SEBA Class 9 Hindi (Elective) Solution| Chapter-1| हिम्मत और जिंदगी

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SEBA Class 9 Hindi (Elective) Solution| Chapter-1| हिम्मत और जिंदगी

SEBA Class 9 Hindi (Elective) Solution| Chapter-1| हिम्मत और जिंदगी ये उत्तर संबंधित विषयों के अनुभवी प्रोफेसरों द्वारा सावधानीपूर्वक तैयार किए जाते हैं। उनका उद्देश्य छात्रों को विषय की उचित समझ में मदद करना और उनके कौशल और अभिव्यक्ति की कला में सुधार करना है। यदि ये उत्तर उन उद्देश्यों को पूरा करते हैं जिनके साथ वे तैयार किए गए हैं, तो हम अपने प्रयास को पर्याप्त रूप से पुरस्कृत मानेंगे। इन उत्तरों में और सुधार के लिए किसी भी सुझाव का हमेशा स्वागत है।

पाठ 1

कवि परिचय रामधारी सिंह ‘दिनकर’ : 

राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर जी का जन्म बिहार प्रदेश के मुंगेर जिले के गंगा के उत्तरी तट पर स्थित गाँव सिमरिया में सन् 1908 में हुआ था। रामधारी सिंह दिनकर एक युगश्रष्टा प्रतिनिधि कवि के रूप में विख्यात है। दिनकर के काव्य की प्रमुख विशेषता उनमें अभिव्यक्त राष्ट्रीय चेतना है। राष्ट्रीय भावना और देश भक्ति उनके काव्य की आत्मा है। दिनकर जी का गद्य और पद्य दोनों पर समान अधिकार था। उनकी गद्य की पुस्तक संस्कृति के चार अध्याय को साहित्य अकादमी पुरस्कार और काव्य ग्रन्थ उर्वशी को ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला। राष्ट्रपति ने उन्हें ‘पद्मभूषण’ से सम्मानित किया। उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं ।

गद्य : मिट्टी की ओर, अर्धनारीश्वर, देश-विदेश, उजली आग, भारत की सांस्कृतिक कहानी, रेती के फूल आदि। 

पद्य: प्रणभंग, रेणुका, हुँकार, रसवंती, रश्मिरथी आदि ।

अभ्यासमाला

सही विकल्प का चयन करो : 

प्रश्न 1. किन व्यक्तियों को सुख का स्वाद अधिक मिलता है ? 

(क) जो सुख का मूल्य पहले चुकाता है।

(ख) जो सुख का मूल्य पहले चुकाता है और उसका मजा बाद में लेता है।

(ग) जिसके पास धन और बल दोनों हैं। (घ) जो पहले दुःख झेलता है।”

उत्तर : जो सुख का मूल्य पहले चुकाता है और उसका मजा बाद में लेता है। 

प्रश्न 2. पानी में जो अमृत-तत्त्व है, उसे कौन जानता है ?

(क) जो प्यासा है।

(ख) जो धूप में खूब सूख चुका है।

(ग) जिसका कंठ सूखा हुआ है। 

(घ) जा रेगिस्तान से आया है। 

उत्तर: जो धूप में खूब सूख चुका है।

प्रश्न 3. ‘गोधूली वाली दुनिया के लोगों’ से अभिप्राय है- 

(क) विवशता और अभाव में जीने वाले लोग।

(ख) जय-पराजय के अनुभव से पूरे लोग।

(ग) फल की कामना न करने वाले लोग।

(घ) जीवन को दाँव पर लगाने वाले लोग। 

उत्तर जीवन को दाँव पर लगाने वाले लोग

प्रश्न 4. साहसी मनुष्य की पहली पहचान यह है कि वह

(क) सदा आगे बढ़ता जाता। 

(ख) लोगों की सोच की परवाह नहीं करता। 

(ग) बाधाओं से नहीं घबराता है। 

(घ) बिलकुल निडर होता है।

उत्तर : सदा आगे बढ़ता जाता है। 

संक्षिप्त उत्तर दो (लगभग 25 शब्दों में ) 

प्रश्न 5. चाँदनी की शीतलता का आनंद कैसा मनुष्य उठा पाता है ? 

