SEBA Class 10 Hindi (MIL) Solution| Chapter-14| कदम मिलाकर चलना होगा

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SEBA Class 10 Hindi (MIL) Solution| Chapter-14| कदम मिलाकर चलना होगा

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पाठ – 14

कवि-परिचय अटल बिहारी वाजपेयी

भारतरत्न अटल बिहारी वाजपेयी भारत के दसवें प्रधानमंत्री होने के साथ-साथ एक महान कवि और प्रखर वक्ता भी थे। उनके पिता का नाम पंडित कृष्ण बिहारी वाजपेयी और माता का नाम कृष्णा वाजपेयी था। उनके पिता मध्य प्रदेश के ग्वालियर रियासत में अध्यापक थे। अटल जी का जन्म ग्वालियर के शिन्दे की छावनी में 25 दिसंबर, 1924 को हुआ। इनका परिवार मूलत: उत्तर प्रदेश में आगरा जनपद के प्राचीन स्थान ‘बटेश्वर’ का निवासी था। अटल जी के पिता हिंदी और ब्रजभाषा के सिद्धहस्त कवि थे। अटल जी को साहित्य-सृजन विरासत में प्राप्त हुआ था। उनके दो प्रमुख कविता संग्रह हैं- ‘मेरी इक्यावन कविताएँ’ (1995), और ‘न दैन्यं न पलायनम्’ (1998) आदि।

अटल बिहारी वाजपेयी ने ग्वालियर के विक्टोरिया कॉलेज (अब लक्ष्मीबाई कॉलेज) में तथा कानपुर के डी.ए.वी. कॉलेज में शिक्षा ग्रहण की और राजनीति विज्ञान में एम.ए. की उपाधि प्राप्त की। सन् 1993 में वे कानपुर विश्वविद्यालय द्वारा पीएच. डी. की मानद उपाधि से सम्मानित किए गए। अटल जी का कर्मजीवन वस्तुतः पत्रकारिता से ही शुरू हुआ था। वे ‘पांचजन्य’, ‘राष्ट्रधर्म’, ‘स्वदेश’ और ‘वीर अर्जुन’ जैसे कई राष्ट्रवादी पत्र-पत्रिकाओं के संपादक रहे। सन् 1977 में विदेश मंत्री के रूप में इन्होंने संयुक्त राष्ट्रसंघ में पहली बार हिंदी में भाषण दिया था।

भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी भूमिका सक्रिय थी। वे सन् 1942 में जेल भी गए। अटल जी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से सक्रिय रूप में जुड़े थे। आजीवन अविवाहित, अद्भुत व्यक्तित्व के धनी श्री वाजपेयी जी पढ़ने-लिखने, सिनेमा देखने, यात्राएँ करने और खाना पकाने खाने के शौकीन थे। वे सन् 1951 में गठित राजनैतिक दल’ भारतीय जनसंघ’ के संस्थापक थे। देश की आर्थिक उन्नति, वंचितों के उत्थान और महिलाओं तथा बच्चों के कल्याण की चिंता उन्हें हरदम रहती थी। उन्हें सन् 2014 में देश का सर्वोच्च सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया। अटल जी ‘भारतीय जनता पार्टी’ के प्रथम अध्यक्ष भी थे।

सबके चहेते श्री अटल जी 16 अगस्त, 2018 को सबको रुलाकर स्वर्गलोक में विलीन हो गए। इनके कृतित्व और व्यक्तित्व को देश सदा याद करेगा।

कवि-संबंधी प्रश्न एवं उत्तर

1. अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म कब और कहाँ हुआ था ? 

उत्तर: अटल बिहारी वाजपेयी जी का जन्म 25 दिसंबर, 1924 को मध्य प्रदेश के शिन्दे की छावनी ( ग्वालियर) में हुआ था।

2. अटल बिहारी वाजपेयी की किन्हीं दो कविता संग्रह के नाम लिखिए।

उत्तर: अटल बिहारी वाजपेयी के दो कविता संग्रह है- 

(i) मेरी इक्यावन कविताएँ

(ii) न दैन्यं न पलायनम्

3. वाजपेयी जी का कर्म-जीवन किस कार्य से प्रारंभ हुआ ? 

