SEBA Class 10 Hindi (Elective) Solution| Chapter-9| जो बीत गयी

SEBA Class 10 Hindi (Elective) Solution| Chapter-9| जो बीत गयी सूची में प्रत्येक अध्याय का उत्तर प्रदान किया गया है ताकि आप आसानी से विभिन्न अध्याय एनसीईआरटी समाधान कक्षा 10 आलाक भाग-2 में खुल सकें और एक की आवश्यकता का चयन कर सकें। इसके अलावा आप एनसीईआरटी (CBSE) पुस्तक दिशानिर्देशों के अनुसार विशेषज्ञ शिक्षकों द्वारा इस खंड में NCERT पुस्तक ऑनलाइन पढ़ सकते हैं। ये समाधान NCERT हिंदी (MIL) समाधान का हिस्सा हैं। यहां हमने कक्षा 10 NCERT आलाक भाग -2 पाठ्य पुस्तक समाधान आलाक भाग -2 के SEBA Class 10 Hindi (Elective) Solution| Chapter-9| जो बीत गयी लिए दिए हैं आप यहां इनका अभ्यास कर सकते हैं।

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SEBA Class 10 Hindi (Elective) Solution| Chapter-9| जो बीत गयी

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कवि परिचय हरिवंश राय बच्चन (1907-2003) : 

कवि हरिवंश राय बच्चन का जन्म 27 नवंबर, 1907 को इलाहाबाद (उत्तर प्रदेश) में हुआ था। काव्य रचना की प्रकृति बच्चन जी में प्रारंभ से ही थी। सन् 1935 के समीप ‘मधुशाला’ नामक काव्य संग्रह के प्रकाशन के साथ ही हिंदी काव्य जगत में इन्हें वास्तविक ख्याति मिली। बच्चन जी ने विशेषतः गीतों की ही सृजना की है। उनके गीतों में नैसर्गिक प्रवाह है। कुछ कविताओं में कवि ने अपने अंतर की प्रकृति को स्वानुभव और सूक्ष्म अनुभव को अध्ययनगत सीधी सच्चाई से अभिव्यक्त कर दिया है।

बच्चन जी ने अनेक पुस्तकों की रचनाएँ की है। उनमें से मधुशाला, मधुबाला, मधुकलश, निशा- निमंत्रण, एकांत संगीत, आकुल अंतर सतरंगिनी, हलाहल, खादी के फूल मिलन यामिनी, आदि काव्य ग्रंथ प्रसिद्ध हैं। इसके अतिरिक्त डायरी, आलोचना, निबंध आदि भी लिखते थे। आपका स्वर्गवास सन् 2003 में हुआ है।

भावार्थ :

1. जो बीत गयी सो बात गयी….. सो बीत गयी ।। 

भावार्थ: कवि यह कहना चाहते हैं कि मनुष्य को अपने बीते हुए दुख को भुलाकर वर्तमान की चिंता करनी चाहिए। अपने दुखों को यादकर शोक मनाने से अच्छा है कि जीवन के बाकी बचे समय को सुखपूर्वक बिताया जाए, जो बीत गयी उसके लिए शोक नहीं करना चाहिए। कवि यहाँ मानव जीवन के साथ टूटे हुए तारों के साथ तुलना की है। जीवन में भी ऐसा ही एक प्रिय तारा था, जो उसे बहुत प्रिय था पर वह तारा जब डूब गया फिर वापस नहीं आया। उसके लिए शोक मनाने से क्या वह वापस आएगा। जिस प्रकार अम्बर के चेहरे को देखो कितने सितारे जगमगाते हैं, पर इस अंबर से प्यारे तारे टूटे, कितने अपने प्रिय सितारे छूटे, पर जो टूट कर गिर गए उसके लिए अम्बर शोक नहीं मनाता। उसी प्रकार मनुष्य को अपने बीते हुए दुख को भुलाकर वर्तमान की चिंता करनी चाहिए। अपने दुखों को यादकर शोक मनाने से अच्छा है कि जीवन के बाकी बचे समय को सुखपूर्वक बिताया जाए। जीवन का भरपूर आनंद उठाया जाए।

