SEBA Class 9 Hindi (Elective) Solution| Chapter-3| बिंदु बिंदु विचार

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SEBA CLASS 9 QUESTION ANSWER

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SEBA CLASS 9 QUESTION ANSWER (ENGLISH MEDIUM)

SEBA Class 9 Hindi (Elective) Solution| Chapter-3| बिंदु बिंदु विचार

SEBA Class 9 Hindi (Elective) Solution| Chapter-3| बिंदु बिंदु विचार ये उत्तर संबंधित विषयों के अनुभवी प्रोफेसरों द्वारा सावधानीपूर्वक तैयार किए जाते हैं। उनका उद्देश्य छात्रों को विषय की उचित समझ में मदद करना और उनके कौशल और अभिव्यक्ति की कला में सुधार करना है। यदि ये उत्तर उन उद्देश्यों को पूरा करते हैं जिनके साथ वे तैयार किए गए हैं, तो हम अपने प्रयास को पर्याप्त रूप से पुरस्कृत मानेंगे। इन उत्तरों में और सुधार के लिए किसी भी सुझाव का हमेशा स्वागत है।

पाठ 3

रामानंद दोषी

अभ्यास माला

पूर्ण वाक्य में उत्तर दो 

प्रश्न 1. मुन्ना कौन सा पाठ याद कर रहा था? 

उत्तर : क्लीनलीनेस इज नेक्स्ट टु गॉडलीनेस । 

प्रश्न 2. मुन्ना को बाहर कौन बुला रहा था ? 

उत्तर : मुन्ना को उसका मित्र बाहर बुला रहा था। 

प्रश्न 3. मुन्ना की बहन उसके लिए क्या-क्या कार्य किया करती थी ?

उत्तर : मुन्ना की बहन उसकी खुली किताब को निशान के लिए कागज़ लगाकर बंद करती, किताबों कॉपियों कागजों के बेतरतीब ढेर को संवारकर करीने से सजाकर रखती है। खुले पेन को बंद करती है गीला कपड़ा लाकर स्याही के दाग-धब्बे पोछती और कुरसी को ठीक से रख देती।

प्रश्न 4. आपकी राय में अंग्रेजी की सूक्ति का मुन्ना और उसकी बहन में से किसने सही-सही अर्थ समझा ? 

उत्तर: अंग्रेजी की सूक्ति का सही-सही अर्थ मुन्ना की बहन समझी है। 

प्रश्न 5. पाठ के अनुसार सात समंदर की भाषा क्या है ? 

उत्तर : पाठ के अनुसार सात समंदर की भाषा अंग्रेजी है।

संक्षिप्त उत्तर दो (लगभग 25 शब्दों में) 

प्रश्न 6. लेखक का ध्यान अपनी किताब से उचट कर मुन्ना की ओर क्यों गया ? 

उत्तर : लेखक ने किसी भी सीख को रट लेने तथा उसे समझ-बूझकर आचरण में सही ढंग से न उतार पाने की प्रवृति पर व्यंग्य किया है। अपने बेटे को जोर जोर से अपना पाठ याद करते हुए ‘क्लीनलीनेस इज नेक्स्ट टु गॉडलीनेस’ जिसका अर्थ है शुचिता देवत्व की छोटी बहन है, सुन कर लेखक का ध्यान उचट कर मुन्ना की ओर लग गया क्योंकि मुन्ना का स्वभाव इसके विपरीत था। वह पढ़ते- पढ़ते किताब ऐसे ही खुला रखकर बाहर खेलने निकल जाता। पेन खुला छोड़ देता। किताब-कॉपियों इधर-उधर पड़ी रहती, स्याही के दाग-धब्बे जगह पर लगी रहती। लेखक ने वाणी और व्यवहार की एकरूपता पर बल दिया है। 

प्रश्न 7. विटिया मुन्ना की मेज को क्यों संवार देती है? 

उत्तर : बहन भाई से बहुत प्यार करती है क्योंकि मुन्ना सात समंदर पार की भाषा अंग्रेजी पढ़ रहे हैं। इसलिए भाई का आदर भी करती है। क्योंकि वह अंग्रेजी नहीं पढ़ती। इसलिए मुन्ना पढ़कर जब बाहर चला जाता तब वह उसकी अस्त- व्यस्त किताब-कॉपियों को सँवार कर रख देती है।

प्रश्न 8. लेखक को सारे प्रवचन- अध्ययन बौने क्यों लगे ? 

