SEBA Class 10 Hindi (Elective) Solution| Chapter-3| भोलाराम का जीव

SEBA Class 10 Hindi (Elective) Solution| Chapter-3| भोलाराम का जीव सूची में प्रत्येक अध्याय का उत्तर प्रदान किया गया है ताकि आप आसानी से विभिन्न अध्याय एनसीईआरटी समाधान कक्षा 10 आलाक भाग-2 में खुल सकें और एक की आवश्यकता का चयन कर सकें। इसके अलावा आप एनसीईआरटी (CBSE) पुस्तक दिशानिर्देशों के अनुसार विशेषज्ञ शिक्षकों द्वारा इस खंड में NCERT पुस्तक ऑनलाइन पढ़ सकते हैं। ये समाधान NCERT हिंदी (MIL) समाधान का हिस्सा हैं। यहां हमने कक्षा 10 NCERT आलाक भाग -2 पाठ्य पुस्तक समाधान आलाक भाग -2 के SEBA Class 10 Hindi (Elective) Solution| Chapter-3| भोलाराम का जीव लिए दिए हैं आप यहां इनका अभ्यास कर सकते हैं।

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SEBA Class 10 Hindi (Elective) Solution| Chapter-3| भोलाराम का जीव

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पाठ 4

भोलाराम का जीव

रकर परसा (1922-1995 )

अभ्यासमाला

प्रश्न 1. सही विकल्प का चयन करो 

(क) भोलाम कह रहता था ?

(अ) जबलपुर शहर में

(आ) धमालपुर शहर में 

(इ) लालपुर शहर में 

(ई) दानापुर शहर में

उत्तर: जबलपुर शहर में 

(ख) भोलाराम के जीव ने कितने दिन पहले देह त्यागी थी ?

(अ) तीन दिन पहले

(आ) चार दिन पहले 

(इ) पाँच दिन पहले 

ई) सात दिन पहले

उत्तर: पाँच दिन पहले

(ग) नारद भोलाराम का घर पहचान गए –

(अ) माँ-बेटी के सम्मिलित क्रंदन सुनकर (आ) उसका टूटा-फूटा मकान देखकर 

(इ) घर के बगल में नाले को देखकर

(ई) लोगों से घर का पता पूछकर

उत्तर: माँ-बेटी के सम्मिलित क्रंदन सुनकर।

(घ) धर्मराज के अनुसार नर्क में इमारतें बनाकर रहने वालों में कौन शामिल हैं? 

(अ) ठेकेदार 

(आ) इंजीनियर 

(इ) ओवरसीयर 

(ई) उपर्युक्त सभी 

उत्तर : ठेकेदार।

(ङ) बड़े साहब ने नारद को भोलाराम के दरख्वास्तों पर वजन रखने की सलाह दी यहाँ ‘वजन’ का अर्थ है- 

(अ) पेपर वेट 

(आ) वीणा 

(इं) रिश्वत 

(ई) मिठाई का डब्बा

उत्तर : रिश्वत

2. पूर्ण वाक्य में उत्तर दो 

(क) ‘भोलाराम का जीव’ शीर्षक पाठ के लेखक कौन है ?

उत्तर : ‘भोलाराम का जीव’ शीर्षक पाठ के लेखक हरिशंकर परसाई जी है।

(ख) नारद के आग्रह के पश्चात भी भोलाराम क्यों सवर्ग जाना नहीं चाहता है? 

उत्तर : नारद के आग्रह के पश्चात भी भोलाराम स्वर्ग जाना नहीं चाहता, कारण पेंशन की दरख्वास्तों में ही उसका मन अटक गया है। अपनी दरख्वास्तें छोड़कर जाना नहीं चाहता।

(ग) भोलाराम का घर किस शहर में था ? 

उत्तर : भोलाराम का घर जबलपुर शहर में था । 

(घ) भोलाराम को सेवानिवृत्त हुए कितने वर्ष हुए थे ? 

उत्तर : भोलाराम को सेवानिवृत्त हुए पाँच साल हो गया था। 

(ङ) भोलाराम की पत्नी ने भोलाराम को किस बीमारी का शिकार बताया ?

 उत्तर : गरीबी की बीमारी का शिकार बताया। 

(च) भोलाराम ने मकान मालिक को कितने साल से किराया नहीं दिया था ?