2. जीवन में वह था एक कुसुम…. सो बात गयी। 

उत्तर : जीवन में भी ऐसा ही एक पुष्प था, जिस पर तुम निछावर होते थे, पर

जब वही पुष्प मुरझाकर सुख गया उसके लिए शोक मनाने से क्या वह वापस आएगा। अपने प्रिय फूलों के सुखने अथवा मुरझा जाने पर मधुवन कभी शोर नहीं मचाता फूलों से ही उपवन की शोभा बढ़ती। पर उपवन के लिखे फूल जब मुरझा जाते हैं, कितनी लताएँ सुख कर मुरझा गई पर जो मुरझा गई फिर कहाँ खिल पाई पर अपने प्रिय फूलों के सुखने अथवा मुरझा जाने पर मधुवन कभी शोर नहीं मचाता। उसी प्रकार मनुष्य को अपने दुखों को याद करके शोक मनाने से अच्छा है जीवन का भरपूर आनंद उठाएँ।

3. जीवन में मधु का प्याला था………… सो बात गयी। 

भावार्थ जीवन में शराब से भरा प्याला था और इस शराब के प्याले के लिए मनुष्य अपना सब कुछ दाव पर लगा देता है। पर वही प्लाया जब टूट गया तो शराबी उसके लिए शोक नहीं करता अर्थात् जो टूट कर बिखर जाता है, वह वापस नहीं आता। जिस प्रकार मदिरालय का आँगन जहाँ कितने शराब से भरे प्याले हिल जाते हैं, अर्थात् थोड़ी सी चोट लगते ही गिर कर मिट्टी में मिल गए। पर जो एकबार गिरते हैं वह कब उठ पाते हैं इन टूटें प्यालों पर मदिरालय कब पछताता है, जो बीत गया सो बात भी गयी। उसके लिए शोक करने से क्या होगा। पलभर के जीवन को सुखपूर्वक बिताना चाहिए।

4. मृदु मिट्टी के हैं बने हुए ….मधुप्याले हैं। 

भावार्थ : कवि ने मनुष्य के जीवन की तुलना कोमल मिट्टी के घड़े के साथ की

 है। थोड़ी-सी चोट लगते ही टूट सकता है। जिस प्रकार शराब से भरा घड़ा कोमल मिट्टी का बना होता है और ये शराब से भरा घड़ा थोड़ी सी चोट लगते ही फूट भी जाता है, क्योंकि उसका जीवन छोटा होता है। लघु जीवन लेकर हो आता है।

फिर भी मंदिरालय के अंदर शराब से भरा घड़ा भी है और शराब से भरे प्याले भी हैं। अतः मनुष्य का जीवन भी पलभर का है। गम को भुलाकर जीवन का भरपूर आनंद लेना चाहिए।

5. जो मादकता के मारे हैं….. सो बात गयी। 

भावार्थ: जो शराब के नशे में रहता है, ये शराबी मादकता में बहकर शराब हो लूटा करते हैं। ये शराबी कच्चा पीने वाला है। उसकी ममता तो सिर्फ शराब के प्याले पर ही रहता है। पर जो सच्चा शराबी है, वह मधु के नशे से जला हुआ है, वह अपना गम भुलाकर शराब के नशे में पड़ा रहता है। वह न रोता है, न चिल्लाता है। वह तो नशे में सबकुछ भूल गया। उसी प्रकार मनुष्य को बीते हुए दुख को भुलाकर वर्तमान की चिंता करनी चाहिए। अपने दुखों को यादकर शोक मनाने से अच्छा है। कि जीवन के बाकी बचे समय को सुखपूर्वक बिताया जाए। जीवन का भरपूर आनंद उठाया जाए।

अभ्यासमाला

प्रश्न 1. सही विकल्प का चयन करो : 

(क) कवि हरिवंश राय बच्चन का जन्म हुआ था-

(अ) सन् 1905 में

(आ) सन् 1906 में

(इ) सन् 1907 में 

(ई) सन् 1908 में

उत्तर : (इ) सन् 1907 में।

(ख) कवि ने इस कविता में बीती बात को भुलाकर क्या करने का संदेष दिया है-

(अ) वर्तमान की चिंता

(आ) भविष्य की चिंता

(इ) अतीत की चिंता

(ई) सुख की चिंता

उत्तर : (अ) वर्तमान की चिंता । 

(ग) जो बीत गई’ शीर्षक कविता के रचयिता कौन है?

