SEBA Class 9 Hindi (Elective) Solution| Chapter-16| टूटा पहिया

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SEBA Class 9 Hindi (Elective) Solution| Chapter-16| टूटा पहिया

SEBA Class 9 Hindi (Elective) Solution| Chapter-16| टूटा पहिया ये उत्तर संबंधित विषयों के अनुभवी प्रोफेसरों द्वारा सावधानीपूर्वक तैयार किए जाते हैं। उनका उद्देश्य छात्रों को विषय की उचित समझ में मदद करना और उनके कौशल और अभिव्यक्ति की कला में सुधार करना है। यदि ये उत्तर उन उद्देश्यों को पूरा करते हैं जिनके साथ वे तैयार किए गए हैं, तो हम अपने प्रयास को पर्याप्त रूप से पुरस्कृत मानेंगे। इन उत्तरों में और सुधार के लिए किसी भी सुझाव का हमेशा स्वागत है।

पाठ 16 

धर्मवीर भारती 

1. मैं रथ का टूटा… ….. अभिमन्यु आकर घिर जाय । 

भावार्थ : संकलित कविता टूटा पहिया भारती जी के सात गीत वर्ष नामक काव्य-संकलन से ली गई है। यह एक प्रतीकात्मक कविता है। जीवन में तुच्छ से तुच्छ और लघु से लघु समझी जानेवाली वस्तु अथवा व्यक्ति भी कभी असत्य और अन्याय से लड़ने में अत्यधिक उपयोगी और शक्तिशाली सिद्ध हो सकता है। यही उदाहरण देकर कवि ने कहा है टूटा हुआ पहिया जो अब बेकार है क्योंकि किसी के काम का नहीं है फिर भी टूटा हुआ पहिया कभी किसी काम में आ जाए क्या पता कब दुस्साहसी अभिमन्यु जैसा कोई योद्धा इस कठिन चक्रव्यूह में अक्षौहिणी सेनाओं को चुनौती देता हुआ इस व्यूह में घिर जाय तब मेरे इस टूटे हुए रथ के पहिये से असत्य पक्ष के भयंकर अस्त्रों से लोहा ले सके। 

2. अपने पक्ष को असत्य.. ……टूटा हुआ पहिया हूँ ! 

भावार्थ : अपने पक्ष को असत्य जानते हुए भी बड़े-बड़े महारथी अकेली निहत्थी आवाज को अपने ब्रह्मांस्त्रों से कुचल देना चाहे। तब मैं रथ का टूटा पहिया उस वीर योद्धा के हाथ में आकर ब्रह्मास्त्रों से लोहा ले सकता हूँ। अर्थात आज के बड़े-बड़े महारथी (आतंकवादी) परमाणु बम की सहायता से युद्ध की व्यापक विनाश लीला मचाते हुए अपनी सत्ता हासिल करने के लिए अपने से कमजोर लोगों को कुचल देना चाहते हैं तब अभिमन्यु जैसा कोई दुस्साहसी योद्धा इस अन्याय के विरुद्ध अपना हथियार उठाए तो मैं रथ का टूटा पहियां उसके हाथों में आकर ब्रह्मास्त्रों से लोहाँ ले सकता हूँ। 

3. लेकिन मुझे फेंको.. .. …..टूटे हुए पहियों का आश्रय ले ! 

भावार्थ : इसलिए रथ का टूटा हुआ पहिया अपने को फेंकने के लिए मना करता है, कब सच्चाई टूटे हुए पहियों का आश्रय ले ब्रह्मास्त्रों (आज के परमाणु बम) की सहायता से लड़े गये युद्ध की व्यापक विनाश लीला के बाद इतिहास की गति अवरुद्ध सी जान पड़े और जो भी साधारण से साधारण व्यक्ति और टूटे पहिये जैसा हथियार शेष बचे, उससे ही इतिहास को नयी गति मिले। अर्थात इन बड़े-बड़े महारथी द्वारा व्यापक विनाश लीला के बाद भी इतिहास रची गई। ऐसे ही साधारण और टूटे हुए पहिये द्वारा फिर सृष्टि के विनाश को आबाद किया। आज भी ऐसा महान योद्धा है जो निस्वार्थ भाव से अभिमन्यु जैसा बन कर समाज रुपी चक्रव्यूह को भेद कर रथ के टूटे हुए पहियों का आश्रय ले असत्य और अन्याय के विरुद्ध युद्ध करे। 

