SEBA Class 9 Hindi (MIL) Solution|साउताल (संथाल

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SEBA CLASS 9 QUESTION ANSWER (ENG. MEDIUM)

SEBA Class 9 Hindi (MIL) Solution|साउताल (संथाल

साउताल (संथाल)

सारांण

ताल भी असम की एक जनगोष्ठी है। इनकी मातृभाषा संथाली है। साउताल खुद को ‘होड़ हपन’ मानते हैं। प्रसिद्ध विद्वान सुनीति कुमार चट्टोपाध्याय (चटर्जी) साउताल शब्द की उत्पत्ति संस्कृत शब्द ‘समांतराल’ से मानते हैं। डॉ. वाणीकांत काकति के अनुसार असम में चाय उद्योग बहुत पहले वर्तमान असम में रहनेवाले ‘साउताल’ लोग कामरूप में ही रहा करते थे। शुरू होने से

साउताल लोगों की सामाजिक जीवन प्रक्रिया अनूठी है। वे गाँव बसाकर रहा करते हैं। गाँव के जनसाधारण को प्रणालीबद्ध तरीके से शासन करने के लिए गाँव के नागरिकों में से पाँच लोगों को चुनकर शासन करने का दायित्व सौंपा जाता है। उन पाँच व्यक्तियों को ‘मोड़े होड़’ कहा जाता है। ‘मोड़े होड़’, के प्रमुख को मुखिया या ‘माझी’ कहा जाता है। गाँव के किसी भी समस्या या आपसी विवादों की शिकायत माझी को दी जाती है। इस प्रकार साउताल समाज की समस्याएँ गाँव में ही सुलझ जाती है।

साउताल लोगों का समाज पितृप्रधान है। इनकी मुख्य आजीविका कृषि ही है। उबरे कृषि भूमि की खोज में वे अपने निवास को बदलते रहते हैं। साउताल के लोग गीत-नृत्य में भी रुचि रखते हैं। दंग नृत्य, दंग गीत, लंगड़े गीत, सहराई, बाहागीत आदि उनके प्रमुख गीत-नृत्य है। साउताल लोगों की वैवाहिक रीति-नीति, पोशाक-परिधान और पूजा-अर्चना की परंपरा अनूठी और अलग है। साढताल असम की प्राचीन जाति है।

पाठ्यपुस्तक संबंधित प्रश्न एवं उत्तर

1. सुनीति कुमार चट्टोपाध्याय के अनुसार साउताल शब्द की उत्पत्ति कहाँ से हुई हैं।

उत्तर: सुनीति कुमार चट्टोपाध्याय के अनुसार साउताल शब्द की उत्पत्ति संस्कृत शब्द ‘समांतराल’ से हुई है।

2. साउताल लोगों की मुख्य जीविका क्या है ? 

उत्तरः साउताल लोगों की मुख्य जीविका खेती है।

3. ‘मोड़े होड़’ ( पाँच व्यक्ति ) के प्रधान व्यक्ति को क्या कहा जाता है ? 

उत्तर: ‘मोड़े होड़’ (पाँच व्यक्ति) के प्रधान व्यक्ति को ‘माझी’ कहा जाता है।

4. साउताल लोगों की उपाधियाँ कितनी और क्या-क्या हैं ? 

उत्तर: साउताल लोगों की 12 उपाधियाँ (गोत्र) हैं, जैसे- मुर्मू, हेंब्रम, किस्कू, बेसरा, टुडु, सरेन, बास्के, हासडा, मार्डी, चोंडे, पाओरिया और बेडेया।

5. साउताल लोगों की कला-संस्कृति के बारे में संक्षेप में लिखिए। 

उत्तर: साउताल लोगों की कला-संस्कृति परंपरागत है। उनकी पोशाक, आचार नीति, पर्व-उत्सव, नृत्य-गीत की अलग विशेषता है। साउताल समाज में पुरुष पंछी या धोती पहनते हैं और महिलाएँ पंछी और पाड़हाड़ पहनती हैं। साउताल हिंदू धर्मावलंबी होते हैं और वे अपने पर्व-उत्सव, विवाह आदि हिंदू धर्म के अनुसार करते हैं। किंतु विधि-विधान में थोड़ा-बहुत अंतर दिखाई देता है। साउताल लोगों के प्रमुख उत्सव हैं-बाहा और सहराई। गीत-नृत्य में दंग, लंगड़े प्रमुख हैं। गीत-नृत्य में प्रयुक्त वाद्य यंत्र हैं- तामाक, टुमडा, करताल, ढोल आदि।

6. साउताल लोगों के सामाजिक जीवन का वर्णन कीजिए।

उत्तर साउताल लोगों की सामाजिक जीवन प्रकिया अनूठी है। वे अक्सर गाँव बसाकर रहा करते हैं। गाँव के सुसंचालन और सुशासन के लिए गाँव के पाँच व्यक्तियों को चुनते हैं और गाँव को प्रणालीबद्ध तरीके से शासन करने का भार उन पर सौंपते हैं। साउताली या संथाली भाषा में उन्हें ‘मोड़े होड़’ कहते

