SEBA Class 9 Hindi (MIL) Solution|वैचित्र्यमय असम|कोच – राजवंशी

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SEBA CLASS 9 QUESTION ANSWER (ENG. MEDIUM)

SEBA Class 9 Hindi (MIL) Solution|वैचित्र्यमय असम|कोच – राजवंशी

कोच-राजवंशी

सारांश

विद्वानों का मानना है कि सभी राजवंशी लोग मूलतः कोच जाति से संबंधित हैं। इसलिए उन्हें असम में कोच-राजवंशी कहा जाता है। ये लोग असम, उत्तर बंगाल, नेपाल, भूटान, बिहार, मेघालय और बांग्लादेश में रहते हैं। कोच-राजवंशी हिंदू धर्मावलंबी हैं। कुछ लोगों का मानना है कि कोच और राजवंशी दो अलग-अलग समुदाय हैं। लेकिन यह सटीक नहीं है। कई स्थलों पर सिर्फ कोच और सिर्फ राजवंशी लिखा जाता है, लेकिन राजवंशी का मूल कोच ही है। अनेक स्थानों पर कोच लोग प्राचीन कोच भाषा और संस्कृति का पालन करते आ रहे हैं। जो आर्येतर धारा है। दूसरी ओर, राजवंशी लोगों की भाषा-संस्कृति आर्य है। दो अलग-अलग भाषा संस्कृति का पालन करने के बावजूद नृतात्विक रूप से सभी कोच-राजवंशी लोगों का मूल कोच ही माना गया है। अलग-अलग स्थान पर ये लोग कोच, कोच-राजवंशी, क्षत्रिय राजवंशी या राजवंशी, किसी स्थान पर सिर्फ क्षत्रिय के रूप में जाने जाते हैं। ये लोग भले ही अपना परिचय क्षत्रिय के रूप में देते हैं, फिर भी आर्य क्षत्रिय नहीं हैं। इन सबकी संस्कृति पर जनजातीय प्रभाव स्पष्ट है।

सरकारी तौर पर इन लोगों को अब तक जनजाति का दर्जा नहीं मिला है, फिर भी इन्हें जनजाति कहना ही उचित होगा। असम, बंगाल, बिहार, नेपाल और बांग्लादेश आदि स्थानों पर ये लोग राजवंशी के रूप में जाने जाते हैं। बाद में महाही, हाजंग, जलधा, धिमाल, झलो, मालो आदि अनेक छोटी-छोटी जनगोष्ठियों के लोग राजवंशी के रूप में अपना परिचय देने लगे, लेकिन ये मूलत: कोच ही हैं। इस संबंध में प्रसिद्ध इतिहासकार बुकानन हैमिल्टन का कहना है- “मुझे कोई संदेह नहीं है कि कोच जनजातीय लोगों की उत्पत्ति एक ही उत्स से हुई है और अधिकतर राजवंशी कोच हैं।

कोच-राजवंशी लोगों की भाषा एवं संस्कृति अनूठी और समृद्ध है। भारतवर्ष में आर्यों ने जो वर्ण आधारित समाज व्यवस्था स्थापित की, उससे कोच-राजवंशी की समाज-व्यवस्था पूरी तरह अलग है। समय के प्रवाह के साथ ये लोग आर्य समाज  व्यवस्था के अंतर्गत आ चुके हैं, फिर भी आर्य क्षत्रिय हिंदुओं की संस्कृति के साथ इनकी समानता नहीं है। हिंदू आचार-नीति अपनाने के बावजूद कोच-राजवंशी का अपना आचार-संस्कार, परंपरा, पूजा-पाठ, धर्म-विश्वास, खाद्य-रुचि, पोशाक-परिधान, अलंकार, गीत-संगीत आदि विद्यमान है। जन्म-मृत्यु, विवाह में अपनी आचार-नीति, मरने के बाद आत्मा के अस्तित्व का विश्वास, मृतक के प्रति श्रद्धा, तंत्र-मंत्र पर विश्वास, प्रकृति पूजा, जीव-जंतु की पूजा, सड़क पूजा, विषहरी पूजा, भूत-प्रेत पर विश्वास आदि कोच राजवंशी को अर्ध हिंदू और जनजातीय पहचान दिलाते हैं। समग्र रूप से देखा जाए तो कोच-राजवंशी लोगों की संस्कृति पर बौद्ध, शैव, शाक्त का प्रभाव पड़ा है और हिंदू धर्म के प्रति आकृष्ट होने के कारण प्राचीन धार्मिक प्रभाव, शंकरी वैष्णव और गौड़ीय प्रभाव नजर आते हैं। इन सबके अलावा कोच राजवंशी लोगों की संस्कृति में प्राचीन जनजाति की विशेषता मुख्य रूप से नजर आती है। असम के सामग्रिक विकास एवं प्रगति में कोच-राजवंशी का योगदान सराहनीय रहा है।

