SEBA Class 10 Hindi (Elective) Solution| Chapter-2| छोटा जादूगर

SEBA Class 10 Hindi (Elective) Solution| Chapter-2| छोटा जादूगर सूची में प्रत्येक अध्याय का उत्तर प्रदान किया गया है ताकि आप आसानी से विभिन्न अध्याय एनसीईआरटी समाधान कक्षा 10 आलाक भाग-2 में खुल सकें और एक की आवश्यकता का चयन कर सकें। इसके अलावा आप एनसीईआरटी (CBSE) पुस्तक दिशानिर्देशों के अनुसार विशेषज्ञ शिक्षकों द्वारा इस खंड में NCERT पुस्तक ऑनलाइन पढ़ सकते हैं। ये समाधान NCERT हिंदी (MIL) समाधान का हिस्सा हैं। यहां हमने कक्षा 10 NCERT आलाक भाग -2 पाठ्य पुस्तक समाधान आलाक भाग -2 के SEBA Class 10 Hindi (Elective) Solution| Chapter-2| छोटा जादूगर लिए दिए हैं आप यहां इनका अभ्यास कर सकते हैं।

SEBA Class 10 Solutions

SEBA CLASS 10 (Ass. MEDIUM)

SEBA CLASS 10 (Bangla MEDIUM)

SEBA CLASS 10 (English MEDIUM)

SEBA Class 10 Hindi (Elective) Solution| Chapter-2| छोटा जादूगर

SEBA Class 10 Hindi (Elective) Solution| Chapter-2| छोटा जादूगर ये उत्तर संबंधित विषयों के अनुभवी प्रोफेसरों द्वारा सावधानीपूर्वक तैयार किए जाते हैं। उनका उद्देश्य छात्रों को विषय की उचित समझ में मदद करना और उनके कौशल और अभिव्यक्ति की कला में सुधार करना है। यदि ये उत्तर उन उद्देश्यों को पूरा करते हैं जिनके साथ वे तैयार किए गए हैं, तो हम अपने प्रयास को पर्याप्त रूप से पुरस्कृत मानेंगे। इन उत्तरों में और सुधार के लिए किसी भी सुझाव का हमेशा स्वागत है।

छोटा जादूगर

अभ्यासमाला

प्रश्न 1. सही विकल्प का चायन करो : 

(क) बाबू जयशंकर प्रसाद का जन्म हुआ था-

(अ) काशी 

(आ) इलाहाबाद 

(इ) पटना 

(ई) जयपुर में 

उतर : काशी ।

(ख) जयशंकर प्रसाद जी का साहित्यिक जीवन किस नाम से आरंभ हुआ था 

(अ) ‘विद्याधर’ नाम से 

(आ) ‘कलाधर’ नाम से

(इ) ‘ज्ञानधर’ नाम से 

(ई) ‘करुणाधर’ नाम से

उत्तर: ‘कलाधर’ नाम से।

(ग) प्रसाद जी का देहावसान हुआ-

(अ) 1935 ई. में 

(आ) 1936 ई. में 

(इ) 1937 ई. में 

(ई) 1938 ई. में 

उत्तर : 1937 ई. में 

(घ) कार्निवल के मैदान में लड़का चुपचाप किनको देख रहा था ? 

(अ) चाय पीने वालों को

(आ) मिठाई खानों वालों को 

(इ) गाने वालों को उत्तर: शरबत पीने वालों को।

(ई) शरबत पीने वालों को

उत्तर (ई) शरबत पीने वालों को

(ङ) लड़के को जादूगर का कौन-सा खेल अच्छा मालूम हुआ ?

(अ) खिलौने पर निशाना लगाना 

(आ) चूड़ी फेंकना 

(इ) तीर से नंबर छेदना 

(ई) ताश का खेल दिखाना

उत्तर : खिलौने पर निशाना लगाना। 

प्रश्न 2. पूर्ण वाक्य में उत्तर दो  : 

(क) जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित प्रथम कहानी का नाम क्या है ? 

