SEBA Class 10 Hindi (MIL) Solution| Chapter-16| अरुणिमा सिन्हा : साहस की मिसाल

SEBA Class 9 Hindi (MIL) Solution| Chapter-16| अरुणिमा सिन्हा : साहस की मिसाल सूची में प्रत्येक अध्याय का उत्तर प्रदान किया गया है ताकि आप आसानी से विभिन्न अध्याय एनसीईआरटी समाधान कक्षा 10 अंबर भाग-2 में खुल सकें और एक की आवश्यकता का चयन कर सकें। इसके अलावा आप एनसीईआरटी (CBSE) पुस्तक दिशानिर्देशों के अनुसार विशेषज्ञ शिक्षकों द्वारा इस खंड में NCERT पुस्तक ऑनलाइन पढ़ सकते हैं। ये समाधान NCERT हिंदी (MIL) समाधान का हिस्सा हैं। यहां हमने कक्षा 10 NCERT अंबर भाग -2 पाठ्य पुस्तक समाधान अंबर भाग -2 के SEBA Class 10 Hindi (MIL) Solution| Chapter-16| अरुणिमा सिन्हा : साहस की मिसाल लिए दिए हैं आप यहां इनका अभ्यास कर सकते हैं।

SEBA Class 10 Solutions

SEBA CLASS 10 (Ass. MEDIUM)

SEBA CLASS 10 (Bangla MEDIUM)

SEBA CLASS 10 (English MEDIUM)

SEBA Class 10 Hindi (MIL) Solution| Chapter-16| अरुणिमा सिन्हा : साहस की मिसाल

SEBA Class 10 Hindi (MIL) Solution| Chapter-16| अरुणिमा सिन्हा : साहस की मिसाल ये उत्तर संबंधित विषयों के अनुभवी प्रोफेसरों द्वारा सावधानीपूर्वक तैयार किए जाते हैं। उनका उद्देश्य छात्रों को विषय की उचित समझ में मदद करना और उनके कौशल और अभिव्यक्ति की कला में सुधार करना है। यदि ये उत्तर उन उद्देश्यों को पूरा करते हैं जिनके साथ वे तैयार किए गए हैं, तो हम अपने प्रयास को पर्याप्त रूप से पुरस्कृत मानेंगे। इन उत्तरों में और सुधार के लिए किसी भी सुझाव का हमेशा स्वागत है।

पाठ – 16

लेखिका – परिचय डॉ. जयश्री गोस्वामी महन्त

असमीया साहित्यकारों में डॉ. जयश्री गोस्वामी महन्त का स्थान अन्यतम है। वे एक विशिष्ट साहित्यकार, शिक्षाविद् तथा भूतपूर्व सांसद हैं। उन्होंने असमीया कहानी, कविता, उपन्यास, बाल साहित्य आदि के अतिरिक्त युगीन यथार्थ को लेकर सामाजिक तथा राजनीतिक संदर्भ में कई चिंतनशील लेख एवं निबंधों की रचना की है। विश्वसाहित्य के कई ग्रंथों का अनुवाद करके भी उन्होंने असमीया अनुवाद साहित्य को समृद्ध किया है। गुवाहाटी के कॉटन कॉलेज में प्राणीविज्ञान विभाग में अध्यापन कार्य से अपना जीवन आरंभ करनेवाली डॉ. महन्त के अनेक शोधपरक लेख देश विदेश की पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। वे सन् 1999 से 2002 तक राज्यसभा की सांसद भी रह चुकी हैं। उनकी साहित्यिक कृतियाँ हैं

उपन्यास : ‘महाकवि’, ‘गांधारी’, ‘चाणक्य’ आदि।

कहानी संकलन : ‘अन्य एक रत्नाकर’, ‘उवॅलि जोवा चादर’ आदि।

निबंध-संकलन: ‘असम आंदोलन: युगमीया चिंतार प्रतिफलन’। 

बाल साहित्य : ‘चेमनीयार विश्व साहित्य’, ‘विश्वर श्रेष्ठ साधुकथा’ आदि। भारत सरकार ने उन्हें सन् 2018 में ‘पद्मश्री’ सम्मान से सम्मानित किया है।

लेखिका – संबंधी प्रश्न एवं उत्तर

1. डॉ. जयश्री गोस्वामी महन्त जी किस भाषा की लेखिका है ?

उत्तर: डॉ. जयश्री गोस्वामी महन्त जी असमीया भाषा में लेखन कार्य करती रही हैं। 

2. डॉ. महन्त को कब और क्या पुरस्कार मिला ?

उत्तर: डॉ. जयश्री गोस्वामी महन्त को सन् 2018 में ‘पद्मश्री’ पुरस्कार मिला।

3. डॉ. महन्त राज्यसभा की सांसद के रूप में कब से कब तक रहीं ? 

