SEBA Class 9 Hindi (Elective) Solution| Chapter-8| मणि-कांचन संयोग

SEBA Class 9 Hindi (Elective) Solution| Chapter-8| मणि-कांचन संयोग , The answer of each chapter is provided in the list so that you can easily browse throughout different chapter NCERT Solutions Class 9 Hindi (Elective) आलोक ( भाग 1 ) Notes . Also you can read NCERT book online in this sections Solutions by Expert Teachers as per NCERT (CBSE) Book guidelines. These solutions are part of NCERT Hindi (Elective) Solutions. Here we have given Class 9 NCERT आलोक ( भाग 1 ) Text book Solutions for आलोक ( भाग 1 ) SEBA Class 9 Hindi (Elective) Solution| Chapter-8| मणि-कांचन संयोग You can practice these here.

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SEBA CLASS 9 QUESTION ANSWER (ENGLISH MEDIUM)

SEBA Class 9 Hindi (Elective) Solution| Chapter-8| मणि-कांचन संयोग

SEBA Class 9 Hindi (Elective) Solution| Chapter-8| मणि-कांचन संयोग ये उत्तर संबंधित विषयों के अनुभवी प्रोफेसरों द्वारा सावधानीपूर्वक तैयार किए जाते हैं। उनका उद्देश्य छात्रों को विषय की उचित समझ में मदद करना और उनके कौशल और अभिव्यक्ति की कला में सुधार करना है। यदि ये उत्तर उन उद्देश्यों को पूरा करते हैं जिनके साथ वे तैयार किए गए हैं, तो हम अपने प्रयास को पर्याप्त रूप से पुरस्कृत मानेंगे। इन उत्तरों में और सुधार के लिए किसी भी सुझाव का हमेशा स्वागत है।

पाठ 8

– डॉ. अच्युत शर्मा

अभ्यास माला

सही विकल्प का चयन करो :

प्रश्न 1. धुवाहाता- बेलगुरि नामक पवित्र स्थान कहाँ स्थित है ? 

(क) बरपेटा में 

(ख) माजुलि में 

(ग) पाटबाउसी में 

(घ) कोचबिहार में

उत्तर : माजुली में ।

प्रश्न 2. शंकरदेव के साथ शास्त्रार्थ से पहले माधवदेव थे

(क) शाक्त 

(ख) शैव 

(ग) वैष्णव 

(घ) सूर्योपासक

उत्तर: शाक्त

प्रश्न 3. सांसारिक जीवन में शंकरदेव और माधवदेव का कैसा संबंध था ? 

(क) चाचा-भतीजे 

(ख) भाई-भाई का 

(ग) मामा-भांजे का 

(घ) मित्र-मित्र का

उत्तर : मामा-भांजे का 

प्रश्न 4. शंकरदेव के मुँह से किस ग्रन्थ का श्लोक सुनकर माधवदेव निरुत्तर हो गए थे?

(क) ‘गीता’ का 

(ख) ‘रामायण’ का 

(ग) ‘महाभारत’ का 

(घ) ‘भागवत’ का

उत्तर: भागवत का। 

किसने किससे कहा, बताओ 

प्रश्न 5. माँ को शीघ्र स्वस्थ कर दो ?

उत्तर : माधवदास ने देवी गोसानी से मनौती मांगी थी।

प्रश्न 6. ‘बलि चढ़ाना विनाशकारी कार्य है।’ হচ্ছে।) 

उत्तर : माधवदेव के बहनोई रामदास ने माधवदास से कहा था।

प्रश्न 7. अब तक मैंने कितने ही धर्मशास्त्रों का अध्ययन किया है।’ 

उत्तर : माधवदेव ने रामदास से कहा था।

प्रश्न 8. ‘वे एक ही बात से तुम्हें निरुत्तर कर देंगे’।

उत्तर : रामदास ने माधवदास से कहा था । 

प्रश्न 9. यह दीघल पुरीया गिरि का पुत्र माधव है।’ 

उत्तर : रामदास ने शंकरदेव से कहा था।

पूर्ण वाक्य में उत्तर दो 

प्रश्न 10. विश्व का सबसे बड़ा नदी द्वीप माजुलि कहाँ बसा हुआ है ? 

