SEBA Class 10 Hindi (MIL) Solution| Chapter-11| वन भ्रमण

SEBA Class 10 Hindi (MIL) Solution| Chapter-11| वन भ्रमण सूची में प्रत्येक अध्याय का उत्तर प्रदान किया गया है ताकि आप आसानी से विभिन्न अध्याय एनसीईआरटी समाधान कक्षा 10 अंबर भाग-2 में खुल सकें और एक की आवश्यकता का चयन कर सकें। इसके अलावा आप एनसीईआरटी (CBSE) पुस्तक दिशानिर्देशों के अनुसार विशेषज्ञ शिक्षकों द्वारा इस खंड में NCERT पुस्तक ऑनलाइन पढ़ सकते हैं। ये समाधान NCERT हिंदी (MIL) समाधान का हिस्सा हैं। यहां हमने कक्षा 10 NCERT अंबर भाग -2 पाठ्य पुस्तक समाधान अंबर भाग -2 के SEBA Class 10 Hindi (MIL) Solution| Chapter-11| वन भ्रमण लिए दिए हैं आप यहां इनका अभ्यास कर सकते हैं।

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SEBA Class 10 Hindi (MIL) Solution| Chapter-11| वन भ्रमण

SEBA Class 10 Hindi (MIL) Solution| Chapter-11| वन भ्रमण ये उत्तर संबंधित विषयों के अनुभवी प्रोफेसरों द्वारा सावधानीपूर्वक तैयार किए जाते हैं। उनका उद्देश्य छात्रों को विषय की उचित समझ में मदद करना और उनके कौशल और अभिव्यक्ति की कला में सुधार करना है। यदि ये उत्तर उन उद्देश्यों को पूरा करते हैं जिनके साथ वे तैयार किए गए हैं, तो हम अपने प्रयास को पर्याप्त रूप से पुरस्कृत मानेंगे। इन उत्तरों में और सुधार के लिए किसी भी सुझाव का हमेशा स्वागत है।

पाठ – 11

लेखिका परिचय – अनुराधा शर्मा पुजारी

अनुराधा शर्मा पुजारी असमीया साहित्य की एक सुप्रसिद्ध लेखिका तथा पत्रकार हैं। इनका जन्म सन् 1964 में असम के जोरहाट शहर में हुआ। इन्होंने जोरहाट के देवीराम बस्वा महाविद्यालय से स्नातक की डिग्री और डिब्रुगढ़ विश्वविद्यालय से समाज-शास्त्र में स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद इन्होंने कोलकाता के “बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ लिबरल आर्ट्स एंड मैनेजमेंट” से पत्रकारिता की डिग्री प्राप्त की। अध्ययन पूरा करने के बाद इन्होंने कोलकाता में ही “एकाडमी ऑफ फाइन आर्ट्स” में अध्यापन के जरिए अपना कर्मजीवन का प्रारंभ किया। असमीया अखबारों तथा पत्रिकाओं में अनुराधा शर्मा पुजारी निरंतर लिखती आई हैं। असमीया भाषा-साहित्य एवं कला-संस्कृति के विकास में इनकी रचनाएँ महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। विशेषकर शैक्षिक दृष्टि से रचित अनुराधा शर्मा पुजारी की रचनाएँ विद्यार्थियों को हमेशा प्रेरणा देती आ रही हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान हेतु असमीया दैनिक समाचार पत्र “आमार असम ” द्वारा इन्हें रेनेसाँ असम पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। वर्तमान में असम की महिला लेखिकाओं में अनुराधा शर्मा पुजारी का विशेष स्थान है।

लेखिका संबंधी प्रश्न एवं उत्तर

1. ‘वन भ्रमण’ पाठ की लेखिका कौन है?

उत्तर: ‘वन भ्रमण’ पाठ की लेखिका अनुराधा शर्मा पुजारी है।

2. अनुराधा शर्मा पुजारी का जन्म कब और कहाँ हुआ था ?

उत्तरः अनुराधा शर्मा पुजारी का जन्म सन् 1964 में असम के जोरहाट में हुआ था। 

3. अनुराधा शर्मा पुजारी ने किस महाविद्यालय से स्नातक की डिग्री प्राप्त की ?

उत्तर: अनुराधा शर्मा पुजारी ने जोरहाट के देवीराम बरुवा महाविद्यालय से स्नातक की डिग्री प्राप्त की।

4. अनुराधा शर्मा पुजारी ने किस विषय में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की ? 

उत्तरः अनुराधा शमा पुजारी ने समाजशास्त्र में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की।

5. अनुराधा शर्मा पुजारी ने पत्रकारिता किस संस्थान से पूरा किया ? 

उत्तर: कोलकाता के बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ लिबरल आर्ट एण्ड मैनेजमेंट से अनुराधा शर्मा पुजारी ने पत्रकारिता की 

6. अनुराधा शर्मा पुजारी ने अध्यापन कार्य कहाँ शुरू किया? 

उत्तर: कोलकाता के एकाडमी ऑफ फाइन आर्ट्स में अनुराधा शर्मा पुजारी ने अध्यापन का कार्य शुरू किया।

7. अनुराधा शर्मा पुजारी किस असमीया दैनिक समाचार पत्र से जुड़ी हैं ? 