उत्तर : जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित प्रथम कहानी का नाम है- ‘ग्राम’ जो 1911 ई. में ‘इंदु’ नामक पत्रिका में प्रकाशित हुई थी।

(ख) प्रसाद जी द्वारा विरचित महाकाव्य नाम बताओ।

उत्तर: प्रसाद जी द्वारा विरचित महाकाव्य का नाम है- लहर और कामायनी । 

(ग) लड़का जादूगर को क्या समझता था ?

उत्तर : लड़का जादूगर को बिल्कुल निकम्मा समझता था। 

(घ) लड़का तमाशा देखने परदे में क्यों नहीं गया था ?

उत्तर : लड़का तमाशा देखने परदे में इसलिए नहीं गया था कारण उसके पास टिकट नहीं था।

(ङ) श्रीमान ने कितने टिकट खरीद कर लड़के को दिए थे ? 

उत्तर : श्रीमान जी ने बारह टिकट खरीदकर उस लड़के को दिए थे।

(च) लड़के ने हिंडोले से अपना परिचय किस प्रकार दिया था ?

उत्तर : लड़के ने हिंडोले से पुकार कर बोला- बाबूजी मैं हूँ छोटा जादूगर

(छ) बालक (छोटे जादूगर) को किसने बहुत ही शीघ्र चतुर बना दिया था ?

उत्तर : बालक को सांसारिक परिस्थितियों की माँग तथा आवश्यकता ने शीघ्र चतुर बना दिया था। 

(ज) श्रीमान कलकत्ते में किस अवसर पर छुट्टी बिता रहे थे ?

उत्तर : श्रीमान कलकत्ते में बड़े दिन की छुट्टी मनाने आए थे।

(झ) सड़क किनारे कपड़े पर सजे रंगमंच पर खेल दिखाते समय छोटे जादूगर की वाणी में स्वभावसुलभ प्रसन्नता की तरी क्यों नहीं थी ? 

उत्तर : सड़क के किनारे पर सजे रंगमंच पर खेल दिखाते हुए भी छोटा जादूगर का मन अशांत था। खेल दिखाते हुए सबको हँसा रहा था पर उसकी वाणी में वह प्रसन्नता नहीं थी। माँ आज उसे तुरंत चले आने को कहा था, बोली थी मेरा समय आ गया है। इसलिए आज वह इतना उदास है।

(ञ) मृत्यु से ठीक पहले छोटे जादूगर की माँ के मुँह से कौन-सा अधूरा शब्द निकला था ? 

उत्तर : मृत्यु से ठीक पहले छोटे जादूगर की माँ के मुँह से ‘बे…’ अधूरा शब्द निकला था। 

प्रश्न 3. अर्ति संक्षिप्त उत्तर दो (लगभग 25 शब्दों में)

(क) बाबू जयशंकर प्रसाद की बहुमुखी प्रतिभा का परिचय किन क्षेत्रों में मिलता ?

उत्तर : बाबू जयशंकर प्रसाद एक ऐसे विराट एवं विलक्षण व्यक्तित्व के रूप में वतरित हुए थे, जिसमें विविध प्रकार की साहित्यिक प्रतिभाएँ विद्यमान थीं, जो युग रा को नवीन मोड़ देने में सक्षम था और जिसमें हिंदी साहित्य को समृद्ध बनाने अपार संभावनाएँ छिपी हुई थी। वे बहुमुखी प्रतिभा के कलाकार और शिव के सक थे। हिंदी साहित्य के क्षेत्र में नवयुग का द्वार उन्हीं के द्वारा खोला गया था।

हिंदी साहित्य के इतिहास में यह नया युग ‘छायावादी युग’ के नाम से जाना जाता है। इस प्रकार जयशंकर प्रसाद छायावादी युग के प्रवर्तक थे। उनके द्वारा रचित ‘कामायनी’ एक महान कृति है। 

(ख) श्रीमान ने छोटे जादूगर को पहली भेंट के दौरान किस रूप में देखा था ?

