SEBA Class 10 Hindi (Elective) Solution| Chapter-6| चिट्ठियों की अनूठी दुनिया

SEBA Class 10 Hindi (Elective) Solution| Chapter-6| चिट्ठियों की अनूठी दुनिया सूची में प्रत्येक अध्याय का उत्तर प्रदान किया गया है ताकि आप आसानी से विभिन्न अध्याय एनसीईआरटी समाधान कक्षा 10 आलाक भाग-2 में खुल सकें और एक की आवश्यकता का चयन कर सकें। इसके अलावा आप एनसीईआरटी (CBSE) पुस्तक दिशानिर्देशों के अनुसार विशेषज्ञ शिक्षकों द्वारा इस खंड में NCERT पुस्तक ऑनलाइन पढ़ सकते हैं। ये समाधान NCERT हिंदी (MIL) समाधान का हिस्सा हैं। यहां हमने कक्षा 10 NCERT आलाक भाग -2 पाठ्य पुस्तक समाधान आलाक भाग -2 के SEBA Class 10 Hindi (Elective) Solution| Chapter-6| चिट्ठियों की अनूठी दुनिया लिए दिए हैं आप यहां इनका अभ्यास कर सकते हैं।

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SEBA Class 10 Hindi (Elective) Solution| Chapter-6| चिट्ठियों की अनूठी दुनिया

SEBA Class 10 Hindi (Elective) Solution| Chapter-6| चिट्ठियों की अनूठी दुनिया ये उत्तर संबंधित विषयों के अनुभवी प्रोफेसरों द्वारा सावधानीपूर्वक तैयार किए जाते हैं। उनका उद्देश्य छात्रों को विषय की उचित समझ में मदद करना और उनके कौशल और अभिव्यक्ति की कला में सुधार करना है। यदि ये उत्तर उन उद्देश्यों को पूरा करते हैं जिनके साथ वे तैयार किए गए हैं, तो हम अपने प्रयास को पर्याप्त रूप से पुरस्कृत मानेंगे। इन उत्तरों में और सुधार के लिए किसी भी सुझाव का हमेशा स्वागत है।

पाठ 6

श्री अरविंद कुमार सिंह

अभ्यासमाला

प्रश्न 1. कन्नड़ भाषा में पत्र को क्या कहा जाता है? 

उत्तर : कन्नड़ भाषा में पत्र को कागद कहा जाता है। 

प्रश्न 2. आज चिट्ठियों की तेजी को किसने रोका है ? 

उत्तर : फैक्स, ई-मेल, टेलीफोन तथा मोबाइल ने चिट्ठियों की तेजी को रोका है।

प्रश्न 3. सही विकल्प का चयन करो :

(क) पत्र को उर्दू में क्या कहा जाता है-

(अ) खत 

(आ) चिट्ठी

(इ) कागद

(ई) लेख

उत्तर : खत

(ख) पत्र लेखन है

(अ) एक तरीका 

(इ) एक कला

(आ) एक व्यवस्था 

(ई) एक रचना

उत्तर: एक कला

(ग) विश्व डाक संघ ने पत्र लेखन की प्रतियोगिता शुरू की-

(अ) सन् 1970 से 

(आ) सन् 1971 से 

(इ) सन् 1972 से

(ई) सन् 1973 से

उत्तर: सन् 1972 से

(घ) महात्मा गांधी और रवीन्द्रनाथ टैगोर के बीच सन १९९५ से १९४९ के मध्य हुए पत्राचार का संग्रह किस नाम से प्रकाशित हुआ है? 

उत्तर: ‘महात्मा कवि’ के नाम से

(ङ) महात्मा गाँधी के पास दुनिया भर से तमाम पत्र किस पते पर आते थे-

(अ) मोहनदास करमचंद गाँधी- भारत (आ) महात्मा गाँधी-भारत

(इ) बापू जी इंडिया

(ई) महात्मा गांधी- इंडिया

उत्तर : महात्मा गाँधी- इंडिया 

(च) तमाम सरकारी विभागों की तुलना में सबसे ज्यादा गुडविल किसकी है-

(अ) रेल विभाग

(आ) डाक विभाग

(इ) शिक्षा विभाग

(ई) गृह विभाग

उत्तर : डाक विभाग

(छ) गाँवो या गरीब बस्तियों में चिट्ठी या मनीआर्डर लेकर पहुँचने वाला डाकिया किस रूप में देखा जाता है?