उत्तर : चाँदनी की ताजगी और शीतलता का आनंद वह मनुष्य लेता है, जो दिन भर कड़ी धूप में थक कर घर लौटा है, जिसके शरीर को अब शीतलता की जरूरत महसूस होती है और वह संतुष्ट है कि दिनभर उसने किसी अच्छे काम में समय लगाया है। अर्थात जीवन की धूप में तपने वाला ही चाँदनी का आनन्द ले सकता है।

प्रश्न 6. लेखक ने अकेले चलने वाले की तुलना सिंह से क्यों की है ? 

उत्तर : झुंड में चलना और झुंड में चरना यह भैंस और भेड़ का काम है। सिंह किसी के बनाये रास्ते पर नहीं चलता। वह तो उनसे अलग खुद अपना रास्ता निर्माण करता हुआ चलता है। वह बिल्कुल अकेला होने पर भी मगन रहता है। अर्थात साहस की जिंदगी सबसे बड़ी जिंदगी होती है। ऐसी जिंदगी की सबसे बड़ी पहचान यह है कि वह बिल्कुल निडर बिल्कुल बेखौफ होती है।

प्रश्न 7. जिंदगी का भेद किसे मालूम है ? 

उत्तर : जिंदगी का भेद उसे मालूम है जो यह जानकर चलता है कि जिंदगी कभी भी खत्म न होने वाली चीज है। ये लोग जीवन को भोग त्याग से करना जानते हैं। जिंदगी में निडर होकर चलते हैं। जीवन में अगर असफलता आये तब भी वह पीछे की पांव नहीं हटाता ।

प्रश्न 8. लेखक ने जीवन के साधकों को क्या चुनौती दी है ? 

उत्तर : जीवन का भरपूर आनंद उठाना चाहिए। जीवन को सही ढंग से जीने के लिए हिम्मत और निडर होना चाहिए। जिंदगी की चुनौती को कबूल करना चाहिए तभी हम आगे बढ़ सकते हैं। अगर कायरों की तरह लहरों में तैरने से डरकर किनारे में मरी हुई सीपियों से ही संतोष मिल जाए तो समुद्र के अंतराल में छिपे हुए मोतियों के भंडार को कौन बाहर लाएगा। कामना का आँचल छोटा नहीं करना चाहिए। लहरों में तैरने का जिन्हें अभ्यास है, वे ही मोती लेकर बाहर आते हैं। 

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दो (लगभग 50 शब्दों में):

प्रश्न 9. लेखक ने जिंदगी की कौन-सी दो सूरतें बताई हैं और उनमें से किसे बेहतर माना है ?  

उत्तर : लेखक कहते हैं कि जीवन की दो सूरतें हैं। एक तो यह कि आदमी बड़े से बड़े मकसद के लिए कोशिश करते हैं और अपनी जीत हासिल करने के लिए हाथ बढ़ाते हैं और अगर कदम-कदम पर असफलता रूपी बादल छा जाने पर भी वह पीछे को पाँव नहीं हटाते।

दूसरी सूरत यह है कि उन गरीब आत्माओं का संगी बन जाए जो न तो अधिक सुख पाती है और न अधिक दुख पाने का संयोग है। जो जिंदगी की चुनौती को कबूल करना नहीं जानते वे जिंदगी के साथ जुआ नहीं खेल सकते पर जिंदगी को दांव में लगा सकते हैं, अर्थात जीवन का सामना हिम्मत और निडर होकर करना चाहिए। अगर रास्ता आगे ही आगे निकल रहा हो तो फिर असली मजा तो पाँव बढ़ाते जाने में ही है। जिंदगी की सबसे बड़ी विशेषता है हिम्मत आदमी के और सारे गुण उसके हिम्मत होने से ही पैदा होते हैं। जीवन के उस फूल को जिसमें हमारा भी अधिकार है उसे दोनों हाथों से उपभोग करना चाहिए।

प्रश्न 10. जीवन में सुख प्राप्त न होना और मौके पर हिम्मत न दिखा पाना इन दोनों में से लेखक ने किसे श्रेष्ठ माना है और क्यों ? 