उत्तरः वाजपेयी जी का कर्म-जीवन पत्रकारिता से प्रारंभ हुआ।

4. उन्होंने किन पत्र-पत्रिकाओं का संपादन किया था ?

उत्तर: अटल बिहारी वाजपेयी जी पांचजन्य (साप्ताहिक), राष्ट्रधर्म (मासिक), स्वदेश (दैनिक) और वीर अर्जुन (दैनिक) जैसे कई राष्ट्रवादी पत्र पत्रिकाओं का संपादन किया था।

5. वाजपेयी जी को क्या-क्या अच्छा लगता था ? 

उत्तर: वाजपेयी जी पढ़ने-लिखने, सिनेमा देखने यात्राएँ करने और खाना पकाने- खाने के शौकीन थे।

6. वाजपेयी जी को कौन-सी चिंता हरदम रहती थी ?

उत्तरः वाजपेयी जी को देश की आर्थिक उन्नति, वंचितों के उत्थान और महिलाओं तथा बच्चों के कल्याण की चिंता हरदम रहती थी।

7. अटल बिहारी वाजपेयी जी को देश का सर्वोच्च सम्मान ‘भारत रत्न’ से कब नवाजा गया ? 

उत्तर: अटल विहारी वाजपेयी को देश का सर्वोच्च सम्मान’ भारत रत्न’ से सन् 2014 में नवाजा गया। 

8. अटल बिहारी वाजपेयी का निधन कब हुआ ?

उत्तर: अटल बिहारी वाजपेयी का निधन 16 अगस्त, 2018 को हुआ।

सारांश

अटल बिहारी वाजपेयी जी द्वारा रचित कविता “कदम मिलाकर चलना होगा” एक प्रेरणादायक कविता है। इस कविता के माध्यम से कवि ने मनुष्य जीवन के मार्ग में आनेवाली विभिन्न बाधाओं एवं कठिनाइयों का मुकाबला करते हुए निरंतर आगे बढ़ने का संदेश दिया है। इस कविता में सामूहिक विकास व उत्थान की प्रेरणा है। इस कविता के माध्यम से बच्चों के हृदय में उत्साह और साहस की भावना जगाने का प्रयास किया गया है। वस्तुतः मनुष्य को अपने लक्ष्य को पाने के लिए कदम से कदम मिलाकर चलना ही होगा। इसी में सबकी भलाई है।

पाठ्यपुस्तक संबंधित प्रश्न एवं उत्तर

बोध एवं विचार

1 सही विकल्प का चयन कीजिए:

(क) कवि ने किनके आने की परवाह नहीं की है ?

(i) बाधाओं के

(ii) पीड़ाओं के

(iii) तूफानों के

(iv) वर्षा के

उत्तर: (i) बाधाओं के

(ख) कवि ने हमें कैसे चलने का आह्वान किया है ?

(i) हाथ मिलाकर

(ii) कदम मिलाकर

(iii) कतार बनाकर

(iv) समूह बनाकर

उत्तर: (ii) कदम मिलाकर

(ग) कवि के अनुसार जीत कैसी होती है ?

(i) दीर्घ

(ii) शून्य

(iii) स्थायी

(iv) क्षणिक

उत्तर: (iv) क्षणिक

(घ) मानव जीवन किससे सज्जित है ?

(i) काँटों से 

(ii) प्यार से

(iii) घृणा से

(iv) जंजीरों से

उत्तर: (i) काँटों से

(ङ) जीवन के लक्ष्य से क्या अपेक्षा की जाती है ?

(i) प्रगति

(ii) कष्ट

(iii) अपमान

(iv) प्यार

उत्तर: (i) प्रगति

2. निम्नलिखित प्रश्नों के संक्षिप्त उत्तर दीजिए:

(क) कवि ने किस प्रकार की विपत्तियों में हँसते-हँसते आगे बढ़ने की बात कही है ?

उत्तर: कवि ने जीवन-पथ पर चलने के लिए सभी प्रकार की विपत्तियों में भी हमें हँसते-हँसते आगे बढ़ने की बात कही है। कवि कहता है कि अगर बाधाएँ आती हैं तो आएँ, भले ही चारों ओर विपत्तियों के बादल छा जाएँ, मगर हमें विचलित नहीं होना चाहिए। अगर सिर पर विपत्तियों का पहाड़ टूट पड़े, पथ पर अंगारे बिछ जाएँ, तो भी हमें हँसते-हँसते उन विपत्तियों को टालना होगा, तभी हम अपने लक्ष्य को पा सकते हैं।

( ख ) उन्नत मस्तक रखने के लिए हमें किन परिस्थितियों से गुजरना पड़ता है ? 