उत्तर: विश्व का सबसे बड़ा नदी द्वीप ब्रहमपुत्र की गोद में बसा हुआ है। 

प्रश्न 11. श्रीमंत शंकरदेव का जीवन काल किस ई. से किस ई. तक व्याप्त? 

 उत्तर : श्रीमंत शंकरदेव का जीवनकाल ई. 1449 से ई. 1568 तक व्याप्त है। 

प्रश्न 12. शंकर-माधव का मिलना असम-भूमि के लिए कैसा साबित हुआ ?

उत्तर : शंकर-माधव का मिलन पावन असम-भूमि के लिए सोने में सुगंध- जैसा साबित हुआ।

प्रश्न 13. महाशक्ति का आगार ब्रह्मपुत्र क्या देखकर अत्यंत हर्षित हो उठा था

उत्तर : महाशक्ति का आगार ब्रह्मपुत्र अपनी गोद में मामा-भांजे को गुरु-शिष्य बनते देखकर अत्यन्त हर्षित हो उठा था। 

प्रश्न 14. माधवदेव को शिष्य के रूप में स्वीकार कर लेने के बाद शंकरदेवक्या बोले ? 

उत्तर : शंकरदेव ने माधवदेव को शिष्य के रूप में स्वीकार कर लिया और आनन्दमग्न होकर वे बोल उठे ‘तुम्हें पाकर आज मैं पूरा हुआ।’

प्रश्न 15. किस घटना से असम के सांस्कृतिक इतिहास में एक सुनहरे अध्याय का श्रीगणेश हुआ था ? 

उत्तर : माजुलि में स्थित पवित्र स्थान धुवाहाता बेलगुरि में हुए दोनों महापुरुषों के महामिलन ने असम के सांस्कृतिक इतिहास में एक सुनहरे अध्याय का श्रीगणेश कर दिया था।

अति संक्षिप्त उत्तर दो (लगभग 25 शब्दों में)

प्रश्न 16. ब्रह्मपुत्र नद किस प्रकार शंकरदेव -माधवदेव के महामिलन का साक्षी बना था?

उत्तर : वैष्णव- -गुरु श्रीमंत शंकरदेव और शाक्त माधवदेव का महामिलन असम भूमि के लिए सोने में सुगंध जैसा साबित हुआ। इस मिलन से भारतवर्ष के पूर्वोत्तरी भू-खंड में भागवती वैष्णव धर्म अथवा एकशरण नाम-धर्म प्रचार हुआ। सांसारिक जीवन में शंकर-माधव मामा-भांजे थे। पर इस महामिलन के उपरान्त दोनों गुरु- शिष्य के पवित्र बंधन में बंध गए थे। यह महामिलन मध्ययुगीन असम की ही नहीं अपितु असम भूमि के सम्पूर्ण सांस्कृतिक इतिहास की संभवत: सर्वाधिक महत्वपूर्ण घटना है और इसका साक्षी बना था ब्रह्मा का वरद पुत्र ब्रह्मपुत्र नद। 

प्रश्न 17. धुवाहाता-बेलगुरि सत्र में रहते समय श्रीमंत शंकरदेव प्रयास में जुटे थे? 

“उत्तर : धुवाहाता-बेलगुरि सत्र में रहते समय श्रीमंत शंकरदेव शक्ति की उपासना, तंत्र-मंत्र, बलि-विधान एवं अनेकानेक कठोर धार्मिक बाह्याचारों से जकड़े हुए असमीया समाज को मुक्ति का नया पथ दिखाने तथा उसे आध्यात्मिक उन्नति के सरलतम मार्ग पर ले चलने के महान प्रयास में जुटे हुए थे। कारण उस समय असमीया समाज में तंत्र-मंत्र, बलि-विधान एवं और भी अनेक कठोर धार्मिक बाह्याचारों से जकड़ा हुआ था । 

प्रश्न 18. माधवदेव ने कब और क्या मनौती मांगी थी ? 