उत्तर लेखक बड़े दिन की छुट्टी में कलकत्ता गए थे। वहीं पर कार्निवल के मैदान में एक छोटे फुहारे के पास छोटे जादूगर को चुपचाप शरबत पीने वालों को देखते हुए देखा था। जिसके गले में फटे कुरते के ऊपर एक मोटी-सी सूत की रस्सी पड़ी थी और जेब में कुछ ताश के पत्ते थे। उसके मुँह पर गम्भीर विषाद के साथ धैर्य की रेखा थी।

(ग) “वहाँ जाकर क्या कीजिएगा ?” छोटे जादूगर ने ऐसा कब कहा था ?

उत्तर : लेखक ने जब छोटे जादूगर से पूछा उस परदे में क्या है? तुम वहाँ गए थे? लड़के ने बोला वहाँ जाने से टिकट लगता है। हमारे पास नहीं है। तब लेखक कहते हैं, चलो मैं तुम्हें ले चलता हूँ। तब लड़के ने कहा था वहाँ जाकर क्या कीजिएगा। वह तो खिलौने पर निशाना लगाना चाहता था।

(घ) निशानेबाज के रूप में छोटे जादूगर की कार्य कुशलता का वर्णन करो।

उत्तर लेखक छोटे जादूगर के लिए बारह टिकट खरीदकर दिए थे। वह पक्का निशानेबाज निकला। उसका कोई गेंद खाली नहीं लगा गया। सभी देखने वाले ढंग रह गए। इस तरह निशाना तो बड़े लोग भी नहीं पाते, जितना यह छोटा-सा लड़का निशाना लगा रहा था। उसकी क्रिया कौशल देखकर सभी उसकी तारीफ कर रहे थे। 

(ङ) कलकत्ते के बोटानिकल उद्यान में श्रीमान श्रीमती को छोटा जादूगर किस रूप में मिला था ?

उत्तर : कलकत्ते के सुरम्य बोटानिकल उद्यान में लेखक और उनकी पत्नी झील के किनारे एक वृक्ष की छाया में बैठकर बात कर रहे थे कि छोटा जादूगर दिखाई पड़ा। उसके हाथ में एक खादी का झोला था। साफ कपड़े पहना था। सिर पर उनका रूमाल सूत की रस्सी से बँधा हुआ था। मस्तानी चाल से झूमता हुआ आकर कहने लगा- बाबूजी नमस्ते, आज कहिए तो खेल दिखाऊँ ?

(च) कलकत्ते के बोटानिकल उद्यान में श्रीमान ने जब छोटे जादूगर को ‘लड़के’ कहकर संबोधित किया, तो उत्तर में छोटे जादूगर ने क्या कहा 

उत्तर: जादूगर का खेल देखकर लेखक की पत्नी ने धीरे से उसे एक रुपया दे दिया। लड़का बहुत खुश हुआ। एक रुपया देने के कारण लेखक को थोड़ा गुस्सा आया इसलिए छोटा जादूगर को ‘लड़के !’ कहकर संबोधित किया। तब लड़के ने कहा मुझे छोटा जादूगर कहिए, यही मेरा नाम है। इसी से मेरी जीविका चलती है।

(छ) “आज तुम्हारा खेल जमा क्यों नहीं ?”- इस प्रश्न के उत्तर में छोटा जादूगर ने क्या कहा ?

अथवा, 

छोटे जादूगर के (आज) खेल न जमने का क्या कारण है ?

उत्तर : उस दिन भी छोटे जादूगर सड़क के किनारे बैठकर अपना खेल दिखा रहा था, पर उसकी वाणी में स्वभावसुलभ प्रसन्नता नहीं था। वह औरों को तो हँसा रहा था पर स्वयं उदास था। खेल समाप्त होने के बाद जब लेखक ने कहा- आज तुम्हारा खेल जमा क्यों नहीं, तब लड़के ने कहा- माँ बीमार है। आज तुरंत चले आने को कहा है और बोली मेरा समय आ गया है।