उत्तरः गुवाहाटी से प्रकाशित ‘आमार असम’ दैनिक समाचार-पत्र से जुड़ी है।

8. अनुराधा शर्मा पुजारी को किस पुरस्कार से सम्मानित किया गया है ? 

उत्तरः ‘रेने साँ असम पुरस्कार’ से अनुराधा शर्मा पुजारी को सम्मानित किया गया है।

सारांश

‘वन भ्रमण’ एक शिक्षाप्रद एवं रोचक यात्रा-वृत्तांत है। इसकी लेखिका अनुराधा शर्मा पुजारी हैं। इसमें विश्वप्रसिद्ध राष्ट्रीय उद्यान काजीरंगा के बारे में वर्णन किया गया है।

कक्षाध्यापकों के द्वारा काजीरंगा भ्रमण के लिए जाने की घोषणा होते ही विद्यार्थियों में खुशी की लहर दौड़ गई। आठवीं एवं नौवीं कक्षाओं के पचास विद्यार्थियों एवं पाँच शिक्षक-शिक्षिकाओं का एक दल तैयार किया गया। सभी विद्यार्थियों को वस्तुओं की सूची बता दी गई। पंखुड़ी और उसके भाई पवन ने भी अपने-अपने सामान तैयार किए। एक बैग में सभी सामान भर लिए गए। पंखुड़ी और एनए के पाता-पिता ने उन्हें आवश्यक निर्देश एवं आशीर्वाद दिए।

दो बसों में बैठे विद्यार्थी काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान की ओर चल पड़े। सभी खुश थे। शिक्षकों ने सभी विद्यार्थियों को आवश्यक निर्देश दिए। काजीरंगा में सभी विद्यार्थियों को सुन्दर सुन्दर कमरों में ठहराया गया। सबने खाना खाया और अपनी-अपनी थालियाँ धोईं। दोपहर बाद सभी विद्यार्थी सो गए; पर सौरभ, पवन और आफताब चुपके से निकलकर जलाशय के किनारे पहुँच गए। वहाँ एक नौका थी। आफताब ने नाव की रस्सी खोलकर उसे चप्पू के सहारे चलाने लगा। लेकिन कुछ दूर जाकर नाव जलकुंभी में फँस गई। नाव में छेद थी इसलिए उसमें पानी भरने लगा। सभी डर गए। पवन ‘बचाओ-बचाओ’ चिल्लाने लगा। लेकिन आस-पास कोई न था। तभी खेतों से होकर कुछ लड़कियाँ वहाँ आई और उन तीनों को डूबने से बचाया।

इस घटना से सभी चिंतित हो गए। सभी ने तीनों लड़कों को यह सुझाव दिया कि जो काम करना नहीं आए, उसमें हाथ नहीं देना चाहिए। सजा के तौर पर उन तीनों को उस दिन भ्रमण पर जाने से रोक दिया गया।

दूसरे दिन पवन, सौरभ और आफताब ने गुरुजनों से माफी मांगी तब उन्हें काजीरंगा वन भ्रमण के लिए ले जाया गया। सभी खुश थे। सबने जंगल में विचरण करते गैंडे और अन्य जानवरों को देखा। मालविका मैडम ने काजीरंगा वनांचल के राष्ट्रीय उद्यान बनने तक की पूरी कहानी बच्चों को सुनाई। वन भ्रमण से विद्यार्थियों को बहुत लाभ हुआ। बहुत-सी बातें सीखने को मिलीं। अंत में सभी सुरक्षित अपने- अपने घर लौट आए।

पाठ्यपुस्तक संबंधित प्रश्न एवं उत्तर

■ बोध एवं विचार

1. सही विकल्प का चयन कीजिए :

(क) वन भ्रमण का कार्यक्रम कितने दिनों का था ?

(i)दो

(ii)तीन

(iii)चार

(iv)पाँच

उत्तर: (iii)चार

(ख) वन भ्रमण के लिए कितने विद्यार्थियों का चयन हुआ ?

(i)25

(ii)40

(iii)45

(iv)50

उत्तर (iv) 50

(ग) वन भ्रमण पर विद्यार्थियों को अपने साथ कौन-सी चीज ले जाने की मनाही थी ?

(i) कपड़े के जूते

(ii) कैमरा और मोबाइल फोन

(iii) टॉर्चलाइट

(iv) डायरी

उत्तर: (ii) कैमरा और मोबाइल फोन

(घ)शिक्षक ने विद्यार्थियों में लंच पैकेट एवं पानी की बोतलों काम किन्हें सौंपा ?

(i) सौरभ और पवन

(ii) आफताब और रुमि

(iii) पंखुड़ी और बिदिसा

(iv) सौरभ और आफताब

उत्तर:(iv) सौरभ और आफताब

2. पूर्ण वाक्य में उत्तर दीजिए :

(क) विद्यार्थियों के बीच किस बात की चर्चा थी ? 

उत्तर: विद्यार्थियों में काजीरंगा वन भ्रमण पर जाने की चर्चा थी।

(ख) भ्रमण पर जाने के लिए किस स्थान का चयन किया गया

उत्तरः भ्रमण पर जाने के लिए काजीरंगा का चयन किया गया।

(ग) “मैं तो लड़का हूँ। यह काम तो लड़कियों का है।” यह किसका कथन है ?