उत्तर: ‘जो बीत गई’ शीर्षक का रचयिता हरिवंश राय बच्चन जी हैं।

प्रश्न 2. संक्षेप में उत्तर दो 

(क) ‘जो बीत गयी’ कविता में कवि ने किसकी ओर ध्यान देने की बात कही हैं।

उत्तर: मनुष्य को अपने बीते हुए दुख को भूलाकर वर्तमान की चिंता करनी चाहिए। अपने दुखों को यादकर शोक मनाने से अच्छा है जीवन का भरपूर आनंद उठाना चाहिए।

(ख) ‘जो बीत गई’ शीर्षक कविता के कवि कौन हैं? 

उत्तर : ‘जो बीत गई’ शीर्षक कविता के कवि हरिवंश राय बच्चन है।

(ग) अपने प्रिय तारों के टूट जाने पर क्या अंबर कभी शोक मनाता है? 

उत्तर : अम्बर में कितने सितारे जगमगाते हैं। इन सितारों से ही अंबर चमकता है, पर इन्हीं तारों में कितने प्यारे तारे टूट गए। जो तारे अम्बर से टूट कर छूट जाते हैं, फिर कहाँ उनसे मिल पाते हैं, पर अम्बर उसके लिए कभी शोक नहीं मनाता क्योंकि यह प्रकृति का नियम है। बीते हुए कल को लेकर कोई शोक नहीं मनाता।

(घ) सच्चे मधु से जलनेवाला न रोता है और न चिल्लाता है। क्यों ? 

उत्तर : जो सच्चा शराबी है वह मधु के नशे से जला हुआ है। वह अपना गम भुलाकर शराब के नशे में पड़ा रहता है, वह न तो रोता है, न चिल्लाता है। वह तो नशे में सबकुछ भूल गया।

(ङ) हमें मधुवन और मदिरालय से क्या शिक्षा मिलती है ? 

उत्तर मधुवन और मदिरालय से हमें यही शिक्षा मिलती है उपवन जो रंग- बिरंगे पुष्पों से शोभा पाती है, पर वह फूल जब सूखकर मुरझा जाती है, उन सूखे फूलों के लिए उपवन कभी शोक नहीं मनाता। उसी प्रकार मदिरालय में जहाँ प्यालों से प्याले टकराते, पर उसी मदिरालय में जब शराबी का प्याला टूटा अर्थात शराब ने ही जिसका प्राण लिया पर मदिरालय ने कभी इसके लिए नहीं पछताया। एक गया तो दूसरा शराबी आ जाएगा। अतः मधुवन और मदिरालय से हमें यही शिक्षा मिलती है, जो जग से टूट कर बिछड़ जाता है, उसके लिए शोक या पश्चाताप करने से कोई वापस नहीं आता। जीवन के बाकी बचे समय को अपने बीते हुए दुख को भुलाकर वर्तमान की चिंता करनी चाहिए।

(च) कवि ने ‘अम्बर के आनन’ को देखने की बात क्यों की है ?  

उत्तर: कवि ने अम्बर के आनन को देखने की बात इसलिए कही क्योंकि नीले आसमान में सितारों की जगमगाती चादर फैली हुई है। पर इन्हीं सितारों से कोई प्रिय तारा टूट कर अम्बर से बिछुड़ गया, पर क्या वह तारा फिर अम्बर में जा पाता है। न अम्बर उसे कभी मिल पाता है। अपने प्रिय तारे के टूट कर छूट जाने पर अम्बर ने कभी शोक नहीं मनाया। एक बार जिसका साथ छूटा वह कभी वापस नहीं आता। अतः अतीत को लेकर परेशान होने के वजह वर्तमान को संवारना चाहिए। क्योंकि जीवन क्षणिक है। इस पल को अतीत से जोड़कर पछताना नहीं चाहिए, जो बिछड़ जाते हैं। उनके लिए शोक नहीं करना चाहिए।