उत्तर: भोलाराम ने मकान मालिक को एक साल से किराया नहीं दिया था। 

(छ), भोलाराम के परिवार में कितने सदस्य थे ?

 उत्तर : भोलाराम के परिवार में उसकी स्त्री, दो लड़के और एक लड़की थी।

(ज) “आप हैं वैरागी, दफ्परों के रीति-रिवाज नहीं जानते।” यहाँ किस रीति- रिवाज की चर्चा की गई है ? 

उत्तर: बड़े साहब ने बोला आप है वैरागी, दफ्तरों के रीति-रिवाज नहीं जानते। असल में भोलाराम ने गलती की। यह भी एक मंदिर है, यहाँ भी दान-पुण्य करना

पड़ता है, भेंट चढ़ानी पड़ती है। रिश्वत के बिना कोई काम नहीं होता।

(झ) बड़े साहब ने नारद से भोलाराम की पेंशन मंजूर करने के लिए बदले क्या माँगा? 

उत्तर : बड़े साहब ने नारद से भोलाराम की पेंशन मंजूर करने के बदले उनसे उनकी वीणा माँगा था। 

(ञ) रेलवे विभाग के भ्रष्टाचार के संबंध में चित्रगुप्त ने क्या कहा है ?

उत्तर: चित्रगुप्त ने रेलवे विभाग के भ्रष्टाचार के संबंध में कहा कि लोग दोस्तों को फल भेजते हैं और वे रास्तें में ही रेलवेवाले उड़ा लेते हैं। हौजरी के पार्सलों के मौजे रेलवे अफसर पहनते हैं।

(ट) धर्मराज का क्या काम है ? 

उत्तर: धर्मराज लाखों वर्षों से असंख्य आदमियों को कर्म और सिफारिश के आधार पर स्वर्ग या नर्क में निवास स्थान अलॉट करते है।

प्रश्न 3. संक्षेप में उत्तर दो 

(क) ‘पर ऐसा कभी नहीं हुआ था।’- यहाँ किस घटना का संकेत मिलता है ? 

अथवा, 

यमदूत के लिए भोलाराम संबंधी परेशानी क्या थी ? 

 उत्तर: यहा धर्मराज का कथन है। कारण भोलाराम के जीव ने पाँच दिन पहले देह त्यागी और यमदूत के साथ इस लोक के लिए रवाना भी हुआ पर बीच में ही यमदूत के चंगुल से छूटकर न जाने कहाँ गायब हो गया, जो आज तक कभी नहीं हुआ था। धर्मराज लाखों वर्षों से असंख्य आदमियों को कर्म और सिफारिश के आधार पर स्वर्ग या नर्क में निवास स्थान अलॉट करते आ रहे थे, पर ऐसा कभी नहीं हुआ कि यमदूत मनुष्य का जीव स्वर्ग लोक में लाते समय कहीं गायब हो गया हो। इन पाँच दिनों में सारा ब्रह्मांड छान डाला पर उसका कहीं पता नहीं चला।

(ख) यमदूत ने भोलाराम के जीव के लापता होने के बारे में क्या बताया 

उत्तर : यमदूत ने भोलाराम के जीव के लापता होने के बारे में यह बताया- दयानिधान! मैं कैसे बताऊँ कि क्या हो गया। आज तक मैंने धोखा नहीं खाया था, पर इस बार भोलाराम का जीव मुझे चकमा दे गया। पाँच दिन पहले जब जीव ने भोलाराम की देह त्यागी, तभी मैंने उसे पकड़ा और इस लोक की यात्रा आरंभ की। नगर के बाहर ज्यों ही मैं उसे लेकर एक तीव्र वायु तरंग पर सवार हुआ, त्यों ही वह मेरे चंगुल से छूटकर न जाने कहाँ गायब हो गया। इन पाँच दिनों में मैंने सारा ब्रह्मांड छान डाला, पर उसका कहीं पता नहीं चला।

(ग) धर्मराज ने नर्क में किन-किन लोगों के आने की पुष्टि की ? उनलोगों नेक्या-क्या अनियमितताएँ की थीं? 