उत्तर : लेखक को सारे प्रवचन अध्ययन बौने लगते है कारण मुन्ना पाठ याद

करता है- क्लीनलीनेस इज नेक्स्ट टु गॉडलीनेस, जिसका अर्थ है शुचिता देवत्व

की छोटी बहन है। पर मुन्ना वाणी और व्यवहार आचरण में नहीं उतार पाया।

वाणी और व्यवहार की एकरूपता में अन्तर है। ज्ञान आचरण में उतरे बिना विफल मनोरथ है। अतः लेखक के कानों में गूँजती वाक्य क्षण मात्र में सब बदल जाता है तब उनके सामने प्रवचन और अध्ययन सब बौने लगते हैं। 

प्रश्न 9. ‘हम वास्तव में तुम्हारे समक्ष श्रद्धानत होना चाहते हैं’- इस वाक्य में लेखक ने ‘वास्तव’ शब्द का प्रयोग क्यों किया है?

उत्तर : वास्तव शब्द का प्रयोग इसलिए किया है कि वाप्पी और व्यवहार में समता होनी चाहिए। केवल कंठ से बोलने से नहीं होता, हृदय की गूँज निकलनी चाहिए। ज्ञान चाहे मस्तिष्क में रहे या पुस्तक में, वह मुँह से बखानने से नहीं होगा, ज्ञान आचरण में उतरे बिना विफल मनोरथ है। कथनी और करनी में समानता लानी चाहिए। लेखक कहते हैं मंचों से उपदेश देनेवाले मुन्नाओं। केवल कंठ से मत बोलो हम तुम्हारे हृदय की गूंज सुनना चाहते हैं। वाणी और व्यवहार में समता आने दो हम वास्तव में तुम्हारे समक्ष श्रद्धानत होना चाहते हैं। वाणी और व्यवहार में यथथिता लाओ। तभी तुम्हारा ज्ञान पूरा होगा।

प्रश्न 10. ‘वाणी और व्यवहार में समता आने दो।’ यदि वाणी और व्यवहार एक हो तो इसका परिणाम क्या होगा ? अपना अनुभव व्यक्त करो। 

उत्तर: वाणी और व्यवहार में समता होनी चाहिए। किताबी ज्ञान से कुछ नहीं होता। उसे आचरण में भी लाना चाहिए जिस प्रकार बड़े-बड़े महापुरुषों के धर्म- ग्रन्थ पढ़ने से कुछ नहीं होता बल्कि उनके बताए रास्ते पर चलने से सम्पूर्ण जीवन मंगलमय हो जाएगा। मन में सोची हुई बात को वचनों से प्रकाशित कर देने पर कार्यसिद्धि नहीं होती, बल्कि उसे आचरण में लाने से जीवन सफल होगा। अतः वाणी और व्यवहार में समता होने से मनुष्य सफल हो सकता है।

प्रश्न 11. ‘पाठ याद हो गया’, मुन्ना का पाठ याद हो जाने पर भी लेखक उससे प्रसन्न नहीं हैं, क्यों ? 

उत्तर : ‘पाठ याद हो गया’, पर मुन्ना का पाठ याद हो जाने पर भी लेखक इसलिए उससे प्रसन्न नहीं है कारण मुन्ना पाठ याद कर रहा था शुचिता देवत्व की छोटी बहन है पर उसका आचरण इसके विपरीत था वह अपनी किताब- कॉपियों को बिखेर कर रखता है, चारों ओर दाग-धब्बे लगे रहते। किताब को खुला ही छोड़कर बाहर निकल जाता। बाद में मुन्ना की बहन आकर साफ करती। इसलिए लेखक कहते हैं, ‘पाठ याद हो गया’। पर जिस विषय को उसने याद किया उसका ज्ञान अपने आचरण में उतारे बिना विफल मनोरथ है।

प्रश्न 12. लेखक ने इस निबंध में अंग्रेजी की सूक्ति- ‘क्लीनलीनेस इज नेक्स्ट टु गॉडलीनेस’को आधारबिन्दु क्यों बनाया है? 

