SEBA Class 10 Hindi (Elective) Solution| Chapter-11| कायर मत बन

SEBA Class 10 Hindi (Elective) Solution| Chapter-11| कायर मत बन सूची में प्रत्येक अध्याय का उत्तर प्रदान किया गया है ताकि आप आसानी से विभिन्न अध्याय एनसीईआरटी समाधान कक्षा 10 आलाक भाग-2 में खुल सकें और एक की आवश्यकता का चयन कर सकें। इसके अलावा आप एनसीईआरटी (CBSE) पुस्तक दिशानिर्देशों के अनुसार विशेषज्ञ शिक्षकों द्वारा इस खंड में NCERT पुस्तक ऑनलाइन पढ़ सकते हैं। ये समाधान NCERT हिंदी (MIL) समाधान का हिस्सा हैं। यहां हमने कक्षा 10 NCERT आलाक भाग -2 पाठ्य पुस्तक समाधान आलाक भाग -2 के SEBA Class 10 Hindi (Elective) Solution| Chapter-11| कायर मत बन लिए दिए हैं आप यहां इनका अभ्यास कर सकते हैं।

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SEBA Class 10 Hindi (Elective) Solution| Chapter-11| कायर मत बन

SEBA Class 10 Hindi (Elective) Solution| Chapter-11| कायर मत बन ये उत्तर संबंधित विषयों के अनुभवी प्रोफेसरों द्वारा सावधानीपूर्वक तैयार किए जाते हैं। उनका उद्देश्य छात्रों को विषय की उचित समझ में मदद करना और उनके कौशल और अभिव्यक्ति की कला में सुधार करना है। यदि ये उत्तर उन उद्देश्यों को पूरा करते हैं जिनके साथ वे तैयार किए गए हैं, तो हम अपने प्रयास को पर्याप्त रूप से पुरस्कृत मानेंगे। इन उत्तरों में और सुधार के लिए किसी भी सुझाव का हमेशा स्वागत है।

पाठ 11

कवि परिचय नरेंद्र शर्मा (1913-1989 ) : 

कवि नरेंद्र शर्मा आधुनिक हिंदी काव्यधारा के अंतर्गत छायावाद एवं छायावादोत्तर युगों में होने वाले व्यक्तिवादी गीति कविता के रचयिता के रूप में प्रसिद्ध है। व्यक्तिगत प्रणयानुभूति, विरह-मिलन के चित्र, सुख-दुःख के भाव, प्रकृति सौंदर्य, आध्यात्मिक रहस्यानुभूति, राष्ट्रीय भावना और सामाजिक विषमता के चित्रण के साथ उनके गीतों एवं कविताओं में विषयगत विविधता सहज ही देखी जा सकती है।

गीति कवि नरेंद्र शर्मा जी का जन्म सन् 1913 में उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिलांतर्गत जहाँगीर नामक स्थान में हुआ था। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से उन्होंन एम.ए. किया। सन् 1989 में इस यशस्वी गीति कवि का देहावसान हो गया। आपकी काव्य कृतियों में ‘प्रभात फेरी’, ‘प्रवासी के गीत’, ‘पलाशवन’, ‘मिट्टी के फूल’, ‘हंसमाला’, ‘रक्त चन्दन’, ‘कदली वन’, ‘द्रौपदी’ (खंड काव्य) ‘उत्तर जय’ (खंड काव्य) और ‘सुवर्ण’ खंड काव्य विशेष रूप से उल्लेखनीय है। ‘कड़वी-मीठी बातें उनका कहानी संग्रह है।

भावार्थ 

1. कुछ भी बन ………… बस कायर मत बन ।

भावार्थ: कवि नरेंद्र शर्मा जी की रचनाओं से पुरुषार्थ, साहस एवं अडिग अविचल भाव का संदेश मिलता है। कवि ने मनुष्य मात्र से यह आग्रह किया है कि वह और कुछ भी बने, पर कायर कभी मत बने। मनुष्य को चाहिए कि उसके मार्ग पर आने वाली बाधाओं से वह साहस और दृढ़ता के साथ लड़े कभी भी उनसे समझौता न करे। निराश होकर माथा न पटके। कवि कहते हैं कायर इंसान मृत्यु से पहले सौ बार मरता है। इसलिए कवि कहते हैं कि जिंदगी में कुछ भी बनो पर कायर मत बनो। 