उत्तर: यह पवन का कथन है।

(घ) एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए ऑक्सीजन की कितनी मात्रा होनी चाहिए ? 

उत्तर: एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए 35% ऑक्सीजन की मात्रा होनी चाहिए।

(ङ) क्या गैंडे केवल काजीरंगा में ही पाए जाते हैं? – यह प्रश्न किसने किया ?

उत्तर: यह प्रश्न मानसी ने किया।

(च) तीनों लड़कों को नाव कहाँ से मिली ?

उत्तर: तीनों लड़कों को नाव तालाब में मिली।

(छ) बापीराम किस नाम से प्रसिद्ध था ? 

उत्तर: बापीराम निगना शिकारी के नाम से प्रसिद्ध था।

(ज) याण्डाबू की संधि कब की गई थी ? 

उत्तर: याण्डाबू की संधि सन् 1826 में की गई थी।

(झ) प्रथम भारतीय एवं असमीया वन अधिकारी कौन थे ? 

उत्तर: महीचंद्र मिरि प्रथम भारतीय एवं असमीया वन अधिकारी थे।

(ञ) मेरी कर्जन ने काजीरंगा अभयारण्य के संरक्षण के लिए किससे अनुरोध किया ?

उत्तर: मेरी कर्जन ने काजीरंगा अभयारण्य के संरक्षण के लिए लॉर्ड कर्जन से अनुरोध किया।

3. संक्षिप्त उत्तर दीजिए:

(क) कक्षाध्यापकों के द्वारा वन भ्रमण पर जाने की घोषणा करने पर विद्यार्थियों में क्या प्रतिक्रिया हुई ?

उत्तर: कक्षाध्यापकों के द्वारा वन भ्रमण पर जाने की घोषणा करने पर विद्यार्थियों में खुशी की लहर दौड़ गई। विद्यार्थियों में केवल एक ही बात की चर्चा होती थी कि वन भ्रमण के लिए कहाँ जाया जाए।

(ख) भ्रमण पर जाने के लिए विद्यार्थियों को क्या-क्या निर्देश दिए गए ? 

उत्तर: भ्रमण के लिए जाने से पहले विद्यार्थियों को अपने साथ ले जाने वाली सामग्री की सूची बनाने के लिए कहा गया। उन्हें यह बता दिया गया कि अपने साथ ले जाने वाली वस्तुएँ विद्यार्थी स्वयं लेकर आएँगे। इसके अतिरिक्त उन्हें मोबाइल फोन और कैमरा साथ ले जाने के लिए मना किया गया।

(ग) पवन कौन है ? उसमें क्या-क्या अवगुण हैं ? 

उत्तर: पवन पंखुड़ी का भाई है तथा नौवीं कक्षा में पढ़ता है। उसमें अनेक अवगुण हैं। वह बहुत कम पढ़ता है। देर तक सोता रहता है। वह खाना खाकर अपना बर्तन स्वयं नहीं धोता। वह अपनी बहन पंखुड़ी से हमेशा झगड़ता रहता है। 

(घ) माँ पंखुड़ी और पवन के बीच हो रहे झगड़े को कैसे शांत करती थी ?

उत्तर: माँ पंखुड़ी और पवन को मिठाई, बिस्कुट अथवा अपने बागान के केले के घौद में से दो-चार पके केले तोड़कर देती और दोनों का झगड़ा शांत कराती।

(ङ) भ्रमण पर जाने के लिए आवश्यक वस्तुओं की एक सूची तैयार कीजिए 

उत्तर: वस्तुओं की सूची इस प्रकार है एक बड़ी और एक छोटी डायरी, कपड़े के जूते, टोपी, पतला गमछा, दवाइयाँ, टॉर्चलाइट, सूती कपड़ा, कलम आदि।

(च) “मैं भ्रमण पर नहीं जाऊँगा।” पवन ने अपनी माँ से ऐसा क्यों कहा? 

उत्तरः पवन अपना काम स्वयं नहीं करता था। जब भ्रमण पर जाने से पहले पंखुड़ी ने अपना सामान ठीक कर लिया और पवन ऐसा नहीं कर सका। इसलिए उसने माँ से कहा कि मैं भ्रमण पर नहीं जाऊँगा।

(छ) पंखुड़ी ने घड़ी में ‘अलार्म’ क्यों लगाई थी ?

उत्तर: पंखुड़ी को भ्रमण पर जाने के लिए सुबह जल्दी उठना था इसलिए उसने अपनी घड़ी में ‘अलार्म’ लगाई थी। 

(ज) शिक्षकों ने भ्रमण पर जा रहे विद्यार्थियों में से किसे क्या-क्या दायित्व सौंपे ?

उत्तर : शिक्षकों ने छात्र-छात्राओं के बीच से उनका नेता चुन दिया। छात्र-छात्राओं की गिनती और उनकी असुविधाओं पर ध्यान देने का दायित्व पंखुड़ी और विदिशा को दिया गया। विद्यार्थियों के बीच लंच पैकेट एवं पानी की बोतलें बाँटने का दायित्व सौरभ और आफताब को दिया गया।

(झ) ऑक्सीजन हमारे लिए क्यों जरूरी है? 

