SEBA Class 10 Hindi (MIL)| वैचित्र्यमय असम | मटक

SEBA Class 9 Hindi (MIL)| वैचित्र्यमय असम | मटक सूची में प्रत्येक अध्याय का उत्तर प्रदान किया गया है ताकि आप आसानी से विभिन्न अध्याय एनसीईआरटी समाधान कक्षा 10 अंबर भाग-2 में खुल सकें और एक की आवश्यकता का चयन कर सकें। इसके अलावा आप एनसीईआरटी (CBSE) पुस्तक दिशानिर्देशों के अनुसार विशेषज्ञ शिक्षकों द्वारा इस खंड में NCERT पुस्तक ऑनलाइन पढ़ सकते हैं। ये समाधान NCERT हिंदी (MIL) समाधान का हिस्सा हैं। यहां हमने कक्षा 10 NCERT अंबर भाग -2 पाठ्य पुस्तक समाधान अंबर भाग -2 के SEBA Class 10 Hindi (MIL)| वैचित्र्यमय असम | मटक लिए दिए हैं आप यहां इनका अभ्यास कर सकते हैं।

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SEBA Class 10 Hindi (MIL)| वैचित्र्यमय असम | मटक

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सारांश

मटक असम का एक प्राचीन जनसमुदाय है। ‘मटक’ ताई भाषा का शब्द है। ताई मंगोलीय मूल के मटक लोग आदिकाल में चीन के म्यूंगफी वर्तमान में संभवतः यूनान में निवास करते थे। परवर्ती समय में जनसंख्या वृद्धि या अन्य किसी कारण से भूमि की लोक में असम की ओर यात्रा की। उन्होंने चीन के यूनान प्रदेश से थाईलैंड, म्यांमार होते हुए प्राचीन असम में प्रवेश किया और वे तिमाम पहाड़ से सटे अंचल में तेरहवीं शताब्दी तक रहे। इन्हीं मटकों से चुकाफा तिमाम में मिले थे और ‘फुखाओ’ . परिवार के रूप में पहचान पाए थे। कालांतर में सत्रहवीं शताब्दी में मटकों ने काल संहिता के प्रवर्तक गोपालदेव के शिष्य अनिरुद्धदेव के द्वारा प्रचारित ‘मायामरा’ वैष्णव धर्म को ग्रहण किया। ‘मायामरा’ धर्म अपनाने के बावजूद वे अपनी पारंपरिक धार्मिक आस्था को संजोए हुए हैं। मटक राजा सर्वानंद सिंह, शिक्षाविद् पवन नेओग, राजकुमार लंकेश्वर गोहाई के नाम असम के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में लिपिबद्ध हैं।

पाठ्यपुस्तक संबंधित प्रश्न एवं उत्तर 

1. ‘मटक’ शब्द का अर्थ लिखिए।

उत्तर: ‘मटक’ असम की एक प्राचीन भाषा ‘ताई’ का शब्द है। ताई भाषा में ‘म’ का अर्थ शक्तिशाली, बुद्धिमान या ज्ञानी और ‘टक’ का अर्थ उपयुक्त, तौलना, तराजू, परीक्षित है।

2. ‘मटक’ की उत्पत्ति के बारे में लिखिए।

उत्तर: मटक शब्द की उत्पत्ति के बारे में जानने के लिए ‘फुखाओ’ (Phukao) शब्द का इतिहास देखना आवश्यक है। ‘फुखाओ’ ‘ताई’ भाषा की एक प्रमुख शाखा है। यह शाखा ताई मंगोलीय ‘फुथाई’ गुट के अन्तर्गत आती है। ‘फुथाई’ ताई का एक बड़ा वर्ग है। फुथाई लोगों को चीन के लाओ राज्य में रहने की वजह से उन्हें लाओ भी कहा जाता है। दक्षिण चीन, थाईलैंड, वियतनाम से असम तक लाओ लोग फैले हुए हैं। आहोम इतिहास के अनुसार फुखाओ की उत्पत्ति बीज सींचने या फसल सींचने के मूल से हुई है। फसल सींचने वाले । के फुखाओं से मटक की उत्पत्ति हुई है।

3.’मटक’ साधारणतः किस धर्म के लोग हैं ? 