2. ले-दे कर जीना …… बस कायर मत बन ।

भावार्थ: कवि कहते हैं कि जीवन से समझौता करके क्या जीना कब तक कायरों की 1 तरह गम के आँसू बहाओगे, कवि कहते हैं मानवता अमूल है, मानवता मानव जीवन का सच्चा आभूषण है। व्यक्ति के आत्मबलिदान से मानवता अमर बनती है। युगों से संचित मानवता व्यक्ति को खून-पसीने से सींचती है और मनुष्य होने की सार्थकता इसी में है। इसलिए कवि कहते हैं। हे मनुष्य कुछ नहीं करोगे तो क्या करोगे बस आतं विलाप करोगे, अपने कष्ट से व्याकुल होकर रोते रहोगे। उठो कर्म करो जीवन की नैया साहस के साथ पार लगाओ। कुछ भी बनो पर कायर मत बनो।

3. ‘युद्ध देहि’ कहे जब पामर ……… कायर मत बन । 

भावार्थ : युद्धं देहि अर्थात लड़ाई करो कहकर अगर कोई दुष्ट और नीच व्यक्ति सामने आ जाए तो मनुष्य को चाहिए कि या तो प्यार के बल पर उसे जीत ले, नहीं तो उसकी हिंसा का जवाब प्रतिहिंसा से दे किसी भी स्थिति में अहिंसा की दुहाई देते हुए पीठ फेर कर वह न भागे अर्थात कायरों की तरह मुँह छुपा न ले। कवि ने माना कि हिंसा के बदले में की जाने वाली हिंसा मनुष्य की कमजोरी को दर्शाती है। परंतु कायरता उससे अधिक अपवित्र है। कायर इंसान मृत्यु से पहले सौ बार मरता है। अतः कुछ भी बनो पर कायर मत बनो।

4. तेरी रक्षा का न मोल है ………. कायर मत बन । 

भावार्थ : कवि ने कहा है कि मानवता अमूल्य है, जिसे मूल्य देकर भी कोई खरीद नहीं सकता है। उसकी रक्षा के सामने व्यक्ति की सुरक्षा का कोई मूल्य नहीं है। सत्य तो यह है कि व्यक्ति के आत्म-बलिदान से मानवता अमर बनती है। मानवता हो वास्तव में मानव की सच्ची ज्योति है अतः किसी दुष्ट या नीच व्यक्ति के समक्ष कायरों की तरह आत्मसमर्पण न करके अपना सब कुछ मानवता पर न्यौछावर कर दें। बस भीरु कापुरुष की तरह जीवन मत बिताओ।

अभ्यासमाला

प्रश्न 1. ‘सही’ या ‘गलत’ रूप में उत्तर दो-

(क) कवि नरेंद्र शर्मा व्यक्तिवादी गीतिकवि के रूप में प्रसिद्ध हैं। 

उत्तर : सही।

(ख) नरेंद्र शर्मा की कविताओं में भक्ति एवं वैराग्य के स्वर प्रमुख है। 

उत्तर : गलत ।

(ग) पंडित नरेंद्र शर्मा की गीति प्रतिभा के दर्शन छोटी अवस्था में ही होने लगे थे।

उत्तर : सही।

(घ) ‘कायर मत बन’ शीर्षक कविता में कवि ने प्रतिहिंसा से दूर रहने का उपदेश दिया है।

उत्तर: गलत।

(ङ) कवि ने माना है कि प्रतिहिंसा व्यक्ति की कमजोरी को दर्शाती है।

उत्तर : सही।

प्रश्न 2. पूर्ण वाक्य में उत्तर दो

(क) कवि नरेंद्र शर्मा का जन्म कहाँ हुआ था ? 

उत्तर: कवि नरेंद्र शर्मा का जन्म सन् 1913 में उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिलांतर्गत जहाँगीर नामक स्थान में हुआ था।

(ख) कवि नरेंद्र शर्मा आकाशवाणी के किस कार्यक्रम के संचालक नियुक्त हुए थे ?

उत्तर: कवि नरेंद्र शर्मा आकाशवाणी में विविध भारती कार्यक्रम के संचालक नियुक्त हुए थे। 

(ग) ‘द्रौपदी’ खंड काव्य के रचयिता कौन हैं? 

उत्तर ‘द्रौपदी’ खंड काव्य के रचयिता नरेद्र शर्मा जी है। 

(घ) कवि ने किसे ठोकर मारने की बात कही है? 

