SEBA Class 10 Hindi (MIL) Solution| वैचित्र्यमय असम | आदिवासी

SEBA Class 9 Hindi (MIL) Solution| वैचित्र्यमय असम | आदिवासी सूची में प्रत्येक अध्याय का उत्तर प्रदान किया गया है ताकि आप आसानी से विभिन्न अध्याय एनसीईआरटी समाधान कक्षा 10 अंबर भाग-2 में खुल सकें और एक की आवश्यकता का चयन कर सकें। इसके अलावा आप एनसीईआरटी (CBSE) पुस्तक दिशानिर्देशों के अनुसार विशेषज्ञ शिक्षकों द्वारा इस खंड में NCERT पुस्तक ऑनलाइन पढ़ सकते हैं। ये समाधान NCERT हिंदी (MIL) समाधान का हिस्सा हैं। यहां हमने कक्षा 10 NCERT अंबर भाग -2 पाठ्य पुस्तक समाधान अंबर भाग -2 के SEBA Class 10 Hindi (MIL) Solution| वैचित्र्यमय असम | आदिवासी लिए दिए हैं आप यहां इनका अभ्यास कर सकते हैं।

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SEBA Class 10 Hindi (MIL) Solution| वैचित्र्यमय असम | आदिवासी

SEBA Class 10 Hindi (MIL) Solution| वैचित्र्यमय असम | आदिवासी ये उत्तर संबंधित विषयों के अनुभवी प्रोफेसरों द्वारा सावधानीपूर्वक तैयार किए जाते हैं। उनका उद्देश्य छात्रों को विषय की उचित समझ में मदद करना और उनके कौशल और अभिव्यक्ति की कला में सुधार करना है। यदि ये उत्तर उन उद्देश्यों को पूरा करते हैं जिनके साथ वे तैयार किए गए हैं, तो हम अपने प्रयास को पर्याप्त रूप से पुरस्कृत मानेंगे। इन उत्तरों में और सुधार के लिए किसी भी सुझाव का हमेशा स्वागत है।

वैचित्र्यमय असम

सारांश

असम के चाय बागानों और ग्रामीण क्षेत्रों में आदिवासी जनसमुदाय के लोग सदियों से रहते आ रहे हैं। असमीया संस्कृति और असम के आर्थिक सामाजिक विकास में आदिवासी लोगों का महत्वपूर्ण योगदान है। आदिवासी का अर्थ “प्रथम वासी” या “मूल निवासी है। आदिवासी जनसमुदाय के अंतर्गत कई जातियाँ आती हैं। जैसे- कोल, भील, मुंडा, सौताल, ओरांग, भूमिज, धनवार आदि।

इतिहासकार प्रफुल्ल बरुवा ने आदिवासी जनसमुदाय का परिचय देते हुए लिखा है- ” आदिवासी लोगों का कद छोटा, काला और नाक चपटी होती हैं। वे सामान्य तौर पर जंगलों एवं पहाड़ों पर रहना पसंद करते हैं।” आदिवासी लोग भले ही अनेक उपाधियों का व्यवहार करते हों, परंतु सामूहिक रूप में स्वयं को ‘आदिवासी कहकर गौरव का अनुभव करते हैं। आदिवासी मूलतः चाय मजदूर ही होते हैं। लेकिन समय के बदलने के साथ-साथ इस समुदाय के लोग कृषि कार्य और अन्य कार्य भी करने लगे हैं। आदिवासी जनसमुदाय का मुख्य पर्व करम पूजा है। यह भाद्र महीने की एकादशी तिथि को मनाई जाती है। इसके अतिरिक्त आदिवासी लोग टुसु सोहराई, सुमर, डोमकच, फगुआ, जागूर आदि उत्सव भी मनाते हैं। आदिवासी लोगों में अनेक भाषाएँ प्रचलित हैं। जैसे- कुडुस, सौताली, मुंडारी, खाड़िया, कुड़माली आदि। भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में भी आदिवासी लोगों का योगदान रहा है। क्रिस्चन मुंडा, मालती ओरांग, दयाल पानिका आदि स्वतंत्रता सेनानी हैं। वृहत्तर असमीया जाति के निर्माण और विकास में आदिवासी लोगों का विशेष योगदान है।

