SEBA Class 10 Hindi (Elective) Solution| Chapter-3| नीलकंठ

SEBA Class 10 Hindi (Elective) Solution| Chapter-3| नीलकंठ सूची में प्रत्येक अध्याय का उत्तर प्रदान किया गया है ताकि आप आसानी से विभिन्न अध्याय एनसीईआरटी समाधान कक्षा 10 आलाक भाग-2 में खुल सकें और एक की आवश्यकता का चयन कर सकें। इसके अलावा आप एनसीईआरटी (CBSE) पुस्तक दिशानिर्देशों के अनुसार विशेषज्ञ शिक्षकों द्वारा इस खंड में NCERT पुस्तक ऑनलाइन पढ़ सकते हैं। ये समाधान NCERT हिंदी (MIL) समाधान का हिस्सा हैं। यहां हमने कक्षा 10 NCERT आलाक भाग -2 पाठ्य पुस्तक समाधान आलाक भाग -2 के SEBA Class 10 Hindi (Elective) Solution| Chapter-3| नीलकंठ लिए दिए हैं आप यहां इनका अभ्यास कर सकते हैं।

SEBA Class 10 Solutions

SEBA CLASS 10 (Ass. MEDIUM)

SEBA CLASS 10 (Bangla MEDIUM)

SEBA CLASS 10 (English MEDIUM)

SEBA Class 10 Hindi (Elective) Solution| Chapter-3| नीलकंठ

SEBA Class 10 Hindi (Elective) Solution| Chapter-3| नीलकंठ ये उत्तर संबंधित विषयों के अनुभवी प्रोफेसरों द्वारा सावधानीपूर्वक तैयार किए जाते हैं। उनका उद्देश्य छात्रों को विषय की उचित समझ में मदद करना और उनके कौशल और अभिव्यक्ति की कला में सुधार करना है। यदि ये उत्तर उन उद्देश्यों को पूरा करते हैं जिनके साथ वे तैयार किए गए हैं, तो हम अपने प्रयास को पर्याप्त रूप से पुरस्कृत मानेंगे। इन उत्तरों में और सुधार के लिए किसी भी सुझाव का हमेशा स्वागत है।

पाठ 3

महादेवी वर्मा ( 1907-1987 )

अभ्यासमाला

प्रश्न 1. सही विकल्प का चयन करो : 

(क) नीलकंठ पाठ में महादेवी वर्मा की कौन-सी विशेषता परिलक्षित हुई है? 

(अ) जीव-जंतुओं के प्रति प्रेम, 

(आ) मनुष्यों के प्रति सहानुभूति

(इ) पक्षियों के प्रति प्रेम,

(ई) राष्ट्रीय पशुओं के प्रति प्रेम

उत्तर: जीव-जंतुओं के प्रति प्रेम

(ख) महादेवी जी ने मोर-मोरनी के जोड़े के लिए कितनी कीमत चुकाई ?

(अ) पाँच रुपए

(आ) सात रुपए

(ई) पैंतीस रुपए

(इ) तीस रुपए 

उत्तर : पैंतीस रुपए।

(ग) विदेशी महिलाओं ने नीलकंठ को क्या उपाधि दी थी ?

(अ) परफैक्ट जेंटिलमैन

(आ) किंग ऑफ द जंगल

(इ) ब्यूटीफूल बर्ड

(ई) स्वीट एंड हैंडसम, परसन

उत्तर : परफैक्ट जेंटिलमैन

(घ) महादेवी वर्मा ने अपनी पालतू बिल्ली का नाम क्या रखा था ?

(अ) चित्रा 

(आ) राधा 

(इ) कुब्जा

(ई) कजली

उत्तर: चित्रा

(ङ) नीलकंठ और राधा की सबसे प्रिय ऋतु थी- 

(अ) ग्रीष्म

(आ) वर्षा

(इ) शीत-

(ई) वसंत

उत्तर : वर्षा ऋतु

प्रश्न 2. नीच प्रश्नों को उत्तर दो :

(क) गुटर-गटर की रागिनी कौन सी चिड़िया अलापती है ? 

उत्तर : कबूतर अलापते हैं। 

(ख) महादेवी वर्मा कौन है?

