SEBA Class 10 Hindi (MIL) Solution| वैचित्र्यमय असम | बोड़ो

SEBA Class 9 Hindi (MIL) Solution| वैचित्र्यमय असम | बोड़ो सूची में प्रत्येक अध्याय का उत्तर प्रदान किया गया है ताकि आप आसानी से विभिन्न अध्याय एनसीईआरटी समाधान कक्षा 10 अंबर भाग-2 में खुल सकें और एक की आवश्यकता का चयन कर सकें। इसके अलावा आप एनसीईआरटी (CBSE) पुस्तक दिशानिर्देशों के अनुसार विशेषज्ञ शिक्षकों द्वारा इस खंड में NCERT पुस्तक ऑनलाइन पढ़ सकते हैं। ये समाधान NCERT हिंदी (MIL) समाधान का हिस्सा हैं। यहां हमने कक्षा 10 NCERT अंबर भाग -2 पाठ्य पुस्तक समाधान अंबर भाग -2 के SEBA Class 10 Hindi (MIL) Solution| वैचित्र्यमय असम लिए दिए हैं आप यहां इनका अभ्यास कर सकते हैं।

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SEBA Class 10 Hindi (MIL) Solution| वैचित्र्यमय असम | बोड़ो

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सारांश

बोड़ो लोग पूर्वोत्तर भारत की आदिम जनजाति हैं। अपनी मजबूत समाज व्यवस्था, भाषा साहित्य, धर्म व समृद्ध संस्कृति के साथ बोड़ो असम में निवास करनेवाली एक विशिष्ट जनजाति है। सर एडवर्ड गेट के अनुसार असम और उत्तर पश्चिम बंगाल में बोड़ो लोगों का विशाल साम्राज्य था। वर्तमान में बोड़ो लोग असम के विभिन्न स्थानों में निवास कर रहे हैं। कोकड़ाझार, चिरांग, बाक्सा, उदालगुड़ी आदि बोड़ो बहुल क्षेत्र हैं। इसके अलावा बोड़ो मूल के सोनोवाल कछारी, ठेंगाल कछारी, सुतिया, देउरी, लालुंग, राभा, गारो, हाजंग और त्रिपुरी लोग लखीमपुर, तिनसुकिया, डिब्रुगढ़, शिवसागर आदि स्थानों में निवास करते हैं। बोड़ो लोगों की अपनी समृद्धशाली भाषा है। बोड़ो भाषा चीन के तिब्बत बर्मी परिवार की भाषा है। बोड़ो भाषा संविधान की आठवीं अनुसूची में दर्ज है। बोड़ो भाषा साहित्य का बोड़ो साहित्य सभा के जरिए प्रचार-प्रसार व विकास हो रहा है। बोड़ो भाषा की पहली पुस्तक गंगाचरण कछारी की ‘बड़ो फिसा ओ आइन’ (1915) है। बोड़ो लोगों का प्राचीन धर्म ‘बाथौ’ है। ‘बाथौ बौराई’ बोड़ो लोगों के श्रेष्ठ देवता हैं। बोड़ो लोग बाथौ पूजा बड़ी श्रद्धापूर्वक करते हैं। बोड़ो पुरुष व महिलाएँ परिश्रमी होती हैं। बोड़ो लोगों के पहनावे, वाद्य, नृत्य, गीत की विशिष्ट पहचान है। बोड़ो लोगों ने असम की प्रगति में अमूल्य योगदान दिया है। प्रख्यात कलाकार शोभा ब्रह्म, कामिनी कुमारी नर्जरी, शहीद बिनेश्वर ब्रह्म बोड़ो जनजाति के अमूल्य हस्ताक्षर थे।

पाठ्यपुस्तक संबंधित प्रश्न एवं उत्तर

1. बोड़ो भाषा किस भाषा समुदाय के अन्तर्गत है ?

उत्तर: बोड़ो भाषा चीन तिब्बत-बर्मी परिवार की भाषा समुदाय के अन्तर्गत है। 

2. बोड़ो भाषा को कब प्राथमिक शिक्षा के माध्यम के रूप में मान्यता मिली थी ? 

उत्तरः सन् 1963 में बोड़ो भाषा को प्राथमिक शिक्षा के माध्यम के रूप में मान्यता मिली थी।

3. बोड़ो लोगों के बारे में लिखी गई दो पुस्तकों के नाम लिखिए। 

उत्तर: बोड़ो लोगों के बारे में लिखी गई दो पुस्तकों के नाम’ फैमाल मिजिंक’ और ‘जुजाइनि’ है।

4. बोड़ो भाषा की पहली पुस्तक क्या थी ?