उत्तर: ऑक्सीजन मनुष्य को स्वस्थ और जीवित रखता है। कोई भी जीव बगैर ऑक्सीजन के जीवित नहीं रह सकता। हमलोग जो साँस लेते हैं, वह ऑक्सीजन गैस ही होती है।

(ञ) ‘सेल्फ सर्विस’ का आशय क्या है ? 

उत्तर: ‘सेल्फ सर्विस’ अंग्रेजी भाषा का शब्द है। इसका अर्थ है- अपना काम स्वयं करना। जैसे खाना खाने के बाद अपना बर्तन स्वयं साफ करना। बिस्तर छोड़ने के बाद अपनी मच्छरदानी ठीक करना और सोने से पहले अपना बिस्तर और मच्छरदानी स्वयं लगाना आदि।

(ट) पंखुड़ी ने तीनों लड़कों की ओर से किन शब्दों में माफी माँगी ? 

उत्तर: पंखुड़ी ने माफी माँगते हुए कहा- ‘इसके लिए हम बहुत दुःखी और क्षमाप्रार्थी हैं। हमारे तीन भाइयों ने नीची हरकत करके हमारी आशाओं पर पानी फेर दिया है। परन्तु तीनों की गलती की सजा सभी विद्यार्थियों को देना उचित नहीं है। इन तीनों की सजा यह होगी कि सभी विद्यार्थियों के साथ इन्हें भ्रमण पर नहीं ले जाया जाए।’

(ठ) भ्रमण पर जाने से पहले माता-पिता ने पंखुड़ी और पवन को क्या समझाया ? 

उत्तरः पंखुड़ी के पिताजी ने समझाया कि शिक्षकों का साथ मत छोड़ना। उनकी आज्ञा का पालन करना। उसके बाद पंखुड़ी की माँ ने उन्हें यह समझाया कि वन भ्रमण से बहुत सी बातें सीखी जा सकती हैं। जितना चाहो सीखने की कोशिश करना तथा अपनी-अपनी चीजें संभालकर रखना।

(ड) काजीरंगा को गैंडों का निवास स्थान क्यों कहते हैं ? 

उत्तर: गैंडे संसार के सभी जंगलों में पाए जाते हैं। परन्तु असम के कांजीरंगा में बड़ी संख्या में गैंडे पाए जाते हैं। इसलिए काजीरंगा को गैंडे का निवास स्थान कहा जाता है।

4. सम्यक् उत्तर जीजिए: 

( क ) काजीरंगा भ्रमण पर जाने के लिए विद्यार्थियों ने क्या-क्या तैयारियाँ की ? 

उत्तर: विद्यार्थियों ने भ्रमण पर ले जाने लायक वस्तुओं की सूची बनाकर अपनी तैयारियाँ की। सभी विद्यार्थियों ने वस्तुएँ अपने-अपने बैग में भरकर रख लिए। पंखुड़ी ने भी ले जाने लायक वस्तुएँ एक बड़े से थैले में भरकर रख ली। सुबह उठने के लिए अपनी घड़ी में अलार्म भी लगाकर रख ली। सभी समय पर विद्यालय पहुँच गए और दोनों बसों में अपनी-अपनी जगह पर बैठ गए।

(ख) पवन, सौरभ और आफताब चुपके से कैसे निकले ? 

उत्तर: दोपहर के भोजन के बाद सभी विद्यार्थी आराम कर रहे थे तभी पवन, सौरभ और आफताब कमरे के पीछे जाकर बगीचे के दरवाजे पर लगे लोहे के फाटक को फाँदकर बाहर निकले। दरवाजे को पार करने के बाद उन्हें एक बड़ा-सा जलाशय दिखाई दिया। 

(ग) पवन, सौरभ और आफताब किस प्रकार की मुसीबत में फँस गए थे? क्या वे मुसीबत से मुक्त हुए ? यदि हाँ तो कैसे ?

उत्तर: तीनों लड़के जलाशय के पास पहुँचे और उसमें रस्सी से बँधी नाव को खोलकर उस पर वे सवार हो गए। नाव जलकुंभी में फँस गई और उसमें छेद से होकर पानी भी भरने लगा। वे तीनों डूबने लगे। वे भारी मुसीबत में फँस गए और बचाओ बचाओ की आवाज लगाने लगे। कुछ देर बाद मछली पकड़ने वाली कुछ लड़कियाँ जो उधर से गुजर रही थीं, आवाज सुनकर दौड़ी चली आईं और तीनों को डूबने से बचाया।

(घ) पाँचों लड़कियाँ कौन थीं? वे कब और कहाँ से आ रही थीं ? उन्होंने तीनों लड़कों को कैसे बचाया ?

उत्तर: पाँचों लड़कियाँ मछली पकड़कर खेतों से होकर लौट रही थीं। वे तीनों लड़कों की पुकार सुनकर वहाँ आईं और जलाशय में कूदकर उनकी जान बचा ली। 

(ङ) भ्रमण को आनंददायक कैसे बनाया जा सकता है ?