उत्तर: माधवदेव जब अपनी सारी पैत्रिक संपत्ति कोचबिहार की पश्चिमी सीमा

पर स्थित बांडुका में बसे बड़े भाई दामोदर को सौंपकर भांडारीडुबि या टेंबुवानि की ओर वापस आ रहे थे तभी उनको खबर मिली कि उनकी माँ सख्त बीमार हैं। भांडारीडुबी में बहन और बहनोई रामदास के पास रहने वाली अपनी विधवा माँ के स्वास्थ्य को लेकर माधवदेव चिंतित हो उठे और तुरन्त मनौती माँगी हे देवी गोसानी। तुम्हें सफेद बकरों का एक जोड़ा भेंट करूँगा। माँ को शीघ्र स्वस्थ कर दो।

प्रश्न 19. ‘इसके लिए आवश्यक धन देकर माधवदेव व्यापार के लिए निकल पड़े।’ प्रस्तुत पंक्ति का संदर्भ स्पष्ट करो। 

उत्तर माधवदेव जब भांडारीबि की ओर आ रहे थे तो उनको खबर मिली कि उनकी माँ सख्त बीमार है। उनकी माँ भांडारीडुबि में बहन उर्वशी और बहनोई रामदास के पास रहती थी। अपनी माँ के स्वास्थ्य को लेकर चिंतित थे और माँ के स्वास्थ के लिए देवी गोसानी के पास मनौती मांगी कि माँ को स्वस्थ्य कर दो तुम्हें सफेद बकरों का एक जोड़ा भेट करूँगा। बहनोई रामदास के घर पहुँचने पर देखा माँ देवी गोसानी की कृपा से स्वस्थ हो गई तब माधवदेव अपने मनौती के अनुसार सफेद बकरों का एक जोड़ा खरीदकर रखने के लिए रामदास से अनुरोध किया और इसके लिए आवश्यक धन देकर माधवदेव व्यापार के लिए निकल पड़े।

प्रश्न 20. ‘माधवदेव आप से शास्त्रार्थ करने के लिए आया है’।- किसने किससे और किस परिस्थिति में ऐसा कहा था ? 

उत्तर : रामदास ने श्रीमंत शंकरदेव से कहा था। जब व्यापार से वापस आकर माधवदेव बहनोई रामदास से बकरों की बात पूछी तब रामदास बोले बकरे लाकर क्या करोगी। रामदास माधवेदव को समझाते रहे और बोले बलि चढ़ाना विनाशकारी कार्य है। उससे किसकी प्राप्ति होगी। दूसरी जीव की हत्या बेकार हो तुम क्यों करोगे तब माधवदेव बोले सबमें बलि-विधान का ही निर्देश है। तुम्हें किस शास्त्र में ऐसी बातें मिली है। माधवदेव के ज्ञान-दंभ से रामदास थोड़ा आहत हुए और बोले तुम और हम क्यों ऐसे ही शास्त्रार्थ करें। भोजन के बाद चलो उनके पास ही चलें जिनसे हमने ये बाते सुनी है। फिर रामदास और माधवदेव शंकरदेव के पास पहुँचे और रामदास ने बकरों की बलि प्रसंग को शंकरदेव से कहा और यह भी कहा- ‘माधवदेव आप से शास्त्रार्थ करने के लिए आया है।’

संक्षेप में उत्तर दो (लगभग 50 शब्दों में )

प्रश्न 21. शंकर- माधव के महामिलन के संदर्भ में ‘मणि-कांचन संयोग’ आख्या की सार्थकता स्पष्ट करो। 

उत्तर : शंकर-माधव का महामिलन पवित्र असमभूमि के लिए मणि- काँचन संयोग हुआ अर्थात सोने और रत्न का मिलन था जिससे उनके जीवन रुपी आभूषण को सुन्दर और मूल्यवान बना दिया। इस मिलन से भारतवर्ष के इस पूर्वोत्तरी भू- खंड में भागवती वैष्णव धर्म अथवा एकशरण नाम-धर्म के प्रचार-प्रसार कार्य में एक अदभुत गति आ गई थी। शंकर-माधव के सम्मिलित प्रयास से इस पावन कार्य में दिन दूनी रात चौगुनी बढ़ोत्तरी होने लगी और कृष्ण भक्ति की धाराएँ जन-मन को भिगोती हूई चारों दिशाओं में बढ़ने लगी। माधवदेव ने कृष्ण भक्ति, गुरु-भक्ति और एकशरण नाम धर्म के प्रचार-प्रसार कार्य में अपने को पूरी तरह समर्पित कर दिया। असमीया जाति शंकर गुरु और माधवगुरु दोनों की आभा से उद्भाषित है। जिस प्रकार धरती के लिए सूर्य और चाँद की किरणों का अपना- अपना महत्व है, उसी प्रकार महान असमिया समाज के लिए शंकर – भास्कर और माधव-मृगांक की प्रतिभाएँ अपने-अपने ढंग से कल्पतरु के समान कल्याणकारी हैं। 

प्रश्न 22. बहनोई रामदास के घर पहुँचने पर माधवदेव ने क्या पाया और उन्होंने क्या किया ? 