उत्तर: डॉ. महन्त राज्यसभा की सांसद के रूप में सन् 1999 से 2002 तक रहीं।

4. डॉ. महन्त के किन्हीं दो असमीया उपन्यासों के नाम बताइए।

उत्तर: डॉ. महन्त जी के दो असमीया उपन्यास है-‘महाकवि’, ‘गांधारी’।

5. डॉ. महन्त द्वारा रचित किन्हीं दो कहानी-संकलन के नाम लिखिए। 

उत्तर: डॉ. महन्त द्वारा रचित दो कहानी संकलन है- ‘अन्य एक रत्नाकर’ और ‘उर्वोल जोवा चादर’।

6. डॉ. महन्त द्वारा निबंध संकलन का नाम बताइए।

उत्तर: डॉ. महन्त जी के निबंध-संकलन का नाम है-‘ असम आंदोलन : युगनीया चिंतार प्रतिफलन’ ।

7. डॉ. महन्त जी द्वारा रचित बालोपयोगी पुस्तकों के नाम लिखिए। 

उत्तर: डॉ. महन्त जी द्वारा रचित बालोपयोगी पुस्तकें हैं- ‘चेमनीयार विश्व-साहित्य’ और ‘विश्वर श्रेष्ठ साधुकथा’।

8. डॉ. जयश्री गोस्वामी महन्त जी वर्तमान में किस समाचार-पत्र की संपादक है ?

उत्तर: डॉ. जयश्री गोस्वामी महन्त जी वर्तमान में ‘एदिनर संवाद’ नामक असमीया दैनिक समाचार पत्र की संपादक हैं।

सारांश

‘अरुणिमा सिन्हा साहस की मिसाल” शीर्षक पाठ अरुणिमा सिन्हा के जीवन की सच्ची कहानी है। इसमें अरुणिमा सिन्हा के जीवन संघर्ष, प्रबल इच्छाशक्ति तथा विजय प्राप्ति के प्रेरक प्रसंगों का उल्लेख किया गया है। अपनी कमजोरी को ही ताकत बना लेना ऐसी मिसाल कोई अरुणिमा सिन्हा से ही ले सकता है। कहते हैं कि जब हमारे इरादे बुलंद हों, तो हिमालय जैसा पहाड़ भी हमारे लक्ष्य को डिगा नहीं सकता, ऐसा ही चमत्कार अरुणिमा सिन्हा ने कर दिखाया अपनी जिंदगी से हार मानने वालों के लिए भी एक सबक है। 

जीवन में सफलता पाने के लिए मन की दृढ़ता और प्रबल इच्छाशक्ति की जरूरत होती है। उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में सन् 1988 में जन्मी अरुणिमा की रुचि बचपन से ही खेल-कूद में थी। बाद में वे राष्ट्रीय स्तर की एक वॉलीबॉल खिलाड़ी भी बनीं। उनका जीवन सामान्य रूप से चल रहा था। अचानक उनके साथ ऐसा घटित हुआ जिसके चलते उनकी जिंदगी का इतिहास ही बदल गया। क्या थी वह घटना जिसके चलते उन्होंने नए कीर्तिमान रच दिए, आइए जानें।

अरुणिमा सिन्हा 11 अप्रैल 2011 को पद्मावती एक्सप्रेस से लखनऊ से दिल्ली जा रही थी। रात के लगभग एक बजे कुछ शातिर लुटेरे ट्रेन के डिब्बे में दाखिल हुए और लूटपाट करने लगे। अरुणिमा सिन्हा के गले का हार देखकर उसे छीनने का प्रयास करने लगे और विरोध करने पर लुटेरों ने उन्हें चलती ट्रेन से बरेली के पास फेंक दिया। अरुणिमा का बायाँ पैर पटरियों के बीच में आ जाने से कट गया। पूरी रात अरुणिमा सिन्हा कटे पैर के साथ दर्द से चीखती चिल्लाती रही। लगभग उनचालीस रेलगाड़ियाँ गुजरने के बाद पूरी तरह से अरुणिमा सिन्हा अपने जीवन की आशा खो चुकी थी। लेकिन शायद अरुणिमा सिन्हा के भाग्य में कुछ और ही लिखा था। फिर लोगों को इस घटना का पता चलने के बाद इन्हें पहले बरेली के अस्पताल और उसके बाद नई दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में भर्ती कराया गया, जहाँ अरुणिमा सिन्हा जिंदगी और मौत से करीब चार महीने तक जंग लड़ती रहीं। आखिरकार अरुणिमा के बाएँ पैर को कृत्रिम पैर के सहारे जोड़ दिया गया।

अस्पताल से लौटकर अरुणिमा सीधे घर नहीं गई, बल्कि वे बछेंद्री पाल के पास पर्वतारोहण का प्रशिक्षण लेने पहुँचीं। उनका परिवार उन्हें असमर्थ और विकलांग समझने लगा। परंतु अरुणिमा की आँखों में एवरेस्ट विजय का सपना था, वे किसी भी हालत में अपना सपना पूरा करना चाहती थीं।

अंततः कठोर अभ्यास, बुलंद हौंसले और दृढ़ आत्मविश्वास के कारण उन्होंने एक कृत्रिम पैर होने के बावजूद 21 मई, 2013 को विश्व के सर्वोच्च शिखर माउंट एवरेस्ट को फतह कर एक नया इतिहास रच डाला। आज उनका नाम हम बड़े गर्व के साथ लेते हैं। वे प्रेरणा की स्रोत है।