उत्तर: भ्रमण शिक्षा का एक आवश्यक अंग है। कुछ नियमों का पालन करके तथा अनुशासित रहकर भ्रमण को आनंददायक बनाया जा सकता है। इसके लिए हमें अपने गाइड की बात को मानना एवं सावधानी रखना भी आवश्यक है।

(च) वनों से क्या-क्या लाभ है ?

उत्तर: वनों से अनेक लाभ हैं। वनों में प्रचुर मात्रा में ऑक्सीजन प्राप्त होती है। वनों से कीमती लकड़ियाँ, जड़ी बूटियाँ तथा नाना प्रकार के वन्य जीव-जंतु मिलते हैं। वनों से कीमती घास प्राप्त होती है, जिनका आर्थिक महत्व होता है। वन बादलों को आकर्षित करके वर्षा कराने में मदद करते हैं।

(छ) वन्य जीव मनुष्य के मित्र हैं, परंतु किन हालात में वे मनुष्य पर आक्रमण करते हैं ?

उत्तरः वन्य जीव बड़े ही सुंदर और आकर्षक होते हैं। वे किसी भी तरह मनुष्य को हानि नहीं पहुँचाते। वे पारिस्थितिक तंत्र को संतुलित बनाए रखते हैं। परंतु मनुष्य जब वन्य जीवों को पहँचाते हैं अथवा उनके रहने या विचरण करने अथवा शिकार करने वाले स्थानों का अतिक्रमण करते हैं तो वे मनुष्य पर आक्रमण करते

(ज) काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए। 

उत्तर: काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान भारत का एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय उद्यान है। यह पूरे विश्व में एक सींग वाला गैंडा के लिए विख्यात हैं। यहाँ बड़ी संख्या में गैंडे पाए जाते हैं। काजीरंगा को गैंडों का निवास स्थान कहा जाता है। वैसे काजीरंगा में हाथी, हिरण, बन्दर आदि अनेक वन्य जीव भी पाए जाते हैं।

(झ) ‘वन भ्रमण’ पाठ से हमें क्या-क्या सीखें मिलती हैं ? 

उत्तर: ‘वन भ्रमण’ पाठ से हमें कई प्रकार की शिक्षा मिलती है। इसमें भ्रमण से पूर्व तथा भ्रमण स्थल तक पहुँचने तक की तैयारियों एवं अनुभवों से अवगत होने का लाभ प्राप्त होता है। एक साथ यात्रा करने, चाय-नाश्ता एवं सामूहिक भोजन करने का अवसर प्राप्त होता है। कई प्रकार के अनुशासन सीखने को मिला। विद्यार्थियों का मनोरंजन भी हुआ। वहीं एक स्थान पर थोड़ा दुखद अनुभव भी हुआ।

अंबर भाग-2

अध्याय संख्यापाठ
पद्य खंड
पाठ 1पद-युग्म
पाठ 2वन-मार्ग में
पाठ 3किरणों का खेल
पाठ 4तोड़ती पत्थर
पाठ 5यह दंतुरित मुसकान
गद्य खंड
पाठ 6आत्म-निर्भरता
पाठ 7नमक का दारोगा
पाठ 8अफसर
पाठ 9न्याय
पाठ 10तीर्थ-यात्रा
पाठ 11वन भ्रमण
पाठ 12इंटरनेट के खट्टे-मीठे अनुभव
पद्य खंड
पाठ 13बरगीत
पाठ 14कदम मिलाकर चलना होगा
गद्य खंड
पाठ 15अमीर खुसरू की भारत भक्ति
पाठ 16अरुणिमा सिन्हा : साहस की मिसाल
वैचित्र्यमय असम
तिवा
देउरी
नेपाली भाषी गोर्खा
बोड़ो
मटक
मोरान
मिसिंग
मणिपुरी
राभा
सोनोवाल कछारी
हाजंग
नाथ योगी
आदिवासी

5. सप्रसंग व्याख्या कीजिए:

(क) अपने जरूरत के काम की जानकारी न होने पर उसके लिए दूसरे पर निर्भर होना पड़ेगा। इससे तुम्हें तकलीफ होगी। तब समय तुम्हें धोखा देगा और दूसरे लोग भी ठगेंगे।

उत्तर: प्रसंग प्रस्तुत गद्यांश’वन भ्रमण’ पाठ से लिया गया है। इसकी लेखिका अनुराधा शर्मा पुजारी है। अनुराधा शर्मा पुजारी असमीया साहित्य की प्रतिष्ठित लेखिका एवं पत्रकार हैं। संदर्भ: यह पंखुड़ी की माँ का कथन है, जो पवन को समझा रही है। क्योंकि पवन अपना काम खुद नहीं करता।