उत्तर महादेवी वर्मा जी छायावादी कवयित्री है।

(ग) नीलकंठ नाम मोर को क्यों दिया गया था ?

उत्तर : नीलाभ ग्रीवा के कारण मोर का नाम नीलकंठ था।

(घ) ‘नीलकंठ’ किस विधा की रचना है ?

उत्तर: ‘नीलकंठ’ महादेवी वर्मा की रेखाचित्र रचना है।

(ङ) ‘नीलकंठ’ की राधा कौन है ?

उत्तर : तीलकंठ’ की छाया के समान रहने वालीं मोरनी ही राधा है। 

(च) “परन्तु उसकी गति में भी एक छंद रहता था।” यहाँ किसकी गति के छंद

की बात उठाई गई है?

उत्तर: यहाँ राधा (मोरनी) उसकी गति में भी एक छंद रहता था। उसी की बात उठाई गई है।

प्रश्न 3. अति संक्षिप्त उत्तर दो ( लगभग 25 शब्दों में) 

(क) बड़े मियाँ के पैरों के पास पड़ी हुई मोरनी को अनदेखा करना महादेवी जी

के लिए कठिन क्यों था ?

उत्तर: बड़े मियाँ के पैरों के पास पड़ी हुई मोरनी को अनदेखा करना महादेवी जी के लिए कठिन इसलिए हुआ था कि मोरनी के भूँज से बँधे दोनों पंचों की उँगलियों टूटकर इस प्रकार एकत्र हो गई थी कि वह खड़ी ही नहीं हो सकती थी।

(ख) नीलकंठ ने चिड़ियाघर के जीव-जन्तुओं के सेनापति का पद कैसे संभाला था ?

उत्तर : नीलकंठ ने अपने आपको चिड़ियाघर के निवासी जीव-जंतुओं का सेनापति और संरक्षक नियुक्त कर लिया। सबेरे ही वह सब खरगोश, कबूतर आदि का सेना एकत्र कर उस ओर ले जाता जहाँ दाना दिया जाता है और घूम-घूमकर मानो सबकी रखवाली करता रहता है। किसी ने कुछ गड़बड़ की और वह अपनी तीखे चचु- प्रहार से उसे दंड देने दौड़ा। दंडविधान के समान ही उन जीव-जंतुओं के प्रति उसक प्रेम भी असाधारण था।

(ग) नीलकंठ के स्वभाव की किन्हीं दो विशेषताओं का उल्लेख करो। 

उत्तर : नीलकंठ देखने में जितना सुंदर था, उसका स्वभाव भी उतना ही कोमल

मेघों की साँवली छाया में अपने इंद्रधनुष के गुच्छे जैसे पंखों को मंडलाकार बनाक जब वह नाचता था, तब उस नृत्य में एक सहजात लय-ताल रहता था।

(घ) मोर-मोरनी के जोड़े को लेकर घर पहुँचने पर सब लोग महादेवी जी क्या कहने लगे ? 

उत्तर : लेखिका जब बड़े मियाँ की दुकान से मोर मोरनी को लेकर घर पहुँ तो सब कहने कहने लगे यह तो तीतर है। मोर कहकर ठग लिया है। कारण मोर इतने छोटे थे कि मोर का बच्चा नहीं लगता। ऊपर से पिंजड़ा इतना संकीर्ण के वे पक्षी शावक जाली के गोल फ्रेम में किसी जड़े चित्र जैसे लग रहे थे। इस अब कहने लगे यह तीतर है। मोर कहकर ठग लिया है। 

(ङ) “वास्तव में नीलकंठ मर गया था।” यहाँ लेखिका ने ‘वास्तव में’ शब्द न्यों रखा है। 

उत्तर : वास्तव में नीलकंठ मर गया था। क्यों का उत्तर तो अब तक नहीं

का है। न उसे कोई बीमारी हुई न उसके रंग-बिरंगे फूलों के स्तबक जैसे किसी चोट का चिह्न मिला। अपनी अनुभवहीनता के कारण ही नीलकं में थकावट और आखों में एक शून्यता नजर नहीं आई। 

(च) महादेवी जी के अनुसार नीलकंठ को कैसा वृक्ष अधिक भाता था ?