पाठ्यपुस्तक संबंधित प्रश्न एवं उत्तर

1. आदिवासियों के बारे में संक्षेप में लिखिए। 

उत्तर: ‘आदिवासी शब्द’ आदि’ और ‘वासी’ दो शब्दों के मेल से बना है। आदि का अर्थ प्रथम या मूल और वासी का अर्थ वासिंदा (निवासी) होता है। इस प्रकार देश के प्रथम निवासी को आदिवासी कहा जाता है। आदिवासी जनसमुदाय के लोग सदियों से असम के चाय बागानों या गाँवों में रहते आ रहे हैं। यह समुदाय असमीया जाति का एक अभिन्न हिस्सा है। असमीया संस्कृति और असम के आर्थिक-सामाजिक विकास में इनका महत्वपूर्ण योगदान है। आदिवासी लोग प्रकृति प्रेमी होते हैं। पूजा-पाठ पर उनकी बड़ी आस्था होती है। वे विभिन्न देवी-देवताओं की उपासना करते हैं। आदिवासी लोग पारंपरिक रूप से ‘करम’ पूजा मनाते आ रहे हैं। ‘करम’ एक प्रकार का पेड़ होता है। करम को देवता मानकर गाँव के लोग बड़ी श्रद्धापूर्वक पूजा करते हैं और कुशल-मंगल की कामना करते हैं। इसके अतिरिक्त टुसु पूजा, बाहा पूजा, फगुआ, जागूर आदि मनाते हैं। आदिवासियों की अपनी अगल भाषा है। वे आपस में अपनी भाषा में बातचीत करते हैं। परंतु वे असमीया भाषा भी समझते हैं और बोलते भी हैं। लंबे समय से असम की धरती को अपनी कर्मभूमि मानकर आदिवासी जनसमुदाय असमीया संस्कृति की श्रीवृद्धि में विशेष योगदान दिया है

2. आदिवासियों की भाषा एवं पर्व-त्योहारों के बारे में लिखिए। 

उत्तर: आदिवासियों की भाषा विविधतापूर्ण है। इस जनसमुदाय के लोग द्रविड़ और आस्ट्रिक भाषा-परिवार की भाषाएँ बोलते हैं। उदाहरण के तौर पर, लोगों की कुडुस भाषा द्रविड़ परिवार की भाषा है। मुंडा और सौताल लोगों की भाषा आस्ट्रिक परिवार की है। आदिवासी लोग अपनी भाषाओं के विकास के लिए संस्थागत तरीके से संरक्षण एवं संवर्धन करते आ रहे हैं। आदिवासी लोग अपनी आदिवासी भाषाओं के संरक्षण के साथ-साथ अपने पारंपरिक पर्व-त्योहारों को भी रीति-रिवाज के साथ मनाते आ रहे हैं। आदिवासियों द्वारा मनाए जाने वाले पर्वों में ‘करम पूजा’ और ‘टुसु पूजा’ प्रमुख हैं। इसके अलावा बाहा पर्व, सोहराई, मागे, फगुआ आदि उत्सव भी मनाये जाते हैं। करम पूजा भादो महीने की एकादशी को मनाई जाती है। यह कृषि आधारित उत्सव है। करम उत्सव प्रेम, भाइचारा, एकता, अच्छी फसल और सबके कल्याण की भावना से ओतप्रोत एक पारंपरिक त्योहार है। आदिवासी जनसमुदाय असम की बहुरंगी संस्कृति में एक विशेष महत्व रखता है।

3. संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए :

(क) क्रिस्चन मुंडा

उत्तर: क्रिस्चन मुंडा आदिवासी जनसमुदाय के एक बहुत बड़े मजदूर नेता थे। उन्होंने चाय बागानों में काम करने वाले मजदूरों को लेकर स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान अंग्रेजों के खिलाफ बगावत की थी। अंग्रेज सरकार ने उन्हें फुलबाड़ी चाय बागान में खुलेआम फाँसी दी थी। आदिवासी जनसमुदाय के क्रिस्चन में मुंडा भारतीय स्वाधीनता की लड़ाई में अपने प्राणों की आहुति देने वाले प्रथम शहीद हैं। क्रिस्चन मुंडा ने सन् 1910-1913 में तेजपुर के समीप फुलबाड़ी चाय बागान में किसानों और मजदूरों के विद्रोह का नेतृत्व लिया था। क्रिस्चन मुंडा के शहीद होने के बाद असम के कई चाय बागानों में स्वाधीनता का आंदोलन और तेज हो गया था। मालती ओरांग, दयाल पानिका, बाँकुडु साउरा आदि आदिवासी स्वाधीनता संग्राम में शहीद हो गए।

(ख) जस्टिस लक्रा

उत्तर: जस्टिस लक्रा आदिवासी समाज के एक बड़े छात्र नेता थे। इन्होंने अखिल असम आदिवासी छात्र संघ की स्थापना में अहम भूमिका अदा की थी। इन्हें आदिवासी समाज अखिल असम आदिवासी छात्र संघ का जन्मदाता मानते हैं। जस्टिस लक्रा निचले असम में सन् 1996 में हुए वर्ग संघर्ष को करीब से देखा था। उस समय वे शिलांग विश्वविद्यालय में पढ़ रहे थे। अपनी पढ़ाई छोड़कर वे पीड़ितों की सेवा में लग गए थे। उल्लेखनीय है कि 1996 के उस वर्ग संघर्ष में करीब दो लाख लोगों को शरणार्थी शिविरों में रहना पड़ा था। 2 जुलाई, 1996 को जस्टिस लक्रा ने अपने सहयोगी जोसेफ मिंजो, स्टीफन एक्का, बॉस्को सेरेमाके, मांगरा ओरांग और विल्फ्रेड टोप्पो से मिलकर लखीमपुर के जुनुवस्ती आदिवासी उच्च विद्यालय में अखिल असम आदिवासी छात्र संघ का गठन किया। इस संघ का मुख्य उद्देश्य लोगों की सुरक्षा और शांति प्रदान करना था। यह संघ अपने जन्म से ही आदिवासियों के जनजातिकरण और चाय मजदूरों की दैनिक मजदूरी वृद्धि के लिए आंदोलन करता आ रहा है। ऐसे आंदोलनों में आंद्रेयास मांडी, हेमलाल सना, बॉस्को सेरेमाको, जितेन ताँती समेत 18 आदिवासी शहीद हो चुके हैं। जस्टिस लक़ा को आदिवासी समाज अपना ‘राष्ट्रपिता’ मानता है। इस महान आदिवासी छात्र नेता का जन्म 2 अक्टूबर, 1970 को हुआ था और मृत्यु 13 जुलाई, 2015 को हुई थी।

अतिरिक्त प्रश्न एवं उत्तर

1. आदिवासी समाज के लोग कहाँ रहते हैं ?

उत्तर: आदिवासी समाज के लोग असम के चाय बागानों एवं गाँवों में निवास करते

2. आदिवासी किसे कहते हैं ?

उत्तर: आदिवासी आदि’ और ‘वासी’ दो शब्दों से बना है, जिसका अर्थ है- देश के प्रथम निवासी । अर्थात् जो देश के पहले निवासी हैं, सामान्यतः उन्हें आदिवासी कहा जाता है।

3. आदिवासी जनसमुदाय के प्रमुख पर्वों के नाम बताइए। 

उत्तरः आदिवासी जनसमुदाय के प्रमुख पर्व हैं- करम पूजा, टुसु पूजा, बाहा पर्व, सोहराई, फगुआ आदि ।

4. आदिवासी जनसमुदाय की भाषा का परिचय दीजिए। 

उत्तर: आदिवासी जनसमुदाय की भाषाएँ द्रविड़ और आस्ट्रिक भाषा परिवार की भाषाएँ हैं। आदिवासी समाज में ओरांग, सौताल, मुंडा, खाड़िया, कुड़माली कई जातियाँ हैं और उनकी भाषाएँ भी अलग-अलग हैं। ओरांग की भाषा कुडुस, मुंडा की भाषा मुंडारी, सौताल की भाषा सौताली, खाड़िया की खाड़िया, कुड़माली की कुड़माली आदि। आदिवासियों की भाषाओं को सामग्रिक रूप से’ आदिवासी भाषा’ कहते हैं। आदिवासी लोगों ने अपनी भाषाओं के विकास के लिए कुडुस साहित्य सभा, सौताली साहित्य सभा, मुंडारी साहित्य सभा जैसी संस्थाओं की स्थापना की है।

