SEBA Class 9 Hindi (MIL) Solution|सुतिया

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SEBA CLASS 9 QUESTION ANSWER (ENG. MEDIUM)

SEBA Class 9 Hindi (MIL) Solution|सुतिया

सुतिया

सारांश

असम की प्राचीन जातियों में सुतिया जाति का स्थान प्रमुख है। विद्वानों के अनुसार छठी शताब्दी में ही प्राचीन सुतिया राज्य का उल्लेख मिलता है। आहोम शासन से पूर्व सुतिया जनसमुदाय के लोग मुख्यतः ब्रह्मपुत्र के उत्तरी तट पर शासन करते आ रहे थे। बाद में आहोम स्वर्गदेव सुहुंगमूंग दिहिंगिया राजा के शासनकाल में सुतिया राज्य सम्मिलित हो गया। गौरतलब है कि आहोम राजा के साथ हुए युद्ध में सुतिया लोगों की रानी वीरांगना सती साधनी ने पराक्रम के साथ युद्ध किया था और आहोम की अधीनता स्वीकार करने की जगह मौत को गले लगा लिया था।

सुतिया लोगों के शासन वाले सदिया राज्य का पुराना नाम विदर्भ था और इसकी राजधानी का नाम कुंडिल नगर था। सुतिया लोग खुद का परिचय विदर्भ राज्य के राजा भीष्यकर के वंशज के रूप देते हैं। ये लोग देवी के उपासक थे और सदिया की केंसाईखाती या ताम्रेश्वरी देवी की पूजा नरबलि से करते थे। सुतिया राज्य जब आहोम राज्य में शामिल हुआ, तब आहोम लोग भी केंसाईखाती देवी की पूजा लगे। स्वर्गदेव गौरीनाथ सिंह के समय से नरबलि की प्रथा समाप्त हो गई। करने

 सुतिया लोगों की एक समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा थी। ये लोग मंगोल जाति की बृहद बोड़ो जनगोष्ठी के अंतर्गत हैं। सुतिया लोगों की सभ्यता-संस्कृति उन्नत थी। वे लोग नगर बसाकर रहते थे। कुंडिल नगर, भीष्मकर नगर, लक्ष्मी नगर, रतनपुर आदि प्राचीन नगरों के अवशेषों से सुतिया लोगों की उन्नत सभ्यता-संस्कृति का प्रमाण मिलता है। सुतिया लोगों की युद्ध शक्ति को झाँपकर आहो राजा ने विद्रोह की आशंका से उन्हें अलग-अलग स्थानों पर बसा दिया था। इसलिए सुतिया लोग अपनी प्राचीन व समृद्ध सभ्यता-संस्कृति का ठीक तरह से संरक्षण नहीं कर पाए। असमीया जातीय जीवन में सुतिया लोगों का महत्वपूर्ण योगदान है। 

पाठ्यपुस्तक संबंधित प्रश्न एवं उत्तर

1. सुतिया लोगों का मूल निवास स्थान कहाँ था ? 

उत्तरः हिमालय के उत्तर के मानस सरोवर से पूर्व में स्थित स्वात सरोवर के आस पास का इलाका सुतिया लोगों का मूल निवास स्थान था।

2. सुतिया शब्द की उत्पत्ति किस शब्द से हुई थी ?

उत्तरः स्वात सरोवर के किनारे के इलाके से आने के कारण सुतिया लोगों को स्वातिया कहा जाता था। बाद में इसी स्वातिया शब्द से सुतिया शब्द की उत्पत्ति हुई। दूसरी ओर, यह भी कहा जाता है कि ‘जी’ या ‘डी’ या ‘टि’ का अर्थ ‘पानी’ या ‘नदी’ है, ‘सु’ का अर्थ ‘नदी’ है । ‘सु-टि’ का अर्थ पवित्र नदी है अर्थत् पवित्र नदी के किनारे बसे हुए लोग सुतिया कहलाए।

