SEBA Class 9 Hindi (MIL) Solution|कलिता

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SEBA CLASS 9 QUESTION ANSWER (ENG. MEDIUM)

SEBA Class 9 Hindi (MIL) Solution|कलिता

सारांश

कलिता जनसमुदाय असम का एक प्राचीन और बड़ा जनसमुदाय है। असम में अनेक जनसमुदाय के लोग सदियों से निवास करते आ रहे हैं, परंतु जनसंख्या की दृष्टि से कलिता जनसमुदाय के लोगों की संख्या सर्वाधिक है। असम के तिनसुकिया जिले से लेकर धुबड़ी जिले तक ब्रह्मपुत्र घाटी के प्रत्येक जिले में कलिता जनसमुदाय के लोग रहते हैं। वर्त्तमान में असम में कलिता जनसमुदाय के लोगों की कुल संख्या लगभग 50 लाख बताई जाती है। कलिता जनसमुदाय ब्रह्मपुत्र घाटी के समतल मैदानी अंचल का पहला निवासी है। इसलिए यह जनसमुदाय ब्रह्मपुत्र घाटी का ‘भूमिपुत्र’ कहलाता है।

असम में वर्त्तमान में निवास करनेवाले सभी जनसमुदाय के लोग कहीं-न कहीं से प्रव्रजित होकर आए हैं। कलिता जनसमुदाय के लोगों के पूर्वज भी आज से लगभग सात हजार साल पहले पश्चिम में हिमालय के तराईवाले समतल मैदानों से होते हुए ब्रह्मपुत्र घाटी के विभिन्न अंचलों में आकर बस गए। उस समय मैदानी भागों के आस-पास के पहाड़ों पर मंगोलीय मूल के जनसमुदाय रहते थे, वे समतल मैदानी भागों के रहने के इच्छुक नहीं थे। इसलिए उन अंचलों में कलिता लोगों को बसने में किसी तरह के संघर्ष का सामना नहीं करना पड़ा। नदी के किनारे उपजाऊ भूमि पर छोटे-छोटे उपनिवेश स्थापित करके वे स्थायी रूप से रहने लगे। वर्त्तमान में असम में जनसंख्या की दृष्टि से कलिता लोगों का तबका बहुत बड़ा है। इसका एक छोटा तबका भारतीय संविधान के अनुसार सामान्य वर्ग (General Caste) में सम्मिलित है। जैसे- बरकलिता, सरुकलिता, कायस्थ, हालोई आदि। वर्त्तमान में कलिता जनसमुदाय अनेक समुदायों में बँटा हुआ है। कलिता लोगों की लगभग 92 उपाधियाँ हैं। जैसे कलिता, बर्मन, वर्मा, काकति, बरुवा, बरा, चौधरी, तालुकदार, डेका, तहबिलदार खाटनियार, दत्त, सेनापति, भराली, मेधी, शइकीया, हजारिका, भूयां, बेजबरुवा, रायबरुवा, रायचौधरी आदि ।

असमीया भाषा मूलतः कलिता जनसमुदाय की भाषा है। परिधान के रूप में यह समुदाय सूती, एड़ी, पाट और मूंगा के कपड़े पहनते हैं। पर्व-त्योहार व शादी में चादर-मेखला व धोती-कुर्ता पहनते हैं। कलिता समाज में लड़कियों को हथकरघे पर कपड़ा बुनने का काम जानना अनिवार्य होता है। लाल पाढ़ वाला फूलाम गामोछा के द्वारा समाज में बड़ों का सम्मान किया जाता है। सोने-चांदी के आभूषण कलिता समाज की महिलाएँ पहनती हैं। शादीसुदा औरतें अपने कपाल पर बिंदी और माँग में सिंदूर लगाती हैं। पुरुष मुख्यत: किसान हैं, लेकिन समय के साथ कलिता जनसमुदाय के लोग व्यवसाय आदि पेशे को अपना लिए हैं। आज भी प्रायः 90 प्रतिशत इस समुदाय के लोग खेतीबाड़ी या पशुपालन से जुड़े हुए हैं।

कलिता लोगों का मुख्य भोजन चावल है। चावल के साथ वे तरह-तरह की साग-सब्जियाँ, माँस-मछली, चोखा- चटनी, तरह-तरह के व्यंजन खाते हैं। कलिता लोग अतिथि का स्वागत घरेलू पिठा-लड्डू आदि से करते हैं। खानपान में दूध-दही का खूब व्यवहार किया जाता है। भोजन के बाद पान-तांबूल खाने-खिलाने का नियम है। कलिता जनसमुदाय अनेक उत्सव-पर्व मनाते हैं। उनमें बिहु, शाकेति, बांस पूजा, भथेली, ओजापाली, नगाड़ा नाम आदि प्रमुख हैं। वृहत्तर असमीया जाति के गठन में कलिता जनसमुदाय का विशेष योगदान है। भाषा-संस्कृति, जातीय प्रगति, शिक्षा दीक्षा और सामूहिक उन्नति के क्षेत्र में इस समुदाय का उल्लेखनीय योगदान है। कुमार भास्कर वर्मा से लेकर आनंदराम बरुवा, मणिराम देवान, डॉ. वाणीकांत काकति जैसी विभूतियाँ कलिता जनसमुदाय के प्रतिनिधि हस्ताक्षर हैं।