उत्तर: बोड़ो भाषा की पहली पुस्तक गंगाचरण कछारी की ‘बड़ो फिसा ओ आइन’ थी। 

5. बोड़ो लोगों के पारंपरिक वेश-भूषा में इस्तेमाल किए गए कुछ फूलों के नामों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर: बोड़ो लोगों के पारंपरिक वेश-भूषा में इस्तेमाल किए गए कुछ फूलों के नाम इस प्रकार हैं-दाउथ आगान, फारेउ मेगन, मुफुर आफा, दाउराई मेखब आदि।

6. संक्षेप में टिप्पणी लिखिए:

(क) उस्ताद कामिनी कुमार नर्जरी 

उत्तरः नृत्य कला में उस्ताद कामिनी कुमार नर्जरी का जन्म सन् 1926 में वर्तमान गोसाईंगाँव महकमा के अन्तर्गत बिन्याखाता अंचल के बामुनकूरा गाँव में हुआ था। इनके पिता का नाम बजाराम नर्जरी और माता का नाम थांगाली नर्जरी था। उन्होंने निःस्वार्थ और अथक प्रयास से बोड़ो नृत्य को प्रादेशिक स्तर से राष्ट्रीय स्तर तक पहचान दिलाया। 26 जनवरी, 1957 को दिल्ली में आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह में उस्ताद नर्जरी अपने दल के साथ ‘सांस्कृतिक दल’ में शामिल हुए और प्रथम स्थान हासिल किया। इसके अतिरिक्त सन् 1992 में एशिया मेला 13 में हिस्सा लेकर बोड़ो नासीना नृत्य पेश कर दर्शकों से अथाह सम्मान व प्रशंसा प्राप्त हुआ।

सन् 1982 में उस्ताद कामिनी कुमार नर्जरी को ‘संगीत नाटक अकादमी’ पुरस्कार प्राप्त हुआ। इस प्रकार उन्होंने अपनी कोशिश से बोड़ो संस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलवाया और 16 मई 1998 को उनका देहांत हो गया।

(ख) शोभा ब्रह्म

उत्तर: प्रख्यात कलाकार शोभा ब्रह्म का जन्म 18 अक्टूबर, 1929 को कोकराझाड़ जिले के गोसाईंगाँव के भूमका नामक एक पिछड़े गाँव में हुआ था। उनके पिता का नाम हरिचरण ब्रह्म और माता का नाम देवश्री ब्रह्म था। उन्होंने अपनी कला-कृतियों से बोड़ो और असमीया समाज के सही चित्र को प्रतिबिम्बित किया। वे भारत के एक प्रख्यात मूर्तिकार और असम के कला जगत के पथ प्रदर्शक थे। उन्हें प्रकृति से अथाह प्रेम था तथा वे प्रकृति को बचाने के लिए जीवन भर प्रयत्नरत भी रहे।

अन्ततः चित्र शिल्प और भास्कर्य कला के साथ साहित्य चर्चा करते हुए इस महान शिल्पी का देहांत 5 मार्च, 2012 को हो गया।

(ग) बिनेश्वर ब्रह्म

उत्तर: शहीद बिनेश्वर ब्रह्म का जन्म 28 फरवरी, 1949 में वर्तमान कोकराझाड़ जिले के भातारमारी गाँव में हुआ। उनके पिता का नाम तारामणि ब्रह्म और माँ का नाम सोनती ब्रह्म था। उन्होंने सन् 1954 में अपने गाँव के प्राथमिक विद्यालय से प्रारम्भिक शिक्षा प्रारम्भ की। 1967 में पीयूएससी की परीक्षा तथा 1972 में जोरहाट के असम कृषि महाविद्यालय से स्नातक की डिग्री की परीक्षा में उत्तीर्ण हुए।

सन् 1973 के फरवरी में पहली बार ‘उन्होंने हिन्दुस्तान खाद्य निगम के खाद्य विस्तार’ एवं ‘कृषि शोध विभाग’ में नौकरी शुरू कर कर्म क्षेत्र में पदार्पण किया। वे एक बुद्धिमान, चिंतक, विचारक, समाज सेवक, साहित्यकार और अच्छे संगठन कर्त्ता थे। वे एक साथ कई भाषाओं पर अधिकार रखते थे- जैसे बोड़ो, अंग्रेजी, असमीया, बाँग्ला, हिंदी, नेपाली, भोजपुरी और राजवंशी।

बिनेश्वर ब्रह्म को सन् 1990 से 1993 तक बोड़ो साहित्य सभा के महासचिव के पद पर नियुक्त किया गया। उन्होंने इसके अतिरिक्त लेखन के द्वारा भी बोड़ो भाषा के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनकी प्रकाशित पुस्तकें इस प्रकार हैं- ‘आई नि मादई’ (कविता संकलन 1985), बरदैसिखला (कविता संकलन 1997) और आंगनि गामि भातारमारि (निबंध संकलन) उन्होंने अपने गाँव के प्राथमिक विद्यालय से शिक्षा प्रारम्भ किया। इसके बाद धुबड़ी के सापटग्राम हाईस्कूल से सन् 1950 में इतिहास विषय में 80% अंक लेकर प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण होकर गुवाहाटी कॉलेज में दाखिला लिया। ललित कलारत्न डॉ. शोभा, कविगुरु ब्रह्म रवीन्द्रनाथ ठाकुर द्वारा कोलकाता में स्थापित शांतिनिकेतन में 1950 में पढ़ने गए और सन् 1957 में वहाँ से कला विषय में स्नातक की डिग्री प्राप्त की।

