SEBA Class 9 Hindi (MIL) Solution|गरिया मरिया और देशी लोग

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SEBA CLASS 9 QUESTION ANSWER (ENG. MEDIUM)

SEBA Class 9 Hindi (MIL) Solution|गरिया, मरिया और देशी लोग

गरिया मरिया और देशी लोग

सारांश

असम में विभिन्न जातियाँ-उपजातियाँ एक साथ रहती हैं। इन सबको मिलाकर ही बृहत्तर असमीया जाति का गठन हुआ है। दूसरी स्थानीय जनगोष्ठियों की तरह असमीया जाति गठन प्रक्रिया में भागीदार गरिया, मरिया और देशी के नाम से प्रख्यात इस्लाम धर्मावलंबी स्थानीय लोग असम की प्राचीन जनगोष्ठियों के अंश हैं। सन् 1205-06 में तिब्बत-चीन जीतने के मकसद के साथ बंग के तुर्की सेनापति बख्तियार खिलजी के नेतृत्व में कामरूप में प्रवेश करनेवाले मुसलमान सैनिक कामरूप के राजा पृथु के हाथ शोचनीय रूप से पराजित हुए और कुछ सैनिक असम में ही बस गए। वक्त बीतने के साथ-साथ वे इस्लाम को अपनाकर भी असम की भाषा-परंपरा संस्कृति के साथ घुलते-मिलते चले गए। सदियों से धर्म निरपेक्ष समाज संस्कृति को अपनाने वाले असमीया लोगों के जाति गठन की प्रक्रिया में गरिया, मरिया और देशी लोगों का योगदान सराहनीय रहा है।

पाठ्यपुस्तक संबंधित प्रश्न एवं उत्तर

1. बख्तियार खिलजी ने असम में कब प्रवेश किया था ? 

उत्तर: बख्तियार खिलजी ने सन् 1205-06 में असम में प्रवेश किया था।

2. बख्तियार खिलजी ने किसलिए असम में प्रवेश किया था ? 

उत्तर: तुर्की सेनापति खिलजी ने तिब्बत-चीन जीतने के मकसद से असम में प्रवेश किया था।

3. बख्तियार खिलजी को किसने परास्त किया था ? 

उत्तर: बख्तियार खिलजी को कामरूप के राजा पृथु ने परास्त किया था। 

4. इस्लाम धर्म में धर्मांतरित होने वाले प्रथम जनजातीय राजा का नाम क्या था ?

उत्तरः इस्लाम धर्म के धर्मांतरित होनेवाले प्रथम जनजातीय राजा का नाम ‘आली मेस’ था।

5. ‘गरिया’ शब्द का विश्लेषण कीजिए। असम में गरिया किसे कहते हैं ? 

उत्तरः इस्लाम धर्म अपनानेवाले लोग जो मूल समाज से अलग छूट चुके समाज मे शामिल हो गए। ऐसे लोगों को ‘गरिया’ कहा जाता है। इनका बृहत्तर असमीया समाज में विशेष स्थान है।

6. आहोम काल में असम में कुछ स्थानीय लोगों द्वारा इस्लाम धर्म अपनाने के दो कारण लिखिए। 

उत्तरः आहोम काल में असम में कुछ स्थानीय लोगों द्वारा इस्लाम धर्म अपनाने के दो कारण निम्नलिखित हैं

  1.  विभिन्न पीर-फकीरों के संदेश के प्रभाव से हिंदू धर्मावलंबी लोगों के मन पर इस्लाम का गहरा असर पड़ा था। 
  2. जनजातीय राजा मेस के इस्लाम धर्म अपनाने के बाद राजा के साथ अधिकांश प्रजा भी इस्लाम के प्रति आकर्षित हुई थी।

7. मरिया और देशी जनगोष्ठी के बारे में वर्णन कीजिए। 

उत्तरः आहोम शासनकाल में पीतल-कांसे के धंधे से जुड़े मुसलमानों को ‘मरिया’ के नाम से जाना जाता है। ऊपरी असम के कुछ इलाके, नगाँव जिला, निचले असम की गुवाहाटी के उजान बाजार और कामरूप के हाजो में मरिया लोग रहते हैं। देशी लोग मुख्य रूप से अविभाजित ग्वालपाड़ा जिले में रहते हैं। इस इलाके में कोच-राजवंशी भाषा-संस्कृति सम्पन्न स्थानीय मुसलमान देशी या देशी मुसलमान कहलाते हैं। देशी लोग खासकर कोच-राजवंशी, मेस-कछारी आदि स्थानीय जनगोष्ठियों में धर्मांतरित लोग हैं।

8. महान असमीया समाज गठन का उदाहरण किसने किसके राज में प्रस्तुत किया ? 