उत्तर: हमें उन्नत मस्तक रखने के लिए निम्नलिखित परिस्थितियों से गुजरना पड़ता

(i) हँसी और खुशी

(ii) आँधी-तूफान 

(iii) त्याग-बलिदान

(iv) उद्यान विरान

(v) सम्मान-अपमान

(vi) कष्ट-पीड़ा

वस्तुतः सुख और दुःख दोनों परिस्थितियों से गुजरकर ही हम अपना सिर ऊँचा कर जी सकते हैं।

(ग) कवि ने मनुष्य के दिल में अरमानों को सँजोए रखने की बात क्यों की है?

उत्तर: कवि ने प्रस्तुत कविता के माध्यम से मनुष्य के दिल में अस्मानों को सँजोए रखने की बात की है क्योंकि अरमानों से ही मनुष्य लक्ष्य की ओर आगे बढ़ना चाहता है। कहने का आशय यह है कि मनुष्य के दिल में जब तक कुछ करने या पाने की इच्छा नहीं होती, तब तक वह अपने अपेक्षित लक्ष्य की ओर आगे नहीं बढ़ता है। कवि कहता है कि हमारे जीवन में चाहे अंधकार हो या प्रकाश, घृणा हो या प्रेम, हार हो या जीत-ये सभी जीवन के लिए आवश्यक हैं। अतः मुसीबतों से बिना घबराए हमें अपने दिल में अरमानों को सँजोए रखना चाहिए। मनुष्य को अंततः सफलता अवश्य प्राप्त होती है।

(घ) कवि ने ‘परहित अर्पित अपना तन-मन’ क्यों कहा है? अपना विचार प्रकट कीजिए।

उत्तरः कवि ने ‘परहित अर्पित अपना तन-मन’ इसलिए कहा है, क्योंकि मनुष्य का जीवन केवल स्वयं के लिए नहीं होता। परहित यानी परोपकार में ही मनुष्य को परम आनंद प्राप्त होता है। शास्त्रों में भी परोपकार को सबसे बड़ा धर्म कहा गया है। इसलिए कवि अपना तन-मन दूसरों की भलाई के लिए अर्पित करना चाहता है। यहाँ कवि ने व्यक्ति से बढ़कर समाज एवं राष्ट्र की कल्पना की है। उनके अनुसार स्वहित के लिए जीना मृत्यु के समान और परहित के लिए जीना अमरता के समान है।

(ङ) ‘जीवन को शत-शत आहुति में, जलना होगा’- का आशय क्या है ?

उत्तर: ‘जीवन को शत-शत आहुति में, जलना होगा’ का आशय यह है कि अनेक प्रकार की विपत्तियाँ मनुष्य को झेलनी होंगी। अपने सर्वस्व त्याग और बलिदान के कारण ही मनुष्य अपने जीवन को सार्थक बना सकता है। अर्थात् अपने राष्ट्र की उन्नति के लिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने सामर्थ्य के अनुरूप योगदान देना चाहिए। अनेक प्रकार की विपत्तियों से गुजरकर और अपने जीवन की आहुति देकर भी अपनी मातृभूमि की रक्षा करनी होगी।

(च) ‘कदम मिलाकर चलना होगा’- कविता का केंद्रीय भाव लिखिए। 

उत्तर: ‘कदम मिलाकर चलना होगा’ शीर्षक कविता अटल बिहारी वाजपेयी जी की प्रेरणा और ओज से परिपूर्ण एक सुंदर रचना है। इस कविता के जरिए कवि ने मनुष्य जीवन के मार्ग में आनेवाली विभिन्न बाधाओं एवं कठिनाइयों का मुकाबला करते हुए निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी है।

