SEBA Class 9 Hindi (MIL) Solution|वैचित्र्यमय असम| कछार की जनगोष्ठियाँ

SEBA Class 9 Hindi (MIL) Solution|वैचित्र्यमय असम| कछार की जनगोष्ठियाँ The answer of each chapter is provided in the list so that you can easily browse throughout different chapter NCERT Solutions Class 9 Ambhar Bhag-1 and select needs one. Also you can read NCERT book online in this sections Solutions by Expert Teachers as per NCERT (CBSE) Book guidelines. These solutions are part of NCERT Hindi (MIL) Solutions. Here we have given Class 9 NCERT Ambhar Bhag-1 Text book Solutions for Ambhar Bhag-1 You can practice these here. SEBA Class 9 Hindi (MIL) Solution|वैचित्र्यमय असम| कछार की जनगोष्ठियाँ

SEBA CLASS 9 QUESTION ANSWER (ENG. MEDIUM)

SEBA Class 9 Hindi (MIL) Solution|वैचित्र्यमय असम| कछार की जनगोष्ठियाँ

कछार की जनगोष्ठियाँ

सारांश

असम के दक्षिणी हिस्से में तीन जिले हैं- कछार, हैलाकांदी और करीमगंज। इन तीनों जिले के बीच से बराक नदी गुजरती है। बराक नदी से संबंधित होने के कारण इन तीनों जिले को एक साथ बराक घाटी कहा जाता है। बराक घाटी में विभिन्न जातियों और उपजातियों के लोग रहते हैं। सामाजिक-आर्थिक-राजनीतिक क्षेत्र में समय-समय पर घटित घटनाओं के कारण भारत के अलग-अलग क्षेत्रों से लोग आकर बराक घाटी में बसते रहे हैं। बराक घाटी में बंगाली, मणिपुरी, असमीया, राजवंशी, हिंदीभाषी, नागा, मार, कार्बी, मिजो, नेपाली, चकमा, कुकी, खासिया, रियांग आदि जनगोष्ठी के लोग रहते आ रहे हैं। प्रत्येक जनगोष्ठी के लोग अपनी भाषा-संस्कृति का संरक्षण करते आ रहे हैं। अलग-अलग भाषा और संस्कृति के लोगों के सह-अस्तित्व के कारण बराक घाटी को ‘नृतत्व का बगीचा’ कहा जाता है। यहाँ हर प्रकार के पर्व-उत्सव का आयोजन होता है। दुर्गापूजा, ईद, बिहू, क्रिसमस आदि बराक घाटी के प्रमुख उत्सव हैं।

पाठ्यपुस्तक संबंधित प्रश्न एवं उत्तर

1. नृतत्वविदों ने बराक घाटी को क्या कह कर संबोधित किया है ? 

उत्तरः नृतत्वविदों ने बराक घाटी को एंथ्रोपोलॉजिकल गार्डन (Anthropological garden) यानी ‘नृतत्व का बगीचा’ कह कर संबोधित किया है।

2. बराक घाटी में रहने वाली विभिन्न जनगोष्ठियों के नाम क्या-क्या हैं ? 

उत्तर: बराक घाटी में रहने वाली विभिन्न जनगोष्ठियों के नाम इस प्रकार हैं मणिपुरी, मणिपुरी विष्णुप्रिया, बंगीय समाज, भोजपुरी, असमीया, राजवंशी, राजस्थानी, बर्मन (डिमासा), रंगमाई नगा आदि।

3. बराक घाटी के लोगों की मुख्य जीविका क्या है ? 

उत्तर: बराक घाटी के लोगों की मुख्य जीविका खेती-बारी, व्यवसाय और नौकरी हैं।

4. द बैकग्राउंड ऑफ असामीज कल्चर (The Background of Assamese Culture) पुस्तक की रचना किसने की थी ? 

उत्तर: ‘द बैकग्राउंड ऑफ असामीज कल्चर’ (The Background of Assamese Culture) पुस्तक की रचना ‘राज मोहन नाथ’ ने की थी।

5. हैदराबाद में आयोजित संतोष ट्रॉफी फुटबॉल प्रतियोगिता में असम फुटबॉल टीम के मैनेजर कौन थे ? 