उत्तर: कवि ने मनुष्य मात्र से यह आग्रह किया है कि उसके मार्ग पर आने वाली बाधाओं से वह साहस और दृढ़ता के साथ लड़े।

(ङ) ‘कायर मत बन’ शीर्षक कविता के रचयिता कौन है? 

उत्तर: ‘कायर मत बन’ शीर्षक कविता के रचयिता नहेंद्र शर्मा है। 

(च) पामर अगर ‘युद्ध देहि’ कहता तो उसका कर्त्तव्य क्या होना चाहिए?

उत्तर : ‘युद्ध देहि’ कहकर अगर कोई दुष्ट और नीच व्यक्ति सामने आ जाए तो मनुष्य को चाहिए कि या तो प्यार के बल पर उसे जीत ले, नहीं तो उसकी हिंसा का जवाब प्रतिहिंसा से दे ।

(छ) ‘ले-देकर’ जीने वाले को महत्वहीन क्यों कहा गया है?

उत्तर : कवि ने यहां समझौता करके कायर के समान जीने को जीना नहीं कहा है, उनके अनुसार व्यक्ति के आत्म-बलिदान से मानवता अमर बनती है।

(ज) मानवता ने मनुष्य को किस प्रकार सींचा है?

उत्तर : युगों से संचित मानवता व्यक्ति को खून-पसीने से सींचती है। 

(झ) व्यक्ति को किसके समक्ष आत्म-समर्पण नहीं करना चाहिए ? 

उत्तर : दुष्ट या नीच व्यक्ति के समक्ष आत्मसमर्पण नहीं करना चाहिए। 

प्रश्न 3. अति संक्षिप्त उत्तर दो (लगभग 25 शब्दों में) 

(क) ‘ले दे कर जीना क्या जीना ? कवि ने यहाँ क्या सन्देश दिया है?

उत्तर : कवि ने यहाँ समझौता करके कायर के समान जीने को जोना नहीं कहा है बाधाओं, विपत्तियों के साथ समझौता करके चलने वाला जीवन मूल्यहीन और निरर्थक होता है। युगों संचित मानवता व्यक्ति को खून-पसीने से सींचती है और मनुष्य होने की सार्थकता इसी में है उठो कर्म करो जीवन की नैया साहस के साथ पार लगाओ। कुछ भी करों पर कायर मत बनो।

(ख) कवि नरेंद्र शर्मा के गीतों एवं कविताओं की विषयगत विविधता पर प्रकाश डालिए।

उत्तर: कवि नरेंद्र आधुनिक हिंदी काव्यधारा के अंतर्गत छायावाद एवं छायावादोत्तर युगों में होने वाले व्यक्तिवादी गीति कविता के रचयिता के रूप में प्रसिद्ध है। व्यक्तिगत प्रणयानुभूति, विरह-मिलन के चित्र, सुख-दुःख के भाव, प्रकृति-सौंदर्य, आध्यात्मिकता, रहस्यानुभूति, राष्ट्रीय भावना और सामाजिक विषमता के चित्रण के साथ उनके गीतों एवं कविताओं में विषयगत विविधता सहज ही देखी जाती है।

(ग) नरेंद्र शर्मा जी की काव्य-भाषा पर टिप्पणी प्रस्तुत करो ।

उत्तर : यशस्वी, गीतिकार, नरेंद्र शर्मा की काव्य-भाषा सरल, प्रांजल एवं सांगीतिक लय-युक्त खड़ी बोली है। उन्होंने सहज प्रवाहमयी भाषा के जरिए कोमल और कठोर दोनों ही प्रकार के भावों को बखूबी अभिव्यक्ति दी है। माधुर्य एवं प्रसाद गुणों की बहुलता के साथ उनकी रचनाओं में कहीं ओजगुण का भी संचार हुआ है। आत्मीयता, चित्रात्मकता और सहज आलंकारिता उनकी काव्य-भाषा के तीन निराले गुण हैं।

(घ) कवि ने कैसे जीवन को जीवन नहीं माना है? 

उत्तर जो कायरों की तरह किसी भी स्थिति में अहिंसा की दुहाई देते हुए पीट फेर कर भाग जाता है अर्थात लड़ाई के मैदान से भाग खड़ा होता है। कष्ट से व्याकुल होकर रोता है गम के आँसू पोता है तथा समझौता करके जीता है। कवि ऐसे जीवन को जीवन नहीं माना है।

(ङ) कवि ने कायरता को प्रतिहिंसा से अधिक अपवित्र क्यों कहा है?  

