो दुनिया जीती है परन्तु जीना सार्थक उसी का है जो दूसरों के लिए जीता है। अतः “सर्वे भवन्तु सुखिनः” की भावना लेकर परोपकार करो कारण इससे बढ़कर धर्म दूसरा नहीं है।

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