पाठ्यपुस्तक संबंधित प्रश्न एवं उत्तर

बोध एवं विचार

1. सही विकल्प का चयन कीजिए:

(क) रेल दुर्घटना में अरुणिमा घायल हुई थी

(i)11 जुलाई, 2011 को 

(ii) 11 अप्रैल, 2011 को

(iii) 15 अप्रैल, 2011 को

(iv) 20 अगस्त, 2011 को

उत्तर: (ii) 11 अप्रैल, 2011 को

(ख) रेल दुर्घटना में घायल अरुणिमा का इलाज पहले हुआ था

(i) बरेली के अस्पताल में

(ii) अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में

(iii) लखनऊ के अस्पताल में 

(iv) उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान संस्थान में

उत्तर: (i) बरेली के अस्पताल में

(ग) अस्पताल के बिस्तर पर पड़ी पड़ी अरुणिमा 

(i) रेल में सफर करने के कारण पछताने लगी।

(ii) घरवालों की याद करके रोने लगी।

(iii) दिन-रात अपने दुर्भाग्य पर रोने लगी।

(iv) हिमालय के शिखरों पर चढ़ने का सपना देखने लगी। 

उत्तर:(iv) हिमालय के शिखरों पर चढ़ने का सपना देखने लगी।

(घ) चार महीने के बाद जब अरुणिमा अस्पताल से निकली तो

(i) सीधे बछेन्द्री पाल के पास पहुँच गई।

(ii) सीधे तेनजिंग नरगे के पास पहुँच गई। 

(iii) सीधे माँ से मिलने घर पहुँच गई।

(iv) सीधे पर्वतारोहण का प्रशिक्षण लेने चली गई। 

उत्तर: (i) सीधे बछेन्द्री पाल के पास पहुँच गई।

(ङ) अरुणिमा एवरेस्ट के शिखर पर पहुँची

(i) 21 मई, 2013 को 

(ii) 31 मई, 2013 को

(iii) 21 जून, 2013 को

(iv) 21 मई, 2015 को

उत्तर: (i) 21 मई, 2013 को

2. उपयुक्त शब्दों का चयन कर वाक्यों को फिर से लिखिए :

( क ) अरुणिमा सिन्हा _________ कुछ भी देने से इनकार कर रही थी। (भिखारियों को / लुटेरों को/ भक्तों को/ गरीबों को )

(ख) अरुणिमा लगभग _________  रेल की पटरियों के पास पड़ी रही। ( सात घंटे/ नौ घंटे/ घंटे/ चौबीस घंटे )

(ग) अरुणिमा लद्दाख में स्थित माउंट शमशेर कांगरि की._________  फीट की ऊँचाई तक चढ़ने में सफल हुई। 

(29, 108 फीट / 26, 108 फीट / 21,908 फीट / 21, 108 फीट)

(घ) काठमांडू से यात्रा आरंभ करने के 52 दिनों के बाद अरुणिमा_________ ऊँचाई पर स्थित माउंट एवरेस्ट के शिखर पर आरोहण किया।

( 8848 मीटर की / 8948 मीटर की / 8548 मीटर की / 8148 मीटर की)

(ङ) भारत सरकार ने अरुणिमा को सन् 2015 में_________  सम्मानित किया। (‘पद्मश्री’ सम्मान से / ‘पद्मभूषण’ सम्मान से/ ‘पद्मविभूषण’ सम्मान से/ ‘अमेजिंग इंडियन अवार्ड’ से)

उत्तर: (क) अरुणिमा सिन्हा लुटेरों को कुछ भी देने से इनकार कर रही थी।

(ख) अरुणिमा लगभग चौबीस घंटे रेल की पटरियों के पास पड़ी रही।

(ग) अरुणिमा लद्दाख में स्थित माउंट शमशेर कांगरि की 21,108 फीट ऊँचाई तक चढ़ने में सफल हुई।

(घ) काठमांडू से यात्रा आरंभ करने के 52 दिनों के बाद अरुणिमा 8,848 मीटर की ऊँचाई पर स्थित माउंट एवरेस्ट के शिखर पर आरोहण किया।

(ङ) भारत सरकार ने अरुणिमा को सन् 2015 में ‘पद्मश्री’ सम्मान से सम्मानित किया।

3. पूर्ण वाक्य में उत्तर दीजिए:

(क) किस खेल में अरुणिमा सिन्हा ने राष्ट्रीय प्रतियोगिता में राज्य की टीम में खेलकर काफी नाम कमाया था ? 

उत्तर: वॉलीबॉल में अरुणिमा सिन्हा ने राष्ट्रीय प्रतियोगिता में राज्य की टीम में खेलकर काफी नाम कमाया था।

(ख) चलती रेलगाड़ी में लुटेरे अरुणिमा से क्या माँगते हुए धमकी दे रहे थे ? 

उत्तर: चलती रेलगाड़ी में लुटेरे अरुणिमा से गले का हार माँगते हुए धमकी दे रहे थे।

(ग) अरुणिमा ने किसकी देखरेख में पर्वतारोहण का प्रशिक्षण लिया था ? 