3. सुतिया लोगों की एक वीरांगना का नाम लिखिए। 

उत्तरः सुतिया लोगों की वीरांगना थीं- रानी सती साधनी ।

4. नीचे दिए गए किसी एक के बारे में संक्षेप में लिखिए। सोनाराम सुतिया, डॉ. स्वर्णलता बरुवा, चिदानंद सइकिया, कोषेश्वर बरुवा

(क) सोनाराम सुतिया

उत्तरः सोनाराम सुतिया असम के एक वैष्णव पंडित थे। धार्मिक और आध्यात्मिक क्षेत्र में उनका योगदान अतुलनीय है। इस महान वैष्णव पंडित का जन्म जोरहाट जिले के काकजान अंचल के बाम कुकरासोवा गाँव में सन् 1915 में हुआ था। बाल्यकाल से ही मेधावी छात्र का परिचय देते हुए उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा पाँच विषयों में लेटर सहित उत्तीर्ण की। कॉटन कॉलेज से बी.एससी. की डिग्री हासिल करने के पश्चात प्रखंड विकास अधिकारी के रूप में नौकरी की।

सोनाराम सुतिया स्वतंत्रता सेनानी भी थे। भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय हिस्सा लेने के कारण उन्हें दो साल तक जेल में रहना पड़ा था। परवर्ती समय में धार्मिक मनोवृत्ति के कारण वे ‘ श्रीमंत शंकरदेव संघ’ से जुड़े और कई वर्षों तक उन्होंने पदाधिकर का पद संभाला। उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं-असम के वैष्णव दर्शन की रूपरेखा, नाम धर्म प्रकाश, भागवत माहात्म्य आदि। इन्हें असम सरकार ने श्रीमंत शंकरदेव पुरस्कार से सम्मानित किया और श्रीमंत शंकरदेव संघ ने श्री शंकर-माधव पुरस्कार और वैष्णव पंडित की उपाधि दी

(ख) डॉ. स्वर्णलता बरुवा 

उत्तरः असम में इतिहासकार के रूप में डॉ. स्वर्णलता बरुवा का नाम आदरपूर्वक लिया जाता है। श्रीमती बरुवा डिब्रुगढ़ विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग की अध्यक्षा थीं। सेवानिवृत्त होने के पश्चात् असम में एकमात्र महिला इतिहासकार के रूप में डॉ. स्वर्णलता बरुवा को ख्याति मिली। ये’ सुतिया जातिर बुरंजी’ (सुतिया जाति का इतिहास) नामक पुस्तक की मुख्य संपादिका है। इसके अलावा इन्होंने कई महत्वपूर्ण ऐतिहासिक ग्रंथों की रचना की है। उनमें ‘A Comprehensive History of Assam, Last Day of Ahom monarchy: A History of Assam from 1769-1826 आदि प्रमुख हैं।

(ग) चिदानंद सइकिया

उत्तर: असमीया साहित्य को समृद्ध बनाने में साहित्यकार चिदानंद सइकिया का योगदान सराहनीय रहा है। उन्होंने कुल 27 पुस्तकों की रचना की, जिनमें ‘सोवियत नारी’, ‘सीमांत गांधी’, ‘महर्षि कार्ल मार्क्स’, ‘जुये पोरा सोन’ ‘रंगसुवा पृथ्वीर सेउजिया बोल’, ‘जिया ढल बागरि जाय’ आदि प्रमुख हैं। सन् 1924 में गोलाघाट जिले के बोकाखात गाँव में जन्मे शिक्षाविद्, स्वतंत्रता सेनानी तथा साम्यवादी दर्शन के समर्थक, उदारमना चिदानंद सइकिया को सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार, साहित्यिक पेंशन और कृती शिक्षक पुरस्कार मिले थे।

