SEBA Class 9 Hindi (Elective) Solution| Chapter-11| नर हो न निराश करो मन को

SEBA Class 9 Hindi (Elective) Solution| Chapter-11| नर हो न निराश करो मन को, The answer of each chapter is provided in the list so that you can easily browse throughout different chapter NCERT Solutions Class 9 Hindi (Elective) आलोक ( भाग 1 ) Notes . Also you can read NCERT book online in this sections Solutions by Expert Teachers as per NCERT (CBSE) Book guidelines. These solutions are part of NCERT Hindi (Elective) Solutions. Here we have given Class 9 NCERT आलोक ( भाग 1 ) Text book Solutions for आलोक ( भाग 1 ) SEBA Class 9 Hindi (Elective) Solution| Chapter-11| नर हो न निराश करो मन को You can practice these here.

SEBA CLASS 9 QUESTION ANSWER

SEBA CLASS 9 QUESTION ANSWER (ASSAMESE MEDIUM)

SEBA CLASS 9 QUESTION ANSWER (BANGLA MEDIUM)

SEBA CLASS 9 QUESTION ANSWER (ENGLISH MEDIUM)

SEBA Class 9 Hindi (Elective) Solution| Chapter-11| नर हो न निराश करो मन को

SEBA Class 9 Hindi (Elective) Solution| Chapter-11| नर हो न निराश करो मन को ये उत्तर संबंधित विषयों के अनुभवी प्रोफेसरों द्वारा सावधानीपूर्वक तैयार किए जाते हैं। उनका उद्देश्य छात्रों को विषय की उचित समझ में मदद करना और उनके कौशल और अभिव्यक्ति की कला में सुधार करना है। यदि ये उत्तर उन उद्देश्यों को पूरा करते हैं जिनके साथ वे तैयार किए गए हैं, तो हम अपने प्रयास को पर्याप्त रूप से पुरस्कृत मानेंगे। इन उत्तरों में और सुधार के लिए किसी भी सुझाव का हमेशा स्वागत है।

पाठ 11 

मैथिलीशरण गुप्त 

मूलभाव : प्रस्तुत कविता में राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त जी ने मनुष्य को कर्मठता का संदेश दिया है। कवि कहता है कि मनुष्य को अनुकूल अवसर हाथ से नहीं जाने देना चाहिए। मनुष्य को चाहिए कि वह अपने महत्व एवं व्यक्तित्व को पहचाने, तभी उसे आत्म गौरव और अमरत्व प्राप्त हो सकता है। निराश होकर बैठना मनुष्य के लिए लज्जाजनक है। 

बोध एवं विचार 

सही विकल्प का चयन करो : 

प्रश्न 1. कवि ने हमें प्रेरणा दी है- 

(क) कर्म की 

(ख) आशा की 

(ग) गौरव की 

(घ) साधन की 

उत्तर : कर्म की। 

प्रश्न 2. कवि के अनुसार मनुष्य को अमरत्व प्राप्त हो सकता है- 

(क) अपने नाम से 

(ख) धन से 

(ग) भाग्य से 

(घ) अपने व्यक्तित्व से 

उत्तर : अपने व्यक्तित्व से । 

प्रश्न 3. कवि के अनुसार ‘न निराश करो मन को’ का आशय है-

(क) सफलता प्राप्त करने के लिए आशावान होना । 

(ख) मन में निराशा तो हमेशा बनी रहती है। आशय है- 

(ग) मनुष्य अपने प्रयत्न से असफलता को भी सफलता में बदल सकता है। 

(घ) आदमी को अपने गौरव का ध्यान हमेशा रहता है। 

उत्तर : सफलता प्राप्त करने के लिए आशावान होना । 

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखो (लगभग 50 शब्दों में) 

प्रश्न 1. तन को उपयुक्त बनाए रखने का क्या उपाय है ? 

उत्तर : राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त जी ने हमारे तन को उपयुक्त बनाए रखने के लिए कर्मठ रहने का संदेश दिया है। क्योंकि कर्म करके ही हम हमारे शरीर को उपयुक्त बनाए रख सकते हैं। हर व्यक्ति अपना काम करके अपने शरीर को स्वस्थ बनाए रख सकते हैं। अतः हमें निराश न होकर कर्म में व्यस्त रहना चाहिए। 

प्रश्न 2. कवि के अनुसार जग को निरा सपना क्यों नहीं समझना चाहिए ? 

उत्तर : कवि मैथिलीशरण गुप्त जी के अनुसार इस संसार को हमें केवल सपना नहीं समझाना चाहिए। हमें इस संसार को वास्तव के रूप में देखना चाहिए। उनके अनुसार मनुष्य को अनुकूल अवसर हाथ से जाने देना नहीं चाहिए। क्योंकि कर्म से ही मनुष्य अपना रास्ता विस्तार कर सकता हैं। 

अतः हमें निराश न होकर इस संसार को केवल सपना नहीं समझना चाहिए। 

प्रश्न 3. अमरत्व-विधान से कवि का क्या तात्पर्य है ?  