(ज) छोटे जादूगर के चरित्र की किन्हीं तीन विशेषताएं लिखो। 

उत्तर छोटा जादूगर प्रशाद जी की एक मनोहर कहानी है छोटा जादूगर जो एक तेरह चौदह साल का लड़का जो अपनी आर्थिक विपन्नता और प्रतिकूल परिस्थितियों से संघर्ष करता है। अपने पावों पर खड़ा होता है। उसका व्यवहार सबके लिए मधुर था। आर्थिक परिस्थितियों में भी स्वाभिमानी है। गंभीर विषाद में भी धैर्य के साथ काम करता है। लेखक के शरबत पीलाने पर कहा था शरबत न पीलाकर आप मेरा खेल देखकर मुझे कुछ पैसा दिया होता तो मुझे अधिक प्रसन्नता होती। मां के लिए दवा-दारू ले सकता। इसी से पता चलता है कि वह कितना आत्मस्वाभिमान है।

प्रश्न 4. संक्षिप्त उत्तर दो (लगभग 50 शब्दों में )

(क) प्रसाद जी की कहानियों की विशेषताओं का उल्लेख करो 

उत्तर : प्रसाद जी उत्कृष्ट कहानीकार थे। इनकी कहानियों में भारत का अतीत साकार हो उठता है। कहानीकार के रूप में आप भाववादी धारा के प्रवर्तक कहलाएँ। आपकी अधिकांश कहानियों में चारित्रिक उदारता, प्रेम, करुणा, त्याग, बलिदान, अतीत के प्रति मोह से युक्त भावमूलक आदर्श की अभिव्यक्ति हुई है। ‘प्रतिध्वनि’, ‘आकाश ‘दीप’, ‘आंधी’ और ‘इंद्रजाल’ उनके प्रसिद्ध कहानी संग्रह है। उन्होंने अपने समकालीन समाज की आर्थिक विपन्नता, निरीहता, अन्याय और शोषण को भी कुछेक कहानियों में चित्रित किया है।

(ख) क्यों जी, तुमने इसमें क्या देखा? इस प्रश्न का उत्तर छोटे जादूगर ने किस प्रकार दिया था?

उत्तर: क्यों जी, तुमने इसमें क्या देखा। लेखक के पूछने पर जादूगर, निःसंकोच होकर कहने लगा, मैंने सब देखा। यहाँ चूड़ी फेंकते है। खिलौने पर किस तरह निशाना लगाते हैं। तीर से किस तरह नंबर छेदते हैं। उससे अच्छा तो ताश के खेल में दिखा सकता हूँ। वह जादूगर तो बिल्कुल निकम्मा है। मुझे तो सिर्फ खिलौने पर निशाना लगाना अच्छा मालूम हुआ। उसकी वाणी में ही रुकावट न थी।

(ग) ” और तुम तमाशा देख रहे हो ?” लेखक के इस प्रश्न के उत्तर में छोटे जादूगर ने क्या कहा है ? 

उत्तर : लेखक के इस प्रश्न के उत्तर में छोटे जादूगर के मुँह पर तिरस्कार की हँसी फूट पड़ी। उसने कहा- तमाशा देखने नहीं, दिखाने निकला हूं। तमाशा दिखाकर कुछ पैसे ले जाऊँगा, तो माँ को पथ्य दूंगा। मुझे शरबत न पिलाकर आपने मेरा खेल देखकर मुझे कुछ दे दिया होता, तो मुझे अधिक प्रसन्नता होती। 

(घ) अपने माँ-बाप से संबंधित प्रश्नों के उत्तर में छोटे जादूगर ने क्या-क्या कहा था ? 

उत्तर : लेखक के पूछने पर छोटा जादूगर अपने माँ-बाप के बारे में बताया- माँ और बाबूजी है माँ बहुत बीमार है और बाबूजी देश के लिए जेल में है। मैं भी जेल जाना चाहता था, पर माँ के कारण जान पाया। मेरे जाने के बाद माँ को कौन देखेगा। मुझे भी इच्छा होती है, देश की सेवा करने की, पर माँ भी तो मातृभूमि जैसी ही प्यारी है। एक माँ की सेवा न कर पाया तो क्या हुआ अपनी माँ की सेवा तो कर पाऊँगा। मैं यह खेल तमाशा दिखाकर जो कुछ पैसे ले जाऊँगा, तो माँ को पथ्य दूंगा। वह गर्व से बोला था। 

(ङ) श्रीमान ने तेरह चौदह वर्ष के छोटे जादूगर को किसलिए आश्चर्य से देखा था?