उत्तर: हैदराबाद में आयोजित संतोष ट्रॉफी फुटबॉल प्रतियोगिता में असम फुटबॉल टीम के मैनेजर थे-सुनील मोहन ।

6. संक्षिप्त टिप्पणी लिखो :

(क) राजमोहन नाथ

उत्तरः राजमोहन नाथ ने असम के इतिहास और पुरातत्व गवेषणा के क्षेत्र में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है। बचपन से ही उन्हें इतिहास के अध्ययन में अत्यंत रूचि थी । इस बात का प्रमाण उनका उल्लेखनीय ग्रंथ है ‘द बैकग्राउंड ऑफ असामीज कल्चर’ (The Background of Assamese Culture)। उनके इस ग्रंथ का प्रकाशन सन् 1948 में हुआ था। सन् 1958 में तिनसुकिया में असम साहित्य सभा का तेरहवाँ अधिवेशन हुआ था, जिसमें राजमोहन नाथ इतिहास शाखा के अध्यक्ष थे।

(ख) कमालुद्दीन अहमद

उत्तर: इतिहासकार के रूप में प्रसिद्ध कमालुद्दीन अहमद करीमगंज कॉलेज के इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष थे। बाद में वे प्राचार्य के पद पर भी आसीन हुए। उन्होंने साहित्य की भी रचना की थी। उनके द्वारा सम्पादित साहित्यिक पत्र का नाम ‘दिग्वलय’ था। उन्होंने असम के शिल्प और स्थापत्य के संबंध में पुस्तक लिखी थी, जिसका नाम ‘द आर्ट एंड आर्किटेक्चर ऑफ असम’ (1994) (The Art and Architecture of Assam (1994) था। उन्होंने उपन्यास, शोध पत्र आदि के अतिरिक्त अन्य रचनात्मक साहित्य की भी रचना की थी।

(ग) नन्दलाल बर्मन

उत्तर: बराक घाटी के बर्मन समाज के राजमंत्री वंश के नंदलाल बर्मन एक प्रसिद्ध समाज सेवक थे। इसके अतिरिक्त उन्होंने एक प्रभावशाली व्यवसायी के रूप में समाज में एक अलग पहचान भी बनाई थी। बर्मन समाज के लोग उन्हें आदर के साथ ‘मिलाउ’ तथा अन्य समाज के लोग ‘महाजन’ कह कर संबोधित करते थे। ग्रामीण विद्यार्थियों की शिक्षा के लिए कछार जिले के बरखोला में सन् 1901 में एक स्कूल की स्थापना की थी। इस प्रकार नंदलाल बर्मन ने बराक घाटी के लोगों के विकास के लिए अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।

(घ) नलिनीद्र कुमार बर्मन

उत्तरः नलिनींद्र कुमार बर्मन एक शिक्षक के रूप में प्रसिद्ध थे। उन्होंने सन् 1930 में दीमा हसाओ जिले के सदर हाफलांग मिशन स्कूल से शिक्षक की नौकरी शुरू की थी। उन्होंने डिमासा जाति की विरासत और परम्परा के संबंध में गहरा अध्ययन किया था तथा उससे संबंधित कई किताबों की रचना भी की थी। इससे संबंधित उनकी एक कृति का नाम The Queen of Cachar or Herambo and the History of the Cacharis है। डिमासा समाज में श्राद्ध का आवश्यक अंग कीर्तन है, जिसे उन्होंने कीर्तन पदावली के एक संकलन के रूप में प्रकाशित किया था। उस पुस्तक का नाम है ‘हैडिंबराज गोविंदा चंद्र कृत हिन्दू शास्त्रीय श्राद्धादि कीर्तन गीतिका’। इस प्रकार देखा जाए तो डिमासा जाति के लिए उन्होंने अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया था।