उत्तर : महादेवी जी के अनुसार नीलकंठ को फलों के वृक्षों से अधिक पुष्पित और पल्लवित वृक्ष भाते थे वसंत में जब आम के वृक्ष सुनहरी मंजरियों से लद जाते थे, अशोक लाल पल्लवों से ढँक जाता था, तब वह अस्थिर हो उठता था। 

(झ) नीलकंठ को राधा और कुब्जा में किसे अधिक प्यार था और क्यों ?

उत्तर : नीलकंठ राधा से अधिक प्यार था। वह कुब्जा को पसंद नहीं करता था। वह राधा के साथ रहना रहता है पर कुब्जा उसके साथ रहना चाहती है। उसके क्रूर स्वभाव के कारण नीलकंठ उससे दूर भागता था। वह राधा को चोंच से भारती है। उसके कलह-कोलाहल से नीलकंठ दुखी रहना था। 

(ज) मृत्यु के बाद नीलकंठ का संस्कार महादेवी जी ने कैसे किया ? 

उत्तर : महादेवी जी मृत्यु के बाद नीलकंठ को अपने शाल में लपेटकर संगम

ले गई। गंगा के बीच धार में उसे प्रवाहित किया। उस समय उसके पंखों की चंद्रिकाओं से बिंबित प्रतिबिंबित होकर गंगा का चौड़ा पाट एक विशाल मयूर के समान तरंगित हो उठा था।

(झ) लेखिका ने क्यों कहा है कि नीलकंठ और राधा की सबसे प्रिय ऋतु वर्षा थी ? 

उत्तर : नीलकंठ और राधा की सबसे प्रिय ऋतु वर्षा थी। मेघ के गर्जनताल पर ही उसके तन्मय नृत्य का आरम्भ होता बूंदों की रिमझिमाहट जितनी तीव्र होती जाती, नीलकंठ के नृत्य का बेग उतना ही अधिक बढ़ता जाता है। वर्षा के थम जाने पर वह दाहिने पंजे पर दाहिना पंख और बाएं पंजे पर बायां पंख फैलाकर सुखाता था।

प्रश्न 4. संक्षेप में उत्तर दो (लगभग 50 शब्दों में) 

(क) बड़े मियाँ ने मोर के बच्चे दूसरों को न देकर महादेवी जी को ही क्यों देना चता था? 

उत्तर: बड़े मियाँ मोर के बच्चे दूसरों को न देकर महादेवी जी को इसलिए देना चाहता

था, कारण दूसरे मोर बच्चे को मार कर इसके पंजों से दवा बनाने के लिए खरीदकर ले जाते हैं। ऐसे मासूम चिड़ियों को मारने के लिए देना नहीं चाहता था। इसीलिए महादेवी जी को देना चाहता था ताकि मोर के बच्चे को पाल सके। 

(ख) महादेवी जी ने मोर और मोरनी के क्या नाम रखे और क्यों ? 

उत्तर : मोर देखने में बहुत सुन्दर था। उसकी गोल आँखों में इंद्रनील की नीलाभ घुति झलकती है। लंबी नील हरित ग्रीवा की हर भंगिमा में धूपछाँही तरंगें उठती- गिरती है। उसको विशेष अदाओं को देखकर तथा नीलाभ ग्रीवा के कारण मोर का नाम रखा गया नीलकंठ । 

मोरनी का विकास मोर में समान चमत्कारिक नहीं था, परंतु अपनी लंबी धूपछाँही गरदन, हवा में चंचल कलगी, मंथर गति आदि से वह मोर की उपयुक्त सहचारिणी थी और उसकी छाया के समान रहने के कारण मोरनी का नामकरण हुआ राधा। 

(ग) लेखिका के अनुसार कार्तिकेय ने मयूर को अपना वाहन क्यों चुना होगा ? मयूर की विशेषताओं के आधार पर उत्तर दो। 

उत्तर : लेखिका के अनुसार कार्तिकेय ने मयूर को अपना युद्ध वाहन इसलिए चुना था, कारण कलाप्रिय वीर पक्षी है। मयूर चील, बाज आदि पक्षियों के समान हिंसक और क्रूर कर्म वाला नहीं होता। वह सुंदर और कोमल स्वभाव का होता है, पर विपत्ति में दूसरों की रक्षा भी कर सकता है। किस प्रकार छोटे से खरगोश को साँप से बचाया था। रात भर उसे पंखों के नीचे रखे उष्णता देता रहा। दंड विधान के समान ही उन जीव-जंतुओं के प्रति उसका प्रेम भी असाधारण था और जरूरत पड़ने पर अपनी नुकीली पैनी चोंच से संहार भी कर सकता है।

(घ) नीलकंठ के रूप रंग का वर्णन अपने शब्दों में करो। इस दृष्टि से राधा कहाँ तक भिन्न थी ? 