उत्तरः मटक साधारणतः ‘ताओ’ धर्म के लोग हैं।

4. मटक लोगों का मोवामरीया विद्रोह के साथ संबंध के बारे में लिखिए। 

उत्तरः मोवामरीया विद्रोह के प्रमुख मटक नेताओं पर राजपरिवार का अत्याचार होता था। विद्रोही नेता नहीं मिलने पर आम जनता को बंदी बनाकर कारागार में डाल. दिया जाता था। सर्वानंद ने मोवामरीया विद्रोह का नेतृत्व किया। सर्वानंद में प्रचुर सांगठनिक दक्षता थी। कारागार के अंदर और बाहर सभी मटक लोगों का सर्वानंद ने मनोबल बढ़ाया और मोवामरीया विद्रोह सफल हुआ। अतः इस प्रकार यह कहा जा सकता है कि मोवामरीया विद्रोह में मटक लोगों ने अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया था और उनका विद्रोह के साथ गहरा संबंध था।

5. मटक राज्य की उन्नति के लिए सर्वानंद सिंह के किए जनकल्याणमूलक कार्यों का संक्षेप में वर्णन कीजिए।

उत्तरः मोवामरीया विद्रोह को सफल बनाने में सर्वानंद सिंह ने अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। सिंह ने राज्य की स्थापना कर स्वयं को उसका राजा घोषित किया। मटक राज्य की उन्नति के लिए उन्होंने विभिन्न जन कल्याणकारी काम काज आरम्भ किए। गली, सड़क का निर्माण कर यातायात व्यवस्था विकसित की। रंगागढ़ा आलि, गोधा आलि, राजगढ़ आलि, हातीआलि आदि मोड़ बनवाए। प्रजा की सुविधा के लिए राजधानी के बाहर अंदर कुल चौबीस पोखर खुदवाए। इनमें बैमरा पोखरी, तिनिकोनिया पोखरी, शेलुकीया पोखरी, बर पोखरी, जाउलधोवा पोखरी आदि मुख्य हैं।

6. संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए: 

(क) शिक्षाविद् पवन नेओग

उत्तरः बहुमुखी प्रतिभा सम्पन्न शिक्षाविद् पवन नेओग का जन्म 18 अक्टूबर, 1933 को बरगुरि, तिनसुकिया में हुआ। इनके पिता का नाम आसाम्बर नेओग तथा माता का नाम गोलापी नेओग था। पाँच वर्ष की अवस्था में तिनसुकिया आदर्श विद्यालय से उन्होंने अपनी शिक्षा प्रारम्भ की। उन्हें बचपन से ही खेल-कूद में विशेष रुचि थी। उन्होंने फुटबॉल और वॉलीबॉल खिलाड़ी के रूप में विद्यालय में विशेष ख्याति अर्जित की थी। 1956 में उन्होंने द्वितीय श्रेणी में आई.ए. उत्तीर्ण की। इसके पश्चात् स्नातक की पढ़ाई गुवाहाटी के कॉटन कॉलेज से आरम्भ की तथा कॉलेज में रहते अंतर महाविद्यालय प्रतियोगिता में शरीर सौष्ठव प्रतिस्पर्द्धा का उन्हें Physique चुना गया और Mr. Cottonian की उपाधि प्रदान की गई। अर्थ उपार्जन के उद्देश्य से सन् 1962 में डीएसपी बने और 30 सितम्बर, 1992 में नौकरी से सेवानिवृत्त हुए। उन्होंने सन् 2001 में बरगुरि के आर्ट स्कूल की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। वे इस अंचल में एक स्कूल की स्थापना करना चाहते थे, किन्तु उनका यह सपना पूरा न हो सका और 11 अगस्त, 2002 को उनकी मृत्यु हो गई।

(ख) राजकुमार लंकेश्वर गोहाईं

उत्तर: राजकुमार लंकेश्वर गोहाईं का जन्म 1 मई, 1954 को असम के तिनसुकिया जिले में हुआ था। इनके पिता का नाम बिशबर था। राजकुमार लंकेश्वर गोहाई दस-बारह वर्ष की उम्र में अपने परिवार के साथ चाबुआ चले आए। राजकुमार की औपचारिक शिक्षा नहीं हुई थी, इसके बावजूद वे साहसी, उच्चाकांक्षी और चिंतनशील स्वभाव के धनी थे। उनमें नेतृत्व करने की अटूट क्षमता थी। राजा के उपयुक्त प्रतिनिधि के रूप में देश स्वाधीन होने के पूर्व से ही बॅमरा राज्य के पुनरुद्धार और अलग राज्य की मान्यता बहाल रखने के लिए वे सरकार के समक्ष जोरदार माँग उठाते रहे। उन्होंने स्थानीय जाति-जनगोष्ठी के भूमि अधिकार, सम्पति अधिकार, राजनैतिक अधिकार सुरक्षित रखने के लिए वेंमरा राज्य को अलग राज्य की मान्यता देने की माँग उठाई थी। वे हाथी पकड़ने और प्रशिक्षण देने में निपुण थे। उन्हें बर्मीज, मणिपुरी, सिंग्फौ, खामती, मिसिंग, देउरी, नक्टे समेत कई भाषाओं का ज्ञान था। उन्होंने स्वयं को अपने राज्य के साथ ही अरुणाचल, मणिपुर, सिक्किम, नागालैंड, मेघालय आदि अंचलों के समाजसेवियों के साथ जनकल्याणकारी तथा विकास के कार्यों में लगाए रखा। अन्ततः समाज के लिए कार्य करते हुए 7 मार्च, 1973 को राजकुमार मृत्यु हो गई। 