पाठ्यपुस्तक संबंधित प्रश्न एवं उत्तर

1. कोच-राजवंशी लोगों का धर्म क्या है ? 

उत्तर: कोच-राजवंशी लोग हिंदू धर्मावलंबी है।

2. कोच-राजवंशी लोगों की भाषा और संस्कृति के बारे में लिखिए। 

उत्तर: कोच-राजवंशी लोगों की भाषा और संस्कृति समृद्ध हैं। भाषाविद् ग्रियर्सन के अनुसार कोच-राजवंशी लोगों की भाषा के शब्द-भंडार, शब्द-रूप, सर्वनाम, उच्चारण भंगिमा, वाक्य संरचना, मौखिक व लिखित साहित्य की एक अलग पहचान है।

इनकी संस्कृति अनूठी है। भारतीय दृष्टिकोण से आर्य समाज की जो व्यवस्था है उससे कोच-राजवंशी की समाज-व्यवस्था थोड़ा भिन्न है। कोच राजवंशी लोग हिंदू धर्म अपनाने के बावजूद उनका धार्मिक विश्वास, पूजा विधि, संस्कार परंपरा, खान-पान, पोशाक परिधान अलग है। निष्कर्ष रूप में कहा जा सकता है कि कोच-राजवंशी लोगों के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन में हिंदू, बौद्ध, शैव, शाक्त का प्रभाव होने के बावजूद इनकी संस्कृति में प्राचीन जनजाति की विशेषताएँ भी खास तौर पर नजर आती है।

3. कोच-राजवंशी लोगों के भोजन और वेशभूषा के बारे में लिखिए। 

उत्तर: कोच-राजवंशी लोगों के भोजन और वेशभूषा भी उनकी खास पहचान दर्शाते हैं। कोच-राजवंशी लोग पारंपरिक तौर पर सेका, पेलका, भेलका, सिदल, सुट्का, तोपला भात आदि खाते हैं। वे वेशभूषा के रूप में वर्तमान प्रचलित परिधान पहनते हैं किंतु उनकी पारंपरिक पोशाक का महत्व खास और अनूठा है। कोच-राजवंशी जाति के पुरुष धोती-कुर्ता और रंगीन मफलर या गमछा लेते हैं जबकि महिलाएँ पाटानी, बुकुनी, फोटा, सेउता का व्यवहार करती हैं।

4. कोच-राजवंशी लोगों के गीत-संगीत क्या-क्या है ? 

उत्तरः कोच-राजवंशी लोगों के अनेक गीत-संगीत हैं, जैसे- भवाईया गान, विभिन्न पूजा के गीत, रावण गान, कुषाण गान, दोतारा गान, बिषहरी पूजा का गान, मारी पूजा का गान, तुक्खा गान, लाहांकरी गान, नटुवा, सांगी ढाक का गान, डाक नाम, जाग गान आदि।