उत्तर : नीलकंठ देखने में बहुत सुंदर था। नीलाभ ग्रीवा होने के कारण उसका नाम नीलकंठ रखा गया। गोल आँखों में इंद्रनील की नीलाभ सुति झलकने लगी थी। लंबी नील हरित ग्रीवा की हर भोगिमा में धूपछाँही तरंगें उठती गिरती है। लम्बी पूँछ और उसके पंखों पर चंद्रिकाओं के इंद्रधनुषी रंग उद्दीप्त हो उठे।

दूसरी ओर मोरनी राधा का विकास मौर में समान चमत्कारिक नहीं था, परंतु अपनी लंबी धूपछाँही गरदन, हवा में चंचल कलगी, मंथर गति, पंखों की श्यामश्वेत पत्रलेखा आदि से वह मोर की उपयुक्त सहचारिणी थी।

(ङ) बारिश में भींगकर नृत्य करने के बाद नीलकंठ और राधा पंखों को कैसे सूखाते थे? 

उत्तर : नीलकंठ और राधा की सबसे प्रिय ऋतु वर्षा थी। मेघ के गर्जनताल पर ही उसके तन्मय नृत्य का आरंभ होता। बूंदों की रिमझिमाहट जितनी तीव्र होती, जाती, नीलकंठ के नृत्य का वेग उतना ही अधिक बढ़ता जाता है। वर्षा के थम जाने पर वह दाहिने पंजे पर दाहिना पंख और बाएँ पंजे पर बायाँ पंख फैलाकर सुखाता था। कभी-कभी वे दोनों एक दूसरे के पंखों से टपकने वाली बूंदों को चोंच से पी-पीकर पंखों का गीलापन दूर करते रहते।

(च) नीलकंठ और राधा के नृत्य का वर्णन अपने शब्दों में करो। 

उत्तर : नीलकंठ में उसकी जातिगत विशेषताएँ थी। मेघों की साँवली छाया में अपने इंद्रधनुष के गुच्छे जैसे पंखों को मंडलाकार बनाकर जब वह नाचता था, तब उस नृत्यमें एक सहजात लय-ताल रहता था। आगे-पीछे, दाहिने-बाएँ क्रम में घूमकर वह किसी अलक्ष्य सम पर ठहर-ठहर जाता था।

राधा नीलकंठ के समान नहीं नाच सकती थी, परंतु उसकी गति में भी एक छंद रहता था। वह नीलकंठ की दाहिनी ओर के पंख को छूती हुई बाईं ओर निकल आती थी और बाएँ पंख को स्पर्श कर दाहिनी ओर इस प्रकार उसकी परिक्रमा में भी एक ताल-परिचय मिलता था।

(छ) वसंत ऋतु में नीलकंठ के लिए जालीघर में बंद रहना असहनीय हो जाता था, क्यों ? 

उत्तर : नीलकंठ को फलों के वृक्षों से अधिक पुष्पित और पल्लवित वृक्ष भाते थे। वसंत ऋतु में जब आम के वृक्ष सुनहली मंजरियों से लद जाते थे, अशोक के वृक्ष लाल पल्लवों से ढँक जाता था, तब जालीघर में वह अस्थिर हो उठता कि उसे बाहर छोड़ देना पड़ता था। वह घंटों इन वृक्षों पर बैठा रहता था।