उत्तर: धर्मराज ने नर्क में गुणी कारीगर, ठेकेदार, बड़े-बड़े इंजीनियर और

ओवरसीयर आदि लोगों के आने की पुष्टि की। उन लोगों ने बहुत सारी अनियमितताएँ की थी। जैसे ठेकेदार है, जिन्होंने पूरे पैसे लेकर रद्दी इमारतें बनाई। बड़े-बड़े इंजीनियर भी आ गए हैं, जिन्होंने ठेकेदारों से मिलकर भारत की पंचवर्षीय योजनाओं का पैसा खाया। दूसरी ओर ओवरसीयर हैं, जिन्होंने उन मजदूरों की हाजिरी भरकर पैसा हड़पा, जो कभी काम पर गए ही नहीं।

(घ) भोलाराम की पारिवारिक स्थिति पर प्रकाश डालो। 

उत्तर : भोलाराम की पारिवारिक स्थिति बहुत दयनीय थी। रिटायर के बाद पाँच साल से पेंशन के लिए कार्यालय का चक्कर काटता रहा, पर पेंशन नहीं मिली। साधारण मुहल्ले में नाले के किनारे एक डेढ़ कमरे के टूटे-फूटे मकाने में अपने परिवार के साथ रहता था। घर में उसकी पत्नी के अलावा दो लड़के और एक लड़की थी। एक साल से मकान का किराया भी नहीं दे पाया। उपार्जन का और कोई रास्ता नहीं था। इन पाँच सालों में पत्नी के सारे गहने बिक गए, वर्तन बिके। अब घर में कुछ बचा ही नहीं।

(ङ) भोलाराम ने दरख्वास्तें तो भेजी थीं, पर उन पर वजन नहीं रखा था, इसलिए कहीं उड़ गई होगी। दफ्तर के बाबू के ऐसा कहने का क्या आशय था। 

उत्तर : नादर ने जब सरकारी दफ्तर में भोलाराम के केस के बारे में बात की और

कहा पाँच साल पहले सेवानिवृत्त के बाद भी आज तक उसे पेंशन नहीं मिली। तब

दफ्तर के बाबू ने कहा कि भोलारान ने दरख्वास्तें तो भेजी थी, पर उन पर वजन नहीं रखा था इसलिए कहीं ठंड़ गई होगी। पेंशन का केस बीसों दफ्तरों में जाता है, देर लग जाती है। हजारों बार एक ही बात को हजार जगह लिखना पड़ता है। यह सरकारी पैसे का मामला है। भोलाराम ने कई दरख्वास्तें तो भेजी थी, लेकिन काम हासिल कराने के लिए उन पर वजन अर्थात रिश्वत भी चाहिए। 

(च) चपरासी ने नारद को क्या सलाह दी ?

 उत्तर: भोलाराम के जीव के लापता हो जाने के कारण धर्मराज परेशान थे तब नारद पृथ्वी पर आकर सरकारी दफ्तर में भोलाराम के केस के बारे में बातें की। तब एक बाबू ने कहा- भोलाराम ने दरख्वास्तें तो भेजी थी, पर उन पर वजन नहीं रखा था इसलिए कहीं उड़ गई होगी। नारद पच्चीस-तीस बाबुओं और अफसरों के पास घूम आए, तब एक उपरासी ने कहा- महाराज, आप क्यों इस झंझट में पड़ गए। आप अगर सालभर भी यहाँ चक्कर लगाते रहे तो भी काम नहीं होगा। आप तो सीधे बड़े साहब से मिलिए, उन्हें खुश कर लिया तो अभी काम हो जाएगा। 

(छ) बड़े साहब ने नारद को भोलाराम के पेंशन केस के बारे में क्या बताया ?

उत्तर: चपरासी के कहने पर नारद बड़े साहब के कमरे में पहुँचे और भोलाराम के पेंशन के केस के बारे में पूछा तो बड़े साहब बोले- आप वैरागी हैं। दफ्तरों के रीति-रिवाज नहीं जानते। असल में भोलाराम ने गलती की यह भी एक मंदिर है। यहाँ भी दान-पुण्य करना पड़ता है; भेंट चढ़ानी पड़ती है। सरकारी पैसे का मामला है। पेंशन का केस बीसों दफ्तरों में जाता है। देर लग जाती है। आप भोलाराम के आत्मीय मालूम होते हैं। भोलाराम की दरख्वास्तें उड़ रही है। इन पर वजन (रिश्वत) रखिए। काम हो जाएगा।

(ज) ‘भोलाराम का जीव’ नामक व्यंग्यात्मक कहानी समाज में फैले भ्रष्टाचार एवं रिश्वतखोरी का पर्दाफाश करता है। कहानी के आधार पर पुष्टि करो। 

अथवा, 

‘भोलाराम का जीव’ शीर्षक कहानी का उद्देश्य क्या है? 