उत्तर : माधवदेव जब बहनोई रामदास के घर पहुँचे तो पाया कि देवी गोसानी की कृपा से उनकी माँ स्वस्थ होने लगी थी। यह देखकर माधवदेव निश्चिंत हुए।

उन्होंने मन ही मन देवी माता को प्रणाम करके उनके प्रति अकृत्रिम कृतज्ञता प्रकट की। थोड़े ही दिनों में माँ पूरी तरह स्वस्थ हो उठी तो माधवदेव ने मनौती के अनुसार सफेद बकरों का एक जोड़ा खरीद कर रखने के लिए बहनोई रामदास से अनुरोध किया।

प्रश्न 23. रामदास ने बलि-विधान के विरोध में माधवदेव से क्या-क्या कहा ? 

उत्तर : रामदास ने बलि-विधान के विरोध में माधवदेव से कहा- ‘बकरे लाकर क्या करोगे। इस लोक में बकरा काटनेवाले को उस लोक में बकरे के हाथों कटना पड़ता है।’ बलि चढ़ाना विनाशकारी कार्य है। उससे किसकी प्राप्ति होगी। दूसरी जीव की हत्या बेकार ही तुम क्यों करोगे ?

प्रश्न 24. शास्त्रार्थ के दौरान शंकरदेव द्वारा उद्धृत ‘भागवत’ के श्लोक का अर्थ सरल हिन्दी में प्रस्तुत करो। 

उत्तर: श्रीमंत शंकरदेव ने ‘भागवत’ के श्लोक को उद्धृत किया- ‘यथा तरोर्मूलनिषेचनेन तृप्यन्त तत्स्कंधभुजोपशाखः । 

प्राणीपहाराच्च यथोन्द्रियाणां तथैव सर्वार्च्चनमच्युतेभ्य : ‘

यानी जिस प्रकार वृक्ष के मूल को सींचने से टहनियाँ, पत्ते, फूल, फल सब संजीवन होते हैं अथवा अन्न ग्रहण के जरिए प्राण का पोषण करने से मानव शरीर की सारी इन्द्रियाँ तृप्त होती हैं, उसी प्रकार परब्रह्म कृष्ण की उपासना करने से सारे देवी-देवता अपने आप संतुष्ट हो जाते हैं। परब्रहम कृष्ण ही एक मात्र आराध्य देव हैं कृष्णास्तु भगवान स्वयम उनकी शरण में ही जीवों का कल्याण निहित है।

प्रश्न 25. शंकरदेव की साहित्यिक देन के बारे में बताओ ।

उत्तर : भक्ति-धर्म के प्रचार कार्य में श्री माधवदेव का सहयोग पाने के पश्चात श्रीमंत शंकरदेव अधिक उन्मुक्त भाव से साहित्य सृष्टि, संगीत रचना आदि के जरिए असमीया भाषा साहित्य संस्कृति को परिपुष्ट बनाने में सक्षम हुए। उन्होंने ‘कीर्तन-घोषा’, ‘गुणमाला’, ‘भक्ति प्रदीप’, ‘हरिश्चन्द्र, उपाख्यान’, ‘रूक्मिणी- हरण काव्य’, ‘बलिछलन’, ‘कुरुक्षेत्र’, आदि काव्य रचनाएँ की हैं। ‘पत्नीप्रसाद’,’कालियदमन’, ‘केलिगोपाल’, ‘रुक्मिणी हरण’, ‘पारिजातहरण’ और ‘राम- ‘विजय’ नामक छह अंकीया नाट भी रचे हैं। कहा जाता है कि उन्होंने बारह कोड़ी ‘बरगीत’ भी रचे थे, जिनमें से लगभग पैतीस बरगीत ही आज उपलब्ध हैं। 