उत्तर: कवि ने कायरता को प्रतिहिंसा से अधिक अपवित्र माना है, कारण कायर व्यक्ति अहिंसा की दुहाई देकर युद्ध के मैदान से भाग जाता है। ऐसे कायर लोग अपने जीवन को भी कलंकित करते हैं। कवि ने माना है कि हिंसा के बदले में की जाने वाली हिंसा मनुष्य की कमजोरी को दर्शाती है, परंतु कायरता उससे अधिक अपवित्र हैं। ऐसा व्यक्ति मृत्यु से पहले सौ बार मरता है। 

(च) कवि की दृष्टि में जीवन के सत्य का सही माप क्या है? 

उत्तर: कवि के अनुसार सत्य तो यह है कि व्यक्ति के आत्मबलिदान से मानवता अमर बनती है। युगों से संचित मानवता व्यक्ति को खून-पसीने से सींचती है, ऐसा ल व्यक्ति कर्मवीर होता है वह अनेक प्रकार की बाधाओं, मुसीबतों, संघर्षों और असफलताओं का साहस एवं दृढ़ता से मुकाबला करता हुआ अपने गंतव्य को प्राप्त करने में सफल होता है और यही जीवन के सत्य का सही माप है।

प्रश्न 4. संक्षेप में उत्तर दो (लगभग 50 शब्दों में )

(क) ‘कायर मत बन’ शीर्षक कविता का संदेश क्या है? 

उत्तर : कवि नरेंद्र शर्मा की दृष्टि मूलतः मानवतावादी रही है। मानवता का जयगान उनकी साहित्य-साधना का लक्ष्य रहा है। इसलिए उनकी रचनाओं से पुरुषार्थ, साहस एवं अडिंग- अविचल भाव का संदेश मिलता है। कवि ने मनुष्य मात्र से यह आग्रह किया है कि वह और कुछ भी बने, पर कायर कभी मत बने मनुष्य को चाहिए कि उसके मार्ग पर आनेवाली बाधाओं से वह साहस और दृढ़ता के साथ लड़े, कभी भी उनसे समझौते न करे, निराश होकर माथा न पटके, रोए गिड़गिड़ाए नहीं, कभी दुःख के आँसू न पीए

(ख) ‘कुछ न करेगा? किया करेगा- रे मनुष्य- यस कातर कंदन’ का आशय स्पष्ट करो।

उत्तर: कवि कहते हैं समझौता करके जीना भी कोई जिंदगी है कुछ नहीं करोगे तो क्या करोगे। कायर की भाँति वक्त के थपेड़ों को खाता हुआ निराशा के गर्त में गिरोगे, कर्महीन होकर भाग्य के सहारे बैठे रहोगे। हे मनुष्य! परिस्थितियों से जूझने के बजाए कातर-क्रंदन करोगे। कर्म भीरू बनकर युद्ध से पलायन करोगे। इसीलिए कवि कहते हैं कुछ भी बनो पर कायर मत बनो ।

(ग) या तो जीत प्रीति के बल पर, या तेरा पथ चूमे तस्कर’ का तात्पर्य बताओ। 

उत्तर : कवि कहते हैं अगर कोई दुष्ट या नीच व्यक्ति लड़ने के लिए सामने आ जाए या तुम्हारा मार्ग अवरुद्ध करने का प्रयास करे तो मनुष्य को चाहिए कि या तो प्यार के बल पर उसे जीत ले, नहीं तो उसकी हिंसा का जवाब प्रतिहिंसा से दे । कर्मशील बनकर अपने मानव नाम को सार्थक बनाए तथा अपने नाम पर निराशा का कलंक न लगने दे। मार्ग पर आनेवाली बाधाओं से वह साहस और दृढ़ता के साथ लड़े कभी भी उनसे समझौता न करे। 

(घ) मनुष्य को सर्वस्व अर्पण करने के लिए कवि ने क्यों कहा है ?