उत्तर: अरुणिमा ने पर्वतारोही बछेन्द्री पाल की देखरेख में पर्वतारोहण का प्रशिक्षण लिया था।

(घ) डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम से अरुणिमा को कौन-सा पुरस्कार मिला था ?

उत्तर: पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम से अरुणिमा को ‘अमेजिंग इंडियन अवार्ड’ मिला था।

(ङ) अरुणिमा की तरह शारीरिक रूप से अक्षम अन्य एक विरल व्यक्तित्व का उदाहरण दीजिए।

उत्तर: स्टीफन हॉकिंग एक विश्व प्रसिद्ध वैज्ञानिक एवं लेखक थे, जो अरुणिमा की तरह शारीरिक रूप से अक्षम

4. संक्षिप्त उत्तर दीजिए:

(क) अरुणिमा की रेल दुर्घटना के बारे में संक्षेप में लिखिए। 

उत्तर: राष्ट्रीय स्तर की वालीबॉल खिलाड़ी अरुणिमा सिन्हा 12 अप्रैल, 2011 को लखनऊ से दिल्ली जा रही थी। पद्मावती एक्सप्रेस में बैठी अरुणिमा एक प्रतियोगिता के सिलसिले में दिल्ली जा रही थी। उसी ट्रेन में कुछ लुटेरे आए और लूट-पाट शुरू कर दिए। अरुणिमा गले में सोने का हार पहनी थी। लुटेरे अरुणिमा के बैग और गले का हार छीनने का प्रयास किए। अरुणिमा लुटेरों नहीं डरी, उनसे भिड़ गई, लेकिन लुटेरे कुछ नहीं कर पाए तो उन्होंने अरुणिमा को बरेली के निकट चलती ट्रेन से बाहर फेंक दिया। इसके कारण वह समानांतर ट्रैक पर गिर गई और दूसरी ट्रेन की चपेट में आने के कारण उनका पैर कट गया। सारी रात दोनों ट्रैक के बीच में पड़ी रहनेवाली इस खिलाड़ी को सुबह होने पर स्थानीय लोगों ने देखा और इन्हें बरेली के अस्पताल में इलाज के लिए ले गए।

(ख) रेल दुर्घटना के बाद अरुणिमा के संबंध में किस तरह की अफवाहें फैली थीं ?

उत्तर: रेल दुर्घटना के बाद अरुणिमा के संबंध में लोग तरह-तरह की बातें करने लगे। कुछ लोग कहते थे कि अरुणिमा बिना टिकट भ्रमण कर रही थी और जब टी.टी. ने उससे टिकट माँगा तो वह रेलगाड़ी से कूद पड़ी। कोई कहता था कि अरुणिमा आत्महत्या करने के लिए चलती गाड़ी से कूद पड़ी थी। ऐसी ही अनेक अफवाहें लोगों के बीच फैली थीं।

(ग) अस्पताल में रहते समय अरुणिमा के मन में कैसे खयाल आए थे ? 

उत्तर: अस्पताल में रहते समय अरुणिमा के मन में एवरेस्ट-विजय की इच्छा होने लगी। मन में दृढ़ इच्छा होने के कारण वह अपने पैरों का दर्द और विकलांगता को भूल । वह कहाँ, कैसे इस कार्य के लिए प्रशिक्षण ले सकेगी यही सोचने लगी। आखिर उसे मालूम हुआ कि एवरेस्ट विजय करने वाली बछेन्द्री पाल उसका सही मार्गदर्शन कर सकेंगी। चार महीने के बाद जब वह अस्पताल से निकली तो घर न जाकर सीधे बछेंद्री पाल के पास प्रशिक्षण के लिए पहुँच गई।

(घ) पर्वतारोहण के क्षेत्र में अरुणिमा को प्रेरणा और प्रशिक्षण किसने और कैसे दिया ?

उत्तर: पर्वतारोहण के क्षेत्र में अरुणिमा को प्रेरणा और प्रशिक्षण बछेन्द्री पाल ने दिए। अरुणिमा को हिमालय के शिखर पर चढ़ने की प्रबल इच्छा और आत्मविश्वास को देखकर बछेन्द्री पाल ने अनुभव किया कि अगर इस युवती को सही प्रेरणा और प्रशिक्षण मिले तो वह जरूर एक दिन अपने लक्ष्य तक पहुँच पाएगी। इसलिए बछेन्द्री पाल ने अपनी देखरेख में अरुणिमा को प्रशिक्षण देना आरंभ किया। लगभग एक वर्ष तक अरुणिमा ने अद्भुत उत्साह, उद्यम एवं पूरी समर्पण भावना से पर्वतारोहण के अभ्यास में आत्म-नियोजित किया। एक सामान्य व्यक्ति की तुलना में अरुणिमा को प्रशिक्षण कार्य में अधिक समय और अधिक परिश्रम करना पड़ता था। फिर भी अपनी अदम्य इच्छाशक्ति और कड़ी मेहनत के बल पर अरुणिमा सिन्हा ने पर्वतारोहण का प्रशिक्षण प्राप्त किया।

(ङ) विकलांग होने पर भी अरुणिमा एवरेस्ट विजय प्राप्त करने में सफल हुई, क्यों ?