व्याख्या: पंखुड़ी का भाई पवन निकम्मा, सुस्त और कामचोर है। वह न तो ठीक से पढ़ाई करता है न अपना छोटा-मोटा काम ही करता है। वह अपनी किताब कॉपियाँ भी संभालकर नहीं रखता। उसका सारा काम या माँ करती है अथवा पंखुड़ी पवन के बारे में पंखुड़ी अपनी माँ से बातें करती है। इसी सिलसिले में माँ उन दोनों भाई-बहन को समझाकर कहती है। उसके कहने का मतलब यह है कि नौकरी करना या अन्य काम करके धनोपार्जन करना अलग बात है। परंतु अपनीजरूरत के काम करना अलग बात है। सभी को अपना काम स्वयं करना चाहिए। उसे काम करने की जानकारी होनी चाहिए अन्यथा छोटा-मोटा काम के लिए भी उसे दूसरे का मुँह ताकना पड़ेगा। वही छोटा काम करने के लिए दूसरे लोग । अधिक रुपये माँगेंगे अथवा ठग भी लेंगे। समय बर्बाद होगा सो अलग।

ख) हाथी कभी भी हमारा शत्रु नहीं रहा है। 

उत्तर: प्रसंग: यह पंक्ति ‘वन भ्रमण’ पाठ से ली गई है। इसकी लेखिका अनुराधा शर्मा पुजारी हैं। पुजारी जी असमीया साहित्य की प्रतिष्ठित लेखिका एवं पत्रकार हैं। ये ‘आमार असम’ नामक दैनिक समाचार पत्र से जुड़ी हुई हैं।

संदर्भ : यहाँ यह बताया गया है कि हाथी ने हमेशा से मनुष्य का भला ही किया है। यह मनुष्य का मित्र जैसा रहा है। 

व्याख्या : विद्यालय से 50 विद्यार्थी काजीरंगा वन भ्रमण के लिए गए थे। काजीरंगा अभयारण्य में जाकर विद्यार्थियों ने हाथी की सवारी भी की। उसे स्पर्श करके भी देखा। विद्याथियों को हाथी बहुत प्यारा लगा। वास्तव में हाथी के साथ जब हम अच्छा व्यवहार करते हैं तो वह हमारा दोस्त बन जाता है। शुरू से ही हाथी से हमारा बेहद लगाव रहा है। पालतू हाथी हमें बहुत लाभ पहुँचाते हैं। हम उनकी सवारी करते हैं। वे भारी लकड़ी भी उठाकर हमारे लिए लाते हैं। जंगली हाथी घने जंगलों से गुजरकर हमारे लिए रास्ता बना देते हैं। यदि हम उसे तंग करेंगे या उनके रहने के लिए जंगल की कमी हो जाएगी तो वैसी स्थिति में वे मनुष्य के घर-द्वार भी तोड़ डालते हैं और फसल खाकर बर्बाद कर देते हैं।

(ग) पेड़-पौधे, वन्य जीव-जंतु सभी मानव के मित्र हैं। 

उत्तर: प्रसंग : प्रस्तुत पंक्ति ‘वन भ्रमण’ नामक पाठ से उद्धृत है। इसकी लेखिका अनुराधा शर्मा पुजारी हैं। पुजारी जी असमीया साहित्य की सुप्रसिद्ध लेखिका एवं पत्रकार हैं। वे ‘आमार असम’ नामक असमीया दैनिक समाचार-पत्र से जुड़ी हुई

संदर्भ: इस पंक्ति में यह बताया गया है कि पेड़-पौधे से लेकर वन्य जीव-जंतु सभी मानवजाति का हित करते हैं।

व्याख्या : विद्यालय से 50 विद्यार्थी एवं शिक्षकों का दल काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान भ्रमण पर गया था। वहाँ का भ्रमण करके विद्यार्थियों को अच्छा लगा। नाना प्रकार के पेड़-पौधे एव जंगली जानवरों को प्रत्यक्ष देखकर विद्यार्थी भाव-विभोर हो उठे। विज्ञान की शिक्षिका मालविका मैडम ने विद्यार्थियों को पेड़-पौधे एवं वन्य जीवों का महत्व बताती हुई कहती हैं कि धरती भर के सभी जीव-जंतु और पेड़ पौधे मनुष्य का भला करते हैं। पेड़-पौधों से हमें जीने लायक ऑक्सीजन मिलता है। जिस प्रकार पेड़-पौधे हानिकारक कार्बन डाई ऑक्साइड गैस ग्रहण कर हमें

ऑक्सीजन जैसे प्राणवायु देते हैं उसी प्रकार बहुत-से कीट-पतंग वायुमंडल के हानिकारक तत्वों को समाप्त करके पारिस्थितिक तंत्र को शुद्ध करते हैं और संतुलन बनाकर रखते हैं। पेड़-पौधे बादलों को आकर्षित करके वर्षा कराने में मदद करते हैं। अन्य जीव-जंतु हमें दूसरे तरीके से हमारी मदद करते हैं। वस्तुतः ये सभी मानव के हितैषी अथवा मित्र ही हैं। हमें इनसे बहुत लाभ मिलता है।

6. किसने, किससे और किस प्रसंग में कहा ?

(क) ‘सुबह के चार बजे। हे भगवान!’ 