उतर: गाँवों या गरीब बस्तियों मे चिट्ठीं या मनीआर्डर लेकर पहुँचने वाला डाकिया देवदूत के रूप में देखा जाता है।

प्रश्न 4. संक्षिप्त उत्तर दो (लगभग 25 शब्दों में) 

(क) पत्र ऐसा क्या काम कर सकता है, जो संचार का आधुनिक साधन भी नहीं कर सकता ? 

उत्तर : संचार के तमाम उन्नत साधनों के बाद भी पत्र की हैसियत बरकरार है। इसी उपयोगिता हमेशा से बनी है। पत्र जो काम कर सकते है, वह संचार काँ आधुनिकतम साधन नहीं कर सकता है। पत्र जैसा संतोष फोन या एसएमएस का संदेश भी नहीं दे सकता, जो अनुभूति और भाव पत्रों से जुड़े होते हैं, वे आधुनिक संचार माध्यमों में नहीं होता। पत्र में कुछ ऐसे गुण होते हैं, जो नए संचार माध्यमों में परिलक्षित नहीं होते। पत्र के द्वारा पुरखों की चिट्टियों को सहेज और संजोकर विरासत के रूप में रखे जा सकते हैं।

(ख) चिट्टियों की तेजी अन्य किन साधनों के कारण बाधा प्राप्त हुई है। 

उत्तर : युग परिवर्तन के साथ-साथ तथा सूचना प्रौद्योगिकी के कारण पत्रों के आदान-प्रदान में कुछ कमी आई। पहले लोगों के लिए संचार का इकलौता साधन चिट्ठी ही थी, पर आज और भी साधन विकसित हो चुके हैं। फैक्स, मोबाइल, टेलीफोन, ई-मेल, इंटरनेट आदि नए-नए माध्यमों के कारण पत्रों का व्यवहार कम होने लगा। फैक्स, ई-मेल, टेलीफोन तथा मोबाइल ने चिट्ठियों की तेजी को रोका है।

(ग) पत्र जैसे संतोष फोन या एसएमएस का संदेश क्यों नहीं दे सकता ? 

उत्तर : पत्र की उपयोगिता हमेशा से बनी रही है। पत्र जो काम कर सकता है, वह संचार का आधुनिकतम साधन नहीं कर सकता। पत्र जैसा संतोष फोन या एसएमएस का संदेश कहाँ दे सकता। पत्रों को तो हम सहेज कर रख लेते हैं। पर एसएमएस संदेशों को हम जल्दी ही भूल जाते हैं। कितने संदेशों को हम सहेज कर रख सकते हैं। तमाम महान हस्तियों की तो सबसे बड़ी यादगार या धरोहर उनके द्वारा लिखे गए पत्र ही है। पत्र यादों को सहेज कर रखते हैं।

(घ) गाँधी जी के पास देश-दुनिया से आए पत्रों का जवाब वे किस प्रकार देते थे ? 

उत्तर : गाँधी जी के पास देश-दुनिया से बड़ी संख्या में पत्र पहुँचते थे, पर पत्रों का जवाब देने के मामले में उनका कोई जोड़ नहीं था। जैसे ही उन्हें पत्र मिलता था, उसी समय वे उसका जवाब भी लिख देते थे। अपने हाथों से ही ज्यादातर पत्रों का जवाब देते थे। जब लिखते-लिखते उनका दाथिना हाथ दर्द करने लगता था तो वे बाएँ हाथ से लिखने में जुट जाते थे।

(ङ) कैसे लोग अब भी बहुत ही उत्सुकता से पत्रों का इंतजार करते हैं? 

उत्तर : संचार के तमाम साधनों के बाद भी चिट्ठी-पत्री की हैसियत बरकरार है। शहरी इलाकों में आलीशान हवेलियाँ हो या फिर झोपड़पट्टियों में रह रहे लोग। दुर्गम जंगलों से घिरे गाँव हो या बर्फबारी के बीच रहे पहाड़ों के लोग, आज भी खतों का ही सबसे अधिक बेसब्री से इंतजार करते हैं। दूर देहात में लाखों गरीब घरों में चूल्हे मनीऑर्डर अर्थव्यवस्था से ही जलते हैं। हमारे सैनिक तो पत्रों का जिस उत्सुकता से इंतजार करते हैं, उसकी कोई मिसाल ही नहीं।

प्रश्न 5. उत्तर दो (लगभग 50 शब्दों में) 

(क) पत्र को खत, कागद, उत्तरम्, लेख इत्यादि कहा जाता है। इन शब्दों से संबंधित भाषाओं के नाम बताओ। 

उत्तर : पत्र को उर्दू में खत, संस्कृत में पत्र, कन्नड़ जाब और लेख तथा तमिल में कडिद कहा जाता है। 

(ख) पाठ के अनुसार भारत में रोज कितनी चिट्ठियाँ डाक में डाली जाती है और इससे क्या साबित होता है ? 