(छ) प्यालों के टूट जाने पर मदिरालय क्यों नहीं पश्चाताप करता। 

उत्तर प्यालों के टूट जाने पर मदिरालय इसलिए पश्चाताप नहीं करता, क्योंकि ये प्याले तो मिट्टी के होते हैं, जो क्षणिक है उसका टूटना निश्चित है। अर्थात शराब धीरे-धीरे शराबी को मृत्यु की ओर ले जाता है। शराबी सब कुछ छोड़ सकता है, पर शराब नहीं। अतः मदिरालय में ऐसे शराबी आते ही रहते हैं और शराब में डूबकर टूट भी जाते हैं। मदिरालय इसके लिए कभी पश्चाताप नहीं करता। उसके लिए तो एक शराबी आता है और चला जाता है, तो फिर दूसरा शराबी आएगा।

(ज) मदिरालय हमें क्या शिक्षा देता है ?

उत्तर: मदिरालय से हमें यहीं शिक्षा मिलती है कि जो जग से टूट कर बिछड़ जाता है उसके लिए शोक या पश्चाताप करने से कोई वापस नहीं आता। जिस प्रकार मदिरालय में जहाँ प्यालों से प्याले टकराते पर उसी मदिरालय में जब शराबी का प्याला टूटा अर्थात शराब ने ही जिसका प्राण लिया पर मदिरालय ने कभी इसके लिए नहीं पछताया।

(झ) मधु के घट और प्यालों से किन लोगों का लगाव होता है। 

उत्तर : मधु के घट और प्यालों से शराबियों का लगाव होता है। कोई शराब पीता है अपना नशा उतारने के लिए तो कहीं शराब शराबी को ले डूबता है, जो कच्चा

शराबी होता है, उसकी ममता तो शराब के प्यालों पर रहता है और जो सच्चा शराबी है वह अपना गम भुलाने के लिए शराब पीता है। 

(ञ) “वह कच्चा पीनेवाला है।” कवि यहाँ क्या कहना चाहते है?

उत्तर : कवि यहाँ यही कहना चाहते हैं कि जो शराब के नशे में रहता है, ये शराबी मादकता में बहकर शराब ही लूटा करते हैं, ये शराबी कच्चा पीने वाला है।उसकी ममता तो सर्फि शराब के प्याले पर ही रहता है।

(ट) ‘जो मादकता के मारे है, वे मधु लूटा ही करते हैं- इससे कवि क्या कहना चाहते हैं? 

उत्तर : जो शराब के नशे में रहता है, ये शराबी मादकता में बहकर शराब ही लूटा करता है। इनके लिए जीवन का आनंद ही शराब है। शराब उनकी कमजोरी बन जाती है, ऐसे कच्चे शराबी शराब के प्यालों से ममता है। अर्थात् उसकी ममता तो सिर्फ शराब के प्याले पर रहता है।

(ठ) उक्त कविता में मानव जीवन की तुलना किन-किन चीजों से की गई है ? सोदाहरण उत्तर दो। 

उत्तर : उक्त कविता में मानव जीवन की तुलना अम्बर से टूटे तारों के साथ, उपवन की मुरझा गयी फूलों के साथ, मदिरालय के टूटे प्यालों से की गयी है। मानव जीवन ईश्वरी देन है। जीवन में उतार-चढ़ाव आता रहता है। पर अपने अतीत की परछाई से परेशान न होकर वर्तमान को उज्ज्वल करना चाहिए। जिस प्रकार अम्बर टूटे तारों के लिए अनुताप नहीं करता। वह तारा उसके लिए अतीत है, मुरझाए फूलों के लिए उपवान शोर नहीं मचाता कौन टूटा कौन गिरा इसके लिए मदिरालय ने कभी पश्चाताप नहीं किया। अतः जीवन के बाकी बचे समय को सुखपूर्वक बीताना चाहिए। 

(ड) इस कविता से हमें क्या शिक्षा मिलती है?  