उत्तर : लेखक ने इस निबंध में अंग्रेजी की सूक्ति को इसलिए आधारबिन्दु बनाया है क्यों कि किसी भी सीख को रट लेने तथा उसे समझ-बूझकर आचरण में सही ढंग से न उतारे बिना विफल होता है। उस ज्ञान को आचरण में उतारना चाहिए। कथनी और करनी एक समान होनी चाहिए। बात को मुँह से और स्वयं को घर से बाहर निकालने से पहले दाग-धब्बे को पोंछकर किताब-कॉपियों को सही ढंग से सजाकर रखना चाहिए। अतः पाठ को याद न करके उसे अपने अन्दर समा लेना चाहिए। मुन्ना पाठ तो याद करता है पर उसे आचरण में उतार नहीं पाया।

आशय स्पष्ट करो (लगभग 50 शब्दो में) 

प्रश्न 13. आचरण की एक लकीर ने सबको छोटा कर दिया है। 

उत्तर: आशय – लेखक कहते हैं आचरण की एक लकीर सबको छोटा कर देता है। कोई भी सीख तभी सार्थक होगी जब उस सीख को हम अपने आचरण में उतार सके। नेताओं के भाषणों में सुन्दर सुगठित वाक्य गूँजते हैं। भाषण में देश के लिए मर-मिटने की कसम खाते हैं। पर वास्तव में क्या देश के लिए मर- मिटने हैं। वह सब तो इनके मुँह से निकला कथन है। उस कथन को आचरण में उतारना चाहिए तभी तो समाज सुधरेगा। इसीलिए लेखक कहते हैं बात को मुँह से निकालने से पहले आचरण में भी समानता लाओ। मुन्ना पाठ याद करता है- ‘क्लीनलीनेस इज नेक्स्ट टु गॉडलीनेस’ पर शुचिता उसके आरचण में उतरी टु नहीं। उसके आचरण की एक लकीर ने सबको छोटा कर दिया। 

प्रश्न 14. केवल कंठ से मत बोलो हम तुम्हारे हृदयों की गूंज सुनना चाहते

उत्तर : लेखक धर्म और राजनीति, समाज और व्यवहार के क्षेत्रों में विविध मंचों से उपदेश देने वाले मुन्नाओं से कहते हैं केवल कैंठ से मत बोलो हम तुम्हारे हृदयों की गूँज सुनना चाहते हैं। रटे-रटाये वाक्य बोलने से कुछ नहीं होगा बल्कि जो कुछ ज्ञान अर्जन किए हो उसे वास्तविकता में लाओ तभी तो वाणी और व्यवहार में समानता आएगी, अर्थात बात कँठ तक रह जाने से ही नहीं होगा उस ज्ञान का अनुभव करो ज्ञान के प्रकाश को अपने हृदय की गहराई में उतारो तभी तो तुम्हारे हृदय की गूँज सबको सुनाई देगी।

सही शब्दों का चयन कर वाक्यों को फिर से लिखो

प्रश्न 15. लेखक ….. पढ़ रहा था। (समाचार पत्र, किताब, पत्रिका, चिट्ठी) 

उत्तर : लेखक किताब पढ़ रहा था।

प्रश्न 16. बिटिया ……नहीं पड़ती। (अंग्रेजी, हिन्दी, असमीया, बंगला) 

उत्तर : बिटिया अंग्रेजी नहीं पढ़ती।

प्रश्न 17. ……. आचरण में उतरे बिना विफल मनोरथ है। (प्रवचन, अध्ययन, व्यवहार, ज्ञान)

उत्तर : ज्ञान आचरण में उतरे बिना विफल मनोरथ है। 

प्रश्न 18. आचरण की एक …….ने सबको छोटा कर दिया। (रेखा, बिन्दू, लकौर, इच्छा)

उत्तर : आचरण की एक लकीर ने सबको छोटा कर दिया।

प्रश्न 19. प्रवचन और अध्ययन सब …..हो गए हैं। (छोटे, नाटे, ऊँचे, बौने) 

उत्तर: प्रवचन और अध्ययन सब बौने हो गए हैं।

अभ्यास माला ( 2 )

सही विकल्प का चयन करो 

1. “किसी ने कहा ‘मेरे पास है पारसमणि” इसमें किसी कौन है?

(क) कोई राह चलता व्यक्ति 

(ख) लेखक का विवेक 

(ग) लेखक की बुद्धि

(घ) लेखक की कल्पना

उत्तर : लेखक की कल्पना

2. ‘लोहा है तुम्हारे पास ? ‘ में ‘लोहा’ से क्या आशय है ? 