(ज) जाली के बड़े घर में रहने वाले जीव-जंतुओं के आचरण का वर्णन करो। 

उत्तर : नीलकंठ ने अपने आपको चिड़ियाघर के निवासी जीव-जंतुओं का सेनापति और संरक्षक नियुक्त कर लिया था। सबेरे वह सब खरगोश कबूतर आदि की सेना एकत्र कर उस और ले जाता, जहाँ दाना दिया जाता है और घूम-घूमकर सबकी रखवाली करता था। किसी ने गड़बड़ की तो तीखे चोंच से दंड देने दौड़ता। वे फिर कभी उसे क्रोधित होने का अवसर न देता दंडविधान के समान ही उन जीव-जंतुओं के प्रति उसका प्रेम भी असाधारण था। प्रायः वह मिट्टी में पंख फैलाकर बैठ जाता और वे सब उसकी लंबी पूँछ और सघन पंखों में छुआ-छुआँवल-सा खेलते रहते थे। 

(झ) नीलकंठ ने खरगोश के बच्चे को साँप के चंगुल से किस तरह बचाया ?

उत्तर : एक दिन किसी तरह जाल के भीतर साँप पहुँच गया। सब जीव-जंतु भाग गए। केवल एक शिशु खरगोश साँप की पकड़ में आ गया। उसका पिछला हिस्सा साँप के मुँह में दबा हुआ था। शेष आधा बाहर था। उसकी आवाज मंद थी। नीलकंठ दूर झूले में सो रहा था। उसी के चौकन्ने कानों ने उस मंद स्वर की व्यथा पहचानी और वह तुरंत नीचे आया। अपनी सहज चेतना से समझ लिया कि साँप के फन पर चोंच मारने से खरगोश भी घायल हो सकता है। उसने साँप को फन के पास पंजों से दबाया और फिर चोंच से इतने प्रहार किया कि वह अधमरा हो गया। पकड़ ढीली पड़ते ही खरगोश का बच्चा मुख से निकल आया।

(ञ) लेखिका को नीलकंठ की कौन-कौन-सी चेष्टाएँ बहुत भाती थी ? 

 उत्तर : नीलकंठ ने कैसे समझ लिया कि उसका नृत्य उन्हें बहुत भाता है। उनके

जालीघर के पास पहुँचते ही वह झूले से उतर कर नीचे आ जाता और पंखों का सतरंगी मंडलाकार छाता तानकर नृत्य की भंगिमा में खड़ा हो जाता, तब से यह नृत्य भंगिमा नित्य का क्रम बन गई। उसका मेरी हथेली पर रखे हुए भुने चने ऐसी कोमलता से हौले-हौले उठाकर खाता था, जिसे देखकर उन्हें हँसी भी आती थी और विस्मय भी होता था। चिड़ियाघर के निवासी जीव-जंतुओं का सेनापति बनकर सबकी रखवाली करना अच्छा लगता था।

(ट) मोर (नीलकंठ) के बढ़ने पर क्रमशः होने वाले परिवर्तनों का वर्णन करों।

 उत्तर: धीरे-धीरे मोर के बच्चे बढ़ने लगे। मोर के सिर की कलगी और सघन, ऊँची तथा चमकीली हो गई। चाँच अधिक बंकिम और पैनी हो गई, गोल आंखों इंद्रनील की नीलाभ पुति झलकने लगी लम्बी नील हरित ग्रीवा की हर भंगिमा में भूपी तरंगे उठने गिरने लगी। दक्षिण-वाम दोनों पंखों में सलेटी और सफेद, आलेखन स्पष्ट होने लगे। पूंछ लंबी हुई और उसके पंखों पर चंद्रिकाओं के इंद्रधनुषी रंग उद्दीप्त हो उठे। रंग रहित पैरों को गवली गति ने एक नई गरिमा से रंजित कर दिया। उसका गरदन ऊंची कर देखना, विशेष भंगिमा के साथ उसे नीची कर दाना चुगना, पानी पीना, टेढ़ी कर शब्द सुनना।

प्रश्न. 5. नीलकंठ के मरने के बाद दूसरे जीवों के आचरण का एक शब्द चित्र प्रस्तुत करों।

उत्तर : नीलकंठ के मरने के बाद चिड़ियाघर के जीव-जंतु उदास रहने लगे। कुब्जा ने कोलाहल के साथ खोज-ढूंढ़ आरंभ की और राधा नीलकंठ के न रहने पर निश्चेष्ट सी कई दिन कोने में बैठी रही। वह प्रतीक्षा के भाव से द्वार पर दृष्टि लगाए रहती थी। आषाढ़ में जब आकाश मेघाच्छन्न हो जाता है तब वह कभी ऊंचे झूले पर और कभी अशोक की डाली पर अपनी केका को तीव्रतर करके नीलकंठ को बुलाती रहती है।