उत्तर : विचारों और भावों के आदान-प्रदान मानव के लिए अपरिहार्य सामाजिक कार्य है। दुनियाभर में रोज करोड़ों पत्र एक दूसरे को तलाशते तमाम ठिकानों तक पहुँचते

हैं। भारत में ही रोज साढ़े चार करोड़ चिट्ठियाँ डाक में डाली जाती है, जो साबित करती है कि पत्र हमारे जीवन में कितनी अहमियत रखते हैं। आजकल व्यापारिक डाक की संख्या लगातार बढ़ रही है। करोड़ों लोग खतों और अन्य सेवाओं के लिए रोज भारतीय डाक घरों के दरवाजों तक पहुँचते हैं। दूर देहात में लाखों गरीब घरों में चूल्हे मनीऑर्डर अर्थव्यवस्था से ही जलते हैं।

(ग) क्या चिट्टियों की जगह कभी फैक्स, ई-मेल, टेलीफोन तथा मोबाइल ले सकते हैं? 

उत्तर : पत्र में कुछ ऐसे गुण होते हैं, जो संचार माध्यमों में परिलक्षित नहीं होते। इसलिए पत्रों का महत्व अभी भी बरकरार है। पत्र जो काम कर सकते हैं, वह संचार का आधुनिकतम साधन नहीं कर सकता है। पत्र जैसा संतोष फोन या एसएमएस का संदेश कहाँ दे सकता जो अनुभूति और भाव पत्रों से जुड़े हैं। वे आधुनिक संचार माध्यमों में नहीं होते। पत्र यादों को सहेज कर रखते हैं। पर एसएमएस संदेशों को हम जल्दी ही भूल जाते हैं। दुनिया का तमाम साहित्य पत्रों पर केंद्रित है और मानव सभ्यता के विकास में इन पत्रों ने अनूठी भूमिका निभाई है।

(घ) किनके पत्रों से यह पता चलता है कि आजादी की लड़ाई बहुत ही मजबूती से लड़ी गई थी ? 

उत्तर : महान हस्तियों की सबसे बड़ी यादगार या धरोहर उनके द्वारा लिखे गए पत्र ही है। दुनिया के तमाम संग्रहालय में जानी-मानी हस्तियों के पत्रों का अनूठा संकलन भी है। भारत में आजादी के पहले महासंग्राम के दिनों में जो कुछ अंग्रेज अफसरों ने अपने परिवारजनों को पत्र में लिखे, वे आगे चलकर बहुत महत्व की पुस्तक तक बन गई इन पत्रों ने साबित किया कि यह संग्राम कितनी जमीनी मजबूती लिए हुए था। इन पत्रों के द्वारा ही इतिहास रची।

(ङ) संचार के कुछ आधुनिक साधनों के नाम उल्लेख करो 

उत्तर संचार के आधुनिक साधन टेलीफोन, मोबाइल, फैक्स, ई-मेल, इंटरनेट वायरलेस और आगे रडार ।

Sl. No.Contents
Chapter 1नींव की ईंट
Chapter 2छोटा जादूगर
Chapter 3नीलकंठ
Chapter 4भोलाराम का जीव
Chapter 5सड़क की बात
Chapter 6चिट्ठियों की अनूठी दुनिया
Chapter 7साखी
Chapter 8पद-त्रय
Chapter 9जो बीत गयी
Chapter 10कलम और तलवार
Chapter 11कायर मत बन
Chapter 12मृत्तिका

प्रश्न 6. सम्यक् उत्तर दो (लगभग 100 शब्दों में) 

(क) पत्र लेखन की कला के विकास के लिए क्या-क्या प्रयास हुए ? 

उत्तर : पिछली शताब्दी में पत्र लेखन ने एक कला का रूप ले लिया। डाक व्यवस्था के सुधार के साथ पत्रों को सही दिशा देने के लिए विशेष प्रयास किए गए। पत्र संस्कृति विकसित करने के लिए स्कूली पाठ्यक्रमों में पत्र लेखन का विषय भी शामिल किया गया। भारत ही नहीं दुनिया के कई देशों में ये प्रयास चले और विश्व डाक संघ ने अपनी ओर से भी काफी प्रयास किए। विश्व डाक संघ की ओर से 16 वर्ष से कम आयु वर्ग के बच्चों के लिए पत्र लेखन प्रतियोगिताएँ आयोजित करने का सिलसिला सन् 1972 से शुरू किया गया।

(ख) वास्तव में पत्र किसी दस्तावेज से कम नहीं है- कैसे ? 