क. उद्यमशीलता 

(ख) लौह धातु 

(ग) भौतिक उपकरण 

(घ) अनुभव।

उत्तर : उद्योगशीलता । 

संक्षिप्त उत्तर दो (लगभग 25 शब्दों में ) 

प्रश्न 3. लेखक पारसमणि क्यों ढूंढ़ रहा था ? 

उत्तर : लेखक की दृष्टि में यह पारसमणि है हमारी सेवा भावना, हमारा अपना परिश्रम और लगन ऐसी पारसमणि के स्पर्श से मनचाहा सोना बनाया जा सकता है। वांछित उपलब्धि प्राप्त की जा सकती है। इसलिए लेखक पारसमणि को ढूँढ रहे थे। पारसमणि के स्पर्श से लोहे को सोना बनाना चाहते हैं। 

प्रश्न 4. लेखक ने स्पर्शमणि के कौन-कौन से रूप बताए हैं? 

उत्तर : लेखक ने प्रत्येक व्यक्ति को अपने भीतर छिपी ‘पारसमणि’ को

पहचानने के लिए परामर्श दिया है। लेखक कहते हैं हमारे भीतर ही स्पर्शमणि है। खाली हाथ हो, तो सेवा के स्पर्श से लोहे-पीतलवाले हो, तो कौशल के स्पर्श से और प्रतिभा वाले हो, तो लगन के स्पर्श से मनचाहा सोना बना सकते हो ।

प्रश्न 5. ‘शुद्ध स्पर्श’ से क्या तात्पर्य है ? 

उत्तर : ‘शुद्ध स्पर्श’ का तात्पर्य है- मन की शुद्धता, हमारी सेवा भावना, हमारा अपना परिश्रम और लगन जो हमारे भीतर ही है-स्पर्शमणि जिसे हमें पहचानना है जीवन का सुमन परिश्रम से खिलता है जिसमें गौरवगंध का अस्तित्व होता है उद्यम करने से ही कार्य सिद्ध होता है। उन्नति और विकाश का रास्ता हमारी सेवा, लगन और श्रम से होकर जाता है। शुद्ध स्पर्श अर्थात मन की शुद्धि जितना पवित्र होगा, स्पर्श जितना शुद्ध होगा सोना भी उसी मात्रा में शुद्ध होगा । अर्थात श्रम से हमारे कर्म सुवासित हो उठेगा क्योंकि श्रम से आए पसीने की बूँदों की सुवास मिल गई है। अर्थात सोना बनाते समय मन की शुद्धता अनिवार्य है। 

प्रश्न 6. सोना का होना और न होना दोनों ही समस्या के कारण क्यों हैं ? 

उत्तर : सोने का होना और न होना दोनों ही समस्या का कारण होता है। सोने में अच्छाई जितनी है बुराई उससे कम नहीं है। सोना जिसके पास है उसे नशा से मारता है और जिसके पास नहीं है उसे लोभ परेशान करता है। क्योंकि सोने में धतुरे से भी सौ गुणा ज्यादा मादकता है। धतुरा खा कर आदमी पागल बन जाता है लेकिन सोने को पाने के लिए आदमी पागल बन जाता है। इसलिए सोने की अधिक मादकता है। सोने की मादकता तथा उसे और अधिक पाने का लालच हमें विनाश की ओर ले जा सकता है।

Sl. No.Contents
Chapter 1हिम्मत और जिंदगी
Chapter 2परीक्षा
Chapter 3बिंदु बिंदु विचार
Chapter 4चिड़िया की बच्ची
Chapter 5आप भोले तो जग भला
Chapter 6चिकित्सा का चक्कर
Chapter 7अपराजिता
Chapter 8मणि-कांचन संयोग
Chapter 9कृष्ण- महिमा
Chapter 10दोहा दशक
Chapter 11नर हो, न निराश करो मन को
Chapter 12मुरझाया फुल
Chapter 13गाँँव से शहर की ओर
Chapter 14साबरमती के संत
Chapter 15चरैवेती
Chapter 16टूटा पहिया
निबंध 

आशय स्पष्ट करो (लगभग 50 शब्दों में): 

प्रश्न 7. याचना के लिए फैलाए हाथ का भाग केवल तिरस्कार है, बंधु ! 