Sl. No.Contents
Chapter 1नींव की ईंट
Chapter 2छोटा जादूगर
Chapter 3नीलकंठ
Chapter 4भोलाराम का जीव
Chapter 5सड़क की बात
Chapter 6चिट्ठियों की अनूठी दुनिया
Chapter 7साखी
Chapter 8पद-त्रय
Chapter 9जो बीत गयी
Chapter 10कलम और तलवार
Chapter 11कायर मत बन
Chapter 12मृत्तिका

प्रश्न 6. मयूर को कलाप्रिय वीर पक्षी क्यों कहा गया है? स्पष्ट करो।

उत्तर: मयूर कलाप्रिय वीर पक्षी है, वह सुन्दर और कोमल स्वभाव का होता है, पर विपत्ति में दूसरों की रक्षा भी कर सकता है। जरूरत पढ़ने पर अपनी नुकीली पैनी चोंच से भयंकर विषधर सांप को खंड-खंड भी कर सकता है। इसीलिए तो कार्तिकेय ने मयूर को अपना वाहन चुना था वह युद्ध में झपट पड़ता था और अपनी पैनी चोंच से शत्रुओं पर संहार करता। 

प्रश्न 7. सम्यक् उत्तर दो ( लगभग 100 शब्दों में) 

(क) नीलकंठ के स्वभाव की विशेषताएँ अपने शब्दों में वर्णन करो।

अथवा,

नीलकंठ की प्रवृत्तियों को रेखांकित करो। 

उत्तर : नीलकंठ देखने में जितना सुंदर था, उसका स्वभाव भी उतना ही कोमल । चिड़ियाघर के निवासी जीव-जंतुओं का रखवाली करता सबेरे ही वह सब खरगोश, कबूतर आदि की सेना एकत्र कर उस ओर ले जाता, जहाँ दाना दिया जाता है कोई गड़बड़ करने पर तीखे चोंच से दंड भी देता दंडविधान के समान ही उन जीव- जंतुओं के प्रति उसका प्रेम भी असाधारण था खरगोश के बच्चे को साँप के मुख से बचा कर रातभर उसे अपने पंखों के नीचे रखे उष्णता देता रहा। नीलकंठ जानता था लेखिका को उसका नृत्य अच्छा लगता है। उन्हें देखते ही वह सतरंगी मंडलाकार छाता तानकर नृत्य की भंगिमा में खड़ा हो जाता।

(ख) कुब्जा और राधा के आचरण में क्या अंतर परिलक्षित होते हैं? क्यों ? 

उत्तर : राधा जितनी सरल और उदार थी, कुब्जा नाम के अनुरूप स्वभाव से भी कुब्जा ही प्रमाणित हुई। उसकी ऊंगिलयाँ चोट लगने के कारण टेढ़ी-मेढ़ी थी और वह ठूंठ जैसे पंजों पर डगमगाती हुई चलती इसीलिए उसका नाम कुब्जा था। नीलकंठ के साथ राधा को देखते ही मारने को दौड़ती, किसी जीव-जंतु से उसकी मित्रता हो. नहीं थी। उसका स्वभाव ही क्रूर था, जहाँ नीलकंठ, राधा और दूसरे जीव-जंतु आपस में मिल जुलकर रहते थे। वहीं कुब्जा के आने से सब परेशान थे। राधा और कुब्जा के स्वभाव में बहुत अंतर था। एक क्रूर स्वभाव की थी। कलह-कोलाहल और द्वेष से भरा उसका मन था, दूसरी ओर सहानुभूति था । 

(ग) मयूर कलाप्रिय वीर पक्षी है, हिंसक मात्र नहीं – इस कथन का आशय समझाकर लिखो। 

उत्तर : मयूर कलाप्रिय वीर पक्षी है। वह बाज, चील जैसा क्रूर कर्म नहीं करता। बाज, सील हिंस्र होते हैं। वह छीनकर भोजन करना जानता है, पर मयूर जीव-जंतुओं की रखवाली भी करता। जरूरत होने पर अपनी नुकीली पैनी चोंच से भयंकर विषधर साँप को खंड-खंड भी कर सकता है। इसीलिए तो कार्तिकेय ने मयूर को अपना वाहन चुना था। वह युद्ध में झपट पड़ता था और अपनी चोंच से संहार करता।