उत्तर : वास्तव में पत्र किसी प्रमाण पत्र से कम नहीं है। पत्र व्यवहार की परंपरा भारत में बहुत पुरानी है। पंत के दो सौ पत्र बच्चन के नाम तथा पत्रों के आइने में दयानंद सरस्वती समेत कई पुस्तकें हमें मिल जाएगी। इसी प्रकार नेहरू और गाँधी के लिखे गए रवींद्रनाथ टैगोर के पत्र भी बहुत प्रेरक है। ‘महात्मा और कवि’ के नाम से महात्मा गाँधी और रवींद्रनाथ टैगोर के बीच सन् 1915 से 1947 के बीच पत्राचार का संग्रह प्रकाशित हुआ, जिसमें बहुत से नए तथ्यों और उनकी मनोदशा का लेखा-

जोखा मिलता है। 

(ग) भारतीय डाकघरों की बहुआयामी भूमिका पर आलोकपात करो। 

उत्तर : भारतीय डाक व्यवस्था के सुधार के साथ पत्रों को सही दिशा देने के लिए विशेष प्रयास किए गए तमाम सरकारी विभागों की तुलना में सबसे ज्यादा गुडविल डाक विभाग की हैं। इसकी एक खास वजह यह भी है कि यह लोगों को जोड़ने का कम करता है। घर-घर तक इसकी पहुँच है। संचार के तमाम उन्नत साधनों के बाद भी चिट्टी-पत्री की हैसियत बरकरार है करोड़ों लोग खतों और अन्य सेवाओं के लिए रोज भारतीय डाकघरों के दरवाजों तक पहुँचते हैं और इसकी बहुआयामी भूमिका भी है। गाँवों या गरीब बस्तियों में चिट्ठी या मनीऑर्डर लेकर पहुँचने वाला डाकिया देवदूत के रूप में देखा जाता है।

 भाषा एवं व्याकरण ज्ञान 

1. केवल ‘पत्र’ कहने से सामान्यतः चिट्ठियों के बारे में ही समझा जाता है। परंतु अन्य शब्दों के साथ संयोग से पत्र का अर्थ बदल जाता है, जैसे समाचार पत्र । अब पत्र शब्द के योग से बनने वाले पांच शब्द लिखो। 

उतर : प्रश्नपत्र निमत्रण पत्र, आवेदन पत्र , इस्ताफा पत्र, प्रेम पत्र ।

2. ‘व्यापारिक’ शब्द व्यापार के साथ ‘इक’ प्रत्यय के योग से बना है। ‘इक’ प्रत्यय से बनने वाले पाँच शब्द पुस्तक से खोज कर লিखो । 

उतर : टेलिफोन + इक = टेलफोनिक

व्यवहार + इक = व्यवहारिक 

संस्कृत + इक = सस्कृतिक 

राजनीति + इक = राजनीतिक

समाज + इक सामाजिक

 3. दो स्वरों के मेल से होने वाले परिवर्तन को स्वर संधि कहते है, जैसे― रविंद्र = रवि + इंद्र । इस संधि इ + इ = ई हुई है । इसे दीर्घ संधि कहते है। संधियाँ चार प्रकार की मानी गई है― दीर्घ, गुण, वृद्दि और यण ।

       हृस्व या दीर्घ अ, इ, उ के साथ ह्रस्व या दीर्घ अ, इ, उ, आ आए तो ये आपस में मिलकर क्रमशः दीर्घ आ, ई, ऊ हो जाते है, इसी कारण इस संधि को दीर्घ संधि कहते है, जैसे―संग्रह + आलय = संग्राहालय, महा + आत्मा = महात्मा । 

        इस प्रकार के दस उदाहरण खोजकर लिखो और अपने शिक्षक को दिखाओ ।

उत्तर : 

गिरि + इन्द्र = गिरीन्द्र ।

भानु + उदय = भानूदय ।

पितृ + ऋण = पितृण ।

मही + इन्द्र = महीन्द्र । 

भौजन + आलय = भोजनालय ।

महा + आशय = महाशय ।

शिव + आलय = शिवालय ।

 अन्न + अभाव अन्नाभाव ।

विद्या + आर्थी विद्यार्थी ।

विद्या + आलय = विद्यालय ।

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