उत्तर : लेखक उस छोटे से लड़के की बात सुनकर आश्चर्य से उसे देखने लगे। इतनी कम उम्र में ही आर्थिक विपन्नता और प्रतिकूल परिस्थितियों से संघर्ष करना सिखाया। अपने माँ-बाप के प्रति भक्ति, मातृभूमि के प्रति भक्ति, उसका मधुर व्यवहार, देश के लिए बाप को जेल जाने पर वह गर्व महसूस करना। साथ ही तेरह चौदह साल में ही खुद भी देश के लिए जेल जाना चाहता था पर माँ के कारण वह जा न पाया। इस छोटे से लड़के में स्वाभिमान, मातृ भक्ति देखकर लेखक मुग्ध हो जाते। हैं। उनके अभाव में भी संपूर्णता थी। 

(च) श्रीमती के आग्रह होने पर छोटे जादूगर ने किस प्रकार अपना खेल दिखाया?

उत्तर : श्रीमती के आग्रह पर छोटे जादूगर के सभी खिलौने उसके खेल में अपना अभिनय करने लगे। बिल्सी रूठती है। भालू उसे मनाता है। बंदर घुड़कने लगा। गुड़िया का ब्याह हुआ। गुड्डा वर काना निकला। यह सब वह खिलौने से अभियन करके दिखा रहा था। लड़के ने अपनी बातों से और खेल दिखाकर सबका मन जीत लिया था। 

(छ) हावड़ा की ओर आते समय छोटे जादूगर और उसकी माँ के साथ श्रीमान की भेंट किस प्रकार हुई थी ?

उत्तर : लेखक लताकुंज देखने के बाद जब हावड़ा की ओर मोटर से आ रहे थे तथा रह-रह कर छोटे जादूगर की बात सोच रहे थे, तभी एक झोपड़ी के पास कंबल कांधे पर डाले वह खड़ा था लेखक ने मोटर रोककर उससे पूछा तुम यहाँ कहाँ ? लड़के ने कहा माँ अब यही रहती है। अस्पताल वालों ने निकाल दिया। उसकी बात सुनकर लेखक गाड़ी से उतरकर उस झोड़पी में गए, जहाँ उसकी माँ फटे कपड़ों से लदी हुई काँप रही थी। छोटा जादूगर कंबल को माँ के शरीर पर डालकर चिपकते हुए कहा, माँ यह दृश्य देखकर उनकी आँखों से आँसू निकल पड़े।

(ज) सड़क के किनारे कपड़े पर सजे रंगमंच पर छोटे जादूगर किस मनःस्थिति में और किस प्रकार खेल दिखा रहा था ?

उत्तर : सड़क के किनारे पर सजे रंगमंच पर छोटे जादूगर अपना खेल तो दिखा रहा था, पर आज उसका खेल जमा नहीं। आज वह उदास था। रह-रहकर माँ की याद आ रही थी। माँ ने कहा था, बेटे आज जल्दी आ जाना मेरी अंतिम घड़ी समीप है। इसीलिए आज कुछ विचलित है। वह खेल तो दिखा रहा था पर उसकी आवाज में वह स्वभावसुलभ प्रसन्नता न थी। वह औरों को हँसाने की चेष्टा कर रहा था पर स्वयं भीतर से काँप रहा था।

(झ) छोटे जादूगर और उसकी माँ के साथ श्रीमान की अंतिम भेंट का अपने शब्दों में वर्णन करो।

उत्तर : उस दिन भी छोटा जादूगर सड़क के किनारे अपना खेल दिखा रहा था, पर उसकी आवाज में वह स्वभावसुलभ प्रसन्नता न थी। वहाँ लेखक से लड़के की मुलाकात हुई। लेखक ने जब कहा आज तुम्हारा खेल जमा क्यों नहीं। तब छोटा जादूगर बोला, माँ ने आज जल्दी बुलाया है। माँ ने कहा मेरी घड़ी समीप है। लेखक गुस्सा होते हैं। उसे तुरंत गाड़ी में बैठाकर उसके झोपड़ी के पास पहुँचे। जादूगर दौड़कर झोपड़ी में माँ-माँ पुकारता हुआ घुसा। लेखक भी पीछे थे, किंतु तब तक माँ के मुँह से आधा शब्द ‘वे…’ ही निकला। उसके दुर्बल हाथ उठकर गिर गए। जादूगर माँ से लिपटकर रो रहा था। लेखक भी स्तब्ध हो गए। उनके मुँह से एक आवाज भी न निकली।

