SEBA Class 9 Hindi (MIL) Solution| Chapter-9 दुःख

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SEBA CLASS 9 QUESTION ANSWER (ENG. MEDIUM)

SEBA Class 9 Hindi (MIL) Solution| Chapter-9 दुःख

दुःख

लेखक परिचय

यशपाल जी एक प्रसिद्ध कहानीकार रहे हैं। श्रेष्ठ कहानीकारों में प्रेमचन्द के बाद सबसे महत्वपूर्ण स्थान यशपाल जी को प्राप्त है। आपका जन्म सन् 1903 में फिरोजपुर छावनी में हुआ था। आपने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा स्थानीय विद्यालय से ही प्राप्त की। बाद में आपने लाहौर से उच्च शिक्षा ग्रहण की। आपने स्वतंत्रता आन्दोलन में भी सक्रिय रूप से भाग लिया तथा अमर शहीद भगत सिंह के साथ मिलकर अपनी मातृभूमि को आजाद कराने के लिए निरन्तर संघर्ष किया। आपने कई वर्षों तक ‘विप्लव’ नामक पत्रिका का सफल सम्पादन भी किया। सन् 1977 में आपका स्वर्गवास हो गया।

यशपाल जी ने कई रचनाएँ की हैं। आपके द्वारा लिखित उपन्यासों में ‘देशद्रोही’, ‘दादा कामरेड’, ‘झूठा सच’, ‘दिव्या’ और ‘तेरी मेरी उसकी बात’ प्रमुख हैं। उनके कहानी संग्रहों में ‘ज्ञानदान’, ‘तर्क का तूफान’, ‘पिजड़े की उड़ान’, ‘फूलों का कुर्ता’ और ‘उत्तराधिकारी’ विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। आपकी आत्मकथा सिंहावलोकन के नाम से जानी जाती है। आपकी भाषा प्रसादयुक्त और शैली कलात्मक है। आपकी कहानियों में एक ओर मन की कोमल एवं यथार्थ अनुभूतियों का वर्णन मिलता है तो दूसरी ओर वास्तविक तथ्यों का भी चित्रण प्राप्त होता है। आपको “तेरी मेरी उसकी बात” नामक उपन्यास के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

प्रस्तुत पाठ ‘दुःख’ एक भावना प्रधान कहानी है। यह कहानी मानव-मन की यथार्थ अनुभूतियों पर आधारित है। कहानीकार यशपाल जी ने दुःख के बनावटी एवं स्वाभाविक स्वरूप का बड़े ही रोचक ढंग से वर्णन किया है। इससे कहानीकार की सूक्ष्म-दृष्टि एवं गंभीर चिन्तन-शक्ति का परिचय मिलता है।

सारांश

‘दुःख’ एक भावना प्रधान कहानी है। यह मानव-मन की कोमल अनुभूतियों पर आधारित है। इसके लेखक प्रसिद्ध कहानीकार यशपाल जी हैं। यशपाल जी ने इसमें दुःख के बनावटी एवं स्वाभाविक स्वरूप को बड़ी सूक्ष्मता तथा सजीवता के साथ चित्रित किया है।

दिलीप इस कहानी का नायक है। हेमा उसकी धर्मपत्नी है। दिलीप-हेमा का बहुत सम्मान करता है। वह उसके प्रति हृदय से अनुरक्त है। उसने उसे पूर्ण स्वतंत्रता दे रखी है। एक दिन दिलीप के उसकी सहेली के साथ सिनेमा देख आने के कारण हेमा रूठ जाती है। वह दिनभर रूठी रहकर अगले दिन अपने मायके चली जाती है। हेमा के इस व्यवहार से दिलीप का दिल टूट जाता है। उसका मन वितृष्णा से भर जाता है। वह स्वयं को अपमानित और तिरस्कृत समझता है।