5. आदिवासी समाज के किन्हीं चार स्वतंत्रता सेनानियों के नाम लिखिए। 

उत्तर: आदिवासी समाज के स्वतंत्रता सेनानी हैं- क्रिस्चन मुंडा, मालती ओरांग, दयाल पानिका, बाँकुडु साउरा आदि।

6. अखिल असम आदिवासी छात्र संघ के जन्मदाता कौन थे ? 

उत्तर: अखिल असम आदिवासी छात्र संघ के जन्मदाता जस्टिस लक्रा थे।

7. ‘भारत बुरंजी’ नामक पुस्तक में प्रफुल्ल बरुवा ने आदिवासी जनसमुदाय का परिचय किस प्रकार दिया है ?

उत्तरः प्रफुल्ल बरुवा ने आदिवासी जनसमुदाय का परिचय देते हुए लिखा है कि इस समुदाय के लोगों का कद छोटा, रंग काला और नाक चपटी होती थी। वे साधारणतः पहाड़ों एवं जंगलों में रहना पसंद करते थे। उनकी अपनी कोई लिपि नहीं थी तथा उनकी भाषा आर्यभाषा परिवार से बिल्कुल अलग थी।

8. आदिवासी लोगों की कुछ उपाधियों का उल्लेख कीजिए। 

उत्तर: आदिवासी लोगों की अनेक उपाधियाँ हैं। जैसे- कोल, भील, मुंडा, कोंवर, भूमिज, सौताल, ओरांग, खेरवार, खाडिया, धनवार आदि

9. करम उत्सव क्या है ? इसके बारे में संक्षेप में लिखिए। 

उत्तरः करम उत्सव आदिवासी जनसमुदाय का एक प्रमुख उत्सव है। यह उत्सव भादो महीने की एकादशी को मनाया जाता है। यह कृषि आधारित एक पारंपरिक उत्सव है, जिसमें सभी लोग नाचते-गाते हैं और करम देवता की पूजा करते हैं। करम एक प्रकार का पेड़ होता है। गाँव की लड़कियाँ जंगल से करम की डाल काटकर लाती हैं और उसे गाँव के चौपाल पर लगा देती हैं। पुरोहित द्वारा पूजा संपन्न होने के बाद आदिवासी लोग अपनी पारंपरिक नीति कथाएँ सुनते हैं। करम उत्सव प्रेम, बंधुत्व और एकता का प्रतीक है। इस उत्सव में अच्छी फसल और लोगों के कल्याण की कामना करते हुए करम सु देवता की आराधना की जाती है।

अंबर भाग-2

अध्याय संख्यापाठ
पद्य खंड
पाठ 1पद-युग्म
पाठ 2वन-मार्ग में
पाठ 3किरणों का खेल
पाठ 4तोड़ती पत्थर
पाठ 5यह दंतुरित मुसकान
गद्य खंड
पाठ 6आत्म-निर्भरता
पाठ 7नमक का दारोगा
पाठ 8अफसर
पाठ 9न्याय
पाठ 10तीर्थ-यात्रा
पाठ 11वन भ्रमण
पाठ 12इंटरनेट के खट्टे-मीठे अनुभव
पद्य खंड
पाठ 13बरगीत
पाठ 14कदम मिलाकर चलना होगा
गद्य खंड
पाठ 15अमीर खुसरू की भारत भक्ति
पाठ 16अरुणिमा सिन्हा : साहस की मिसाल
वैचित्र्यमय असम
तिवा
देउरी
नेपाली भाषी गोर्खा
बोड़ो
मटक
मोरान
मिसिंग
मणिपुरी
राभा
सोनोवाल कछारी
हाजंग
नाथ योगी
आदिवासी

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