SEBA Class 9 Hindi (MIL) Solution|वैचित्र्यमय असम|कार्बी

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SEBA CLASS 9 QUESTION ANSWER (ENG. MEDIUM)

SEBA Class 9 Hindi (MIL) Solution|वैचित्र्यमय असम|कार्बी

कार्बी

सारांश

कार्बी असम की प्रमुख जनजाति है। विष्णुप्रसाद राभा ने अमेरिका के खोजकर्ता कोलंबस के साथ तुलना करते हुए कार्बी लोगों को ‘असम का कोलंबस’ कहा था। इस कथन का समर्थन प्रसिद्ध इतिहासकार सुनीति कुमार चट्टोपाध्याय ने किया था। असम के मध्य में स्थित कार्बी आंग्लांग और डिमा हसाउ में कार्बी लोग मुख्य रूप से रहते हैं। दोनों इलाकों को मिलाकर कार्बी आंग्लांग स्वायत्त परिषद का गठन किया गया है। इस परिषद में कुल 30 सदस्य है। 26 निर्वाचित और 4 मनोनीत सदस्य है। क्षेत्रफल 10,343 वर्ग किलोमीटर है। कार्बी आंग्लांग के अलावा शोणितपुर, विश्वनाथ, लखीमपुर, सोनापुर आदि स्थानों पर भी कार्बी लोग बसे हुए हैं। कार्बी लोगों की अपनी विशिष्ट परंपरा, रीति-नीति, पोशाक, खान-पान, उत्सव-पर्व, धर्म-विश्वास के कारण उनकी एक खास पहचान है।

पाठ्यपुस्तक संबंधित प्रश्न एवं उत्तर

1. कार्बी लोगों को असम का कोलंबस किसने कहा था ? 

उत्तर: कार्बी लोगों को असम का कोलंबस विष्णुप्रसाद राभा ने कहा था।

2. कार्बी पारंपरिक वेशभूषा के बारे में लिखिए। 

उत्तर: कार्बी असम की प्रमुख जनजाति है। स्त्री और पुरुष के वस्त्र अलग-अलग होते हैं। पुरुषों के वस्त्रों को घुटनों तक पे सेलेंग, सई हंगधर, सई इक, सई लक्, पहो आदि कहते हैं। स्त्रियों के वस्त्र है-पीनी, पेकक और वांकक इसके अलावा पे सेलेंग, पे खंजारी, पे सारपी आदि प्रमुख वस्त्र भी होते हैं।

3. कार्वी उत्सव-पर्व के बारे में लिखो।

उत्तर: कार्बी उत्सव-पर्व में पेंग हेम्फू, रंगकेर, सजून आदि प्रमुख हैं। पेंग हेम्फू घरेलू उत्सव है। इस उत्सव में आम तौर पर तीन पूजाएँ होती है-रिंग आंग्लांग, बुईसम और पेंग साल की शुरुआत में ही यह उत्सव होता है; ताकि साल भर कोई अमंगल न हो। इसे घरेलू उत्सव कहा जाता है। सजून उत्सव हर साल नहीं मनाया जाता, 4, 5 या 9 साल के अंतराल पर मनाया जाता है। रंगकेर उत्सव को गाँव का उत्सव कहा जाता है। इसे साल के आरम्भ में मनाया जाता है। पूजा की मूल वेदी पर पंछी, बकरी, अंडे आदि समर्पित कर देवता की पूजा की जाती है।

4. कार्बी लोगों के मूल गुट क्या-क्या हैं ?

उत्तर: कार्बी लोगों के मूल गुट 5 हैं-तिमूंग, टेरन, टेरांग, इंग्ही, इंग्ती । 

5. कार्बी महिलाओं द्वारा परिधान किए गए कुछ वस्त्रों और अलंकारों के नाम लिखिए।

उत्तर: कार्बी महिलाओं द्वारा परिधान किए जाने वाले कुछ वस्त्रों में पीनी, पेकक और वांकक प्रमुख हैं तथा अलंकारों में लेक हिकी, नथेंग्पी, नलांगपंग, नजांगसाई, लेक रुवे आदि प्रमुख हैं।

6. संक्षिप्त में टिप्पणी लिखिए :