उत्तर: विकलांग होने पर भी अरुणिमा सिन्हा एवरेस्ट विजय प्राप्त करने में सफल हुई, क्योंकि उनका हौंसला बुलंद था, प्रबल आत्मविश्वास था। पर्वतारोहण अभियान के दौरान अरुणिमा के लहूलुहान पैरों को देखकर उसे सहायता करनेवाला शेरपा ने कई बार उन्हें जान बचाने के लिए लौट जाने का उपदेश दिया, परंतु अरुणिमा किसी भी विपत्ति के सामने हार मानना नहीं चाहती थीं। वे काठमांडू से यात्रा आरंभ कर 52 दिनों के बाद 21 मई, 2013 को रात आठ बजे 8,848 मीटर की ऊँचाई पर स्थित माउंट एवरेस्ट के शिखर पर पहुँचने में सफल हुई।

5. आशय स्पष्ट कीजिए:

(क) परंतु इस अभियान की विफलता के कारण निराशा के स्थान पर अरुणिमा का संकल्प और भी दृढ़ हो गया।

उत्तर: अरुणिमा सिन्हा के मन में एवरेस्ट विजय की प्रबल इच्छा और दृढ़ आत्मविश्वास था। पर्वतारोहण अभियान के दौरान अरुणिमा सिन्हा को लद्दाख में स्थित माउंट शमशेर कांगरि की 21,108 फीट की ऊँचाई तक चढ़ने में सफलता मिली। परंतु माउंट कांगरि की कुल ऊँचाई थी 21,798 फीट। उस समय मौसम खराब था। ऐसे मौसम में अभियान को जारी रखना असंभव होने के कारण शिखर तक केवल 690 फीट रहते अभियात्री दल को अभियान समाप्त करके नीचे उतरना पड़ा। परंतु इस अभियान की विफलता के कारण निराशा के स्थान पर अरुणिमा का संकल्प और भी दृढ़ हो गया। उनके मन में माउंट एवरेस्ट विजय की इच्छा अधिक प्रबल हो उठी। उस समय अरुणिमा प्रसिद्ध भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी युवराज सिंह के जीवन से अनुप्रेरित हुई। युवराज सिंह कैंसर से मुकाबला कर अपने लक्ष्य तक पहुँचने में कैसे सफल हुए। अरुणिमा सिन्हा अपने बुलंद हौंसले और आत्मविश्वास के कारण शारीरिक विकलांगता के बावजूद अपने लक्ष्य को पाने में कामयाब हुई।

(ख) इस प्रकार अनेक व्यक्ति अपनी प्रतिभा के कारण विभिन्न परिवेश में राष्ट्रीय पटल पर सितारों के समान चमकते हुए सहस्र जनों के लिए आशा और प्रेरणा के स्रोत बन जाते हैं।

उत्तर: अरुणिमा सिन्हा अपनी शारीरिक असमर्थता के बावजूद मन की प्रबल इच्छाशक्ति और अटूट आत्मविश्वास के कारण एवरेस्ट के शिखर पर चढ़ने में कामयाब हुई। कोई भी बाधा उसे लक्ष्य से भ्रमित नहीं कर पाई। भारत सरकार ने अरुणिमा को सन् 2015 में ‘पद्मश्री’ सम्मान से सम्मानित किया। इसके अलावा उन्हें तेनजिंग नरगे सम्मान और अमेजिंग इंडियन अवार्ड भी मिले। इस प्रकार अनेक व्यक्ति अपनी प्रतिभा के कारण विभिन्न परिवेश में राष्ट्रीय पटल पर सितारों के समान चमकते हुए सहस्रजनों के लिए आशा और प्रेरणा के स्रोत बन जाते हैं।

6. सप्रसंग व्याख्या कीजिए:

(क) परंतु अरुणिमा ने इन सबको एक चुनौती मानकर एक नई जिंदगी जीने के लिए मन ही मन संकल्प कर लिया था।

उत्तरः प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक ‘अंबर, भाग-2’ के ‘अरुणिमा सिन्हा: साहस की मिसाल’ शीर्षक पाठ से लिया गया है। इसकी लेखिका डॉ. जयश्री गोस्वामी महन्त जी हैं।

लखनऊ से दिल्ली रेलगाड़ी से जाते समय अरुणिमा सिन्हा और लुटेरों बीच हुए झगड़े के दौरान चलती गाड़ी से लुटेरों ने अरुणिमा को फेंक दिया। वह पूरी रात रेल की पटरियों पर पड़ी रही और सुबह होने पर स्थानीय लोगों ने नजदीक के अस्पताल में इलाज के लिए ले गए। उसका एक पैर कट चुका था और दूसरे पैर में काफी चोट लगी थी। यह घटना होने के बाद लोगों में तरह-तरह की अफवाहें फैलने लगीं। कुछ लोग करने लगे कि अरुणिमा बिना टिकट यात्रा कर रही थी और टी. टी. के आने पर रेलगाड़ी से कूद पड़ी। कोई कहता कि अरुणिमा आत्महत्या करना चाहती थी। ये अफवाहें जब अरुणिमा के कानों में पड़ी तब उसे बहुत दुःख हुआ। परंतु अरुणिमा ने इन सबको एक चुनौती मानकर एक नई जिंदगी जीने के लिए मन ही मन संकल्प कर लिया। वस्तुत: अपने मन की प्रबल इच्छाशक्ति और दृढ़ आत्मविश्वास के बल पर ही अरुणिमा सिन्हा को एवरेस्ट विजय प्राप्ति में सफलता हासिल हुई।