उत्तर : कवि ने कहा है कि मानवता अमूल्य है, उसकी रक्षा के सामने व्यक्ति की सुरक्षा का कोई मूल्य नहीं है। सत्य तो यह है कि व्यक्ति के आत्म बलिदान 5 से मानवता अमर बनती है। युगों से सचित मानवता व्यक्ति के खून-पसीने से सींचती है। अतः मनुष्य के लिए उचित यही है कि वह कभी कायर न बने और अपना सब कुछ मानवता पर न्योछावर कर दे।

(ङ) कवि ने प्रतिहिंसा को व्यक्ति की दुर्बलता क्यों कहा है? 

उत्तर: कवि ने माना है कि हिंसा के बदले में की जाने वाली हिंसा मनुष्य की कमजोरी को दर्शाती है, परंतु कायरता उससे अधिक अपवित्र है कायर व्यक्ति किसी भी स्थिति में अहिंसा की दुहाई देते हुए लड़ाई के मैदान से भाग खड़ा होता है। प्रतिहिंसा में तो बदले की भावना होती है पर शत्रु से मुकाबला करने के लिए उसकी हिंसा का जवाब प्रति हिंसा से देना कायरता नहीं है। अतः हिंसा के बदले में की जाने वाली प्रति हिंसा मनुष्य को दुर्बल बना देती है।

प्रश्न 5. सम्यक् उत्तर दो (लगभग 100 शब्दों में) 

(क) सज्जन और दुर्जन के प्रति मनुष्य के व्यवहार कैसे होने चाहिए। पठित ‘काया मत बन’ कविता के आधार पर उत्तर दो। 

उत्तर : सज्जन व्यक्ति के साथ अच्छा व्यवहार करना चाहिए। कवि ने कहा कि मानवता अमूल्य है। मानव जीवन का सच्चा आभूषण है। उसकी रक्षा के सामने व्यक्ति की सुरक्षा का कोई मूल नहीं है। अतः मनुष्य के लिए उचित यही है कि वह अपना सबकुछ मानवता पर न्योछावर कर दे। इसके विपरीत दुर्जन व्यक्ति के साथ ईंट का जवाब पत्थर से ही देना चाहिए। उनसे कभी समझौता नहीं करनी चाहिए। उसका विरोध करना चाहिए। उसकी हिंसा का जवाब प्रतिहिंसा से दे। किसी भी स्थिति में अहिंसा की दुहाई देते हुए पीठ फेर कर वह न भागे। उसके सामने आत्मसमर्पण न करे।

(ख) ‘कायर मत बन’ कविता का सारांश लिखो।  

उत्तर: संकलित ‘कायर मत बन’ शीर्षक कविता शर्मा की उत्कृष्ट रचनाओं में से अन्यतम है। इस प्रसिद्ध कविता में कवि ने मनुष्य मात्र से यह आग्रह किया है कि वह और कुछ भी बने पर कायर कभी मत बने। मनुष्य को चाहिए कि उसके मार्ग पर आने वाली बाधाओं से वह साहस और दृढ़ता के साथ लड़े कभी भी उनसे समझौता न करे। निराशा होकर माथा न पटके, रोए गिड़गिड़ाए नहीं, कभी दुःख के आँसू न पीए। लड़ाई करो कहकर अगर कोई दुष्ट और नीचे व्यक्ति सामने आ जाए, तो मनुष्य को चाहिए कि या तो प्यार के बल पर उसे जीत ले, नहीं तो उसकी हिंसा का जवाब प्रतिहिंसा से दें। किसी भी स्थिति में अहिंसा की दुहाई देते हुए पीठ फेर कर वह न भागे। कवि ने माना है कि हिंसा के बदले में की जाने वाली हिंसा मनुष्य की कमजोरी को दर्शाती है। परंतु कायरता उससे अधिक अपवित्र है। कवि ने कहा कि है कि मानवता अमूल्य है, उसकी रक्षा के सामने व्यक्ति की सुरक्षा का कोई मूल्य नहीं है। सत्य तो यह है कि व्यक्ति के आत्म बलिदान से मानवता अमर बनती है। युगों से संचित मानवता व्यक्ति को खून-पसीने से सींचती है अतः मनुष्य के लिए उचित यही है कि वह कभी कायर न बने और अपना सब कुछ मानवता पर न्योछावर कर दे।