उत्तर : मनुष्य किसी महान निश्चय के समय यदि साहस से काम नहीं लेता, जिन्दगी की चुनौती को कबूल नहीं करता तो वह कभी जीवन में सुखी नहीं हो सकता। ऐसे व्यक्ति अवसर पर साहस न दिखाने के कारण अपनी ही आत्मा के भीतर एक आवाज सुनता है। पर वह आवाज को रोक नहीं पाता और यह आवाज उसे हमेशा कहती रहती है-तुम कायर हो, तुम कायर हो, तुम जीवन में साहस नहीं दिखा सके और लेखक के अनुसार जीवन में सुख न मिलना भी T अच्छा है क्योंकि मरने के समय हम अपनी आत्मा से यह धिक्कार न सुने कि हममें हिम्मत की कमी थी। हम में साहस का अभाव था।

प्रश्न 11. पाठ के अंत में दी गई कविता की पंक्तियों से युधिष्ठिर को क्या सीख दी गई है? 

उत्तर : यह अरण्य, घनी झाड़ी नहीं है जो काट कर अपना रास्ता बना ले। और न यह किसी का क्रीतदास है जिसे जो चाहे अपना ले यह जीवन उनका नहीं है युधिष्ठिर ! जो उससे कोई डरे । वह तो युद्धभूमि पर निर्भय होकर लड़ते हैं। अर्थात युधिष्ठिर को कहा गया है कि तुम वनवास का कष्ट सहन किये हो राज्य लाभ करने के लिए। क्रीतदास होने के लिए नहीं। संकट से भय पाना जीवन नहीं है। युद्ध करके जीना ही जिन्दगी है। 

सप्रसंग व्याख्या करो (लगभग 100 शब्दों में)

प्रश्न 12. साहसी मनुष्य सपने उधार नहीं लेता, वह अपने विचारों में रमा हुआ अपनी ही किताब पढ़ता है। 

उत्तर: संदर्भ प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य पुस्तक आलोक के हिम्मत और जिंदगी नामक पाठ से ली गयी है। इसके रचयिता रामधारी सिंह ‘दिनकर जी हैं’ । 

प्रसंग दिनकर जी ने एक अच्छी जिंदगी जीने की राह दिखाई है। जीवन को भोग त्याग के साथ करना चाहिए तभी जीवन में आनन्द प्राप्त होगा।

व्याख्या : लेखक कहते हैं साहस की जिंदगी सबसे बड़ी जिंदगी होती है और उनकी पहचान है वह निडर और साहसी है। ऐसे व्यक्ति जनमत की उपेक्षा करके दुनिया की असली ताकत होते हैं। ऐसे साहसी मनुष्य सपनों में भी आनन्द लेते हैं, जिनका व्यवहारिक जीवन में कोई महत्व नहीं होता। वह सपने भी उधार नहीं लेता। वह अपने विचारों में रमा अपनी ही जिंदगी के पन्ने उलटता है। इनकी सोच दूसरों से अलग होती है। अपनी बुद्धि विचारों से ही काम करते हैं।

प्रश्न 13. कामना का अंचल छोटा मत करो, जिंदगी के फल को दोनों हाथों से दबाकर निचोड़ो। 

उत्तर : संदर्भ – प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य पुस्तक आलोक के हिम्मत और जिंदगी नामक पाठ से ली गयी है। इसके रचयिता रामधारी सिंह दिनकर जी हैं। 