उत्तर “भोलाराम का जीव’ नामक व्यंग्यात्मक कहानी में हरिशंकर परसाई ने पौराणिक युग के परिप्रेक्ष्य में आधुनिक समाज व्यवस्था में फैले भ्रष्टाचार को मार्मिकता के साथ पेश किया है। समाज में फैले भ्रष्टाचार एवं रिश्वतखोरी का पर्दाफाश किया है। यह भ्रष्टाचार लगभग हर सरकारी विभाग में व्याप्त है। पाँच साल पहले सेवानिवृत्त भोलाराम की परेशानी में आम जनता की परेशानी छिपी हुई हैं। पाँच वर्षों तक पेंशन के लिए कार्यालय का चक्कर लगाने वाले भोलाराम के परिवार की आर्थिक दयनीयता को इस कहानी में दिखाया गया है, जब नारद ने भोलाराम के पेंशन के बारे में दफ्तर के बड़े साहब से पूछा तो साहब बोले- भोलाराम ने गलती की है। भई यह भी एक मंदिर है. यहाँ भी दान-पुण्य करना पड़ता है भेंट चढ़ानी पड़ती है उसकी दरख्वास्ते उड़ रही है, उन पर वजन रखिए। इससे साफ पता चलता है कि आज समाज में किस प्रकार भ्रष्टाचार फैली हुई है। भोलाराम ने रिश्वत नहीं दी। इसलिए उसको पेंशन नहीं मिली। कहानी के अंत में नारद के सामने फाइल के पन्नों से भोलाराम की आत्मा की आवाज का आना परिस्थिति की विडम्बना को व्यंगात्मक बना देती है। 

प्रश्न 4. ” आप साधु हैं, आपको दुनियादारी समझ में नहीं आती।” यहां ‘दुनियादारी’ का प्रसंग क्यों उठाया गया है? 

उत्तरः ‘आप साधु हैं आपको दुनियादारी समझ में नहीं आती।’ यहां दुनियादारी का प्रसंग इसलिए उठाया गया है, कारण आज भ्रष्टाचार लगभग हर सरकारी विभाग में व्याप्त है तथा इससे समाज का हर वर्ग प्रभावित है। रिश्वत के बिना कोई काम नहीं होता। पांच वर्षों तक पेंशन के लिए कार्यालय का चक्कर लगाने वाला भोलाराम को मृत्यु के बाद भी पेंशन नहीं मिली कारण वह रिश्वत नहीं दिया था। इस लिए दफ्तर के बाबू ने कहा था आप साधु है, आपको दुनियादारी समझ में नहीं आती। दरख्वास्तें पेपरवेट से नहीं दवतो भोलाराम ने दरख्वास्तें तो भेजी थी पर उन पर वजन नहीं रखा था, इसलिए कहीं उड़ गई होगी।

Sl. No.Contents
Chapter 1नींव की ईंट
Chapter 2छोटा जादूगर
Chapter 3नीलकंठ
Chapter 4भोलाराम का जीव
Chapter 5सड़क की बात
Chapter 6चिट्ठियों की अनूठी दुनिया
Chapter 7साखी
Chapter 8पद-त्रय
Chapter 9जो बीत गयी
Chapter 10कलम और तलवार
Chapter 11कायर मत बन
Chapter 12मृत्तिका

प्रश्न 5. आशय स्पष्ट करो 

(क) दरख्वास्तें पेपरवेट से नहीं दबती ।

उत्तर लेखक ने इस कहानी में आधुनिक समाज व्यवस्था में फैले भ्रष्टाचार को : पेश किया है। यह भ्रष्टाचार लगभग हर सरकारी विभाग में व्याप्त है। रिश्वत के बिना कोई काम नहीं होता। दरख्वास्तों पर पेपरवेट रखा जाता है ताकि वह उड़ न जाए, किंतु यहां रिश्वत की बात कही गई है। आजकल भ्रष्टाचार का युग है। आजकल दरख्वास्तें पेपरवेट से नहीं दबती बल्कि रिश्वत से दबती है। और भोलाराम ने गलती की थी, उसने दरख्वास्तें तो दी है, पर उसने रिश्वत नहीं दी थी और आजतक उसे पेंशन नहीं मिली।