हैं। मोड़े होड़ के मुखिया या प्रधान को ‘माझी’ कहा जाता है। गाँव के सभी विवादों और शिकायतों का निपटारा माझी ही करता है। इस प्रकार साउताल लोगों का सामाजिक जीवन सुव्यवस्थित तरीके से चलता है।

7. अर्थ लिखिए

सिंदूर खांडी, टटड़वा, होर: बांडे, माझी, पाड़ हाँड़ 

उत्तर: 

  • सिंदूर खंडी: शादी के समय कन्या द्वारा पहनी जाने वाली हल्दी सनी वेशभूषा|
  • टटड़वा: : शादी के समय पर पहनी जानेवाली वर की टोपी ।
  • होर: बांडे: पोशाक, वस्त्र
  • माझी: मुखिया
  • पाड़ हाँड़  : महिलाओं द्वारा कमर के नीचे के हिस्से में पहनी जाने वाली पोशाक विशेष

8. संक्षेप में टिप्पणी लिखिए

(क) बेनेडिक्ट हेंब्रम

उत्तरः संथाली भाषा-साहित्य के विकास में बेनेडिक्ट हेंब्रम का अतुलनीय योगदान रहा है। वे सफल वक्ता और कर्मठ व्यक्ति थे। उनका जन्म 18 अक्टूबर, 1967 को कोकराझाड़ जिले के गोसाईंगाँव महकमा के पलाशगुड़ी (जियाडांगा) गाँव में हुआ था। उन्होंने गाँव के प्राथमिक स्कूल में ही प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की और उच्च शिक्षा गुवाहाटी के कॉटन कॉलेज से प्राप्त की। उन्होंने 1993 में कॉटन कॉलेज से जीव विज्ञान में एम.एससी. की डिग्री हासिल की। अध्यापन से अपनी आजीविका चलाने वाले बेनेडिक्ट हेंब्रम संथाली व्याकरण लिखकर संथाली भाषा-साहित्य को समृद्ध किया। इनकी मृत्यु 5 अक्टूबर 2013 को

(ख) बदन हासडा

उत्तरः बदन हासडा साउताल जनगोष्ठी के एक मूर्धन्य व्यक्ति थे। इनका जन्म सन् 1957 में कोकराझाड़ जिले के खापरगाँव में हुआ था। वे कोकराझाड़ कॉलेज से आई.ए. की पढ़ाई कर अपनी जनगोष्ठी के शैक्षिक, सामाजिक और आर्थिक उत्थान के कार्यों में जुट गए। सन् 1980 में उनके नेतृत्व में ‘अखिल असम संथाल छात्र संघ’ की स्थापना हुई। सन् 1986 में उनके नेतृत्व में ‘आदिवासी सेवा समिति’ का गठन हुआ और वे वर्षों तक इसके अध्यक्ष बने रहे। वे असम संथाली साहित्य सभा के सलाहकार भी थे। सन् 1996 में जातीय दंगे में अमन व शांति के लिए उनकी पहल सराहनीय थी। एक आतंकी हमले में 1 मई, 2007 को उनकी मृत्यु हो गई।

(ग) मिथियस दुडु

उत्तर असम में साउताल समुदाय के लिए मिथियस ढुड्डु एक ध्रुव तारे के समान थे।

•गोसाईंगाँव विधानसभा क्षेत्र से वे लगातार सात बार विधायक चुने गए थे। उन्हें असम सरकार में मंत्री भी बनाया गया था। असम में चालीस वर्षों तक असम विधानसभा में साउताल लोगों का प्रतिनिधित्व करनेवाले एकमात्र व्यक्ति थे। मिथियस टुड्डु ।

इनका जन्म सन् 1930 में कोकराझाड़ जिले के गोसाईंगाँव महकमा के माटियाजुरी गाँव में हुआ। इन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गाँव के प्राथमिक स्कूल में ही पाई और उच्च शिक्षा गुवाहाटी के कॉटन कॉलेज से प्राप्त की।

सन् 1954 में ग्राहमपुर हाईस्कूल के प्रधानाध्यापक के रूप में नियुक्त होकर कुछ वर्ष तक अध्यापन कार्य से जुड़े और फिर वहाँ से त्याग पत्र दिया । सन् 1957 में वे गोसाईंगाँव विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीतकर विधायक बने और सन् 1991 तक लगातार 40 वर्ष तक विधायक बने रहे। वे फुटबॉल खिलाड़ी । वे धार्मिक व्यक्ति थे। प्रत्येक रविवार को चर्च जाते एक अच्छे थे मिथियस टुड असम संथाली सभा के अध्यक्ष, संथाली भाषा-साहित्य शोध केंद्र के संस्थापक अध्यक्ष, ग्राहमपुर सहकारी समिति के संस्थापक जैसे उच्च आसन पर अधिष्ठित थे। इनकी मृत्यु 10 जुलाई, 2017 को हुई। असम की जातीय समृद्धि में इनका योगदान प्रशंसनीय रहा है।