उत्तर : राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त जी के अनुसार “अमरत्व-विधान” से तात्पर्य यह है कि मनुष्य को चाहिए कि वह अपने महत्व एवं व्यक्तित्व को पहचाने। तभी उसे आत्मगौरव और अमरत्व प्राप्त हो सकता है। 

प्रश्न 4. अपने गौरव का किस प्रकार ध्यान रखना चाहिए? 

उत्तर: कवि मैथिलीशरण गुप्त जी कहते हैं कि हमें अपने गौरव का हमेशा ध्यान रखना चाहिए। हर इंसान को अपने व्यक्तित्व एवं महत्व को पहचानना चाहिए। तभी उसे आत्म गौरव और अमरत्व प्राप्त हो सकता है। इस संसार में मनुष्य को कर्म से अपनी पहचान बनाना चाहिए। निराश होकर बैठना मनुष्य के लिए लखाजनक है। 

प्रश्न 5. कविता का प्रतिपाद्य अपने शब्दों में लिखो। 

उत्तर : कविता का मूलभाव

सप्रसंग व्याख्या करो (लगभग 100 शब्दों में) 

8 प्रश्न 6. सँभलो कि सु-योग न जाए 

चला कब व्यर्थ हुआ सदुपाय भला ? 

संदर्भ प्रस्तुत पंक्तियाँ राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त जी की “नर हो न निराश करो मन को” नामक कविता से ली गई है। 

प्रसंग : कवि मैथिलीशरण गुप्त जी ने मनुष्य को कर्मठता का संदेश दिया है। इस संसार में मनुष्य को हमेशा कर्म में व्यस्त रहना चाहिए ।। 

व्याख्या: कवि गुप्त जी कहते हैं कि मनुष्य को हमेशा कर्म में व्यस्त रहना चाहिए। क्योंकि वह कर्म के द्वारा ही अपनी पहचान बना सकता है। उनके अनुसार मनुष्य को अनुकूल अवसर हाथ से जाने देना नहीं चाहिए। हर मनुष्य के लिए अनुकूल अवसर आता है। अतः हमें इसका कर्म से लाभ उठाना चाहिए। अगर हम इसका लाभ उठा न सके तो बाद में पछताना पड़ेगा। अतः हमें हमेशा कर्मठ रहना चाहिए। 

प्रश्न 7. जब प्राप्त तुम्हें सब तत्व यहाँ, 

फिर जा सकता वह सत्व कहाँ ? 

संदर्भ : प्रस्तुत पंक्तियाँ कवि मैथिलीशरण गुप्त जी रचित “नर हो न निराश करो मन को’ नामक कविता से उद्धृत है। 

प्रसंग : कवि कहते है, यह संसार सभी तत्वों से परिपूर्ण हैं। यह संसार उपलब्धियों का भंडार है। 

व्याख्या : यह संसार सभी तत्वो अर्थात यथार्थता से परिपूर्ण है। यह संसार साधना क्षेत्र है। इच्छित ज्ञान अर्जन करो। क्या नहीं है यहाँ, तुम अपनी पहचान बनाओ, इन्ही तत्वों से अमृत पान करो। उदयम करने से ही कार्य सफल होते है। मनुष्य अपने प्रयत्न से असफलता को भी सफलता में बदल सकता है।

Sl. No.Contents
Chapter 1हिम्मत और जिंदगी
Chapter 2परीक्षा
Chapter 3बिंदु बिंदु विचार
Chapter 4चिड़िया की बच्ची
Chapter 5आप भोले तो जग भला
Chapter 6चिकित्सा का चक्कर
Chapter 7अपराजिता
Chapter 8मणि-कांचन संयोग
Chapter 9कृष्ण- महिमा
Chapter 10दोहा दशक
Chapter 11नर हो, न निराश करो मन को
Chapter 12मुरझाया फुल
Chapter 13गाँँव से शहर की ओर
Chapter 14साबरमती के संत
Chapter 15चरैवेती
Chapter 16टूटा पहिया
निबंध 

भाषा एव व्याकरण ज्ञान

1. इन शब्दों के लिम शद लिख :

उतर : नज – पर 

उपयुक्त–अनुपयक्त

रिश –आशवाद 

अपना –य 

सुधा – वष/रল ज्ञान  अज्ञान 

मान – जन्म – मृत्यु ।

2. इन शब्दों के तीन तीन पर्यायवासी शब्द लिखो :

  • नर – मनुष्य, मानव , आदमी।
  • जग – पृत्थी , धरती , धरनी ।
  • अर्थ –धन , रुपया , सम्पत्ति ।
  • पथ  – रास्ता , मार्ग , बाट ।
  • अखिलेश्वर – ईश्यर , परमात्मा , भगवान

3. ‘अमरत्व’ शब्द में ‘त्व’ प्रत्यय लगा है। भाववाचक ‘त्व’ प्रत्यय खासकर भाववाचक संज्ञा का घोतक है। ‘त्व’ प्रत्यवाले किन्हीं दस शब्द लिखो।

उत्तर : स्वत्व, बंधुत्व, पुरुषत्व, देवत्व, ईश्वरत्व, गुरुत्व, व्यक्तित्व, मातृत्व, नेतृत्व, भ्रातृत्व

Leave a Reply