(ग) कवि नरेंद्र शर्मा का साहित्यिक परिचय दो। 

उत्तर: कवि नरेंद्र शर्मा आधुनिक हिंदी काव्य धारा के अंतर्गत छायावाद एवं छायावादोत्तर युगों में होने वाले व्यक्तिवादी गीति कविता के रचयिता के रूप में प्रसिद्ध है। पंडित नरेंद्र शर्मा की गीति प्रतिभा के दर्शन छोटी अवस्था में ही होने लगे। उनके दो गीत संग्रह विद्यार्थी जीवन में ही प्रकाशित हुए। उनकी काव्य-कृतियों में प्रभात फेरी’, ‘प्रवासी के गीत’, ‘पलाशवन’, ‘मिट्टी के फूल’, ‘उत्तर जय’ (खंड काव्य), ‘हंसमाला’, ‘रक्त चंदन’, ‘कदली वन’, ‘द्रौपदी’ (खंड काव्य) और ‘सुवर्ण’ (खंड काव्य) विशेष रूप से उल्लेखनीय है ‘कड़वी-मीठी बातें’ उनका कहानी संग्रह है। उनका काव्य सृजन सदैव ही एक अमूल्य धरोहर के रूप में हिंदी साहित्य में स्मृतिगत रहेगा।

प्रश्न 6. प्रसंग सहित व्याख्या करो  

(क) “ले-देकर जीना…….. युगों तक खून पसीना।” 

उत्तर : प्रसंग : कवि ने यहाँ समझौता करके कायर के समान जीने को जीना नहीं कहा है। उनके अनुसार व्यक्ति के आत्म-बलिदान से मानवता अमर बनती है। 

व्याख्या : कवि कहते हैं जीवन से समझौता करके क्या जीना। कब तक कायरों की तरह गम के आँसू बहाओगे, कवि कहते हैं कि मानवता अमूल्य है। मानवता रूपी आभूषण पहनने वाले का समाज में सत्कार होता है। मनुष्य के आत्म-बलिदान से मानवता अमर बनती है। युगों से संचित मानवता व्यक्ति को खून पसीने से सींचती है। और मनुष्य होने की सार्थकता इसी में है।

(ख) “युद्ध देहि’ कहे जब……….. तेरा पथ चूमे तस्कर ।” 

उत्तर : प्रसंग : कवि कहते हैं कि दुष्ट और नीच व्यक्ति के समक्ष कभी आत्म- समर्पण नहीं करना चाहिए। विरोध करना चाहिए।

व्याख्या युद्धं देहि अर्थात लड़ाई करो कहकर अगर कोई दुष्ट और नीच व्यक्ति सामने आ जाए तो मनुष्य को चाहिए कि या तो प्यार के बल पर उसे जीत ले, नहीं तो उसकी हिंसा का जवाब प्रतिहिंसा से दे किसी भी स्थिति में अहिंसा की दुहाई देते हुए पीठ फेर कर वह न भागे अर्थात् कायरों की तरह मुँह छुपा न ले।

Sl. No.Contents
Chapter 1नींव की ईंट
Chapter 2छोटा जादूगर
Chapter 3नीलकंठ
Chapter 4भोलाराम का जीव
Chapter 5सड़क की बात
Chapter 6चिट्ठियों की अनूठी दुनिया
Chapter 7साखी
Chapter 8पद-त्रय
Chapter 9जो बीत गयी
Chapter 10कलम और तलवार
Chapter 11कायर मत बन
Chapter 12मृत्तिका

भाषा एवं व्याकरण ज्ञान 

1. खाली जगहों में ‘न’, ‘नहीं’ अथवा ‘मत’ का प्रयोग करके वाक्यों को फिर से लिखों :

(क) तु कभी भी कायर ……. बन ।

उत्तर : तु कभी भी कायर मत बन ।

(ख) तुम कभी कायर …….. बनो ।

उत्तर : तुम कभी कायर मत बनो ।

(ग) आप कभी भी कायर …….. बने ।

उत्तर : आप कभी भी कायर न बने ।

(घ) हमें कभी भी कायर बनना ……. चाहिए ।

उत्तर : हमें कभी भी कायर बनना नहीं चाहिए । 

2. अर्थ लिखकर निम्नलिखित मुहावरों का वाक्य में प्रयोग करो : 

ले-दे कर जीना,   गम के आँसू पीना,    खून-पसीना बहाना,    पीठ फेरना,    टस से मस न होना,   कालिख लगना,     कमर कसना,    आँचल में बाँधना ।

उत्तर : (i) ले-दे कर जीना (समझोता करके जीना) : कवि नरेंद्र शर्मा के अनुसार ले-दे कर जीना जीवन ही नहीं है ।