5. संक्षेप में टिप्पणी लिखिए 

(क) जन नेता शरतचंद्र सिंह

उत्तरः बहुमुखी प्रतिभा के धनी जननेता शरतचंद्र सिंह असम के मुख्यमंत्री थे। वे सन् 1972 से 1978 तक असम के मुख्यमंत्री रहे। इनका जन्म 1 जनवरी, 1914 को हुआ था। इनके पिता का नाम लालसिंग सिंह और माता का नाम आयासिनी सिंह था। वे सही अर्थों में जनता के नेता थे, इसलिए उनको जननेता कहा जाता था। वे महात्मा गाँधी के आदर्श से अनुप्रेरित थे। सरल जीवन उच्च विचार उनका आदर्श था। जनता की सेवा करना ही शरतचंद्र सिंह के जीवन का संकल्प था। मुख्यमंत्री रहते समय उन्होंने विकास की कई योजनाएँ शुरू की थीं, जैसे-आपातकालीन रबी फसल योजना, गांव पंचायत सहकारी समिति, कृषि निगम, आकलन पत्र योजना, निगरानी कोष योजना, शैक्षिक संस्थान सुधार योजना, शिलांग से दिसपुर तक अस्थायी राजधानी का स्थानांतरण आदि। इनकी मृत्यु 24 दिसंबर, 2005 को हुई।

(ख) अंबिका चरण चौधरी

उत्तर: अंबिका चरण चौधरी एक विशिष्ट समाजसेवी और उच्च कोटि के साहित्यकार थे। उन्होंने अनेक पुस्तकों की रचना की है। अंबिका चरण चौधरी विद्यार्थी जीवन से ही लोगों की सेवा में रुचि लेते थे। सन् 1953-54 में पलाशबाड़ी, मिर्जा इलाके में बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित लोगों की सहायता करने की वजह से तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने उनकी भूरि-भूरि प्रशंसा की थी। लगभग 32 पुस्तकों के रचयिता अंबिका चरण चौधरी को सन् 1961 में असम साहित्य सभा के ग्वालपाड़ा अधिवेशन में ‘रत्नपीठ का रत्न’ सम्मान से सम्मानित किया गया था। इसके अलावा उन्हें ‘कामतारत्न’ साहित्यिक पेंशन, महेंद्रनाथ बड़ा पुरस्कार, शिक्षण बांधव आदि सम्मान से अलंकृत किया गया था।

16 अगस्त, 1930 को बंगाईगांव जिले के अंतर्गत बरपाड़ा नामक गाँव में इस महान व्यक्ति का जन्म हुआ था। उनके पिता नरेश्वर चौधरी थे और माता काशिश्वरी चौधरी थीं। कॉटन कॉलेज से दर्शनशास्त्र में उन्होंने ऑनर्स के साथ स्नातक की डिग्री हासिल की। अंबिका चरण चौधरी नौकरी करते हुए अंग्रेजी, असमीया भाषा में अनेक पुस्तकें और लेख लिखे। उनका अंग्रेजी, असमीया और राजवंशी तीनों भाषाओं पर समान अधिकार था।

(ग) अरुण कुमार राय

उत्तर: अरुण कुमार राय भी कोच राजवंशी समुदाय से आते हैं। कोच राजवंशी साहित्य सभा की स्थापना में उनकी अग्रणी भूमिका रही है। अरुण कुमार राय का जन्म 8 अक्टूबर, 1925 को हुआ। उनका निवास बंगाईगाँव के सीपन सीला गाँव में था। उनके पिता का नाम प्रकाश चंद्र राय और माता का नाम अभयेश्वरी राय था। वर्तमान के चिरांग जिले के बेंगतल प्राथमिक विद्यालय से प्रारंभिक शिक्षा पानेवाले अरुण कुमार राय ने बंग गाँव बीरझरा उच्च माध्यमिक स्कूल से एंट्रेंस तक ही पढाई की। वामपंथी विचारधारा का प्रचार करने के कारण उनको जेल भी जाना पड़ा था। वे किसान आंदोलन में सक्रिय रूप से जुड़े थे। सन् 1974-75 में उन्हें कोकराझाड़ महकमा परिषद का अध्यक्ष भी बनाया गया। सन् 1983 में उन्हें उत्तर शालमारा महकमा परिषद का अध्यक्ष बनाया गया।