पाठ्यपुस्तक संबंधित प्रश्न एवं उत्तर

1. कलिता जनसमुदाय की खाद्य-परंपरा के बारे में संक्षिप में लिखिए। 

उत्तरः कलिता जनसमुदाय का मुख्य भोजन चावल है। वे चावल के साथ तरह-तरह की साग-सब्जियाँ खाते हैं। इस समाज में पारंपरिक तरीके से विभिन्न प्रकार के व्यंजन तैयार करने का रिवाज है। नमक का प्रचलन होने से पहले से ही कलिता लोग ‘खार’ (क्षार) का उपयोग करते आ रहे हैं। यह खार केले के पेड़ के धड़ को सुखाकर और उसे जलाकर उसकी राख से तैयार किया जाता है। खार असम का एक प्राचीन व पारंपरिक खाद्य है, जिसे विभिन्न सब्जियों में डाला जाता है। उसके अलावा आलू, बैंगन आदि पकाकर चोखा तैयार करना, खटाई डालकर मछली बनाना, अरूई (कचु) के डंठल की सब्जी बनाना, पुदिना की चटनी, दाल की चटनी, पपीता डालकर कबूतर का माँस तैयार करना भी कलिता समाज में खूब प्रचलित है।सुबह के जलपान में कोमल चावल (बोका चावल), चूड़ा, सांदह गुड़ी, दूध, विभिन्न प्रकार के पिठा-लड्डू खाते व खिलाते हैं। चाय पीने का भी रिवाज है। भोजन या जलपान के बाद पान-तांबूल देना एक आदरसूचक रिवाज है।

2. कलिता जनसमुदाय के आभूषण और पोशाक के बारे में संक्षेप में लिखिए। 

उत्तरः कलिता जनसमुदाय के लोग सोने, चांदी और पीतल से निर्मित आभूषण और एड़ी, पाट, मूगा तथा सूती धागे से निर्मित पोशाकें पहनते हैं। महिलाएँ चादर मेखला और पुरुष कमीज-धोती पहनते हैं। कलिता समाज में लड़कियाँ हथकरघे पर तरह-तरह के फूलाम गामोछा समेत परिवार में पहनने योग्य कपड़े बुनती हैं। कलिता समाज में सफेद और लाल रंग की पोशाकों की प्रधानता रहती है। विवाहित औरतें कपाल पर बिंदी और मांग में सिंदूर लगाती हैं। कानों में कर्णफूल, हाथों में कंगन और गले में हार पहनती हैं। बाल्यावस्था से ही लड़कियाँ केवल कानों में ही छोटे कर्णफूल पहनती हैं। वर्त्तमान में समय के बदलाव के साथ-साथ आभूषण और पोशाकों में भी थोड़ा परिवर्त्तन देखने को मिलता है। कलिता समाज में पुरुष अब पैंट-कमीज ही पहनने लगे में हैं। विशेष अवसर जैसे- शादी, पूजा, उत्सव आदि में पारंपरिक रूप से पुरुष से धोती-कुर्ता और महिलाएँ मेखला-चादर अनिवार्य रूप से परिधान करती हैं।

3. कलिता जनसमुदाय के पर्व-त्योहारों के बारे में लिखिए। 

उत्तर: कलिता जनसमुदाय में विभिन्न पर्व-त्योहार मनाए जाते हैं। उत्सवप्रियता कलिता जनसमुदाय की पहचान है। वे जिन पर्व-त्योहारों को मनाते हैं, उनमें प्रमुख हैं- बिहु, महोहो, ढुलीया, भुँई रोवा उत्सव, लक्ष्मी आदरा उत्सव, पाचती, धान-तोला उत्सव, नखोवा, ओजापाली, नगाड़ा नाम आदि। असम की लोक संस्कृति कलिता लोक-संस्कृति के साथ एकाकार होकर सामूहिक परिचय का प्रतीक बन गई है। असम में मनाए जाने वाले पर्व-त्योहारों में विभिन्न जनसमुदाय के लोगों के साथ कलिता लोगों की भागीदारी और सहभागिता उल्लेखनीय और महत्वपूर्ण रहती है।