तारिणी चरण हाईस्कूल में उन्होंने अध्यापन कार्य शुरू कर कर्म क्षेत्र में प्रवेश किया। 31 जनवरी, 1964 को उन्हें वर्तमान सरकारी चारुकला महाविद्यालय का प्राचार्य बनाया गया। उनके द्वारा बनाये गए चित्र तथा कलाकृतियों की पहली प्रदर्शनी 1965 में गुवाहाटी जिला पुस्तकालय में लगी थी। इसके पश्चात उनकी कला-कृतियां शिलांग, दिल्ली, कोलकाता, मुम्बई से लेकर बुल्गारिया, चेकोस्लाविया आदि देश-विदेश के विभिन्न स्थानों पर प्रदर्शित हुई थीं। उनके द्वारा प्रकाशित कृतियों में शिल्प कलार नवप्रजन्म’, ‘भारतीय चित्रकला “गौदान उजि’ (बोड़ो), ‘लियो-नारदो-दी-विंची आदि विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं।

डॉ. ब्रह्म को उनकी उपलब्धियों के लिए राज्य स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक कई पुरस्कार प्राप्त हुए। वे इस प्रकार हैं-असम शिल्पी पेंशन पुरस्कार (1977), असम सरकार का सांस्कृतिक पेंशन पुरस्कार (1996), कमल कुमारी बरुवा फाउंडेशन पुरस्कार (1991), सद्भावना पुरस्कार (2002) आदि। इसके अलावा उन्हें डिब्रुगढ़ विश्वविद्यालय और कोलकाता के रवींद्र भारती विश्वविद्यालय से डी लीट की उपाधि प्राप्त हुई। आई नि मादई (कविता संकलन 1985), बरदैसिखला (कविता संकलन 1997) और आंगनि गामि भातारमारि (निबंध संकलन) 19 अगस्त, 2000 को गुवाहाटी के भेटापाड़ा स्थित निवास स्थान पर अनजान हमलावर के हाथों गोली लगने से उनकी अकाल मृत्यु हो गई।

अतिरिक्त प्रश्न एवं उत्तर

1 बोड़ो भाषा की विशेषता क्या है ? 

उत्तर: बोड़ो एक समृद्ध भाषा है। यह भाषा संदिया से लेकर पूर्वी बंगाल तक और उत्तर में नेपाल से बांग्लादेश तक व्याप्त है। बोड़ो भाषा चीन के तिब्बत-बर्मी परिवार की भाषा है। विद्वानों के अनुसार तिब्बती भाषा की दो प्रधान शाखाएँ हैं-तिब्बत-बर्मी और ताई-चीन भाषा। तिब्बत-बर्मी भाषा का अंग है-बोड़ो नागा भाषा प्रारंभ में बोड़ो-नागा एक ही परिवार के अंतर्गत थे। बाद में नागा लोग अलग हो गए। बोड़ो मूल से पैदा होनेवाली भाषाएँ हैं- डिमासा, गारो, राभा, सुतिया, लालुंग, हाजंग और तिवा।

2. भारतीय संविधान में बोड़ो भाषा को आठवीं अनुसूची में कब शामिल किया गया ?

उत्तरः सन् 2003 में भारतीय संविधान में बोड़ो भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल में किया गया।

3. बोड़ो गीतों का श्रेणी विभाजन कीजिए।

उत्तर: बोड़ो गीतों को तीन श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है

(i) प्रार्थना गीत

(ii) लोकगीत और

(iii) आधुनिक गीत

अंबर भाग-2

अध्याय संख्यापाठ
पद्य खंड
पाठ 1पद-युग्म
पाठ 2वन-मार्ग में
पाठ 3किरणों का खेल
पाठ 4तोड़ती पत्थर
पाठ 5यह दंतुरित मुसकान
गद्य खंड
पाठ 6आत्म-निर्भरता
पाठ 7नमक का दारोगा
पाठ 8अफसर
पाठ 9न्याय
पाठ 10तीर्थ-यात्रा
पाठ 11वन भ्रमण
पाठ 12इंटरनेट के खट्टे-मीठे अनुभव
पद्य खंड
पाठ 13बरगीत
पाठ 14कदम मिलाकर चलना होगा
गद्य खंड
पाठ 15अमीर खुसरू की भारत भक्ति
पाठ 16अरुणिमा सिन्हा : साहस की मिसाल
वैचित्र्यमय असम
तिवा
देउरी
नेपाली भाषी गोर्खा
बोड़ो
मटक
मोरान
मिसिंग
मणिपुरी
राभा
सोनोवाल कछारी
हाजंग
नाथ योगी
आदिवासी

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