प्रश्न 26. माधवदेव की साहित्यिक देन को स्पष्ट करो ।

उत्तर : योग्य गुरु से असीम प्रेरणा पाने के कारण श्री माधवदेव भी अपनी अनमोल देन से असमीया समाज को हमेशा के लिए गौरव के अधिकारी बनाने के काम में सफल प्रमाणित हुए उनकी काव्य-रचनाओं में ‘नामघोषा’, ‘जन्मरहस्य’, ‘राजसूय’, ‘भक्ति रत्नावली’ आदि विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। ‘चोर-धारा, ‘पिंपरा-गुचोवा’, ‘भोजन- बिहार’, ‘भूमि-लेटोवा’, ‘दधि-मंथन’, आदि नाटक भी रचे हैं। गुरु की आज्ञा से आपने नौ कोड़ी ग्यारह बरगीत भी रचे। जिनमें से लगभग एक सौ इक्यासी बरगीत आज उपलब्ध है।

सम्यक उत्तर दो (लगभग 100 शब्दों में)

प्रश्न 27. माधवदेव की माँ की बीमारी के प्रसंग को सरल हिन्दी में वर्णित करो। 

उत्तर : माधवदेव जब अपनी सारी पैत्रिक संपत्ति अपने बड़े भाई दामोदर को सौंप कर भांडारीडुबि की ओर वापस आ रहे थे तभी उनको खबर मिली कि उनकी माँ सख्त बीमार है। भांडारीडुबि में बहन उर्वशी और बहनोई रामदास के पास रहनेवाली अपनी विधवा माँ के स्वास्थ्य को लेकर माधवदेव अत्यंत चिंतित हो उठे, और माँ को शीघ्र स्वस्थ कर देने के लिए देवी गोसानी से मनौती मांगी सफेद बकरों का एक जोड़ा भेंट करूँगा और माँ के स्वस्थ हो जाने के बाद मनौती के अनुसार सफेद बकरों का जोड़ा खरीदकर रखने के लिए रामदास से अनुरोध भी किया।

प्रश्न 28. बलि हेतु बकरे खरीदने को लेकर रामदास और माधवदेव के बीच हुई बातचीत का अपने शब्दों में प्रस्तुत करो। 

उत्तर : व्यापार से वापस आकर माधवदेव ने बहनोई रामदास से बकरों की बात पूछी तो रामदास ने उत्तर दिया-मोल भाव करके बकरों को मालिक के पास ही रख छोड़ा है। देवी पूजा के दिन एकदम निकट आ गए तो माधवदेव ने बकरों को ले आने के लिए कहा तब रामदास ने उत्तर दिया- बकरे लाकर क्या करोगे। तब माधवदेव क्रोधित होकर बकरे न खरीदने का कारण पूछा तो रामदास ने कहा ‘बलि चढ़ाना विनाशकारी कार्य है। इस लोक में बकरा काटनेवाले को उस लोक में बकरे के हाथों कटना पड़ता है। जीव की हत्या तुम बेकार ही क्यों करोगे। गुरु शंकरदेव से मिली ज्ञान ज्योति के बल पर रामदास ने माधवदेव को बहुत समझाया पर उन बातों से माधवदेव जरा भी प्रभावित नहीं हुए बोले सबमें बलि- विधान का ही निर्देश हैं।’ तुम्हें किस शास्त्र में ऐसी बातें मिली हैं।

प्रश्न 29. रामदास और माधवदेव गुरु शंकरदेव के पास कब और क्यों गए ? 

उत्तर : रामदास और माधवदेव में बकरे खरीदने को लेकर बहस होता है। रामदास ने कहा बलि चढ़ाना विनाशकारी कार्य है । गुरु शंकरदेव से मिली ज्ञान-ज्योति के बलपर रामदास ने माधवदेव को बहुत समझाया पर उन बातों से माधवदेव जरा भी प्रभावित नहीं हुए बल्कि उनका ज्ञान दंभ जाग उठा और दृढ़ता से बोले मैंने कितने ही धर्मशास्त्र का अध्ययन किया सबमें बलि-विधान का ही निर्देश है। तुम्हें किस शास्त्र में ऐसी बातें मिली है। माधवदेव के ज्ञान दंभ से रामदास थोड़ी आहत हुए। फिर बोले तुम और हम क्यों ऐसे ही शास्त्रार्थ करें। चलो उनके पास ही चले, जिनसे हमने ये बातें सुनी है और अगले दिन ही रामदास और माधवदेव भुवाहाता बेलगुरि सत्र में श्रीमंत शंकरदेव के पास गए। 

प्रश्न 30. शंकरदेव और माधवदेव के बीच किस बात पर शास्वार्थ हुआ था ? उसका परिणाम क्या निकला ? 