4. संक्षेप नोट लिखिए : 

(क) कुमार भास्कर वर्मा

उत्तरः कुमार भास्कर वर्मा प्राचीन कामरूप राज्य के एक श्रेष्ठ राजा थे। अपने ज्येष्ठ भाई सुप्रतिष्ठ वर्मा (सप्रतिश्थि वर्मा) की मृत्यु के पश्चात् सन् 593 में कुमार भास्कर वर्मा राजा बने। उनके राजा बनने के दिन से असमीया जातीय पंचांग “भास्कराब्द” की गणना होती है। उत्तर भारत के राजा हर्षवर्धन उनके समसामयिक राजा थे। राजा हर्षवर्धन और कुमार भास्कर वर्मा के बीच गहरी मित्रता थी। भास्कर वर्मा ने हर्षवर्धन के साथ मिलकर राजा शंशांक को पराजित किया था तथा गौड़ और कर्णसुवर्ण को कामरूप के अधीन कर लिया था। भौगोलिक दृष्टि से कामरूप राज्य एक विशाल राज्य में परिवर्तित हो गया था। कामरूप की सीमा पश्चिम में बिहार और दक्षिण में उड़ीसा तक फैल गई थी। चीनी यात्री ह्वेनसांग के अनुसार उस समय कामरूप राज्य की सीमा 1685 लिता जनसमुदाय मील और राजधानी प्राग्ज्योतिषपुर की सीमा 6 मील थी। भास्कर वर्मा की डूबि ताम्रलिपि, निधानपुर ताम्रलिपि, नालंदा की मुहरें आदि एवं असम की ऐतिहासिक धरोहर हैं। एक अनुमान के अनुसार सन् 650 में कुमार भास्कर वर्मा की मृत्यु हुई थी।

(ख) आनंदराम बरुवा

उत्तरः आनंदराम बरुवा संस्कृत भाषा के एक प्रकांड विद्वान थे। उनका जन्म 21 मई, 1850 को उत्तर गुवाहाटी में हुआ था। उनके पिता का नाम गर्गराम बरुवा और माता का नाम दुर्लभेश्वरी बरुवा था। आनंदराम बरुवा बचपन से ही तेज बुद्धि के बालक थे। वे कलकत्ता विश्वविद्यालय से बी.ए. उत्तीर्ण होने के बाद उच्च शिक्षा के लिए इंगलैंड गए। आनंदराम बरुवा असम के प्रथम स्नातक और असम के प्रथम असामरिक सेवा अधिकारी (आई.सी.एस.) थे। वे जिला दंडाधिकारी के पद पर आसीन होनेवाले प्रथम असमीया तथा दूसरे भारतीय थे। इन्होंने संस्कृत भाषा पर अंग्रेजी में अनेक मूल्यवान ग्रंथों की रचना की। इनकी मृत्यु 19 जनवरी, 1889 को हुई। असम सरकार ने उनके सम्मान में सन् 2005 से उच्च माध्यमिक शिक्षांत परीक्षा (H.S.L.C.) में अच्छे अंकों के साथ उत्तीर्ण विद्यार्थियों के लिए “आनंदराम बरुवा पुरस्कार” की शुरुआत की है।

(ग) डॉ. वाणीकांत काकति

उत्तर: डॉ. वाणीकांत काकति असमीया साहित्य के एक मूर्धन्य विद्वान थे। इनका जन्म बरपेटा जिले के बाटिकुरिहा गाँव में 15 नवंबर, 1894 को हुआ था। इनके पिता का नाम ललितराम काकति और माता का नाम लहोबाला काकति था। इन्होंने बरपेटा हाईस्कूल से प्रवेशिका (मैट्रिक) की परीक्षा पास करने के पश्चात् कलकत्ता विश्वविद्यालय से क्रमश: आई.ए., बी.ए. और एम.ए. की परीक्षाएँ पास की। उसके बाद सन् 1918 में गुवाहाटी के कॉटन कॉलेज में प्राध्यापक बने, फिर सन् 1947 में प्राचार्य के पद पर आसीन हुए। बाद में गौहाटी विश्वविद्यालय में भी अध्यापन किया था। इनके द्वारा रचित पुस्तक “Assamese: It’s formation and development.” पर कलकत्ता विश्वविद्यालय ने उन्हें “डॉक्टरेट” की उपाधि दी थी। डॉ. काकति जी द्वारा रचित “कलिता जातिर इतिवृत्त” (कलिता जाति का इतिहास) एक बहुचर्चित ग्रंथ है। असमीया भाषा को एक स्वतंत्र आधुनिक भाषा बनाने में तथा कलिता जनसमुदाय को एक प्राचीन व समृद्ध समुदाय के रूप में प्रतिष्ठित करने में डॉ. वाणीकांत काकति का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

अतिरिक्त प्रश्न एवं उत्तर

1. वर्त्तमान में असम में कलिता जनसमुदाय के लोगों की कुल संख्या कितनी है ? 

