SEBA Class 10 Hindi (MIL)| वैचित्र्यमय असम | नाथ योगी

SEBA Class 9 Hindi (MIL)| वैचित्र्यमय असम | नाथ योगी सूची में प्रत्येक अध्याय का उत्तर प्रदान किया गया है ताकि आप आसानी से विभिन्न अध्याय एनसीईआरटी समाधान कक्षा 10 अंबर भाग-2 में खुल सकें और एक की आवश्यकता का चयन कर सकें। इसके अलावा आप एनसीईआरटी (CBSE) पुस्तक दिशानिर्देशों के अनुसार विशेषज्ञ शिक्षकों द्वारा इस खंड में NCERT पुस्तक ऑनलाइन पढ़ सकते हैं। ये समाधान NCERT हिंदी (MIL) समाधान का हिस्सा हैं। यहां हमने कक्षा 10 NCERT अंबर भाग -2 पाठ्य पुस्तक समाधान अंबर भाग -2 के SEBA Class 10 Hindi (MIL)| वैचित्र्यमय असम | नाथ योगी लिए दिए हैं आप यहां इनका अभ्यास कर सकते हैं।

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SEBA Class 10 Hindi (MIL)| वैचित्र्यमय असम | नाथ योगी

SEBA Class 10 Hindi (MIL) Solution| वैचित्र्यमय असम | ये उत्तर संबंधित विषयों के अनुभवी प्रोफेसरों द्वारा सावधानीपूर्वक तैयार किए जाते हैं। उनका उद्देश्य छात्रों को विषय की उचित समझ में मदद करना और उनके कौशल और अभिव्यक्ति की कला में सुधार करना है। यदि ये उत्तर उन उद्देश्यों को पूरा करते हैं जिनके साथ वे तैयार किए गए हैं, तो हम अपने प्रयास को पर्याप्त रूप से पुरस्कृत मानेंगे। इन उत्तरों में और सुधार के लिए किसी भी सुझाव का हमेशा स्वागत है।

सारांश

नाथ या योगी संप्रदाय असम तथा भारत का एक सबसे प्राचीन जनसमुदाय है। नाथ या योगी संप्रदाय मुख्यतः शैवपंथी होते हैं। शैवधर्म के दर्शन मुख्यतः योग पर आधारित हैं। माना जाता है कि योग से ही योगियों की उत्पत्ति हुई थी। नाथ परंपरा के अनुसार आदिनाथ अर्थात् भगवान शिव ही प्रथम नाथ थे। नाथ योगी संप्रदाय गुरु शिष्य परंपरा में विश्वास रखता है। नाथ लोगों के दो गुरु थे मत्स्येंद्र नाथ और गोरखनाथ नाथ योगी लोगों के दो भाग हैं- पहला है गृहस्थ योगी और दूसरा है संन्यासी योगी। संन्यासी योगी ही नाथ धर्म का प्रचार करते हैं। गुरु गोरखनाथ हठयोग मार्ग के आविष्कारक माने जाते हैं। यह भी माना जाता है कि नाथ लोगों के आदिगुरु महायोगी मत्स्येंद्रनाथ कामरूप के ही निवासी थे तथा कामाख्या पीठ में तंत्र एवं योग साधना में लीन रहते थे।

नाथ लोगों का अपना प्राचीन साहित्य है। तंत्र-मंत्र, योग-साधना, अध्यात्म दर्शन, आयुर्वेद, ज्योतिष, रसायन आदि विषयों पर नाथ संप्रदाय के सिद्ध पुरुषों ने बहुमूल्य साहित्य की रचना की है। नाथ सिद्धाचार्यों के द्वारा रचित ‘चर्यापद’ का असमीया, बांग्ला और उड़िया भाषा की उत्पत्ति में महत्वपूर्ण योगदान है। नाथ योगी असम में प्राचीनकाल से रहते आ रहे हैं।