     कवि का कहना है कि मनुष्य के जीवन में सुख-दुःख, सम्मान-अपमान, घृणा प्रेम, हार-जीत अवश्य आते हैं। हमें जीवन के कँटकों से घबराना नहीं चाहिए। कंधे से कंधा मिलाकर चलने से समाज और देश की भलाई होती है। अगर कोई एक तबका पीछे रह जाए तो देश का मस्तक ऊँचा नहीं होगा। अतः स्वयं के साथ ही दूसरों को साथ लेकर चलना ही जीवन की सार्थकता है।

भाषा एवं व्याकरण

1. निम्नलिखित शब्दों के बहुवचन रूप लिखिए : 

बाधा, अंगार, सीना, घटा, पीड़ा, लड़का, धारा, दरवाजा, सफलता, परदा, कीला, ज्वाला

बाधा -बाधाएँ

अंगार -अंगारे 

सीना -सीने

घटा -घटाएँ 

पीड़ा -पीड़ाएँ

लड़का -लड़के

धारा-धाराएँ

दरवाजा- दरवाजे

सफलता- सफलताएँ

परदा- परदे 

कीला -कीले

ज्वाला -ज्वालाएँ

2. निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द लिखिए

सृष्टि, सम्मान, प्रकाश, जीत, हर्ष, हित

सृष्टि-प्रलय

सम्मान- अपमान

प्रकाश- अंधकार

जीत- हार

हर्ष- विषाद 

हित -अहित

अंबर भाग-2

अध्याय संख्यापाठ
पद्य खंड
पाठ 1पद-युग्म
पाठ 2वन-मार्ग में
पाठ 3किरणों का खेल
पाठ 4तोड़ती पत्थर
पाठ 5यह दंतुरित मुसकान
गद्य खंड
पाठ 6आत्म-निर्भरता
पाठ 7नमक का दारोगा
पाठ 8अफसर
पाठ 9न्याय
पाठ 10तीर्थ-यात्रा
पाठ 11वन भ्रमण
पाठ 12इंटरनेट के खट्टे-मीठे अनुभव
पद्य खंड
पाठ 13बरगीत
पाठ 14कदम मिलाकर चलना होगा
गद्य खंड
पाठ 15अमीर खुसरू की भारत भक्ति
पाठ 16अरुणिमा सिन्हा : साहस की मिसाल
वैचित्र्यमय असम
तिवा
देउरी
नेपाली भाषी गोर्खा
बोड़ो
मटक
मोरान
मिसिंग
मणिपुरी
राभा
सोनोवाल कछारी
हाजंग
नाथ योगी
आदिवासी

3. निम्नलिखित युग्म शब्दों को पढ़िए और समझिए :

हँसते-हँसते, शत-शत, तन-मन 

उत्तरः

हँसते-हँसते -खूब हँसते हुए

शत-शत-कई शतक

तन-मन- तन और मन

4 निम्नलिखित संज्ञा-शब्दों के विशेषण-रूप लिखिए : 

क्षण, हर्ष, मुखर, अर्पण, नीरवता, आकर्षण, सम्मान, बाधा, पीड़ा, वंचना, घृणा, श्रम

उत्तरः

क्षण- क्षणिक

हर्ष- हर्षित

मुखर – मुखरित

अर्पण -अर्पित

नीरवता -नीरव

आकर्षण -आकर्षक

सम्मान- सम्मानित

बाधा -बाधित

पीड़ा- पीड़ित

वंचना- वंचित

घृणा- घृणित 

श्रम -श्रमिक

योग्यता- विस्तार

1. पूर्व राष्ट्रपति ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के बारे में एक निबंध लिखिए। 