सितम्बर का अन्तिम सप्ताह है। वर्षा ऋतु बीत जाने पर भी उस दिन दिनभर वारिश होती है। दिलीप चुपचाप बैठकखाने में बैठ जाता है। वितृष्णा और ग्लानि में समय गुजारना मुश्किल हो जाता है। समय बिताने के लिए वह सोने का असफल प्रयत्न करता है। इसी बीच उसका भाई मोटरसाइकिल ले जाने की अनुमति माँगता है। दिलीप इशारे से उसे अनुमति दे देता है। तभी दीवार पर टँगी घड़ी शाम के छह बज जाने की सूचना देती है। बारिश भी थम जाती है। किसी के आने और कोई अप्रिय चर्चा प्रारम्भ करने के भय से वह भाई की साइकिल लेकर गली की कीचड़ तथा लोगों की निगाहों से छिपता हुआ मिंटो पार्क पहुँच जाता है। अपने अशान्त मन को शान्त करने के उद्देश्य से वह सिर से अपनी टोपी उतारकर एक बेंच पर लेट जाता है और ख्यालों में डूब जाता है। वह सोचता है कि सर्दी की इस रात में यदि ठंड लग जाने से वह बीमार हो जाए तो वह शहीद की तरह चुपचाप अपने दुःख को अकेला ही सह लेगा। एक दिन मृत्यु दबे पाँव आएगी और उसको हमेशा के लिए शांत कर चली जाएगी। उस दिन हेमा अपने व्यवहार के लिए पछताएगी। हेमा के लिए यही उचित प्रतिशोध होगा।

इस प्रकार स्वयं से ही अन्याय के प्रतिकार की एक संभावना देख उसका मन हल्का हो जाता है। समीप के मुख्य रेलवे लाइन से तूफान वेग से तीव्र कोलाहल करती हुई फ्रंटियर मेल के गुजरने से वह समझ जाता है कि रात के साढ़े नौ बज चुके हैं। वह घर लौटने के लिए पैदल ही पैदल चलकर भाटी दरवाजे पहुँचता है। कुछ कदम आगे बढ़ने पर उसे एक लड़का दिखाई देता है जो उस सुनसान सड़क पर खोमचा बेचने के लिए बैठा हुआ है। दिलीप सर्द हवा में सिकुड़कर बैठे उस लड़के के पास जाता है। उससे बातचीत करके दिलीप को उसकी आर्थिक बदहाली का आभास हो जाता है। वह एक रुपया देकर सारा सौदा (खोमचा) खरीद लेता है। लड़का खोमचे का टोटल मूल्य आठ पैसे बताता है। किन्तु उसके पास लौटाने के लिए पैसे नहीं होते। लड़के से यह जानकर कि उसका घर पास ही गली में है, दिलीप के मन में उसका घर देखने का कौतूहल जाग उठता है। दिलीप बाइसाइकिल को थामे लड़के के साथ चल देता है। रास्ते में लड़के से बातचीत के क्रम में वह उसकी पारिवारिक स्थिति को भी जान जाता है। लड़के के घर की बदहाली तथा उसकी भूखी माँ की दर्दभरी दास्तान सुनकर दिलीप का हृदय द्रवित हो जाता है। उसका मन हमदर्दी और सहानुभूति से भर जाता है। लड़के की माँ के पास भी दिलीप को लौटाने के लिए पैसे नहीं होते। इसलिए वह पैसा रखना नहीं चाहती है। किन्तु अन्त में दिलीप के अनुनय पर बच्चे के मिठाई खाने के नाम पर पैसा रख लेती है। वह बेटे को सूखी रोटी खिलाकर स्वयं भूखे पेट सो जाती है। दिलीप के लिए और कुछ देख पाना संभव नहीं होता। वह दाँतो से होंठ दबा घर लौट आता है। मिट्टी के तेल की ढिवरी के प्रकाश में देखा वह दृश्य तथा भूखी माँ का वह वास्तविक दुःख उसकी आँखों से ओझल नहीं होता। उसे हेमा का दुःख बनावटी लगने लगता है। तभी दिलीप का छोटा भाई हेमा का एक पत्र उसे देता है। वह पत्र की पहली लाइन पढ़कर उसे फाड़कर फेंक देता है। पत्र की पहली पंक्ति है- ‘मैं इस जीवन में दुःख ही देखने के लिए पैदा हुई हूँ।

‘। दिलीप को वास्तविक दुःख की अनुभूति हो जाती है। वह समझ जाता है कि हेमा जिसे दुःख कह रही है वह वास्तविक नहीं बल्कि बनावटी दुःख है। इसलिए वह कहता है: ‘काश! तुम जानती, दुःख किसे कहते हैं।…. तुम्हारा यह रसीला दुःख तुम्हें न मिले तो जिन्दगी दूभर हो जाए’।

पाठ्यपुस्तक संबंधित प्रश्न एवं उत्तर बोध एवं विचार

1. सही विकल्प का चयन कीजिए:

(क) दिलीप अपने भाई की साइकिल लेकर कहाँ पहुँचा ? 