अभ्यास-माला 

सही विकल्प का चयन करो : 

प्रश्न 1. रथ का टूटा पहिया स्वयं को न फेंके जाने की सलाह देता है, क्योंकि 

(क) उसे मरम्मत करके फिर से रथ में लगाया जा सकता है। 

(ख) किसी दुस्साहसी अभिमन्यु के हाथों में आकर ब्रह्मास्त्र से लोहा ले सकता है। 

(ग) इतिहासों की सामूहिक गति झूठी पड़ जाने पर सच्चाई टूटे हुए पहियों का आश्रय ले सकता है।. 

(घ) ऊपर के ख और ग दोनों सही है। 

उत्तर : ऊपर के ख और ग दोनों सही है। 

प्रश्न 2. ‘दुरुह चक्रव्यूह में अक्षौहिणी सेनाओं को चुनौती’ किसने दी थी ? 

(क) अभिमन्यु ने 

(ख) द्रोणाचार्य ने 

(ग) अर्जुन ने 

(घ) दुयोर्धन ने 

उत्तर : अभिमन्यु ने 

प्रश्न 3. ‘अपने’ पक्ष को असत्य जानते हुए भी…..’ यहाँ किसके पक्ष को असत्य कहा गया है। 

(क) युधिष्ठिर का 

(ख) दुर्योधन का 

(ग) अभिमन्यु का 

(घ) कृष्ण का 

उत्तर: दुर्योधन का 

प्रश्न 4. ‘ब्रह्मास्त्रों से लोहा ले सकता हूँ- यह किसका कथन है ? 

(क) भीष्म का कथन 

(ख) परशुराम का कथन 

(ग) टूटे हुए पहिए का कथन 

(घ) भीम के गदा का कथन 

उत्तर : टूटे हुए पहिए का कथन

निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर दो 

प्रश्न 5. कवि ने अभिमन्यु को दुस्साहसी क्यों बताया है ? 

उत्तर : चक्र के आकार में सेना की स्थापना, महाभारत के युद्ध में जिस दिन अभिमन्यु पड़ा था उस दिन द्रोणाचार्य ने इसी व्यूह की रचना की थी। इस चक्रव्यूह को भेदकर बाहर निकलना कठिन था। अभिमन्यु को चक्रव्यूह के अन्दर जाने का पथ पता था पर व्यूह से निकलने का पथ वह नहीं जानता था। फिर भी इस महान योद्धा ने द्रोणाचार्य द्वारा व्यूह रचना में घिरे अकेले और निरस्त्र अभिमन्यु ने अपने रथ के टूटे पहिये से भयंकर अस्त्रों से लोहा लिया था। इसीलिए कवि ने अभिमन्यु को दुस्साहसी कहा। 

प्रश्न 6. ‘दुरुह चक्रव्यूह’ का महाभारत के संदर्भ में और आज के संदर्भ में क्या तात्पर्य है ? 

उत्तर : महाभारत के दुरुह चक्रव्यूह रचना करके अभिमन्यु को व्यूह में घेर कर अपने पक्ष को असत्य जानते हुए भी दुर्योधन ने निहत्थे अभिमन्यु को मारा था। आज परमाणु बम की सहायता से लड़े गये युद्ध की व्यापक विनाश लीला। महाभारत के चक्रव्यूह प्रसंग को आधार बनाकर कवि ने यहाँ इसी तथ्य को निरूपित किया है। 

प्रश्न 7. कवि ने किस तथ्य के आधार पर कहा कि ‘असत्य कभी सत्य को बर्दाश्त नहीं कर पाता’ ? 