उत्तर : शंकरदेव और माधवदेव के बीच बलि-विधान को लेकर शास्त्रार्थ हुआ था। शंकरदेव निवृत्ति-मार्ग के पक्ष में और माधवदेव प्रवृत्ति मार्ग के पक्ष में विविध शास्त्रों से प्रमाण प्रस्तुत करते रहे। अंत में श्रीमंत शंकरदेव ने ‘भागवत’ के श्लोक को उद्धृत किया तो माधवदेव निरुत्तर हो गए। शंकरदेव बोले- जिस प्रकार वृक्ष के मूल को सौंचने से टहनियाँ, पत्ते, फूल, फल सब संजीवित होते हैं अथवा अन्न ग्रहण के जरिए प्राण का पोषण करने से मानव शरीर की सारी इन्द्रियाँ तृप्त होती है। उसी प्रकार परब्रह्म कृष्ण की उपासना करने से सारे देवी-देवता अपने- आप संतुष्ट हो जाते हैं। ज्ञानी माधवदेव ने ध्यानपूर्वक इस पुण्य श्लोक को सुना। फिर निष्कर्ष पर पहुँचे कि शंकरदेव का मत ही पूर्णतः तर्क सम्मत एवं सत्य है। वे भलीभाँति समझ गये कि परब्रह्म कृष्ण ही एक मात्र आराध्य देव है – कृष्णस्तु भगवान स्वयम । उनकी शरण में ही जीवों का कल्याण निहित है। और कृष्ण संबंधी ज्ञान – भक्ति के दाता श्रीमंत शंकरदेव को अपना गुरु मानकर प्रणाम किया।

प्रश्न 31. शंकर- माधव के महामिलन के शुभ परिणाम किन रूपों में निकले ? 

उत्तर : धुवाहाता- बेलगुरि नामक वह पवित्र स्थान है जहाँ एकशरण भागवती वैष्णव धर्म के प्रवर्तक श्रीमंत शंकरदेव और परम शाक्त माधवदेव का महामिलन हुआ था। यह महमिलन मध्ययुगीन असम की ही नहीं अपितु असम – भूमि के सम्पूर्ण सांस्कृतिक इतिहास की संभवत: सर्वाधिक महत्वपूर्ण घटना है। उन दिनों संत शंकरदेव शक्ति की उपासना, तंत्र-मंत्र, बलि-विधान एवं अनेकानेक बाह्याचारों से जकड़े हुए असमीया समाज को मुक्त कर नया पथ दिखाने तथा उसे आध्यात्मिक उन्नति के सरलतम मार्ग पर ले चलने के महान प्रयास में जुटे हुए थे और ऐसी स्थिति में माधवदेव को पाकर भागवती वैष्णव-धर्म अथवा एकशरण नाम-धर्म के प्रचार-प्रसार कार्य में एक अदभुत गति आ गई थी। इनके महामिलन से सांस्कृतिक इतिहास में एक सुनहरे अध्याय का आरम्भ हुआ। भक्ति-धर्म के प्रचार कार्य में श्री माधवदेव का सहयोग पाने के पश्चात श्रीमंत शंकरदेव अधिक उन्मुक्त भाव से साहित्य-सृष्टि, संगीत रचना आदि के जरिए असमीया भाषा साहित्य संस्कृति को परिपुष्ट बनाने में सक्षम हुए। असमीया जाति शंकरगुरु और माधवगुरु दोनों की आभा से उदभाषित है।

Sl. No.Contents
Chapter 1हिम्मत और जिंदगी
Chapter 2परीक्षा
Chapter 3बिंदु बिंदु विचार
Chapter 4चिड़िया की बच्ची
Chapter 5आप भोले तो जग भला
Chapter 6चिकित्सा का चक्कर
Chapter 7अपराजिता
Chapter 8मणि-कांचन संयोग
Chapter 9कृष्ण- महिमा
Chapter 10दोहा दशक
Chapter 11नर हो, न निराश करो मन को
Chapter 12मुरझाया फुल
Chapter 13गाँँव से शहर की ओर
Chapter 14साबरमती के संत
Chapter 15चरैवेती
Chapter 16टूटा पहिया
निबंध 