उत्तर: यह वाक्य पवन ने विद्यार्थियों के बीच उस समय कहा, जब विज्ञान की शिक्षिका मालविका मैडम ने सभी विद्यार्थियों को वन भ्रमण हेतु सुबह के चार बजे उठकर तैयार होने के लिए कहा।

(ख) ‘यह क्या मुसीबत है? मुझे यहाँ आना ही नहीं चाहिए था।’ 

उत्तर: यह वाक्य पवन ने पंखुड़ी से उस समय कहा, जब शिक्षक और शिक्षिकाओं ने विद्यार्थियों को यह हिदायत दी कि अपना बिस्तर और मच्छरदानी सभी को स्वयं लगाना पड़ेगा और खाना खाने के बाद बर्तनों को स्वयं साफ करना पड़ेगा।

(ग) ‘ऐसे नहीं चलेगा सब लोग पंक्ति बनाओ।’ 

उत्तर: यह वाक्य पंखुड़ी ने विद्यार्थियों से उस समय कहा, जब सभी खाना खाने के लिए भाग-दौड़ और धक्का-मुक्की करने लगे थे।

(घ) ‘मुझे तो तैरना भी नहीं आता।

उत्तर: यह बात सौरभ ने पवन और आफताब से उस समय कही, जब नाव में पानी भरने लगा और वे डूबने लगे थे।

(ङ) ‘तुम्हारे भाग्य अच्छे थे, सो बच गए। वर्ना निश्चय ही मारे जाते।’ 

उत्तर: यह बात एक बड़ी लड़की ने पवन, सौरभ और आफताब को जलाशय में डूबने से बचाने के बाद कही थी।

भाषा एवं व्याकरण

1. निम्नलिखित सामासिक शब्दों का विग्रह करते हुए समास-भेद भी बताइए:

वन भ्रमणवन का भ्रमणतत्पुरुष समास
विद्यालयविद्या का आलय (घर)तत्पुरुष समास
शिक्षक-शिक्षिकाशिक्षक और शिक्षिकाद्वन्द्व समास
कक्षाध्यापककक्षा का अध्यापकतत्पुरुष समास
भाई-बहनभाई और बहनद्वन्द्व समास
लड़क-लड़कीलड़का और लड़कीद्वन्द्व समास
विश्वविख्यातविश्व में विख्याततत्पुरुष समास
महाशयमहान है जो आशयकर्मधारण समास
मचानघरमचान पर बना घरतत्पुरुष समास
रसोईघररसोई के लिए घरतत्पुरुष समास
हँसी-मजाकहँसी और मजाकद्वन्द्व समास
दोपहरदो पहरों का समाहारद्विगु समास
उपायहीनउपाय से हीनतत्पुरुष समास
अतिथिगृहअतिथि के लिए बना घरतत्पुरुष समास
निवास स्थानरहने (निवास) के लिए बना घरतत्पुरुष समास
माता-पितामाता और पिताद्वन्द्व समास

2. निम्नलिखित शब्दों को संयुक्त वाक्य एवं मिश्र वाक्यों में बदलिए:

(क) हॉर्न बजते ही बस चल पड़ी। 

संयुक्त वाक्य हॉर्न बजी और बस चल पड़ी।

मिश्र वाक्य जैसे ही हॉने बजी वैसे ही बस चल पड़ी।

(ख) सबके चुप होने पर मैडम बोलने लगी।

संयुक्त वाक्य – सब चुप हो गए और मैडम बोलने लगी। 

मिश्र वाक्य जब सब चुप हो गए तब मैडम बोलने लगी। 

(ग) पवन और पंखुड़ी चाय-नाश्ता करके घर से निकल पड़े।

संयुक्त वाक्य – पवन और पंखुड़ी ने चाय-नाश्ता की और घर से निकल पड़े।

मिश्र वाक्य – जब पवन और पंखुड़ी ने चाय-नाश्ता की तब घर से निकल पड़े।

(घ) वे तीनों जलाशय के किनारे पहुँचकर नाव पर चढ़ गए। 

संयुक्त वाक्य- वे तीनों जलाशय के किनारे पहुँचे और नाव पर चढ़गए।

मिश्र वाक्य – जब वे तीनों जलाशय के किनारे पहुँचे तब नाव पर चढ़ गए।

(ङ) सभी लड़कियाँ पवन की बातें सुनकर हँस पड़ीं।

संयुक्त वाक्य – सभी लड़कियाँ पवन की बातें सुनीं और हँस पड़ीं। 

मिश्र वाक्य – जब सभी लड़कियों ने पवन की बातें सुन तब वे हँस पड़ीं।

3. निम्नलिखित मुहावरों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए:

मन मारनामर मारकर क्यों बैठे हो, जाओ बाहर खेलो।
कान देनानौकर की बातों पर जरा कान देना।
हाथ लगानाअरे सुमन, मेरे काम में थोड़ा हाथ लगाओ।
मुँह फूलनापैसा न मिलने के कारण ज्योति अभी तक मुँह फुलाकर बैठी है।
सिर झुकानाउसने चोरी की थी इसलिए पंचायत में उसका सिर झुक गया।
पानी फेरनामोहन ने सब किए कराए पर पानी फेर दिया।
मुँह छिपानाउसने गलती की है। अब वह मुँह छिपाए फिरता है।
कानों पर जूँगैस सिलिण्डर लाने के लिए जय को मैं कब से कह रहा हूँ
नहीं रेंगनापर उसके कानों पर जूँ नहीं रेंग रहा है।
मुख सूखनाआज वह खाली हाथ लौटा है इसलिए उसका मुँह सूखा हुना नजर पड़ना हैं।
ननजर पड़नातीनों लड़कों की नजर रस्सी से बँधी एक नाव पर पड़ी।

अतिरिक्त प्रश्न एवं उत्तर

1. किस छुट्टी में वन भ्रमण पर जाने की योजना बनाई गई ? 