उत्तर : कवि ने महाभारत के महायुद्ध के आधार पर यह बात कही है। क्योंकि दुर्योधन पक्ष ने पाण्डवों के साथ अन्याय युद्ध किया था। अपने पक्ष को असत्य जानकर भी दुरुह चक्रव्यूह रचना करके अभिमन्यु जैसे वीर योद्धा को निहत्था ही मारा लेकिन असत्य कौरव पराजित हुए और सत्य पक्ष के पाण्डवों की विजय हुई। 

प्रश्न 8. ‘लघु से लघु और तुच्छ से तुच्छ वस्तु’ किन परिस्थितियों में अत्यधिक उपयोगी हो सकती है ? 

उत्तर : यह एक प्रतीकात्मक कविता है। इसका संदेश यह है कि जीवन मे तुच्छ से तुच्छ और लघु से लघु समझी जाने वाली वस्तु अथवा व्यक्ति भी कभी असत्य और अन्याय से लड़ने में अत्यधिक उपयोगी और शक्तिशाली सिद्ध हो सकता है। जिस प्रकार कठिन चक्रव्यूह में घिरे अकेले और निहत्थे अभिमन्यु ने अपने रथ के टूटे पहिए से असत्य पक्ष के भयंकर अस्त्रों से लोहा लिया था। 

प्रश्न 9. इतिहास की सामूहिक गति का सहसा झूठी पड़ जाने का क्या आशय है ? 

उत्तर : महाभारत के चक्रव्यूह प्रसंग को आधार बनाकर कवि ने यहाँ इसी तत्थ को निरूपित किया है। आज के परमाणु बम की सहायता से लड़े गए युद्ध की व्यापक विनाश लीला के बाद इतिहास की सामूहिक गति अवरुद्ध सी जान पड़े और जो भी साधारण से साधारण व्यक्ति और टूटे पहिए जैसा हथियार ब्रस्मास्त्रों से लोहा लेकर इतिहास को नयी गति दे सकता है। 

प्रश्न 10. कवि के अनुसार सच्चाई टूटे पहियों का आश्रय लेने को कब विवश हो सकती है ? 

उत्तर: सच्चाई की प्रतीक है टूटे पहिए। कवि कहते है आज भी ऐसा महान योद्धा है जो निस्वार्थ भाव से अभिमन्यु जैसा बनकर इतिहासों की सामूहिक गति जब सहसा झूठी पड़ जाए तब इसी समाज रूपी चक्रव्यूह को भेद कर रथ के टूटे हुए पहियों का आश्रय ले असत्य और अन्याय के विरुद्ध युद्ध करे। अर्थात कर्मशील व्यक्ति सत्य नामक अस्त्र से पराजित कर सकता है।

Sl. No.Contents
Chapter 1हिम्मत और जिंदगी
Chapter 2परीक्षा
Chapter 3बिंदु बिंदु विचार
Chapter 4चिड़िया की बच्ची
Chapter 5आप भोले तो जग भला
Chapter 6चिकित्सा का चक्कर
Chapter 7अपराजिता
Chapter 8मणि-कांचन संयोग
Chapter 9कृष्ण- महिमा
Chapter 10दोहा दशक
Chapter 11नर हो, न निराश करो मन को
Chapter 12मुरझाया फुल
Chapter 13गाँँव से शहर की ओर
Chapter 14साबरमती के संत
Chapter 15चरैवेती
Chapter 16टूटा पहिया
निबंध 

भाषा एवं व्याकरण ज्ञान 

1. निम्नलिखित शब्दों में से प्रत्यय अलग करो : 

उत्तर : सामूहिक = समूह + इक आवश्यकता = आवश्यक

 + ता सनसनाहट= सनस + आहत पाठक = पाठ + अक पूजनीय = पूजन + ईय 

परीक्षित = परीक्षा(भीमा) + इत 

2. निम्नलिखित शब्दों से उपसर्ग अलग करो :

उत्तर : दुस्याहस = दुः + साहस 

अनुदार = अनु + दार

बदसूरत = बंद + सूरत 

निश्चिंत = निः + चिंत बेकारी = बेकार + ई 

अज्ञानी = अज्ञान +ई।

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