  1. डलहौजी पार्क
  2. मिन्टो पार्क 
  3. गाँधी पार्क
  4. राजाजी पार्क

उत्तर:- (b) मिन्टो पार्क

(ख) लगातार फर्स्ट और सेकेंड क्लास के डिब्बों से निकलने वाले तीव्र प्रकाश से दिलीप समझ गया कि: 

  1. पंजाब मेल जा रही है
  2. कालका एक्सप्रेस जा रही है
  3. फ्रंटियर मेल जा रही है
  4. ब्रह्मपुत्र मेल जा रही है

उत्तर : (b) फ्रंटियर मेल जा रही है

(ग) लड़के के मुख पर खोमचा बेचनेवालों की चतुरता न थी, बल्कि उसकी जगह थी एक ―

  1. कायरता
  2. उदारता
  3. प्रसन्नता
  4. उदासीनता

उत्तर:- (a) कायरता

(घ) “मैं इस जीवन में दुःख ही देखने के लिए पैदा हुई हूँ”। यह उक्ति है

  1. बच्चे की माँ की
  2. जगतू की माँ की
  3. हेमा की
  4. रम्भा की

उत्तर: (c) हेमा की

2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक वाक्य में दीजिए:

(क) दिलीप क्यों दुःखी था ?

उत्तर: अपनी पत्नी हेमा की सहेली के साथ सिनेमा देख आने के कारण हेमा दिनभर रूठी रहकर दूसरे दिन अपनी माँ के घर चली गयी थी। दिलीप हेमा के इस व्यवहार से दुःखी था।

(ख) समय न बीतता देख दिलीप ने क्या प्रयत्न किया ?

उत्तर: समय न बीतता देख दिलीप ने खीझकर सो जाने का प्रयत्न किया।

(ग) छोटे भाई ने दिलीप से किस बात की अनुमति माँगी ?

उत्तर : छोटे भाई ने दिलीप से मोटरसाइकिल ले जाने की अनुमति मांगी।

(घ) लड़के की माँ क्या काम करती थी ? 

उत्तर: लड़के की माँ एक बाबू के यहाँ चौका-बर्तन करती थी ।

3. निम्नलिखित प्रश्नों के संक्षिप्त उत्तर दीजिए:

(क) ‘दुःख’ कहानी के नायक दिलीप को अपने घर का दुःख क्यों बनावटी सा लगने लगा ?

उत्तर: खोमचेवाले लड़के, उसकी भूखी माँ तथा उसके घर की बदहाली को देखकर दिलीप को अपने घर का दुःख बनावटी-सा लगने लगा। अपनी आँखों से उनकी दयनीय अवस्था को देखकर दिलीप को वास्तविक दुःख की अनुभूति हुई। लड़के और उसकी भूखी माँ का दुःख वास्तविक था जबकि उसकी पत्नी हेमा का दुःख बनावटी था।

(ख) ‘दुःख’ कहानी का मूल उद्देश्य क्या है, स्पष्ट कीजिए । 

उत्तर: ‘दुःख हृदय की कोमल अनुभूतियों पर आधारित एक भावना प्रधान कहानी है। दुःख के बनावटी एवं स्वाभाविक स्वरूप को चित्रित करना ही इस कहानी का मूल उद्देश्य है। कहानीकार ने हेमा तथा भूखी माँ के दुःख के माध्यम से अपने उद्देश्य को सार्थक बनाने में पूर्ण सफलता प्राप्त की है। इसमें कहानी के नायक दिलीप की पत्नी हेमा के दुःख को बनावटी तथा भूखी माँ के दुःख को स्वाभाविक दुःख के रूप में चित्रित किया गया है। हेमा का बनावटी दुःख पाठकों को प्रभावित नहीं करता। किन्तु भूखी माँ का वास्तविक दुःख पाठकों को उसकी शोचनीय अवस्था पर सोचने के लिए विवश करता है।

(ग) ‘इस जीवन में दुःख झेलने के लिए पैदा हुई हूँ”- हेमा ने ऐसा क्यों कहा ?