प्रसंग सहित व्याख्या करो (लगभग 100 शब्दों में)

प्रश्न 32. ‘ऐसी स्थिति में योग्य गुरु शंकर को योग्य शिष्य माधव मिल गए।’ 

सदर्भ :प्रस्तुत गद्य खण्ड हमारी पाठ्य पुस्तक के ‘आलोक’ से मणिकांचन संयोग नामके पाठ से लिया गया है। इसके रचयिता डॉ. अच्युत शर्मा जी है। 

प्रसंग प्रस्तुत गद्य खण्ड में इन दो महापुरूषों का महामिलन मणिकांचन संयोग हुआ।

व्याख्या : प्रस्तुत गद्य खण्ड में लेखक ने इन गुरु-शिष्य का पवित्र संबंध, उनकी भक्ति की महत्ता के विषय में कहा है। प्रस्तुत लेख में इस महामिलन की पृष्ठभूमि में घटित घटनाओं का सजीव एवं रोचक वर्णन किया है। उन दिनों संत शंकरदेव बाह्याचारों से जकड़े हुए असमीया समाज को मुक्ति का नया पथ दिखाने तथा उसे आध्यात्मिक उन्नति के सरलतम मार्ग पर ले चलने के महान प्रयास में जुटे हुए थे। ऐसी स्थिति में योग्य गुरु को योग्य शिष्य माधव मिल गए। दोनों गुरुशिष्य के पवित्र बंधन में बंध गए। अब दोनों के प्रयास से इस पावन कार्य में दिन दूनी रात चौगुनी बढ़ोत्तरी होने लगी। उनके इस महामिलन के उमंग रस बंगाल की खाड़ी से होकर हिंद महासागर तक फैल गई।

प्रश्न 33. उसने इस महामिलन के उमंग-रस को बंगाल की खाड़ी से होकर हिन्द महासागर तक पहुँचाने के लिए अपनी लोहित जल-धारा को आदेश दिया था।

उत्तर : संदर्भ प्रस्तुत गद्य खण्ड हमारी पाठ्य पुस्तक आलोक से ‘मणि-कांचन संयोग’ नामक पाठ से लिया गया है। 

प्रसंग वैष्णव गुरु श्रीमंत शंकरदेव और शाक्त माधवदेव का महामिलन असम के सांस्कृतिक इतिहास की कदाचित सर्वाधिक महत्वपूर्ण घटना है। 

व्याख्या : शंकर-माधव के मिलनोपरांत एकशरण नाम-धर्म का प्रचार-प्रसार तेजी से बढ़ता गया और कृष्णभक्ति की धाराएँ जन-मन को भिगोती हुई चारों दिशाओं में बहने लगी। माधवदेव ने कृष्ण भक्ति, गुरुभक्ति और एकशरण नामधर्म के प्रचार-प्रसार कार्य में अपने को पूरी तरह समर्पित कर दिया। अतः माधवदेव शंकरगुरु के प्रिय शिष्य ही नहीं रहे, अपितु ‘माधव-वंधन बन गए। इसका साक्षी बना था ब्रह्मा का वरद पुत्र ब्रह्मपुत्र नद। महाशक्ति का आगार ब्रह्मपुत्र अपनी

गोद में मामा-भांजे को गुरु-शिष्य बनते देखकर अत्यन्त हर्षित हो उठा था। उसने इस महामिलन के उमंग-रस को बंगाल की खाड़ी से होकर हिंद महासागर तक पहुँचाने के लिए अपनी लोहित जलधारा को आदेश दिया था। ताकि इन दो महापुरुषों का महामिलन सिर्फ असम तक ही व्याप्त न रहे बल्कि देश-विदेशों में भी प्रचार-प्रसार बढ़े।

प्रश्न 34. “उत्तर भारतीय समाज में ‘रामचरितमानस’ का आदर जितना है, असमीया समाज में ‘कीर्तनघोषा नामघोषा’ का भी आदर उतना ही है।” 