(ग) सर्वानंद सिंह :

उत्तरः सर्वानंद सिंह अपने माता-पिता की एकमात्र संतान थे और उनके पिता का नाम मरुत्लंदन तथा माता का नाम पातय था। बाल्यकाल में ही उनकी माता का

दोहांत हो गया। अति साधारण कमाने खाने वाले मरुलंदन मटक ने सर्वानंद को बड़े यतन से पाल-पोसकर बड़ा किया। पिता के लालन-पालन से सर्वानंद धीरे-धीरे युवा हो गये। सर्वानंद ने मोवामरीया विद्रोह में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा की थी। उन्होंने जेल में रहते हुए बाहर और भीतर सभी मटक लोगों का हौसला बुलंद कर मोवामरीया विद्रोह को सफल बनाया। इसके पश्चात् सर्वानंद सिंह ने बॅमरा में राज्य की स्थापना कर स्वयं को उसके राजा भी घोषित किया। उन्होंने मटक राज्य की उन्नति के लिए विभिन्न जन कल्याणकारी काम-काज आरम्भ किये थे। गली-सड़क निर्माण कर यातायात व्यवस्था विकसित की। रंगागढ़ा आलि, गोधा आलि आदि विभिन्न प्रकार के पोखरी का निर्माण किया। उनके शासन काल में प्रजा शांति से रहती थी। सर्वानंद सिंह बड़े दूरदर्शी और प्रखर बुद्धि वाले राजा थे। जिसके कारण वे अत्यंत लोकप्रिय थे। प्रजा हितैषी राजा सर्वानंद सिंह की मृत्यु बीमारी के कारण सन् 1805 में हो गई।

अतिरिक्त प्रश्न एवं उत्तर

1. ‘ताई’ लोगों के उपास्य देवता कौन हैं ? 

उत्तर: ‘ताई’ लोगों के उपास्य देवता ‘गाँठियाल’ हैं। उनका धर्म ‘ताओ’ है। 

2. सर्वानन्द सिंह कौन थे ?

उत्तरः सर्वानन्द सिंह मटक राज्य के राजा थे। अपने शासनकाल में उन्होंने प्रजा के लिए अनेक कल्याणकारी कार्य किए थे। प्रजा शांति से रहती थी।

3.’मटक’ लोग मुख्यत: कहाँ रहते हैं ?

उत्तर: ‘मटक’ लोग पहले लखीमपुर, शिवसागर, तिनसुकिया तथा उसके आस-पास रहा करते थे, परंतु वर्तमान में वे अनेक स्थानों पर फैले हुए हैं।

4. राजकुमार लंकेश्वर गोहाईं कौन थे ? 

उत्तरः राजकुमार लंकेश्वर गोहाई प्राचीन बॅमरा राज्य के संस्थापक राजा स्वर्गदेव सर्वानन्द सिंह के प्रपौत्र थे ।

अंबर भाग-2

अध्याय संख्यापाठ
पद्य खंड
पाठ 1पद-युग्म
पाठ 2वन-मार्ग में
पाठ 3किरणों का खेल
पाठ 4तोड़ती पत्थर
पाठ 5यह दंतुरित मुसकान
गद्य खंड
पाठ 6आत्म-निर्भरता
पाठ 7नमक का दारोगा
पाठ 8अफसर
पाठ 9न्याय
पाठ 10तीर्थ-यात्रा
पाठ 11वन भ्रमण
पाठ 12इंटरनेट के खट्टे-मीठे अनुभव
पद्य खंड
पाठ 13बरगीत
पाठ 14कदम मिलाकर चलना होगा
गद्य खंड
पाठ 15अमीर खुसरू की भारत भक्ति
पाठ 16अरुणिमा सिन्हा : साहस की मिसाल
वैचित्र्यमय असम
तिवा
देउरी
नेपाली भाषी गोर्खा
बोड़ो
मटक
मोरान
मिसिंग
मणिपुरी
राभा
सोनोवाल कछारी
हाजंग
नाथ योगी
आदिवासी

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