(ii) गम के आँसू पीना (दुःख को दबाकर रहजाना) : कभी भी शत्रु के सामने सिर झुकाकर गम के आंसुओं को पीते रहना नहीं चाहिए । 

(iii) खून-पसीना बहाना (बहुत कष्ट उठाना): मानवता की रक्षा के लिए मनुष्य को खून-पसीना बहाना ही पड़ता है ।

(iv) पीठ फेरना (लड़ाई की मैदान से भाग खड़ा होना) : जब कोई दुष्ट युद्ध के लिए ललकारता है तब हमें पीठ फेरना नहीं चाहिए ।

(v) टस से मस न होना (अविचलित रहना) : अनेक अत्याचार करने पर भी मीराबाई टस से मस न हुई थी ।

(vi) कालिख लगना (कलंकित होना) : सज्जन व्यक्ति कभी भी दुष्ट का साथ देकर कालिख लगाना नहीं चाहता ।

(vii) कमर कसना (प्रस्तुत होना) : विद्यार्थियों को परीक्षा के लिए कमर कसना चाहिए ।

(viii) आँचल में बाँधना (किसी बात को अच्छी तरह से याद रखना) शिक्षकों की बातें सिर्फ बुद्धिमान विद्यार्थी ही आँचल में बाँध सकता है ।

3. निम्नलिखित वाक्यों को शुद्ध रूप में लिखो :

(क) सभा में अनेकों लोग एकत्रित हुए है । 

उत्तर : सभा में अनेक लोग एकत्र हुए हैं ।

(ख) मुझे दो सौ रुपए चाहिए ।

उत्तर : मुझे दो सौ रुपया चाहिए । 

(ग) बच्चे छत में खेल रहे है ।

उत्तर : बच्चे छत पर खेल रहे है ।

(घ) मैंने यह घड़ी सात सौ रुपए से ली है ।

 उत्तर : मैंने यह घड़ी सात सौ रुपए में ली है । 

(ङ) मेरे को घर जाना है । 

उत्तर : मुझे घर जाना है । 

(च) बच्चे को काटकर गाजर खिलाओ ।

उत्तर : बच्चे को गाजर काटकर खिलाओ ।

(छ) उसने पुस्तक पढ़ चुका ।

 उत्तर : उसने पुस्तक पढ़ चुकी ।

(ज) जब भी आप आओ, मुझसे मिलो ।

उत्तर : जब भी आप आए, मुझसे मिलें । 

झ) हम रात को देर से भोजन खाते है ।

उत्तर : हैम रात को देर से भोजन करते है । 

(ञ) बाघ और बकरी एक ही घाट पानी पीति है ।

 उत्तर : बाघ और बकरी एक ही घाट पानी पीते है ।

4. निम्नलिखित शब्दों से प्रत्यय प्रत्ययो को अलग करो : 

     आधुनिक, विषमता, भलाई, लड़कपन, बुढ़ापा, मालिन, गरीबी

उत्तर : अधुना + इक = आधुनिक । (इक्) 

बिषम + ता =  बिषमता । (ता)

भला + आई = भलाई । (आई)

लड़का + पन = लड़कपन । (पन)

बुढ़ा + पा = बुढ़ापा । (पा)

माली + इन = मालिन । (इन)

गरीब + ई = गरीबी । (ई)

5. कोष्ठक में दिए गये निर्देशानुसार वाक्यों को परिवर्तित करो :

(क) मैंने एक दुबला-पतला आदमी देखा था। (मिश्र वाक्य बनाओ) 

उत्तर : मैंने एक आदमी को देखा था जो दुबला-पतला था ।

 (ख) जो विद्यार्थी मेहनत करता है वह अवश्य सफल होता है (सरल वाक्य बनाओ) । 

उत्तर : विद्यार्थी मेहनत करने से अवश्य सफल होता है ।

 (ग) किसान को अपने परिश्रम का लाभ नहीं मिलता । (संयुक्त वाक्य बनाओ)

उत्तर : किसान परिश्रम करता पर उसे लाभ नहीं मिलता । 

(घ) लड़का बजार जएगा । (निषेधवाचक वाक्य बनाओ) 

उत्तर : लड़का बाजार नहीं जाएगा ।

(ङ) लड़की गाना गएगी । (प्रश्नवाचक वाक्य बनाओ) 

उत्तर : लड़की क्या करेगी

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