(घ) कोषेश्वर बरुवा

उत्तरः असमीया साहित्य के भंडार को समृद्ध करने में कवि तथा विशिष्ट साहित्यकार कोषेश्वर बरुवा का स्थान उल्लेखनीय रहा है। इनका जन्म सन् 1936 में लखीमपुर जिले के धौलपुर मौजा के बरठेकेबारी गाँव में हुआ था। कोषेश्वर बरुवा छयद्वार कॉलेज के संस्थापक प्राचार्य थे। दुबरी वन के कवि के रूप में प्रसिद्ध कोषेश्वर बरुवा ने इतिहास की कई पुस्तकें लिखी हैं। इसलिए इन्हें इतिहासकार के रूप में जाना जाता है। श्री बरुवा गहपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक भी चुने गए थे। कोपेश्वर बरुवा द्वारा रचित उल्लेखनीय पुस्तकें निम्नलिखित है- ‘कलेजार दुबरी वन’, ‘अनुभव’, ‘प्रजन्मर उमानत’, ‘लगन’, ‘आगंतुक’, ‘धन्य जन्म भारतवरिषे’, ‘जननेता भीमवर देवरी’, ‘लुइतर अगारीर असमीया सभ्यता’, ‘छोट कॉवरर बुरंजी’, ‘ऐतिहासिक विवर्तनत असमर सुतिया जनगोष्ठी’, ‘सुतिया रजा रत्नध्वज पाल’, ‘Sati Sadhani’, ‘Deuri Chutia Language’ i ‘An outline Grammar of the Deuri Chutia Language Spoken in Upper Assam by W.B. Brown’ i

5. सुतिया लोगों के बारे में संक्षिप्त परिचय लिखिए।

उत्तरः सुतिया असम की एक प्राचीन जाति है। इतिहासकारों के अनुसार प्राचीन सुतिया राज्य का उल्लेख छठी शताब्दी से ही मिलता है। स्वात सरोवर के किनारे के इलाके से आने के कारण सुतिया लोगों को स्वातिया कहा जाता था। बाद में स्वातिया शब्द से ही सुतिया शब्द की उत्पत्ति हुई। दूसरी मान्यता के अनुसार सुटि का अर्थ पानी अर्थात् नदी के किनारे बसने के कारण उन्हें सुतिया कहा जाने लगा। सुतिया का शाब्दिक अर्थ जो भी हो, परंतु यह बात सत्य है कि सुतिया राज्य का इतिहास काफी पुराना है। सुतिया लोगों के शासन वाले सदिया राज्य का पुराना नाम विदर्भ था और इसकी राजधानी का नाम था- कुंडल नगर। सुतिया लोग अपने को राजा भीष्मकर के वंशज मानते हैं। ये लोग देवी के उपासक थे और सदिया की केंसाइखाती या ताम्रेश्वरी देवी की पूजा नरबलि से करते थे। सुतिया राज्य जब आहोम राज्य में शामिल हुआ, तब आहोम लोग भी केंसाईखाती देवी की पूजा करने लगे। राजा गौरीनाथ सिंह के समय से नरबलि की प्रथा समाप्त हो गई।

सुतिया जाति मंगोलीय परिवार की बृहद बोड़ो जनगोष्ठी के अंतर्गत आती है। इनकी सभ्यता-संस्कृति अत्यंत समृद्ध थी। ये लोग नगर बसाकर रहते थे। इतिहास में कुंडिल नगर, भीष्मक नगर, लक्ष्मी नगर, रत्नपुर जैसे इनके समृद्ध नगरों से पता चलता है कि सुतिया जाति की सभ्यता उन्नत एवं समृद्ध थी। इनकी स्थापत्य कला भी समृद्ध थी। मयूर के पंख के साथ विष्णुमूर्ति, शिव पार्वती की मूर्ति, सूर्य की मूर्ति, ताम्रेश्वरी मंदिर, केंसाईखाती थान आदि इन लोगों की स्थापत्य कला का परिचय देते हैं। असमीया भाषा, साहित्य, संस्कृति तथा सामूहिक उन्नति में सुतिया लोगों का अवदान स्तुत्य एवं अद्वितीय है।

अतिरिक्त प्रश्न एवं उत्तर

1. प्राचीन काल में सुतिया राज्य का शासन कहाँ तक फैला था ?