(क) सेमसनसिंग इंग्ती

उत्तर: कार्बी आंग्लांग के स्वप्नद्रष्टा और रूपकार के रूप में प्रख्यात सेमसनसिंग इंग्ती का जन्म 8 फरवरी, 1910 को पश्चिम कार्बी आंग्लांग के टीका पहाड़ नामक स्थान में हुआ था। उनके पिता का नाम थेंकुरसिंग इंग्ती और माता का नाम रूथ माधवी (काजीर तीमूंग्पी) था। उन्होंने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा सन् 1916 में गोलाघाट के मिशन स्कूल से प्रारम्भ कर 1928 में गोलाघाट बेजबरुवा हाईस्कूल से प्रथम श्रेणी में मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की। उच्च शिक्षा हेतु गुवाहाटी के कॉटन कॉलेज में दाखिला लिया, किन्तु स्वाधीनता आंदोलन में भाग लेने के कारण पढ़ाई अधूरी रह गई। बाद में 1933 में सिलहट के पुरीरचंद कॉलेज से बी.ए. की परीक्षा उत्तीर्ण कर कार्बी समाज के प्रथम स्नातक बन गए। सन् 1934 में ब्रिटिश सरकार ने उन्हें नगांव जिले के शिक्षा विभाग में उप-निरीक्षक के पद पर नियुक्त किया। उन्होंने कार्बी समाज को शिक्षा प्रदान करने हेतु अनेक प्रकार के पाठ्य पुस्तकों की रचना की, जिसमें  ‘बिटूस अंकिताप’, ‘कालाखा अकिताप’, ‘टेमपुरु और वपी’ आदि उल्लेखनीय हैं।

(ख) सामर्सिंग हांसे

उत्तरः लेखक, कवि, गीतकार, उपन्यासकार, सिनेमा निर्माता, राजनेता, साहित्य प्रेमी के रूप में प्रख्यात सामसिंग हांसे का जन्म 18 अप्रैल, 1948 को नगांव जिले के सरुबाट के अन्तर्गत पंडितघाट गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम जयसिंग हांसे और माता का नाम काएट टेरनपी था। उन्होंने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा टीका मध्य अंग्रेजी विद्यालय से प्रारंभ कर 1967 में बैठालांग्सू उच्च अंग्रेजी विद्यालय से मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की तथा 1973 में उन्होंने स्नातक की डिग्री हासिल की।

उन्होंने भाषा साहित्य के विकास हेतु कार्बी व असमीया भाषा में कई पुस्तकों की रचना की है, उनमें ताई हाईमू, कार्बी प्रणय गीत, साबिन आलून, कुमलिन, कार्बी कविता आदि प्रमुख हैं। वे 1983-84 में कार्बी साहित्य सभा के सचिव तथा 1984-85 में अध्यक्ष चुने गए। सन् 1985 में विधानसभा चुनाव में डिफू सीट से विजयी होकर कैबिनेट मंत्री बने। कार्बी भाषा-साहित्य के साधक और पथ प्रदर्शक सामसिंग हांसे का 13 जनवरी, 1998 को देहांत हो गया।

(ग) बंगलंग तेरांग

उत्तर: कार्बी साहित्य के पुरोधा बंगलंग तेरांग का जन्म 10 अक्टूबर, 1909 को दिलाई नदी के किनारे निहांगलांग्सों नामक स्थान पर हुआ था। उनके पिता का नाम सार तेरांग तथा माता का नाम कारेंग तिस्सपी था। सर्वप्रथम उन्होंने ही कार्बी साहित्य को लिखित रूप प्रदान किया था। उन्होंने मात्र 13 वर्ष की अवस्था में साहित्य साधना शुरू कर दी थी तथा अनेक प्रकार की पुस्तकों की रचना की, जिनमें वर्ड बुक (Word Book), आदाम आसार (विवाह नियम), रुकासेन, हाईमू, कार्बी कपूसन, कार्बी स रंगजे, रंगलीन आदि उल्लेखनीय हैं। सन् 1973 में कार्बी साहित्य सभा ने उन्हें कार्बी साहित्य के पुरोधा व्यक्ति के रूप में पुरस्कृत किया तथा असम सरकार ने उन्हें एक सौ रुपए की वित्तीय मदद के साथ ही साहित्यिक पेंशन भी प्रदान किया। ऐसे महान व्यक्तित्व का अन्त। 17 जुलाई, 2001 को हो गया।