भाषा एवं व्याकरण ज्ञान

1. निम्नलिखित शब्दों के संधि-विच्छेद करो : 

नंवागतुक― नव + आगंतुक― नवांगतुक । 

मंडलाकार ―मंडल + आकार ―मंडलाकार

निष्चेष्ट ― नि: + चेष्ट―निष्चेष्ट । 

आनंदोत्सव―आनंद + उत्सव―आनंदोस्तव ।

विस्मयाभिभूत― विस्मय + अभिभूत विस्मयाभिभूत ।

आविर्भूत ― आविः + भूत―आविर्भूत । 

मेघाच्छन्न ― मेघ + आच्छन्न―मेघाच्छन्न । 

उद्दीप्त―उत् + दीप्त―उद्दीप्त ।

2. निम्नलिखित समस्तपदों का विग्रह करते हुए समास का नाम भी बताओ : 

पक्षी-शावक, करुण-कथा, लय-ताल, धूप-छाँह, श्याम-श्वेत, चंचु – प्रहार, नीलकंठ, आर्तक्रंदन, युद्धवाहन

उत्तर :  पक्षी और शावक (द्वंद्व समास)

करुण और कथा (द्वंद्व समास) 

लय और ताल (द्वंद्व समास) 

धूप और छाँह (द्वंद्व समास)

श्याम और श्वेत (द्वंद्व समास)

चंचु से प्रहार (करण तत्पुरुष समास ) 

नीलकंठ (नीला है कंठं जिसका अर्थात शिव) (बहुब्रीहि समास) 

आर्तक्रंदन (जिसके क्रंदन में आर्तनाद हो) (कर्मधारय समास)

युद्ध का वाहन (तत्पुरुष समास)

3. निम्नलिखित शब्दों से मूल शब्द और प्रत्यय अलग करो: 

स्वाभाविक―स्वभाव + इक् ।

दुर्बलता ― दुर्वल + ता ।

रिमझिमाहट―रिमझिम + आहट ।

पुष्पित―पुष्प + इत ।

चमत्कारिक―चमत्कार + इक् । 

मानवीकरण―मानवी + करण ।  

विदेशी―विदेश + ई ।  

सुनहला―सुनहल + आ ।

परिणामतः ―परिणाम + अत: 

4. उठना, जाना, डालना, लेना क्रियाओं से बनने वाली संयुक्त क्रियाओं से चार वाक्य बनाओ:

उठना―हमे आपना सेहत बनाने के लिये सुबह जल्दी उठना चाहिये । 

जाना― मुझे कल फुटबल खेलने के लिये दिल्ली जाना है ।

डालना ― दूध में इतना पानी मत डालो ।

लेना ― हमारे बीच लेना देना तो लगा ही रहेगा ।

5. निम्नलिखित वाक्यों में उदाहरणों के अनुसार यथास्थान उपयुक्त विराम चिह्न लगाओ

(क) उन्हें रोककर पूछा मोर के बच्चे है कहाँ 

उत्तर: उन्हें रोककर पूछा, “मोर के बच्चे है कहाँ” ?

(ख) सब जीव-जंतु भागकर इधर-उधर छिप गए

उत्तर: सब जीव-जंतु भागकर इधर-उधर छिप गए। 

(ग) चोंच से मार-मारकर उसने राधा की कलगी नोच डाली पंख नोच डाले

उत्तर:चोच से मार-मारकर उसने राधा की कलगी नोच डाली, पंख नोच डाले

(घ) न उसे कोई बीमारी हुई न उसके शरीर पर किसी चोट का चिह्न मिला

उत्तर: न उसे कोई बीमारी हुई, न उसके शरीर पर किसी चोट का चिह्न मिला।

(ङ) मयूर को बाज चील आदि की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता जिनका जीवन ही क्रूर कर्म है।

उत्तर: मयूर को बाज, चील आदि की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता, जिनका जीवन ही क्रूर कर्म है।

Leave a Reply