उत्तरः प्राचीन काल में सुतिया राज्य का शासन ब्रह्मपुत्र के उत्तरी किनारे तक फैला था।

2. वीरांगना रानी सती साधनी कौन थी ?

उत्तरः वीरांगना सती साधनी सुतिया राज्य की रानी थी। आहोम के साथ हुए युद्ध में उनकी वीरता और पराक्रम अतुलनीय था। वीरांगना सती साधनी आखिरकार आहोम की अधीनता स्वीकार करने के बदले अपनी मौत को लगे ल लिया।

3. सुतिया लोग लखीमपुर इलाके में कैसे पहुँचे ?

उत्तरः हिमालय के उत्तरी ओर स्वात सरोवर के पास सुतिया लोगों का मूल निवास था। वहाँ से वे सोवनशिरि नदी के किनारे-किनारे पश्चिम की ओर प्रव्रजन कर वर्तमान के लखीमपुर इलाके में पहुँचे थे।

4. ‘सदिया’ राज्य का पुराना नाम क्या था और इसकी राजधानी कहाँ थी ?

उत्तर: ‘सदिया’ राज्य का पुराना नाम विदर्भ था और विदर्भ की राजधानी कुंडल नगर में थी।

5. भीष्मकर कौन थे ?

उत्तर: भीष्मकर विदर्भ राज्य के राजा थे।

6. सुतिया राज्य का विलय आहोम राज्य में कब और किस राजा के शासनकाल में हुआ था ? 

उत्तरः सन् 1523 में आहोम राजा सुहुंगमुंग दिहिंगिया के शासनकाल में प्राचीन सुतिया राज्य का विलय हुआ था।

7.सुतिया लोग किस देवी के उपासक थे ?

उत्तरः सुतिया लोग सदिया की केंसाइखाती या ताम्रेश्वरी देवी के उपासक थे। 

8. नरबलि की प्रथा कब समाप्त हुई ?

उत्तर: आहोम राजा गौरीनाथ सिंह के शासनकाल से नरबलि की प्राची प्रथा समाप्त हो गई थी।

9. सुतिया लोग किस मूल जनगोष्ठी के अंतर्गत आते हैं ? 

उत्तरः सुतिया लोग मंगोलीय वृहद् बोड़ो जनगोष्ठी के अंतर्गत आते हैं।

10. सुतिया लोगों के कुछ प्राचीन नगरों के नाम लिखिए। 

उत्तरः सुतिया लोगों के कुछ प्राचीन नगरों के नाम हैं-कुंडिल नगर, भीष्मक नगर, लक्ष्मी नगर, रत्नपुर आदि

11. सुतिया राज्य की उन्नत सभ्यता और श्रम के विशिष्ट विभाजन वाले एक समाज का प्रमाण कैसे मिलता है ?

उत्तरः सुतिया राज्य के कुछ नगरों के अवशेषों से यह प्रमाण मिलता है कि प्राचीनकाल में इस राज्य में एक उन्नत सभ्यता-संस्कृति विद्यमान थी। आहोम राजा ने सुतिया राज्य जीतने के बाद विभिन्न सामग्री और पेशेवर लोगों को हासिल किया था, उनमें 30 हाथी, 60 घोड़े, 79 तोप, पुरस्कार उपाधियाँ, दंडछत्र, केंकोरा डोला, तलवारें, पीकदान, गाय-भैंस आदि शामिल थे। इसके अतिरिक्त आहोम राजा को ब्राह्मण, गणक, ताँती, (बुनकर), सोनार, लोहार, तेली, माली, धोबी, चमार, नाई आदि जाति के लोग युद्ध के दौरान मिले थे। इन सामग्रियों और लोगों की सूची को देखकर ही सुतिया राज्य की उन्नत सभ्यता और श्रम के विशिष्ट विभाजन वाले एक उन्नत समाज का प्रमाण मिलता है।

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