(ङ) इरंगबम चंद्र सिंह

उत्तरः इरुंगबम चंद्र सिंह मणिपुरी समाज के प्रथम अर्थशास्त्र विज्ञान के षाण्मासिक स्नातक थे। उन्होंने समाज व देशहित के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य किये। ग्रामीण विद्यार्थियों की शिक्षा के लिए उन्होंने कई सार्थक कदम उठाए थे। गरीब विद्यार्थियों की मदद करने के लिए उन्होंने एक स्कूल की स्थापन की थी । स्कूल का वर्तमान नाम ‘खेलम हाईस्कूल’ है। इस प्रकार उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।

(च) बिपिन सिंह

उत्तर: मणिपुरी विष्णुप्रिया समाज के गुरु बिपिन सिंह नृत्य कला के क्षेत्र में अविस्मरणीय व्यक्तित्व हैं। नृत्य कला में योगदान की वजह से गुरु बिपिन सिंह को सन् 1966 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार’ प्रदान किया गया था। परवर्ती समय में उनको मध्य प्रदेश सरकार का ‘कालिदास सम्मान’ भी मिला था। उन्होंने कोलकाता में ‘मणिपुरी नर्तनालय’ नामक एक नृत्य कला शिक्षण संस्थान की भी स्थापना की थी। इस प्रकार उन्होंने नृत्य कला के विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।

अतिरिक्त प्रश्न एवं उत्तर

1. सुनील मोहन कौन थे ?

उत्तर: सुनील मोहन असम फुटबॉल संघ के संस्थापक कोषाध्यक्ष एवं असम हॉकी संस्था के अध्यक्ष थे। वे असम के बराकघाटी बंगीय समाज के एक प्रख्यात क्रीडाप्रेमी थे। 

2. बराकघाटी में महिलाओं के विकास व कल्याण के लिए उल्लेखनीय काम किसने किया ?

उत्तर: बराकघाटी में महिलाओं के विकास व कल्याण के लिए मालती श्याम ने आजीवन काम किया।

3.  कछार में लोक-नृत्य के संरक्षण, प्रचार व प्रसार में किसका उल्लेखनीय योगदान रहा और उन्हें कब और कौन-सा पुरस्कार प्रदान किया गया। 

उत्तर: कछार में लोक नृत्य के संरक्षण, प्रचार व प्रसार में मुकुंद दास भट्टाचार्य का योगदान उल्लेखनीय रहा। उन्हें सन् 1997 में ‘विष्णु राभा पुरस्कार’ प्रदान किया गया।

4. जगत मोहन सिंह कौन थे ?

उत्तरः जगत मोहन सिंह एक शिक्षक और साहित्यकार थे। वे निखिल विष्णुप्रिया मणिपुरी साहित्य परिषद के संस्थापक अध्यक्ष थे। मणिपुरी विष्णुप्रिया भाषा में उन्होंने कविता, नाटक, लेख आदि लिखे थे।

5. गुरु विपिन सिंह को संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार कब और क्यों मिला ?

उत्तर: गुरु विपिन सिंह को नृत्य कला के क्षेत्र में विशेष योगदान हेतु सन् 1966 संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार मिला था।

GROUP-A पद्य खंड

Sl. NO.पाठ के नामLink
पाठ 1पदClick Here
पाठ 2भजनClick Here
पाठ 3ब्रज की संध्याClick Here
पाठ 4पथ की पहचानClick Here
पाठ 5शक्ति और क्षमाClick Here

गद्य खंड

पाठ 6पंच परमेश्वरClick Here
पाठ 7खाने खिलाने का
राष्ट्रीय शौक
Click Here
पाठ 8गिल्लूClick Here
पाठ 9दुःखClick Here
पाठ 10जीवन-संग्रामClick Here
पाठ 11अंधविश्वास की छीटेंClick Here
पाठ 12पर्वो का देश भारतClick Here

GROUP-B: पद्य खंड

पाठ 13बरगीतClick Here
पाठ 14मुक्ति की आकांक्षाClick Here

गद्य खंड

पाठ 15वे भूले नहीं जा सकतेClick Here
पाठ 16पिपलांत्री : एक आदर्श गाँवClick Here

वैचित्र्यमय असम

This Post Has 2 Comments

Leave a Reply