उत्तरः गर्मी की छुट्टी में वन भ्रमण पर जाने की योजना बनाई गई।

2. सभी विद्यार्थियों को लेकर कहाँ जाने की घोषणा हुई ? 

उत्तरः सभी विद्यार्थियों को लेकर काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान जाने की घोषणा हुई।

3. भ्रमण के लिए कितने विद्यार्थियों और शिक्षकों का दल बनाया गया? 

उत्तरः भ्रमण के लिए पथ विद्यार्थियों और पाँव शिक्षक-शिक्षिकाओं का दल बनाया गया। 

4. पवन और पंखुड़ी किस कक्षा में पढ़ते हैं ?

उत्तर पंखुड़ी आठवी और पवन नौवीं कक्षा में पढ़ते हैं। 

5.. पवन और पंखुड़ी ने भ्रमण पर जाने से पहले किसका आशीर्वाद लिया?

उत्तर: पवन और पंखुड़ी ने भ्रमण पर जाने से पहले अपने माता-पिता का आशीर्वाद लिया।

6. काजीरंगा किस प्रकार के गैंडे के लिए विश्वविख्यात है ? 

उत्तर: काजीरंगा एक सींग वाले गैंडे के लिए विश्वविख्यात है।

7. शिक्षक ने विद्यार्थियों को कितने बजे उठने के लिए कहा ? 

उत्तर: शिक्षक ने विद्यार्थियोंको सुबह के चार बजे उठने के लिए कहा।

8. मछली न खाने वालों के लिए किस चीज की सब्जी बनी थी ?

उत्तर: मछली न खाने वालों के लिए पनीर की सब्जी बनी थी।

9. जलाशय किस चीज से भरा हुआ था ?

उत्तरः जलाशय जल और जलकुंभियों से भरा हुआ था।

10. आफताब और सौरभ पानी में कैसे गिरे ?

उत्तरः नाव के पलट जाने से आफताब और सौरभ पानी गिरे। 

11. “वन भ्रमण” किस प्रकार की रचना है ? इस पाठ से हमें क्या शिक्षा मिलती है ?

उत्तर: असमीया साहित्यकार अनुराधा शर्मा पुजारी द्वारा रचित ‘वन भ्रमण’ यात्रा-वृत्तांत है। 

यह पाठ रोचक एवं प्रेरणाप्रद है। इस पाठ के माध्यम से एक ओर असम के प्रसिद्ध भ्रमण-स्थल “काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान” के बारे में जानकारी मिलती है तो दूसरी ओर शैक्षिक भ्रमण की पूर्व तैयारियों और भ्रमण के दौरान मिलने वाले खट्टे-मीठे अनुभवों से साक्षात् होता है। अनुशासन, सहयोग, मनोरंजन

तथा व्यक्तित्व का विकास ही इस पाठ का मूल उद्देश्य है। इस पाठ से हमें स्कूली जीवन के अतिरिक्त एक सामान्य जीवनशैली का अनंद मिलता है, जो हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

12. काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के इतिहास पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। 

उत्तर: काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान का इतिहास बहुत रोचक है। सन् 1826 में यांडाबू संधि के बाद कांजीरंगा के जंगलों के आस-पास गाँव बसना शुरू हुआ था। जब आसम पर मानों (बर्मियों) का आक्रमण हुआ, तब उस आक्रमण से बचने के लिए बड़ी संख्या में लोगों ने कांजीरंगा के जंगलों में शरण ली थी। उसके बाद ब्रिटिश युग में कई अंग्रेज कांजीरंगा के जंगलों में शिकार के लिए आते थे। एक बार ब्रिटिश वायसरॉय लार्ड कर्जन की पत्नी मेरी कर्जन काजीरंगा के जीव-जंतुओं को देखने के लिए आई। कांजीरंगा गाँव के ही एक व्यक्ति बापीराम हजारिका ने मेरी कर्जन का साथ दिया था। बापीराम हजारिका एक कुशल महावत थे और वे निगना शिकारी के नाम से मशहूर थे । यह व्यक्ति ही सबसे पहले मेरी कर्जन को गैंडा दिखाया था। मेरी कर्जन इससे पहले कभी-गैंडा नहीं देखी थी। इसलिए अपने पति लार्ड कर्जन से काजीरंगा वनांचल के संरक्षण का अनुरोध किया था। कांजीरंगा वनांचल विश्व के महत्वपूर्ण अभयारण्य में तब्दील हो गया। काजीरंगा अभयारण्य के प्रथम वन अधिकारी थे – महीचंद्र मिरि। इनके प्रयास से काजीरंगा के गैंडे को अमेरिका के चिड़ियाघर में भेजा गया। यही अभयारण्य वर्तमान में कांजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के रूप में विश्व भर में प्रसिद्ध है।

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