उत्तरः महान असमीया समाज गठन का उदाहरण अजान फकीर ने आहोम राज में प्रस्तुत किया।

9. संक्षिम में लिखिए

(क) बाघ हजारिका

उत्तर: इनका असली नाम इंस्माइल सिद्दीकी था। बाघ को युद्ध में परास्त करने की वजह से इनका नाम बाघ पड़ा और आहोम शासन ने उनके अदम्य साहस और दक्षता को देखते हुए हजारिका का पद प्रदान किया था। शराइघाट युद्ध में इन्होंने अपना पराक्रम दिखलाया था।

(ख) अज्ञान फकीर साहब

उत्तर: इस्लाम धर्म के प्रचार में अजान फकीर की भूमिका अहम है। इन्होंने इस्लाम धर्म की वाणियों को सहज-सरल भाषा में प्रचारित किया। इनका दूसरा नाम शाह मिलन है। वे सुदूर बगदाद से इस्लाम धर्म प्रचार करने के लिए असम आए और यहीं बस गए। उन्होंने कुल 108 जिकिर की रचना की, जो असमीया भाषा की अनमोल धरोहर है।

(ग) सैयद अब्दुल मलिक

उत्तरः सैयद अब्दुल मलिक एक प्रसिद्ध असमीया साहित्यकार थे। इनका जन्म गोलाघाट जिले के नाहरनी गाँव में 16 मई, 1919 को हुआ था। उनके पिता का नाम सैयद रहमत अली था। अब्दुल मलिक की पहली कहानी ‘बंध कोठा’ थी। उन्होंने कहानियों, उपन्यासों, नाटकों, कविताओं की अनेक पुस्तकें लिखीं। ‘अघरी आत्मार काहिनी’ उपन्यास के लिए उनको साहित्य अकादमी का पुरस्कार मिला। असम साहित्य सभा ने उन्हें साहित्याचार्य की उपाधि दी। इसके अलावा उन्हें असम उपत्यका सम्मान, अजान पीर सम्मान जैसे कई पुरस्कार व सम्मान मिले। पद्मश्री और पद्मभूषण से सम्मानित इस साहित्यकार की मृत्यु 19 दिसंबर, 2002 को हुई।

(घ) नवाब साहिदूर रहमान

उत्तर: नवाब साहिदूर रहमान एक क्रांतिकारी नेता थे। वे सुभाष चंद्र बोस की ‘आजाद हिंद फौज’ के प्रमुख नेता थे। आजादी की लड़ाई में ये शहीद हो गए। 31 मार्च, 1945 को मित्र वाहिनी के बम धमाके की वजह से इनकी मौत हो गई।

(ङ) फकरुद्दीन अली अहमद

उत्तर: फकरुद्दीन अली अहमद भारत के पूर्व राष्ट्रपति थे। इनका जन्म 13 मई, 1905 को दिल्ली में हुआ। उन्होंने कैंब्रीज सेंट कैथोलिक कॉलेज से इतिहास में स्नातक और लंदन के इनरटैंपल से ‘बार एट लॉ’ की डिग्री हासिल की थी।

सन् 1931 में असम लौटकर वकालत करने के साथ राजनीति में उन्होंने कदम रखा। सन् 1966 में संसदीय चुनाव जीतकर केंद्रीय मंत्री बने। फिर 1974 में भारत के राष्ट्रपति बने। असम के इस सुपुत्र का निधन 19 फरवरी, 1977 को दिल का दौरा पड़ने से हुआ।

अतिरिक्त प्रश्न एवं उत्तर

1. ‘जिकिर’ की रचना किसने की ?

 उत्तरः अजान फकीर ने ‘जिकिर’ की रचना की थी।

2. बाघ हजारिका का असली नाम क्या था ?

उत्तरः बाघ हजारिका का असली नाम इस्माइल सिद्दीकी था। 

3. बहादुर गाँवबूढ़ा कौन थे ?

उत्तर: बहादुर गाँवबूढ़ा एक स्वतंत्रता सेनानी थे। सन् 1857 के सिपाही विद्रोह के दौरान असम के तत्कालीन स्वतंत्रता सेनानी मणिराम देवान, पियली बरुवा आदि के साथ बहादुर (बाहदिल) ने भी योगदान किया था। अंग्रेजों के खिलाफ बगावत के आरोप में उनको आजीवन कालापानी की सजा सुनाई गई।

4. ‘धन्य नर तनु भाल’ किसकी रचना है ?

उत्तर: ‘धन्य नर तनु भाल’ श्रीमंत शंकरदेव के जीवन और कर्म पर आधारित एक असमीया उपन्यास है, जिनकी रचना सैयद अब्दुल मलिक साहब ने की थी।

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