विशेषकर गोवालपाड़ा, बंगाईगाँव, कोकराझाड़, दरंग, नगाँव, मोरीगाँव, होजाई, शोणितपुर, कछार आदि जिलों में लाखों की संख्या में नाथ योगी निवास करते हैं। इसके अतिरिक्त असम के प्रत्येक जिले में इस संप्रदाय के लोग सदियों से निवास करते आ रहे हैं। वर्तमान में असम के कुछ नाथ योगी लोग महापुरुष शंकरदेव द्वारा प्रवर्तित ‘एकशरण नाम धर्म’ में दीक्षित होकर महापुरुषिया धर्म के अंग बन गए हैं। योगी संप्रदाय के लोग स्वभाव से शांत एवं देशभक्त होते हैं। सन् 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान ढेकियाजुली थाने पर फहराए गए ब्रिटिश ध्वज यूनियन जैक को निकाल फेंकने के कारण मनबर नाथ, खहुली देवी और कुमली देवी नामक तीन स्वतंत्रता सेनानी पुलिस की गोली से घटनास्थल पर ही शहीद हो गए थे। वर्त्तमान में नाथ योगी संप्रदाय असम का एक गौरवशाली जनसमुदाय है। यह जनसमुदाय असमीया भाषा-साहित्य, कला-संस्कृति का रक्षक और वाहक होने के साथ-साथ अपने प्राचीन परिचय को भी अक्षुण्ण रखा है।

पाठ्यपुस्तक संबंधित प्रश्न एवं उत्तर

1. असम के नाथ योगी लोगों की उत्पत्ति के बारे में लिखिए। 

उत्तर: नाथ योगी संप्रदाय एक प्राचीन जनसमुदाय है। आर्य सभ्यता से बहुत पहले से •नाथ योगी भारत के विभिन्न राज्यों में रहते आ रहे हैं। नाथ योगी संप्रदाय के लोग मुख्यतः शैवपंथी हैं और वे शैवधर्म का पालन करते आ रहे हैं। शैव धर्म मुख्य रूप से योग-मार्ग पर आधारित है। वस्तुतः योग से ही योगियों की उत्पत्ति हुई है। नाथ परंपरा के अनुसार आदिनाथ अर्थात् भगवान शिव ही प्रथम नाथ थे। महायोगी मत्स्येंद्रनाथ और गुरु गोरखनाथ नाथ लोगों के दो महान गुरु थे।

2. नाथ योगी लोगों के साहित्य और धर्म के बारे में लिखिए। 

उत्तर: नाथ योगी लोगों का साहित्य प्राचीन और समृद्ध है। तंत्र-मंत्र, योग-साधना, अध्यात्म-दर्शन, आयुर्वेद, ज्योतिष, रसायन आदि विषयों पर नाथ संप्रदाय के सिद्धों ने बहुमूल्य साहित्य की रचना की है। असमीया, बांग्ला और उड़िया भाषा की उत्पत्ति में नाथ-सिद्धों के द्वारा रचित “चर्चापद” का महत्वपूर्ण योगदान है। दूसरी ओर, नाथ योगी संप्रदाय के लोग जिस धर्म का पालन करते हैं, उसका नाम शैवधर्म अथवा व्रात्य धर्म है। शैवधर्म में भगवान शिव को ही आदिनाथ या प्रथम नाथ मानते हैं। शैवधर्म मुख्यत: योग व साधना पर आधारित प्राचीन धर्म है।

3. नाथ योगी लोगों के बारे में लिखिए।

उत्तर: नाथ योगी असम में प्राचीन काल से ही रहते आ रहे हैं। इस संप्रदाय के लोग असम के गोवालपाड़ा, बंगाईगाँव, कोकराझाड़, दरंग, नगाँव, मोरीगाँव, होजाई, शोणितपुर, कछार आदि जिलों में लाखों की संख्या में रह रहे हैं। इस अतिरिक्त कमोबेस रूप में असम के प्रत्येक जिले में युगों से रहते आए हैं। एक अनुसंधान के अनुसार यह कहा जाता है कि एक समय नगाँव के समीप कदली नामक एक राज्य था, जो नाथ योगी संप्रदाय की महिला शासिका द्वारा शासित था। होजाई जिले के जोगीजान, तेजपुर के समीप स्थित सूर्य पहाड़ का शिवलिंग, गोवालपाड़ा के जोगीघोपा की पहाड़ी गुफा कामरूप राज्य के सिद्धों की साधना स्थली थी। नाथ योगी संप्रदाय के लोग स्वभाव से शांत और देशभक्त होते हैं।

अतिरिक्त प्रश्न एवं उत्तर

1. नाथ योगी संप्रदाय के लोग किस धर्म का पालन करते हैं ?