अथवा, 

‘जो बीत गई’ कविता के सन्देश को स्पष्ट करो। 

उत्तर : इस कविता से यहाँ शिक्षा मिलती है कि अपने प्रिय के खोने से उनके चले जाने से जीवन को उनके गम में ही डूबो देना नहीं चाहिए। अम्बर, उपवन और

मदिरालय से हमें शिक्षा मिलती है, ये कभी अपने से बिछड़ने वालों के लिए शोक नहीं मनाते क्योंकि यही प्रकृति का नियम है, जो चला जाता है वह कभी लौटकर नहीं आता। अतः अपने बीते हुए दुख को लेकर बाकी जिंदगी बर्बाद नहीं करना चाहिए। जीवन का भरपूर आनंद उठाना चाहिए।

Sl. No.Contents
Chapter 1नींव की ईंट
Chapter 2छोटा जादूगर
Chapter 3नीलकंठ
Chapter 4भोलाराम का जीव
Chapter 5सड़क की बात
Chapter 6चिट्ठियों की अनूठी दुनिया
Chapter 7साखी
Chapter 8पद-त्रय
Chapter 9जो बीत गयी
Chapter 10कलम और तलवार
Chapter 11कायर मत बन
Chapter 12मृत्तिका

प्रश्न 3. “मदिरालय का आंगन देखो।” वहाँ क्या देखने को मिलता है?

उत्तर: कवि कहते हैं मदिरालय का आँगन जहाँ शराबी अपना तन-मन दे देता है शराब के लिए। पर उसी मदिरालय में जब वह शराब के कारण टूट कर बिखर जाता है, तब मदिरालय पछताता नहीं। क्योंकि इस आंगन में कितने शराब से भरे प्याले हिल जाते हैं। थोड़ी सी चोट लगते ही गिरकर मिट्टी में मिल जाते हैं। इन टूटे प्यालों पर मदिरालय कभी पछताया नहीं।

प्रश्न 4. मदिरालय कभी भी क्यों नहीं पछताता है, स्पष्ट करो।  

उत्तर: मदिरालय का आंगन जहा मधु के घट है, मधुप्याले हैं। यहां कितने प्याले हिल जाते हैं, अर्थात थोड़ी सी चोट लगते ही गिर कर मिट्टी में मिल जाते हैं। ये कोमल मिट्टी के बने होते हैं। क्योंकि उसका जीवन ही छोटा होता है। पर एक बार जो गिरते हैं वे कब उठ पाते हैं। इन टूटे प्यालों पर मदिरालय कब पछताता है। एक प्याला टूटता है तो दूसरा आ जाता है। यही प्रकृति का नियम है। एक बार जो जीवन से छूट जाता है वह कभी वापस नहीं आता।

प्रश्न 5. अतीत (जो बीत गयी) के प्रति कवि की धारणा को स्पष्ट करो। 

उत्तर: कवि कहते हैं मानव जीवन ईश्वरीय देन है। जीवन में उतार-चढ़ाव आता रहता है। पर अपने अतीत की परछाई से परेशान न होकर वर्तमान को उज्जवल करना चाहिए। एक बार जिसका साथ छूटा वह कभी वापस नहीं आता, क्योंकि जीवन क्षणिक है। इस पल को अतीत से जोड़कर पछताना नहीं चाहिए। जो बिछड़ जाते हैं उसके लिए शोक नहीं करना चाहिए। जीवन के बाकी बचे समय को सुखपूर्वक बिताना चाहिए। जीवन का भरपूर आनंद उठाना चाहिए

प्रश्न 6. ‘जो बीत गयी’ कविता का भावार्थ लिखो।

उत्तर: ‘जो बीत गयी’ कविता हरिवंश राय बच्चन द्वारा रचित बड़ी ही रोचक और शिक्षाप्रद है। जिस प्रकार अपने टूटे तारों पर अंबर शोक नहीं मनाता अथवा अपने प्रिय फूलों के सूखने अथवा मुरझा जाने पर मधुवन कभी शोर नहीं मचाता। उसी प्रकार मनुष्य को अपने बीते हुए दुख को भुलाकर वर्तमान की चिंता करनी चाहिए। अपने दुखों को यादकर शोक मनाने से अच्छा है जीवन के बाकी बचे समय को सुखपूर्वक बिताया जाए। कवि यहां मानव जीवन के साथ टूटे हुए तारों के साथ तुलना की है। जीवन में भी ऐसा ही प्रिय तारा होता है जो उसे बहुत प्यारा था पर जब वह तारा डूब जाता है। अर्थात खो जाता है उसके लिए शोक मनाने से क्या वह वापस आ सकता है। जो टूट कर बिखर जाते हैं वह कभी वापस नहीं आते। जिस प्रकार मंदिरालय अपने टूटे प्यालों पर शोक नहीं करता क्योंकि उसका जीवन ही छोटा होता है। उसी प्रकार मनुष्य का जीवन भी पलभर का है। अतः अपने दुखों को यादकर शोक मनाने से अच्छा है कि जीवन के बाकी बचे समय को सुखपूर्वक बिताना चाहिए। जीवन का भरपूर आनंद उठाना चाहिए।