अंबर भाग-2

अध्याय संख्यापाठ
पद्य खंड
पाठ 1पद-युग्म
पाठ 2वन-मार्ग में
पाठ 3किरणों का खेल
पाठ 4तोड़ती पत्थर
पाठ 5यह दंतुरित मुसकान
गद्य खंड
पाठ 6आत्म-निर्भरता
पाठ 7नमक का दारोगा
पाठ 8अफसर
पाठ 9न्याय
पाठ 10तीर्थ-यात्रा
पाठ 11वन भ्रमण
पाठ 12इंटरनेट के खट्टे-मीठे अनुभव
पद्य खंड
पाठ 13बरगीत
पाठ 14कदम मिलाकर चलना होगा
गद्य खंड
पाठ 15अमीर खुसरू की भारत भक्ति
पाठ 16अरुणिमा सिन्हा : साहस की मिसाल
वैचित्र्यमय असम
तिवा
देउरी
नेपाली भाषी गोर्खा
बोड़ो
मटक
मोरान
मिसिंग
मणिपुरी
राभा
सोनोवाल कछारी
हाजंग
नाथ योगी
आदिवासी

(ख) युवराज से अरुणिमा को प्रेरणा मिली थी कि जो अपना हाँसला और आत्मविश्वास कायम रख सके उसके लिए शारीरिक विकलांगता कोई लक्ष्य प्राप्ति के मार्ग में प्राचीर बनकर खड़ी नहीं हो सकती और न जीवन में आगे बढ़ने में भी कोई बाधा बन सकती है।

उत्तर: प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक ‘अंबर, भाग-2’ के डॉ. जयश्री गोस्वामी महन्त द्वारा लिखित ‘अरुणिमा सिहा : साहस की मिसाल’ शीर्षक पाठ से लिया गया है। 

पर्वतारोहण अभियान के दौरान अरुणिमा सिन्हा प्रसिद्ध भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी युवराज सिंह की याद आई और उसी संदर्भ में यह उक्ति व्यक्त की गई है। 

अनेक बाधाओं को पार करते हुए अरुणिमा सिन्हा लद्दाख में स्थित माउंट शमशेर कांगरि की 21,108 फीट की ऊँचाई तक पहुँचने में सफल हो चुकी। परंतु माउंट कांगरि की कुल ऊँचाई थी 21,798 फीट। खराब मौसम की वजह से अभियान को रोकना पड़ा था। इस अभियान की विफलता के कारण निराशा के स्थान पर अरुणिमा का संकल्प और दृढ़ हो गया। इस समय अरुणिमा को अपनी लक्ष्य प्राप्ति के लिए क्रिकेट खिलाड़ी युवराज सिंह ने प्रेरणा दी थी। अरुणिमा ने देखा था कि अपनी अदम्य मानसिक शक्ति के । कारण कैंसर रोग से पीड़ित युवराज सिंह रोगमुक्त होकर कैसे अपने लक्ष्य तक पहुँचने में कामयाब हुए थे। युवराज से अरुणिमा को प्रेरणा मिली थी कि जो अपना हौंसला और आत्मविश्वास कायम रख सके, उसके लिए शारीरिक विकलांगता कोई लक्ष्य प्राप्ति के मार्ग में प्राचीर बनकर खड़ी नहीं हो सकती और न जीवन में आगे बढ़ने में भी कोई बाधा बन सकती है।

यहाँ मनुष्य की अदम्य इच्छाशक्ति और दृढ़ आत्मविश्वास पर बल दिया गया है।

7. सम्यक् उत्तर दीजिए:

( क ) अरुणिमा सिन्हा के जीवन में जो विपत्ति आई उसकी चुनौती उसने किस प्रकार ग्रहण की ?

उत्तर: रेल दुर्घटना में अरुणिमा सिन्हा का एक पैर कट जाता है और उनका जीवन संघर्षों से भर जाता है। अरुणिमा ने अपनी विपत्तियों को चुनौती मानकर एक नई जिंदगी जीने के लिए मन ही मन संकल्प ले लेती है। अस्पताल के बिस्तर पर पड़ी पड़ी अरुणिमा हिमालय के शिखर पर चढ़ने का सपना देखने लगी। उसके मन में एवरेस्ट विजय की इच्छा इस प्रकार बलवती हो गई कि वह अपने पैरों का दर्द और विकलांग दशा को भी भूल गई। कहाँ, कैसे इस कार्य के लिए वह प्रशिक्षण ले सकेगी-यही सोचने लगी। चार महीने के बाद अरुणिमा सिन्हा को अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद वह सोधे बछेंद्री पाल के पास पर्वतारोहण का प्रशिक्षण लेने पहुँच गई।

( ख ) माउंट शमशेर कांगरि के शिखर पर पहुँच न सकने के दुःख को अरुणिमा ने किस प्रकार ग्रहण किया ?