(ख) यह भी एक मंदिर है। यहाँ भी दान-पुण्य करना पड़ता है। 

उत्तर: आज कल भ्रष्टाचार लगभग हर सरकारी विभाग में व्याप्त है तथा इससे समाज का हर वर्ग प्रभावित है। यहाँ कहानीकार हरिशंकर परसाई जी ने व्यंग्यात्मक रूप से यह दिखाया है कि जिस प्रकार मंदिर में भगवान को संतुष्ट रखने के लिए पूजा की जाती है और दान-पुण्य करना पड़ता है। भेंट चढ़ानी पड़ती है, उसी तरह आज ऑफिस एवं कचहरी में भी कुछ काम हासिल कराने के लिए अफसर को संतुष्ट रखना पड़ता है। उन्हें संतुष्ट रखने के लिए रिश्वत आदि देना पड़ता है। तभी कुछ काम होता है।

1. नीचे दिए गए समासो के भेद लिखकर उन्हे वाक्यों में प्रयोग करो:

(i) खानाना -पी: खाना और पीना―समाहार द्वंद्व ।

उत्तर : सेहत ठिक रखने के लिए अच्छे से खाना-पीना जरुरी है।

(ii) माँ-बाप : मा और बाप―इतरेतर द्वंद्व

उत्तर : सन्तान की अपने माँ बाप कि सेवा करनी चाहिये। 

(iii) घर-द्वार : घर और द्वार―समाहार द्वंद्व

उत्तर : इन्सान का घर द्वार देखके उस पर विश्वास करना चाहिये।—

(iv) रूपया-पैसा : रूपया और पैसा―इतरेतर द्वंद्व

उत्तर : आज के युग में काम हासिल करने के लिए रुपया-पैसा देना पड़ता है। 

(v) भात-डाल : भात और डाल― समाहार द्वंद्व

 उत्तर : इन्सान को जीने के लिए भात-डाल कि ही आवश्यकता है। 

(vi) सीता-राम : सीता और राम―शतरेतर द्वंद्व

उत्तर : दुलहा-दुलहन को सीता-राम कि जोड़ी लग रही है।

(vii) नाक-कान : नाक और कान―समाहार द्वंद्व ।

उत्तर : समाज मे रहने के लिये नाक-कान खुला रखना चाहिये ।

(viii) थोरा-बहुत : थोड़ा अथवा बहुत―वैकल्पिक द्वंद्व

उत्तर : भुकम्प के वजह से थोड़ा बहुत नुकसान हुआ है। 

(xi) ठंडा-गरम : ठंडा या गरम―वैकल्पिक द्वंद्व |

उत्तर : बच्चा ठंडा-गरम में खेलने के लिए बाहर नहीं जाता है।

 (x) उत्थान-पतन : उत्थान या पतन ―वैकल्पिक द्वंद्व ।

उत्तर : हर इन्सान के जीवन मे उत्थान-पतन होता है।

(xi) आकाश-पाताल : आकाश या पाताल―वैकल्पिक द्वंद्व । 

उत्तर : राम और हरि में आकाश-पाताल का अंतर है। 

प्रश्न 2. निम्नलिखित शब्दों के भाववाचक संज्ञा बनाओ 

(i) गरीब―गरीबी। 

 (ii) असमर्थ―असमर्थक। 

(iii) खराब―खराबी । 

(iv) त्यागी―त्याग । 

 (v) तलाश―तलाशी। 

(vi) बहुत―बहुतो। 

(vii) गृहस्थ―गृहस्थी ।

(viii) कारीगर―कारीगरी।

 (ix) अभ्यस्थ―अभ्यास। 

(x) मूर्ख―मूर्खामी। 

(xi) परेशान―परेशानी। 

(xii) नेता―नेतृत्व।

(xiii) चिल्लाना―चिल्लाहट। 

 (xiv) वास्तविक―वास्तविकता। 

(xv) बीमार―बीमारी। 

(xvi) उँचा―उँच्चता ।

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