प्रश्न 7. हम मधुवन से क्या सीख सकते हैं? 

उत्तर : ‘जो बीत गयी’ कविता हरिवंश राय बच्चन द्वारा रचित बड़ी ही रोचक और शिक्षाप्रद है। मधुवन से हमें शिक्षा मिलती है, जिस प्रकार अपने प्रिय फूलों के सूखने अथवा मुरझा जाने पर मधुवन कभी शोर नहीं मचाता। उपवन जो रंग-बिरंगी पुष्पों से शोभा पाती है पर वहीं फूल जब सूखकर मुरझा जाती है कितनी लताएं सूखकर मुरझा गई पर जो मुरझा गई फिर कहा खिल पायी। पर अपने प्रिय फूलों के सूखने अथवा मुरझा जाने पर मुधवन कभी शोर नहीं मचाता। जो जग से टूट कर बिछड़ जाता है। उसके शोर या पश्चाताप करने से कोई वापस नहीं आता। अपने अतीत को याद करने से अच्छा है वर्तमान की चिंता करों, मनुष्य का जीवन भी पलभर का है। गम को भुलाकर जीवन का भरपूर आनंद लेना चाहिए।

प्रश्न 8. सप्रसंग व्याख्या करे 

(क) जीवन में एक सितारा था, 

माना वह बेहद प्यारा था,

वह डूब गया तो डूब गया, 

अम्बर के आनन को देखो।

उत्तर : संदर्भ प्रस्तुत पंक्तियाँ हरिवंश राय बच्चन द्वारा रचित ‘जो बीत गयी’ नामक पाठ से लिया गया है। 

प्रसंग : कवि मनुष्य को अपने बीते हुए दुख को भुलाकर वर्तमान की चिंता करने को कहा है।

व्याख्या : कवि ने यहाँ मानव जीवन की तुलना टूटे हुए तारों के साथ की है। जीवन में भी ऐसा ही एक प्रिय तारा था, जो उसे बहुत प्रिय था पर वह तारा जब डूब गया फिर वापस नहीं आया। उसके लिए शोक मनाने से क्या वह अपने प्रिय को वापस पा सकता है, जिस प्रकार अम्बर अपने टूटे सितारों के लिए कभी शोक नहीं करता। वह सितारा भी उसके लिए प्रिय था, पर जो छूट गया वह वापस लौटकर नहीं आता।

(ख) मृदु मिट्टी के हैं बने हुए,

मधु घट फूटा ही करते हैं,

लघु जीवन लेकर आए हैं,

प्याले फूटा ही करते हैं। 

उत्तर : संदर्भ : प्रस्तुत पंक्तियाँ हरिवंश राय बच्चन द्वारा रचित ‘जो बीत गयी’ नामक पाठ से लिया गया है।

प्रसंग : कवि ने मनुष्य के जीवन की तुलना कोमल मिट्टी के घड़े के साथ तुलना की है, जो थोड़ी-सी चोट लगते ही टूट कर बिखर जाता है। और यह मधु घट भी मिट्टी के बने होते हैं, जो थोड़ी सी चोट लगते ही टूट जाता है क्योंकि उसका जीवन छोटा होता है। लघु जीवन लेकर ही आता है उसी प्रकार मनुष्य का जीवन भी पलभर का है, अपने दुखों को याद कर शोक मनाने से अच्छा है कि बाकी बच्चे समय को सुखपूर्वक बिताया जाए।

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