(घ) लंकाम तेरन

उत्तरः साहित्यकार के रूप में प्रसिद्ध लंकाम तेरन का जन्म सन् 1932 में हुआ था। उनके पिता का नाम डिप्लू तेरन और माता का नाम कासाई हांसेपी था। सन् 1957 में कासे रंगहांग्पी के साथ उनका विवाह हुआ। वे 1964 में मिकिर पहाड़ी जिला परिषद के जन सम्पर्क अधिकारी भी बने। उन्हें कार्बी आदरबार का महासचिव तथा अध्यक्ष भी चुना गया था। वे कार्बी साहित्य के संस्थापक तथा अध्यक्ष थे तथा 1986 में उन्हें असम साहित्य सभा का उपाध्यक्ष भी बनाया गया। उन्होंने अनेक प्रकार की पुस्तकों का लेखन, संकलन और अनुवाद किया था। उनके द्वारा लिखित पुस्तकों में रंग केसेंग, तामाहीदी, किताब किमी, कार्बी लामकुरु, कार्बी जनगोष्ठी आदि उल्लेखनीय है।

अतिरिक्त प्रश्न एवं उत्तर

1. कार्बी कौन है? वे कहाँ रहते हैं ?

उत्तर: कार्बी असम की एक प्रमुख जनजाति है। कार्बी लोग मुख्यतः कार्बी आंग्लांग में रहते हैं। इसके अलावा शोणितपुर, विश्वनाथ, लखीमपुर, कामरूप आदि स्थानों में भी बसे हुए हैं।

2. कार्बी जैकेट और कार्बी मफलर को क्या कहते हैं ? 

उत्तर: कार्बी जैकेट को ‘सई हंगथर’ और कार्बी मफलर को ‘पहो’ कहते हैं।

3. कार्बी युवा महोत्सव कब और कहाँ आयोजित होता है ? 

उत्तर: कार्बी युवा महोत्सव हर साल 15 से 19 फरवरी तक डिफू शहर में आयोजित होता है।

4. सामसिंग हांसे की किन्हीं दो पुस्तकों के नाम लिखिए। 

उत्तर: सामसिंग हांसे ने कार्बी और असमीया भाषा में कई पुस्तकों की रचना की है, जिनमें ‘ताई हाईमू’, साबिन आलून आदि प्रमुख हैं।

5. सजून उत्सव क्या है ?

उत्तर: सजून उत्सव कार्बी लोगों का एक घरेलू पर्व है। यह 4, 5 या 9 साल के अंतराल पर मनाया जाता है।

6. कार्बी साहित्य सभा के संस्थापक अध्यक्ष कौन थे उत्तरः कार्बी साहित्य सभा के संस्थापक अध्यक्ष ‘लंकाम तेरन’ थे।

7. पिबा क्या है ?

उत्तरः पिबा कार्बी महिलाओं का पारंपरिक वस्त्र है। यह डेढ़ फीट से दो फीट चौड़ा और 6 फीट लंबा होता है। दोनों सिरे पर कौड़ियों से जुड़े चमकीले काले कपड़े होते हैं। काबी महिलाएँ पिबा में बच्चों को रखकर साथ ले जाती है।

GROUP-A पद्य खंड

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पाठ 1पदClick Here
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पाठ 3ब्रज की संध्याClick Here
पाठ 4पथ की पहचानClick Here
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गद्य खंड

पाठ 6पंच परमेश्वरClick Here
पाठ 7खाने खिलाने का
राष्ट्रीय शौक
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पाठ 8गिल्लूClick Here
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पाठ 11अंधविश्वास की छीटेंClick Here
पाठ 12पर्वो का देश भारतClick Here

GROUP-B: पद्य खंड

पाठ 13बरगीतClick Here
पाठ 14मुक्ति की आकांक्षाClick Here

गद्य खंड

पाठ 15वे भूले नहीं जा सकतेClick Here
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वैचित्र्यमय असम

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