उत्तरः वर्त्तमान में असम में कलिता जनसमुदाय के लोगों की कुल संख्या लगभग 50 लाख मानी जाती है।

2 कलिता जनसमुदाय के पूर्वज असम में सर्वप्रथम कहाँ आकर बसे थे ? 

उत्तरः कलिता जनसमुदाय के पूर्वज हिमालय की तराई वाले समतल मैदानों से होते हुए ब्रह्मपुत्र घाटी के समतल मैदानी अंचल में आकर बसे थे।

3. कलिता जनसमुदाय ब्रह्मपुत्र घाटी का भूमिपुत्र क्यों कहलाता है ? 

उत्तरः कलिता जनसमुदाय ब्रह्मपुत्र घाटी के समतल मैदानी अंचल का पहला निवासी है। अत: यह ब्रह्मपुत्र घाटी का भूमिपुत्र कहलाता है।

4. भारतीय संविधान के अनुसार कलिता जनसमुदाय किस वर्ग के अंतर्गत आता है ?

उत्तर: भारतीय संविधान के अनुसार कलिता जनसमुदाय सामान्य वर्ग के अंतर्गत आता है।

5, कलिता जनसमुदाय के लोगों की उपाधियाँ कितनी हैं ? 

उत्तर: कलिता जनसमुदाय के लोगों की लगभग 92 उपाधियाँ हैं। उदाहरण के रूप में कलिता, बर्मन, काकति, बरुवा, वर्मा, बरा, चौधरी, डेका, दत्त, नेओग, भराली, मेधी, शइकीया, भूयाँ, मजुमदार, फुकन, पाटगिरी, पाटोवारी आदि।

6. कलिता लोगों की मुख्य वृत्ति (पेशा) क्या है ?

उत्तरः कलिता लोग मुख्यतः खेतिहर हैं। समय के बदलाव के साथ उन्होंने विभिन्न पेशा अपना लिया है, तथापि लगभग 90 प्रतिशत लोग प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से खेतीबाड़ी या पशुपालन करके अपना जीवन निर्वाह करते हैं।

7. कलिता लोगों का मुख्य भोजन क्या है ? 

उत्तरः कलिता लोगों का मुख्य भोजन चावल है। चावल के साथ तरह-तरह की साग-सब्जियाँ, दालें, चोखा-चटनी, मछली-मांस, घर में बनाया हुआ खार आदि खाते हैं। जलपान में कोमल चावल, चूड़ा, सान्दह (भुने चावल का चूर्ण), गुड़ तथा दूध लेते हैं। मेहमानों व अतिथियों को नारियल के लड्डू, के तिल के लड्डू, तरह-तरह के पिठा से स्वागत करते हैं। भोजन या जलपान के बाद पान-तांबूल खिलाना पारंपरिक रिवाज है।

8. कलिता जनसमुदाय कौन-से उत्सव मनाते हैं ? 

उत्तरः कलिता जनसमुदाय असम का सबसे बड़ा जनसमुदाय है। असम में मनाए जाने वाले अधिकतर उत्सवों में कलिता समाज बढ़-चढ़कर हिस्सा लेता है। कलिता लोग उत्सवप्रिय होते हैं। मुख्यत: कृषिकार्य से जुड़े होने के कारण वे कृषि आधारित सभी पर्व-उत्सवों को मनाते आ रहे हैं। उन उत्सवों में काति बिहु, माघ बिहु, बहाग के सात बिहु, महोहो (मच्छर भगाना), दुलीया, ओजापाली, नगाड़ा नाम, भूँई रोवा उत्सव, पाचती, धान तोला उत्सव, न खोवा आदि प्रमुख हैं।

9. कलिता लोक-संस्कृति कृषि एवं नदियों के साथ क्यों जुड़ी है ? 

उत्तर: प्राचीन काल से ही स्वाभाविक तौर पर कलिता लोगों का कृषि एवं नदियों से अधिक लगाव रहा है। इसलिए उनकी लोक-संस्कृति कृषि एवं नदियों के साथ जुड़ी हुई है।

10. कलिता जनसमुदाय के किन्हीं चार प्रमुख व्यक्तियों के नाम बताइए। 

उत्तर: कलिता जनसमुदाय असम का एक प्राचीन व समृद्ध जनसमुदाय है। कलिता जनसमुदाय के प्रमुख व्यक्तियों में कुमार भास्कर वर्मा, आनंदराम बरुवा, मणिराम और डॉ. वाणीकांत काकति का नाम सर्वोपरि है।

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