उत्तरः पूर्व राष्ट्रपति ए. पी. जे. अब्दुल कलाम (अबुल पकिर जैनुला अबदीन अब्दुल कलाम) भारतीय गणतंत्र के ग्यारहवें राष्ट्रपति थे। उन्हें मिसाइल मैन और जनता के राष्ट्रपति के नाम से जाना जाता है। 15 अक्टूबर 1931 को धनुषकोडी गाँव (रामेश्वर, तमिलनाडु) में एक मध्यमवर्ग मुस्लिम परिवार में इनका जन्म हुआ। इनके पिता जैनुला अबदीन न तो ज्यादा पढ़े-लिखे थे, न ही पैसेवाले थे। इनके पिता मछुवारों को नाव किराए पर दिया करते थे। अब्दुल कलाम संयुक्त परिवार में रहते थे। इनकी प्रारंभिक शिक्षा रामेश्वर के प्राथमिक विद्यालय में हुई। उच्च शिक्षा मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में हुई। वहीं से उन्होंने अंतरिक्ष विज्ञान में स्नातक की उपाधि प्राप्त की। स्नातक होने के बाद उन्होंने हावरक्राफ्ट परियोजना पर काम करने के लिए भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संस्थान में दाखिला लिया। 1962 में वे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन में आए, जहाँ उन्होंने सफलतापूर्वक कई उपग्रह प्रक्षेपण परियोजना में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इन्होंने 1974 में भारत द्वारा पहले मूल परमाणु परीक्षण के बाद से दूसरी बार 1998 में भारत के पोखरन द्वितीय परमाणु परीक्षण में एक निर्णायक भूमिका निभाई। डॉ. अब्दुल कलाम पाँच वर्ष राष्ट्रपति की अवधि की सेवा के बाद शिक्षा, लेखन और सार्वजनिक सेवा के अपने नागरिक जीवन में लौट आए। इन्होंने भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ के अलावा देश- विदेश के कई प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त किए।

27 जुलाई, 2015 को भारतीय प्रबंधन संस्थान, शिलांग में एक व्याख्य के दौरान दिल का दौरा पड़ने से डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम जी का निधन हुआ। वैज्ञानिक और उदार व्यक्तित्व के धनी डॉ. अब्दुल कलाम के जीवन और कार्य नई पीढ़ी के लिए हमेशा प्रेरणास्रोत बने रहेंगे।

अतिरिक्त प्रश्न एवं उत्तर

बहुविकल्पी प्रश्न

(क ) ‘कदम मिलाकर चलना होगा’ शीर्षक कविता के रचयिता हैं:

(i) अटल बिहारी वाजपेयी

(ii) प्रदीप

(ii) सुमित्रा नंदन पंत

(iv) विष्णु प्रभाकर

उत्तरः (i) अटल बिहारी वाजपेयी 

(ख) कविता का उद्देश्य है :

(i) व्यक्तिगत प्रगति

(ii) पारिवारिक प्रगति

(iii) क्षेत्रीय प्रगति

(iv) सामूहिक प्रगति

उत्तर: (iv) सामूहिक प्रगति

(ग) ‘सब कुछ देकर कुछ न माँगते, पावस बनकर ढलना होगा’ का आशय क्या है ?

(i) निःस्वार्थ सेवा करना

(ii) वर्षा होना

(iii) लेन-देन करना

(iv) किसी से कुछ नहीं माँगना

उत्तर: (i) निःस्वार्थ सेवा करना

(घ) मानव-जीवन किसके लिए अर्पित होना चाहिए ?

(i) स्वहित के लिए

(ii) जीव-जंतुओं के लिए

(iii) परहित के लिए

(iv) संसार के लिए

उत्तर: (iii) परहित के लिए

संक्षिप्त उत्तर लिखिए

1. कवि के अनुसार मनुष्य जीवन कैसा है ?

उत्तर: कवि के अनुसार मनुष्य जीवन सुख दुःख, हास्य रूदन, प्रेम-घृणा और जय-पराजय से परिपूर्ण है। 

2. कवि ने हमें ‘पावस’ बनने की प्रेरणा क्यों दी है ?

उत्तर: पावस यानी वर्षा ऋतु धरती को जल से परिपूर्ण कर देती है। चारों तरफ खुशियाँ बिखेरती हैं। किसानों से लेकर प्रकृति के तमाम उपादान हर्षित हो जाते हैं। उसी प्रकार मनुष्य को भी दूसरों के लिए कुछ कर गुजरने की इच्छा होनी चाहिए। हमें उदारतापूर्वक दूसरों की सेवा और भलाई करनी चाहिए।

3. कवि ने हमें कदम मिलाकर चलने के लिए क्यों कहा है ? 

उत्तरः कवि अटल बिहारी वाजपेयी राष्ट्रीय विचारधारा के कवि और नेता रहे है। उन्होंने देश के विकास और जनता की भलाई के लिए सभी देशवासियों से आह्वान किया है कि वे कदम से कदम मिलाकर निरंतर बढ़ते रहें। इसी में सबका हित और विकास है।

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