उत्तर: नाथ योगी संप्रदाय के लोग हिंदू धर्म के अंतर्गत शैवपंथी हैं और शैवधर्म का पालन करते हैं।

2. नाथ लोगों के गुरु कौन थे ?

उत्तर: नाथ लोगों के दो गुरु थे – महायोगी मत्स्येंद्रनाथ और गुरु गोरखनाथ । 

3. नाथ योगी लोगों के कितने भाग हैं ?

उत्तर: नाथ योगी लोगों के दो भाग हैं- गृहस्थ योगी और संन्यासी योगी

4. हठयोग मार्ग के आविष्कारक कौन हैं ?

उत्तर: गुरु गोरखनाथ हठयोग मार्ग के आविष्कारक हैं। 

5. योग साधना पर आधारित एक ग्रंथ का नाम लिखिए।

उत्तर: गुरु गोरखनाथ द्वारा किए गए योग साधना पर आधारित स्वाम स्वात्माराम द्वारा रचित ग्रंथ है- हठयोग प्रदीपिका।

6. चर्यापदों के रचयिता कौन थे ? 

उत्तर: नाथ सिद्धाचार्यों ने चर्यापदों की रचना की थी।

7. भारतीय स्वाधीनता संग्राम में नाथ लोगों के योगदान पर प्रकाश डालिए। 

उत्तर: भारतीय स्वाधीनता संग्राम में नाथ लोगों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया था । सन् 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान ढेकियाजुली थाने पर फहराए गए ब्रिटिश झंडा यूनियन जैक को उतार फेंकने के कारण मनबर नाथ, खहुली देवी और कुमली देवी नामक तीन स्वंतंत्रता सेनानी पुलिस की गोलियों से घटनास्थल पर ही शहीद हो गए थे। इसके अतिरिक्त सन् 1894 में दरंग जिले में हुए पथारूघाट-कृषक विद्रोह के दौरान अंगेजों द्वारा चलाए गोलीकांड में 140 शहीद किसानों में से 28 नाथ संप्रदाय के लोग भी थे।

8. “असम प्रादेशिक योगी सम्मेलन” की स्थापना कब और किसने की थी ?

उत्तर: असम प्रादेशिक योगी सम्मेलन की स्थापना सन् 1919 में संप्रदाय के प्रमुख दूरदर्शी व्यक्ति हलिराम नाथ शहरीया और लम्बोदर बरा के अथक प्रयास से हुई थी।

अंबर भाग-2

अध्याय संख्यापाठ
पद्य खंड
पाठ 1पद-युग्म
पाठ 2वन-मार्ग में
पाठ 3किरणों का खेल
पाठ 4तोड़ती पत्थर
पाठ 5यह दंतुरित मुसकान
गद्य खंड
पाठ 6आत्म-निर्भरता
पाठ 7नमक का दारोगा
पाठ 8अफसर
पाठ 9न्याय
पाठ 10तीर्थ-यात्रा
पाठ 11वन भ्रमण
पाठ 12इंटरनेट के खट्टे-मीठे अनुभव
पद्य खंड
पाठ 13बरगीत
पाठ 14कदम मिलाकर चलना होगा
गद्य खंड
पाठ 15अमीर खुसरू की भारत भक्ति
पाठ 16अरुणिमा सिन्हा : साहस की मिसाल
वैचित्र्यमय असम
तिवा
देउरी
नेपाली भाषी गोर्खा
बोड़ो
मटक
मोरान
मिसिंग
मणिपुरी
राभा
सोनोवाल कछारी
हाजंग
नाथ योगी
आदिवासी

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