संदर्भ प्रस्तुत गद्य खण्ड हमारी पाठ्य पुस्तक आलोक से ‘मणि-कांचन

संयोग’ नामक पाठ से लिया गया है। इसके रचयिता डॉ. अच्युत शर्मा जी है।

प्रसंग : शंकर-माधव महामिलन के इस अतुल्य घटना से एक ओर दोनों महान विभूतियों के जीवन और कर्म प्रभावित हुए तो दूसरी ओर इसके परिणामस्वरूप असम-भूमि का सांस्कृतिक जीवन व्यापक रुप से संजीवित हो उठा।

व्याख्या : उत्तर भारतीय समाज में रामचरितमानस का आदर है। रामचरितमानस उच्च कोटि का महाकाव्य है। यह विश्व-साहित्य की अनुपम कृति है। गोस्वामी तुलसीदास कृत यह ग्रन्थ जो जीवन में हमें प्रायः प्रत्येक क्षेत्र में दिशा प्रदान करती है। आज भी जन-जन में एक लोकप्रिय ग्रन्थ के रूप में अपना अस्तित्व बनाए हुए है और एक महान ग्रन्थ के रूप में लोकप्रिय रहा है। जिसके अध्ययन से प्रत्येक व्यक्ति को सन्तुष्ट, सुखी और सर्वहितकारी जीवन व्यतीत करने में सहायता मिलती है।

उसी प्रकार असमीया समाज में ‘कीर्त्तनघोषा नामघोषा’ का भी आदर उतना ही है। शंकर-माधव के महामिलन से एकशरण नाम-धर्म का प्रचार-प्रसार तेजी से बढ़ता गया और कृष्ण भक्ति को धाराएँ जन-मन को भिगोती हुई बंगाल की खाड़ी से होकर हिन्द महासागर तक चारों दिशाओं में बहने लगी। कृष्णस्तु भगवान स्वयम’ उनकी शरण में ही जीवों का कल्याण निहित है और यह अमृत चारों दिशा में बहने लगी।

भाषा एवं व्याकरण ज्ञान

(क) निम्नलिखित अभिव्यक्तियों के लिए एक-एक शब्द दो :

उत्तर : (क) विष्णु का उपासक-वेष्णब।

(ख) शक्ति का उपासक-शाक्त

(ग) शिव का उपासक-शैव

(घ) जिसकी कोई तुलना न हो- अतुलनीय

(ङ) संस्कृति से संबंधित सांस्कृतिक। 

(च) बहन के पति-बहनोई 

(छ) जिस स्त्री का पति मर गया हो- बिधवा

(ज) ऐसा व्यक्ति जो शास्त्र जानता हो-शास्त्रज्ञ।

(ख) निम्नांकित शब्दों से प्रत्ययों को अलग करो :

उत्तर : मनौती-ई, 

वार्षिक इक, 

कदाचित्- इत, 

बुढ़ापा आ, 

चचेरा-आ, 

पूर्वोत्तरी-ई, 

आध्यात्मिक-इक, 

आधारित-इत।

(ग) निम्नलिखित शब्दों का प्रयोग वाक्य में इस प्रकार करो, ताकि उनका लिंग स्पष्ट हो : 

उत्तर : (क) महामिलन: धुवाहाता-बेलगुरि सत्र में शंकरदेव और माधवदेव का महामिलन हुआ था।

(ख) उपासना : परब्रह्म कृष्ण की उपासना से जीवों का कल्याण निहित है।

(ग) बढ़ोत्तरी : शंकर-माधव के प्रयास से इस पावन कार्य में दिन दुनी बढ़ोत्तरी होने लगी थी।

(घ) मोलभाव : मोल-भाव करके बकरों को मालिक के पास ही रख छोड़ा है।

(ङ) विनती : माधवदेव देवी गोसानी से विनती की अपनी माँ को शीघ्र स्वस्थ कर देने के लिए।

(च) वाणी : शंकर माधव की वाणी जन-मन को भिगोती हुई चारों दिशाओं में बहने लगी। 

(छ) तिरोभाव : १५६८ ई के भाद्र महीने में शंकरदेव का तिरोभाव हुआ था। 

(ज) संस्कृति : ब्रह्मपुत्र असम की संस्कृति का पोषक भी है।

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