(घ) राहेल किस्कू

उत्तर: राहेल किस्कू ने संथाली भाषा-साहित्य के विकास तथा अपने समाज की महिलाओं व बच्चों की उन्नति के लिए अनेक कार्य किए। भ्रष्टाचार, नशाखोरी, डायन हत्या जैसी सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन में उनका योगदान महत्वपूर्ण है। उन्होंने सामाजिक, शैक्षिक और धार्मिक विकास के लिए लोगों में जागरूकता पैदा की और बच्चों व महिलाओं को शिक्षित बनाने के लिए अहम भूमिका निभाई।

राहेल किस्कू का जन्म सन् 1925 में कोकराझाड़ जिले के गोसाईंगाँव महकमा में बरसनपुर गाँव में हुआ। वे बचपन से ही तेज बुद्धि की बालिका थीं। समीप के हाराफुटा मिशन स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करने के पश्चात् उन्होंने सन् 1951 में लखनऊ के एक कॉलेज से स्नातक की डिग्री हासिल की। राहेल किस्कू प्रथम संथाल महिला स्नातक थीं। अध्यापन करते समय समाज की गरीब महिलाओं की मदद के लिए अपने खर्च पर उन्होंने उनके लिए सिलाई प्रशिक्षण का काम शुरू किया था और वहाँ महिलाओं को निःशुल्क शिक्षा दी जाती थी।

राहेल किस्कू संथाली भाषा की कवयित्री और दक्ष लेखिका थीं। खास तौर पर महिलाओं व बच्चों से जुड़े मसलों पर उनकी लेखनी पैनी थी। संथाली भाषा साहित्य जगत को समृद्ध करनेवाली इस विभूति का देहांत 6 अप्रैल, 2001 को हुआ।

अतिरिक्त प्रश्न एवं उत्तर

1. साउताल स्वयं को क्या मानते हैं ?

उत्तरः साउताल स्वयं को ‘होड़ हपन’ मानते हैं।

2. ‘मोड़े होड़’ क्या है ?

उत्तरः साउताल जनगोष्ठी के लोग अपने गाँव को सुव्यवस्थित रूप से चलाने के लिए पाँच व्यक्तियों को चुनते हैं। उन पाँच व्यक्तियों को साउताल लोग ‘मोड़े होड़’ कहते हैं ।

3. साउताल लोग अपने निवास स्थान को क्यों बदलते रहते हैं? 

उत्तरः उर्वर कृषि भूमि की खोज में साउताल लोग अपने निवास स्थान को बदलते रहते हैं।

4. साउताल जनगोष्ठी के लोग अपने गीत-नृत्य में कौन-कौन-से वाद्ययंत्र का इस्तेमाल करते हैं ?

उत्तर: साउताल जनगोष्ठी के लोग अपने गीत-नृत्य में ‘तामाक’, ‘टुमडा’, ‘करताल’, ‘ढोल’ आदि वाद्ययंत्र का इस्तेमाल करते हैं।

5. ‘माझी’ किसे कहते हैं ?

उत्तर: साउताल समाज में गाँव के मुखिया या प्रधान को ‘माझी’ कहा जाता है।

6. साउताल जनगोष्ठी के प्रमुख उत्सवों के नाम लिखिए।

उत्तर: साठताल जनगोष्ठी के प्रमुख उत्सव है- ‘बाहा’ और ‘सहराई’।

GROUP-A पद्य खंड

Sl. NO.पाठ के नामLink
पाठ 1पदClick Here
पाठ 2भजनClick Here
पाठ 3ब्रज की संध्याClick Here
पाठ 4पथ की पहचानClick Here
पाठ 5शक्ति और क्षमाClick Here

गद्य खंड

पाठ 6पंच परमेश्वरClick Here
पाठ 7खाने खिलाने का
राष्ट्रीय शौक
Click Here
पाठ 8गिल्लूClick Here
पाठ 9दुःखClick Here
पाठ 10जीवन-संग्रामClick Here
पाठ 11अंधविश्वास की छीटेंClick Here
पाठ 12पर्वो का देश भारतClick Here

GROUP-B: पद्य खंड

पाठ 13बरगीतClick Here
पाठ 14मुक्ति की आकांक्षाClick Here

गद्य खंड

पाठ 15वे भूले नहीं जा सकतेClick Here
पाठ 16पिपलांत्री : एक आदर्श गाँवClick Here

वैचित्र्यमय असम

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