Sl. No.Contents
Chapter 1नींव की ईंट
Chapter 2छोटा जादूगर
Chapter 3नीलकंठ
Chapter 4भोलाराम का जीव
Chapter 5सड़क की बात
Chapter 6चिट्ठियों की अनूठी दुनिया
Chapter 7साखी
Chapter 8पद-त्रय
Chapter 9जो बीत गयी
Chapter 10कलम और तलवार
Chapter 11कायर मत बन
Chapter 12मृत्तिका

प्रश्न 5. सम्यक् उत्तर दो (लगभग 100 शब्दों में) 

(क) बाबू जयशंकर प्रसाद की साहित्यिक देन का उल्लेख करो।

उत्तर : जयशंकर प्रसाद आधुनिक हिंदी काव्य के सर्वप्रथम कवि थे। उन्होंने अपनी कविताओं में सूक्ष्म अनुभूतियों का रहस्यवादी चित्रण प्रारंभ किया, जो उनके काव्य की एक प्रमुख विशेषता है। उनके इस नवीन प्रयोग ने काव्य जगत में एक क्रांति उत्पन्न कर दी और एक नए युग का सूत्रपात्र किया हिंदी साहित्य के इतिहास में यह नया युग ‘छायावादी युग’ के नाम से जाना जाता है। इस प्रकार जयशंकर प्रसाद जी छायावादी युग के प्रवर्तक थे। उनके द्वारा रचित ‘कामायनी’ (महाकाव्य) एक महान कृति है। उनकी कृतियों काव्य रचनाएँ- उर्वशी, वनमिलन, अयोध्या का उद्धार, झरना, आँसू (खण्ड काव्य), लहर और कामायनी (महाकाव्य ) ।

कंकाल, तितली और झावती उपन्यास है।

‘प्रतिध्वनि’, ‘आकाश दीप’, ‘आँधी’ और ‘इंद्रजाल’ उनके प्रसिद्ध कहानी संग्रह है। इसके अलावा छोटा जादूगर, पुरस्कार, ममता, गुदड़ी के लाल, अघोरी का मोह उनकी प्रसिद्ध कहानियाँ हैं।

(ख) छोटा जादूगर के मधुर व्यवहार एवं स्वाभिमान पर प्रकाश डालो। 

उत्तर छोटा जादूगर प्रसाद जी की एक ऐसी मनोरम कहानी है, जिसमें आर्थिक विपन्नता और प्रतिकूल परिस्थितियों से संघर्ष करते हुए तेरह चौदह साल के एक लड़के के चरित्र को आदर्शात्मक रूप में उभारा गया है। परिस्थिति की माँग से वह बालक अपने पाँवों पर कैसे खड़ा हुआ। उसके मुँह पर गंभीर विषाद के साथ धैर्य की रेखा है। उसका व्यवहार सबके लिए मधुर था। आर्थिक परिस्थितियों में स्वाभिमानी था। लेखक के शरबत पीलाने पर कहा था- शरबत न पीलाकर आप मेरा खेल देखकर मुझे कुछ पैसा दिया होता, तो मुझे अधिक प्रसन्नता होती। माँ के लिए दवा-दारू ले सकता। इसी से पता चलता है कि वह कितना आत्मस्वाभिमानी था।