उत्तर: माउंट शमशेर कांगरि के शिखर पर पहुँच न सकने के दुःख को अरुणिमा ने चुनौती के रूप में ग्रहण किया। अभियान की विफलता के कारण निराशा के स्थान पर अरुणिमा का संकल्प और भी दृढ़ हो गया। उनके मन में माउंट एवरेस्ट विजय की कामना प्रबल हो उठी। इस समय अरुणिमा ने अपनी लक्ष्य प्राप्ति के लिए प्रसिद्ध क्रिकेट खिलाड़ी युवराज सिंह से भी अनुप्रेरणा ली। आखिरकार अपने बुलंद हौंसले और मजबूत इरादों से एवरेस्ट विजय प्राप्त करने में अरुणिमा सफल हुई।

(ग) अरुणिमा ने अपने जीवन के दुर्भाग्य को कैसे सौभाग्य में बदल दिया ? 

उत्तर: अरुणिमा सिन्हा शारीरिक और मानसिक दोनों प्रकार से सबल थीं तथा उनमें मन की दृढ़ता और अध्यवसाय की कमी नहीं थी। एक पैर को खोने के दुर्भाग्य को अपने सौभाग्य के रूप में परिवर्तित करने के रूप में संकल्प पूरा करने के लिए उसने कोई कसर नहीं छोड़ी। लगभग एक वर्ष तक उसने अद्भुत उत्साह, उद्यम एवं पूरी समर्पण भावना से पर्वतारोहण प्रक्रिया के अभ्यास में आत्मनियोजित किया और अंततः अपने लक्ष्य प्राप्ति में कामयाब

(घ) पर्वतारोहण के क्षेत्र में अरुणिमा की उपलब्धि क्या है – अपने शब्दों में वर्णन कीजिए ।

उत्तरः पर्वतारोहण के क्षेत्र में अरुणिमा की उपलब्धि महत्वपूर्ण है। उन्होंने 21 मई, 2013 को माउंट एवरेस्ट के शिखर पर पहुँचकर अपने अद्भुत आत्मविश्वास और बुलंद हौंसले को पूरे विश्व को दिखाया। इस अभूतपूर्व सफलता के लिए भारत सरकार ने अरुणिमा को सन् 2015 में ‘पद्मश्री’ से सम्मानित किया। तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया। इसके अलावा अरुणिमा सिन्हा को ‘तेनजिंग नरगे सम्मान’ और ‘अमेजिंग इंडियन अवार्ड’ सहित कई पुरस्कार मिले हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने एक समारोह में अरुणिमा की लिखी पुस्तक का लोकार्पण कर उनकी बहुत प्रशंसा की है।

(ङ) ‘अपनी जिंदगी को जोखिम में डालकर ऐसे कामों के लिए आगे बढ़ने के सिवाय एक सामान्य जीवन जीना ही तुम्हारे लिए अच्छा रहेगा। लोग अरुणिमा को ऐसा परामर्श क्यों देते थे ?

उत्तर: ‘अपनी जिंदगी को जोखिम में डालकर ऐसे कामों के लिए आगे बढ़ने के सिवाय एक सामान्य जीवन जीना ही तुम्हारे लिए अच्छा रहेगा’-लोग अरुणिमा को ऐसा परामर्श इसलिए दे रहे थे, क्योंकि दुर्घटना के दौरान एक पैर कट गया था और दूसरा पैर भी मानो बेकार हो गया था। एवरेस्ट विजय के लिए अरुणिमा कृत्रिम पैर के सहारे ही कठिन परिश्रम और निरंतर अभ्यास कर रहो थी। यह काम अत्यंत चुनौतीपूर्ण था और अरुणिमा के लिए यह प्रतीत हो रहा था। इसलिए लोगों ने अरुणिमा को परामर्श दिया कि अपनी जिंदगी को जोखिम में डालकर ऐसे कामों के लिए आगे बढ़ने के सिवाय एक सामान्य जीवन जीना ही उनके लिए उचित रहेगा।

1.भाषा एवं व्याकरण

निम्नलिखित शब्दों के बहुबचन रूप लिखिए : रेलगाड़ी, लुटेरा, पटरी, पहिया, जरूरत, बाधा, सितारा, सफलता

उत्तर: रेलगाड़ी -रेलगाड़ियाँ

लुटेरा -लुटेरे

पटरी- पटरिया

पहिया -पहिए

जरूरत-जरूरतें

बाधा- बाधाएँ

सितारा- सितारे

सफलता – सफलताएँ

2.निम्नलिखित उर्दू के उपसर्गों से दो-दो शब्द बनाइए:

बे=……..     ……..

हम=…..     …….

हर=……      …….

बद=……    ……..

ला=…….       ……

गैर=…….     ……..