वे आजीवन कोच-राजवंशी जनजाति की भाषा-साहित्य-संस्कृति की उन्नति के लिए काम करते रहे। उन्होंने नाटक, कविता और शब्दकोश भी लिखे। उनकी कुल 10 पुस्तकें प्रकाशित हैं। सन् 2004 में उन्हें असम सरकार की ओर से साहित्यिक अनुदान भी दिए गए थे। कोच-राजवंशी साहित्य सभा ने उन्हें मरणोपरांत ‘साहित्य रत्न’ का सम्मान प्रदान किया।

(घ) रुक्मिणी कांत राय

उत्तरः कोच-राजवंशी समुदाय के पश्चिम असम के बुद्धिजीवी, शिक्षाविद्, राजनीतिविद्, समाजसेवी और हास्य रसिक व्यक्ति (व्यंग्यकार) के तौर पर रुक्मिणी कांत राय का नाम प्रसिद्ध है। साधारण परिवार में जन्मे रुक्मिणी कांत राय विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त कर वे जीवन में सफलता हासिल करने में कामयाब हुए थे। सामाजिक-सांस्कृतिक, शैक्षिक, राजनीतिक, धार्मिक जीवन के विभिन्न पहलुओं में उन्होंने आदर्श स्थापित किया था। वे विद्यार्थी जीवन से ही मेधावी थे।

उन्होंने गौहाटी विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में प्रथम श्रेणी में द्वितीय स्थान प्राप्त किया था। उन्होंने समाजसेवा के लिए कई स्कूलों, कॉलेजों और मठ-मंदिरों की स्थापना की। अपनी विलक्षण प्रतिभा के बल पर वे एक साधारण क्लर्क की नौकरी से वे कॉलेज के प्राध्यापक प्राचार्य और बाद में विधायक भी बने। उनका भाषण सुनकर जनता मंत्र मुग्ध हो जाती थी।

(ङ) ‘दूरंत तरुण’ पानीराम दास

उत्तरः आजीवन शुद्ध खादी धोती-कुर्ता धारण करने वाले, समय की रेत पर अपने कदम के निशान बनाने वाले, देशप्रेम का आदर्श सामने रखकर समझौता किए बगैर निरंतर संग्राम चलानेवाले, समाज सेवी, स्वतंत्रता सेनानी पानी राम का जन्म 7 अप्रैल, 1917 को मंगलदै के समीप जलजली गाँव में एक साधारण किसान परिवार में हुआ था। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। सन् 1941 में महात्मा गाँधी के सत्याग्रह में शामिल होकर जेल की सजा काटी थी। इनकी मृत्यु 30 नवंबर, 2010 को हुई। इन्हें राष्ट्रीय मर्यादा के साथ अंतिम विदाई दी गई। स्वतंत्रता सेनानी के तौर पर इनका नाम सम्मान से हमेशा लिया जाएगा।

अतिरिक्त प्रश्न एवं उत्तर

1. कोच-राजवंशी लोग कहाँ रहते हैं ?

उत्तर: कोच-राजवंशी लोग मुख्य रूप से असम, उत्तर बंगाल, नेपाल, भूटान, बिहार, मेघालय और बांग्लादेश में रहते हैं।

2. राजवंशी लोग किस जाति से संबंधित है ?

उत्तरः राजवंशी लोग मूलत: प्राचीन कोच जाति से संबंध रखते हैं।

3. कोच-राजवंशी लोगों के बारे में विद्वान बुकानन हैमिल्टन के क्या कहा था ?

उत्तरः कोच-राजवंशी लोगों के बारे में विद्वान बुकानन हैमिल्टन का कहना है मुझे कोई संदेह नहीं है कि कोच जनजाति के लोगों की उत्पत्ति एक ही स्रोत से हुई है और अधिकांश राजवंशी कोच हैं।

4. विश्व सिंह कौन थे ?

उत्तरः विश्व सिंह कोच राजा थे, जिन्होंने 16वीं शताब्दी में अपना साम्राज्य स्थापित किया था।

5. कोच राजवंशी लोगों की किन्हीं दो धार्मिक पूजा का नामोल्लेख कीजिए। 

उत्तर: कोच-राजवंशी लोग अनेक धार्मिक पूजा करते हैं, जैसे- सड़क पूजा, यात्रा पूजा आदि।

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