(ग) छोटे जादूगर की चतुराई और कार्य कुशलता का वर्णन करो। 

उत्तर : छोटा जादूगर मधुर व्यवहार के साथ चालाक, चतुर भी था। अपनी कार्य- कुशलता से खेल दिखाकर सबका मनोरंजन करता था, निशाना तो ऐसे लगाता था, उसके सामने अच्छे-अच्छे निशानेबाज भी चूक जाते हैं उसके खेल में चतुराई थी पर धोखे से पैसा कमाना नहीं चाहता। यह उसकी चारित्रिक उदारता थी। खिलौने को अभिनय करके इतनी कुशलता से खेल दिखाता था कि सब देखकर मुग्ध हो जाते. थे। सबको खेल दिखाकर हँसाता भी था, जिससे पता चलता था कि कार्य कुशलता के साथ-साथ उसमें चतुराई भी थी।

(घ) छोटा जादूगर के देश-प्रेम और मातृ-भक्ति का परिचय दो। 

उत्तर छोटा जादूगर जो तेरह चौदह साल से ही संघर्ष करता हुआ अपने पैरों पर खड़ा होता है। फिर भी वह खुश था। खेल दिखाकर अपनी माँ की सेवा करता, बाप देश के लिए जेल में है। खुद भी जेल जाना चाहता था पर माँ को कौन देखेगा !

उसके अंदर भी देश-प्रेम की भावना थी, पर माँ भी तो मातृभूमि जैसी ही प्यारी है। एक माँ की सेवा न कर पाया तो क्या हुआ। अपनी माँ की सेवा तो कर पाया। उसमें देश-प्रेम और मातृ-भक्ति कूट-कूट कर भरी थी । 

(ङ) छोटे जादूगर की कहानी से तुम्हें कौन-सी प्रेरणा मिलती है। 

उत्तर : छोटे जादूगर की कहानी प्रसाद जी की भावनात्मक कहानी है। इस कहानी से हमें प्रेरणा मिलती है कि प्रतिकूल परिस्थितियों में भी अपना धैर्य नहीं खोना चाहिए। जिस प्रकार छोटा जादूगर परिस्थिति से जूझ कर भी धैर्य नहीं खोया, मन दु:खी होने पर भी अपना खेल दिखाकर सबको हँसाता था, पर खुद अंदर ही अंदर माँ के लिए रोता था। इसी से मता चलता है कि स्वाभिमान तथा मातृ-भक्ति उसमें कूट-कूट कर भरी है। इस कहानी में धैर्य, कर्त्तव्य और स्वाभिमान की प्रेरणा मिलती है।

प्रश्न 6. सप्रसंग व्याख्या करो : 

(क) “मैं उसकी ओर न जाने क्यों आकर्षित हुआ। उसके अभाव में भी सम्पूर्णता थी।” 

उत्तर : संदर्भ : प्रस्तुत गद्यावतरण श्री जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित ‘छोटा जादूगर’ से लिया गया है। 

प्रसंग : इस कहानी में परिस्थिति की माँग से एक बालक किस प्रकार अपने पाँवों पर खड़ा हो जाता है- उसका यहाँ हृदयग्राही चित्रण हुआ है।

व्याख्या लेखक कलकत्ते में कार्निवल के मैदान में एक छोटा फुहारे के पास खड़े थे। वहाँ पर लेखक ने एक लड़के को देखा जो चुपचाप शरबत पीने वालों को देख रहा था। उसके गले में फटे कुरते के ऊपर एक मोटी सी सूत की रस्सी पड़ी थी और जेब में कुछ ताश के पत्ते थे। उसके मुँह पर गंभीर विषाद के साथ धैर्य की रेखा थी। लेखक उसकी ओर न जाने क्यों आकर्षित हुए। उसके अभाव में भी सम्पूर्णता थी। दृढ़ और स्वाभिमानी था। इसलिए लेखक उस छोटे से लड़के की ओर आकर्षित हुए। 

(ख) ” श्रीमती की वाणी में वह माँ की-सी मिठास थी, जिसके सामने किसी भी लड़के को रोका नहीं जा सकता।”  

उत्तर : संदर्भ : प्रस्तुत गद्यावतरण श्री जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित ‘छोटा जादूगर’ से लिया है।

प्रसंग : इस कहानी में लेखक ने एक माँ का प्यार बड़े सुंदर भावात्मक भाव से चित्रण किया है।