उत्तर : याचना के लिए फैलाए हाथ का भाग केवल तिरस्कार ही होता है। अपने भीतर छिपी पारसमणि के अनुभुति से, अपने परिश्रम और लगन से हम लोहा को भी सोना बना सकते हैं। अर्थात किसी भी कार्य में निरन्तर श्रम करते रहने से कठिन कार्य इसके द्वारा सफल हो सकता है। अतः हाथ बढ़ाओ तो किसी उद्योग के लिए, याचना के लिए नहीं। पुरुष हो तो पुरुषार्थ करो क्योंकि हमारी सफलता और प्रगति का रास्ता श्रम के फावड़े से तैयार होता है। कामयाबी केवल उन्हीं व्यक्तियों को मिलती है जो कर्मशील तथा परिश्रमी है। लेखक कहते हैं बंधु हाथ याचना के लिए नहीं कर्म के लिए उठना चाहिए।

प्रश्न 8. शुद्ध सोने का वास शुद्ध व्यक्ति और शुद्ध समाज में ही संभव है। 

उत्तर : पारसमणि निबंध में लेखक ने प्रत्येक व्यक्ति को अपने भीतर छिपी पारसमणि को पहचानने के लिए परामर्श दिया है। लेखक की दृष्टि में यह पारसमणि है हमारी सेवा भावना, हमारा अपना परिश्रम और लगन ऐसी पारसमणि के स्पर्श से मनचाहा सोना बनाया जा सकता है। पर सोना बनाते समय मन की शुद्धता अनिवार्य है अन्यथा सोने की मादकता तथा उसे और अधिक पाने का लालच हमें विनाश की ओर से जा सकता है। अतः उद्यमशील होकर अपनी प्रतिभा और लगन से उन्नति और विकास का रास्ता अपने आप खुल जाता है। ये अपनी उन्नति के साथ-साथ समाज का, जाति का, देश और राष्ट्र का उत्थान अपने श्रम पर करते हैं। अतः शुद्ध सोने का वास शुद्ध व्यक्ति और शुद्ध समाज में ही संभव है जिस समाज में कर्मशील व्यक्ति होते हैं, उनका अमृत स्पर्श छोटे से छोटे कार्य को बड़ा बना देता है।

भाषा एवं व्याकरण ज्ञान

1. निम्नलिखित शब्दों का उच्चारण करो :

उत्तर : नजर , जोर हजार , नाराज , जरूर , जरा , जिन्दगी , तारीफ , ऑफिस  सफाई , फैशन , फन । 

उपर्युक्त शब्दों में “ज” और “फ” अरबी-फारसी तथा अंग्रेजी से आए तत्सम शब्दों की ध्वनियाँ हैं। इन्हें संघर्षो ध्वनि कहते है, क्योंकि इनका उच्चारण करते समय हवा घर्षण के साथ निकलती है, जबकी “ज” और “फ” ध्वनि के उच्चारण में हवा रुकती है।

निम्नलिखित शब्दों में अंतर समझते हुए उच्चारण करो और उनका वाक्यों में प्रयोग करो :

जरा (बुढ़ापा)

जरा (थोड़ा-सा)

राज (राज्य)

राज (रहस्य)

तेज (चमक)

तेज (फुर्तीला)

फन (साँप का फण) 

फन (कला)

उत्तर : वाक्य रचना :

जरा (बुढ़ापा) – प्रफुल्ल को जरा अवस्था प्राप्त हुआ है।

जरा (थोड़ासा)  – जरा पानी देना बहुत प्यास लगी।

राज (राज्य) – राम ने अयोध्या में राज कर रहा है।

राज (रहस्य)  – तुमारे तन्दरुस्ति का राज क्या है?

तेज (चमक) – सुर्य का तेज बहुत ज्यादा है।

तेज (फुर्तीला) – शचीन बहुत तेज दौढ़त है।

फन (साँप का फण) –नागिन का फन का सामने नाचोमत। 

फन (कला) -अजय अभिनय मे अपना फन दिखाया। 

नोट : आजकल इन शब्दों में “नुक्ता” का प्रयोग कम हो रहा है।

2. निम्नलिखित गद्यांश का पाठ करते समय इसका ध्यान रखो कि तिरछी रेखाएँ क्षणभर ठहराव का संकेत देती हैं। इसी के अनुसार इसे पढ़ो।