प्रसंग – लेखक कहते हैं दुनिया में जितने भी आनन्द बिखेरे गए है, उनमें हमारा भी हिस्सा है। समुद्र के गहराई में छिपे मोतियों को हम भी निकाल सकते हैं।

व्याख्या – दुनिया में जितने भी आनन्द बिखेरे गए है उनमें हमारा भी हिस्सा है और वह चीज भी हमारी हो कसती है जिन्हें हम असम्भव सोचकर लौट आते हैं, उन्हें हासिल नहीं करते पर आत्मविश्वास, हिम्मत और साहस से हम वह चीज भी हासिल कर सकते हैं। इसीलिए अपनी कामना का आँचल छोटा नहीं करना चाहिए। जीवन के उस फल को जिसमें हमारा भी अधिकार है उसे दोनो हाथों से उपभोग करना चाहिए तभी आनन्द हँसता हुआ जीवन में प्रवेश करेगा।

Sl. No.Contents
Chapter 1हिम्मत और जिंदगी
Chapter 2परीक्षा
Chapter 3बिंदु बिंदु विचार
Chapter 4चिड़िया की बच्ची
Chapter 5आप भोले तो जग भला
Chapter 6चिकित्सा का चक्कर
Chapter 7अपराजिता
Chapter 8मणि-कांचन संयोग
Chapter 9कृष्ण- महिमा
Chapter 10दोहा दशक
Chapter 11नर हो, न निराश करो मन को
Chapter 12मुरझाया फुल
Chapter 13गाँँव से शहर की ओर
Chapter 14साबरमती के संत
Chapter 15चरैवेती
Chapter 16टूटा पहिया
निबंध 

भाषा और व्याकरण ज्ञान

प्रश्न 14. निम्नलिखित वाक्यों को ध्यानपूर्वक पढ़ो

(क) भोजन का असली स्वाद उसको मिलता है, जो कुछ दिन बिना खाए भी रह सकता है।

(ख) लहरों में तैरने का जिन्हें अभ्यास है, वे मोती लेकर बाहर आएँगे।

(ग) जो सुखों का मूल्य पहले चुकाते हैं उन्हें स्वाद अधिक मिलता है। इन वाक्यों में मोटे छपे शब्द ‘उसको’, ‘जो’, ‘जिन्हें’, ‘वे’, और ‘उन्हें’ संबंधवाचक सर्वनाम हैं क्योंकि वाक्यों में इनका परस्पर संबंध है। संबंधवाचक सर्वनामों का प्रयोग करते हुए कोई अन्य पाँच वाक्य बनाओ।

1. वह लड़का पकड़ा गया, जो कल यहाँ आया था।

2. यह वही फिल्म है जिसे तुम देखना चाहते थे।

3. जिसको पैसा मिलेगा, वह काम क्यों नहीं करेगा।

4. यह वही लड़की है जिससे मदन की शादी हो रही है। 

5. जो झूठ बोलता है वह कभी आगे नहीं बढ़ सकता। 

प्रश्न 15. इस पाठ में अरबी-फारसी के अनेक शब्द आए हैं, जैसे मजा, जिंदगी। इनके हिंदी रूप हैं-आनंद, जीवन । यहाँ कुछ हिंदी शब्द दिए जा रहे हैं। पाठ में से उनके अरबी-फारसी रूप चुनकर लिखो :

भय, सुगंधित, अनुभव, विशेषता, अंतर, वास्तविक, प्रयास, आवश्यकता

उत्तर : 

  • भय- खौफ
  • अंतर- फर्क
  • प्रयास- कोशिश
  • सुगंधित- खुशबूदार 
  • विशेषता- सिफत
  • आवश्यकता- जरूरतमंद
  • अनुभव- महसूस
  • वास्तविक -असलिय 

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