व्याख्या : बोटानिकल उद्यान में लेखक अपने परिवार के साथ बैठकर जलपान कर रहे थे। उसी समय छोटा जादूगर वहाँ आया। आज के उसके चाल में कुछ मस्तानी भाव था। साफ सुथरा कपड़ा पहने था। लेखक के सामने आकर कहा- आज कहिए तो खेल दिखाऊँ, पर लेखक थोड़ा गुस्सा हुए। उन्होने साफ मना कर दिया पर श्रीमती जी ने उस लड़के को खेल दिखाने को कहा। लेखक क्रोध से कुछ कहने जा रहे थे, पर श्रीमती की वाणी में ऐसा कुछ था कि लेखक चाहकर भी मना न कर पाए। उस वाणी में माँ की-सी मिठास थी, उस मिठास के सामने लेखक लड़के को रोक न पाए।

भाषा एवं व्याकरण ज्ञान 

प्रश्न 1. सरल, मिश्र और संयुक्त वाक्यों को पहचानो

(क) कार्निवल के मैदान में बिजली जगमगा रही थी।

उत्तर : सरल वाक्य।

(ख) माँजी बीमार है, इसलिए मैं नहीं गया। 

उत्तर : संयुक्त वाक्य ।

(ग) मैं घूमकर पान की दुकान पर आ गया। 

उत्तर : सरल वाक्य। 

(घ) माँ ने कहा है कि आज तुरंत चले आना। 

उत्तर : मिश्र वाक्य।

(ङ) मैं भी पीछे था, किंतु स्त्री के मुँह से ‘बे….’ निकल कर रह गया। 

उत्तर : मिश्र वाक्य। 

प्रश्न 2. अर्थ लिखकर निम्नलिखित मुहावरों का वाक्य में प्रयोग करो

उत्तर : (1) नौ दो ग्यारह होना (भाग हो जाना) पुलिस आते ही चोरों के दल नौ दो ग्यारह हो गया। 

(2) आँखें बदल जाना (धीरे धीरे दूर होना) मनोज आजकल अपने

दोस्तों से आँखे बदल जाने लगा। 

(3) घड़ी समीप होना (मरने का समीप होना) बुढ़ा होने के कारण उसके घड़ी समीप आ गया है। 

(4) दंग रह जाना (अचरज होना) छोटा जादूगर के खेल देखकर लोग दंग रह गया।

(5) श्रीगणेश होना (प्रतिस्तित होना) मुख्यमंत्री जी ने आज दोपहर नयी पूल की श्रीगणेश किया। 

(6) अपने पाँवों पर खड़ा होना (अपने आप प्रतिष्ठित होना) रमेश जी ने बचपन से परिश्रम करके आज अपने पाव पर सम्पूर्ण खड़ा हो गया।

(7) अपने पाँव पर कुल्हाड़ी मारना (जान बुझक गलती करना) जो अपने को विश्वास नहीं रखते उसके कामों का फल भी अपने पाँ पर कुल्हाड़ी मारना जैसा होगा। 

प्रश्न 3. निम्नलिखित शब्दों के लिंग परिवर्तन करो

रस्सी रस्सा (नश)। 

जादूगर जादूगरिन। 

श्रीमान-श्रीमतं । 

गुड़िया । वर बहू 

(छ)। स्त्री-पुरुष (भूष) नायक-नायिका। माली मालिन ।

प्रश्न 4. निम्नांकित शब्दों के लिंग निर्धारित करो 

 रुकावट-स्त्रीलिंग। हँसी-स्त्रीलिंग। शरबत-स्त्रीलिंग। वाणी-स्त्रीलिंग

भीड़-स्त्रीलिंग । तिरस्कार-स्त्रीलिंग। निशाना स्त्रीलिंग । झील-स्त्रीलिंग ।

 प्रश्न 5. निम्नलिखित शब्दों के वचन 

परिवर्तन करो

एकवचन- बहुवचन

खिलौना-खिलौने 

आँख – आँखे 

दुकान – दुकाने 

छात्रा – छात्राएँ 

बिल्ली – विल्लीयाँ 

साधु – साधुएँ 

कहानी – कहानियाँ 

Leave a Reply