महात्मा गाँधी ने / पृथ्वीसिंह से कहा / सरदार साहब, अगर आप सेवाग्राम में आकर/मेरे आश्रम में रह सकें/ तभी मैं समझँगा कि आपने अहिंसा का पाठ/ सचमुच सीख लिया है।”

पृथ्वीसिंह जरा चौंककर बोले/”आपका क्या मतलब बापुजी?” “भाई/मेरा आश्रम तो/एक प्रयोगशाला जैसा ही है/जिन लोगों की कहीं नहीं बनती, / अक्सर वे मेरे पास आ जाते हैं। उन सबको एक साथ रखने में/मैं सीमेंट का काम करता हूँ/और वह सीमेंट/मेरी अहिंसा ही है।”

3. निम्नलिखित बिलोम शब्दों के अर्थ का अंतर स्पष्ट करते हुए उनका वाक्यों में प्रयोग करो

ध्वनि – प्रतिध्वनि ।

अहिंसा । हिंसा)-

क्रिया —प्रतिक्रिया ।

फल – प्रतिफल ।

उत्तर : वाक्य रचना)

ध्वनि – महात्मा गाँधी ने सन 1942 मे अंगरेजो के खिलाफ भारत छोढ़नेका ध्वनि उठाया था।

प्रतिध्वनि – पहाड़ मे ध्वनि का प्रतिध्वनि होता है। ।

हिंसा – दुसरों से हिंसा मत करना। 

अहिंसा – महात्मा जीने अहिंसा का वाणी प्रचार किया था।

क्रिया – क्रिया का कितना रुप है वताओ। 

प्रतिक्रिया हर क्रिया की एक प्रतिक्रिया होते है।

फल – अच्छा काम का अच्छा फल मिलता है।

प्रतिफल – परमाणु चुक्ति का प्रतिफल क्या होगा किसीको मालुम नही। 

4. निम्नलिखित वाक्यों को निर्देशानुसार परिवर्तन करो

(क) जब मैं अपने मित्र को हमेशा परेशान, नाराज और चिड़चिड़ाते देखता हुँ तब इसी किस्से का स्मरण हो आता है। (वचन वदलो) (বচন পৰিবৰ্ত্তন কৰা)।

उत्तर : जब हम अपने मित्रों को हमेशा परेशान, नाराज और चिड़चिड़ाते देखते हैं तब इसी किस्से का स्मरण हो आता है।

(ख) दुखी होने का कोई कारण नहीं (प्रश्नवाचक बनाओ) (थनार्थक বাকJ

उत्तर : दुखी होने का कोई कारण है क्या?

(ग) रंग-बिरंगे फुल खिले हैं। (बिस्मयादिबोधक बनाओ) 

उत्तर : अरे रंग-बिरंगे फुल खिले है !

(घ) वह अनपढ़ नौकरानी किताबें और कबिताएँ लिखना नहीं जानती थी, पर व्यवहार कुशल अवश्य थी।

उत्तर : वह अनपढ़ नौकर किताबे और कविताएँ लिखना नहीं जानता था। पर व्यावहार कुशल जानता था। 

(ङ) है तो वह भी आदमी ही। (सामान्य वाक्य बनाओ) 

उत्तर : वह भी आदमी है।

5. निम्नलिखित मुहावरों के अर्थ लिखकर उनका वाक्यों में प्रयोग करो :

आगबबुला होना, नुक्ताचीनी करना, टूट पड़ना, चुटकियाँ लेना, कोई चारा न होना।

उत्तर : 1. आग बबुला होना (अत्यन्त उत्तेजित हो उठना) – राघव तुमसे बहुत नाराज है। तुम उसके पास न जाओ, तुमको देखते ही वह आग बबुला हो जायगा। 

2. नुक्ताचीनी करना : (दोष निकालना) – दुसरों की अनावश्यक नुक्ताचीनी करना भले लोगों का काम नहीं।

3. टूट पड़ना : (आक्रमण करना) – पुलिस हथियार लेकर अत्याचारिओं पर टूट पड़े।

4. चुटकियाँ लेना : (व्यंग्य करना)-गाँधीजी मीठी चुटकीयाँ लेकर कड़ी से कड़ी आलोचना कर सकते थे।

5. कोई चारा न होना (कोई उपाय न होना) रसोइयाँ को डाँटनेवाले मालिक को कहे बिना भाग जाने की सीवा कोई चारा न होना था।

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