खुश=……     …….

ता=……..     …….

उत्तर: बे =बेबजह, बेबुनियाद

हम= हमराही, हमशक्ल

हर =हरदम, हरपल

बद= बदनाम, बदसूरत

ला =लाजवाब, लाइलाज

गैर= गैरहाजिर, गैरकानूनी

खुश = खुशमिजाज, खुशबू

ता= ताउम्र, ताजिंदगी

3. निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द लिखिए : लड़की, अंधेरा, दायाँ, दुखमय, अक्षम, सुफल

उत्तर: लड़की- लड़का

अंधेरा- उजाला

दायाँ – बायाँ

दुखमय – सुखमय

अक्षम – सक्षम

सुफल – कुफल

4. पठित पाठ में कई मुहावरों का प्रयोग हुआ है। इन्हें छाँटिए और वाक्यों में प्रयोग कीजिए।

(क) हिम्मत जुटाना (साहस होना) – अन्याय के विरुद्ध खड़ा होने के लिए हिम्मत जुटाओ। 

(ख) इनकार करना (मना करना) = रमेश ने मुझे कलम देने से इनकार कर दिया। 

(ग) गुस्से से लाल होना (अत्यंत क्रोधित होना) शर्मा जी नौकरों के कामों से नाराज होकर गुस्से से लाल हो गए।

(घ) लक्ष्य को पाना (अपेक्षित फल मिलना) – अरुणिमा सिन्हा ने अपने लक्ष्य को पाने के लिए कठोर परिश्रम किया।

(ङ) लहूलुहान होना (घायल होना) = रेल दुर्घटना के दौरान अरुणिमा – लहूलुहान होकर पटरियों के पास पड़ी हुई थी।

अतिरिक्त प्रश्न एवं उत्तर

बहुविकल्पी प्रश्न

(क) अरुणिमा सिन्हा एक अच्छी खिलाड़ी थी-

(i) वॉलीबॉल

(ii) फुटबॉल

(iii) बास्केटबॉल

(iv) बैडमिंटन

उत्तर: (i) वॉलीबॉल

(ख) बछेन्द्री पाल कौन थी ?

(i) वॉलीबॉल खिलाड़ी

(ii) अंतरिक्ष यात्री

(iii) पर्वतारोही

(iv) अरुणिमा की सहेली

उत्तरः (iii) पर्वतारोही

(ग) माउंट कांगरि की कुल ऊँचाई कितनी है ?

(i) 21,108 फीट

(ii) 690 फीट

(iii) 8,848 फीट

(iv) 21,798 फीट

उत्तर: (iv) 21,798 फीट

लघु उत्तरीय प्रश्न

1. पर्वतारोहण के दौरान अरुणिमा को शेरपा ने क्या उपदेश दिया ? 

उत्तरः पर्वतारोहण के दौरान शेरपा ने अरुणिमा के लहूलुहान पैरों को देखकर उसकी सुरक्षा के लिए वहाँ से लौट जाने का उपदेश दिया। ले

2. हिमालय की चढ़ाई के दौरान अरुणिमा अपने साथ क्या-क्या वस्तुएँ गई थी।

उत्तरः हिमालय की चढ़ाई के दौरान अरुणिमा अपने साथ कैमरे, पानी और ऑक्सीजन ले गई थी।

3. माउंट एवरेस्ट की कुल ऊंचाई कितनी है ? 

उत्तर: माउंट एवरेस्ट की कुल ऊंचाई 8,848 मीटर है।

4. अरुणिमा सिन्हा एवरेस्ट के शिखर पर कब पहुँची और वहाँ कितने समय तक ठहरी ?

उत्तर: अरुणिमा सिन्हा एवरेस्ट के शिखर पर 21 मई, 2013 को पहुँची और वहाँ वह लगभग डेढ़ घंटे तक ठहरी थी।

5. अरुणिमा सिन्हा का व्यक्तित्व कैसे लोगों को प्रभावित करता है ? 

उत्तर: अरुणिमा सिन्हा का व्यक्तित्व निराश, दुःखी और कमजोर लोगों को अनायास प्रभावित करता है। उनका व्यक्तित्व अनेक दुःखी लोगों को आनंद प्रदान करता है, उन्हें निराशा तथा हताशा से मुक्ति दिलाता है और नए उद्यम के साथ जीवन में आगे बढ़ते हुए अपने लक्ष्य तक पहुँचने के लिए साहस और दृढ़ता प्रदान करता है।

6. एवरेस्ट विजय के बाद अरुणिमा सिन्हा ने क्या कहा था ? 

उत्तरः एवरेस्ट विजय के बाद अरुणिमा सिन्हा ने कहा- ” अरुणिमा सिर्फ एक मैं ही नहीं हूँ, मेरी तरह और हजारों अरुणिमाएँ हैं, जिन्हें जीवन में आगे बढ़ने के लिए, अपने लक्ष्य तक पहुँचने के लिए अगर आप लोग उत्साहित और प्रेरित करें तो सच्चे अर्थों में वह देशसेवा का एक अच्छा उदाहरण होगा।”

Leave a Reply