उत्तर : ‘इस जीवन में दुःख झेलने के लिए पैदा हुई हूँ” यह कथन ‘दुःख’ कहानी के नायक दिलीप की पत्नी हेमा का है। अपने बनावटी दुःख को व्यक्त करने के उद्देश्य से हेमा ने ऐसा कहा है।

हेमा के इस दुःख का कारण दिलीप का उसकी सहेली के साथ सिनेमा देखने जाना है। इस छोटी-सी बात पर वह रूठ जाती है और अपने मायके चली जाती है। वह इसे दुःख मान रही है। जबकि वह स्वयं इस दुःख का मूल कारण है। उसने स्वयं इस दुःख को आमन्त्रित किया है। इसलिए उसका यह दुःख बनावटी है। उसे वास्तविक दुःख की अनुभूति नहीं है।

(घ) हेमा की चारित्रिक विशेषताएँ बताइए।

उत्तर: हेमा ‘दुःख’ कहानी के नायक दिलीप की धर्मपत्नी है। स्वतंत्र जीवन-शैली, स्वच्छन्द आचरण, शंकालु स्वभाव तथा छोटी-छोटी बात पर रूठना आदि उसके चरित्र की मुख्य विशेषताएँ हैं। उसे अपने प्यार पर विश्वास नहीं है। दिलीप के उसकी सहेली के साथ सिनेमा देख आने के कारण वह रूठ जाती है और दिनभर रूठी रहकर अगले दिन अपने मायके चली जाती है। उसका यह आचरण उसकी उक्त चारित्रिक विशेषताओं का सूचक है। दिलीप उसके प्रति हृदय से अनुरक्त है। वह उससे बेहद प्यार करता है। हेमा के इस व्यवहार से उसे बेहद दुःख होता है। वह स्वयं को अपमानित और तिरस्कृत समझता है। उसका मन वितृष्णा से भर जाता है। परन्तु हेमा को अपने इस आचरण पर कोई पछतावा नहीं होता। वह इसे अपना दुःख मान लेती है। उसका यह मनोभाव कहानी के अंत में उसके द्वारा दिलीप को लिखित एक पत्र में पूरी तरह प्रकट हो जाता है।

आशय स्पष्ट कीजिए:

4.’मनुष्य-मनुष्य में कितना भेद होता है। किन्तु मनुष्यत्व एक चीज है, जो कभी-कभी भेद की सब दीवारों को लाँघ जाती है।”

उत्तर : ईश्वर की सृष्टि विचित्र है। यहाँ विभिन्न प्रकार के लोग रहते हैं। किन्तु जाति, धर्म, रूप-रंग तथा आकृति आदि से सभी एक-दूसरे से भिन्न हैं। किसी का किसी के साथ कोई मेल नहीं। परन्तु इन मनुष्यों में मनुष्यत्व अर्थात् मानवता नामक एक ऐसी चीज है, जो सभी को एक मंच पर लाकर खड़ी कर देती है। हृदय में मानवता की भावना जागृत होते ही लोग भेद की सभी दीवारों को लाँघकर एक दूसरे के प्रति खींचे चले आते हैं। सारे भेदों को भुलाकर एक-दूसरे के सुख-दुःख में सम्मिलित होते हैं। मनुष्यत्व की इसी भावना से प्रेरित होकर कहानी का नायक दिलीप भी भेद की सब दीवारों को लाँघकर सिर्फ खोमचेवाले उस गरीब, असहाय लड़के के पास ही नहीं जाता, बल्कि अँधेरी रात में पानी और कीचड़ भरे संकरे रास्ते से गुजरता हुआ उसके घर पहुँच जाता है।

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वैचित्र्यमय असम

भाषा एवं व्याकरण

1.कोष्ठक में दिए गए शब्दों से भाववाचक संज्ञा बनाकर रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए:

(क) ठंड से बचने के लिए लड़के ने अपनी……तेज कर दी। (चलना)

(ख) राहुल की साफ है। (लिखना)

(ग) कुतुबमीनार की अधिक है। (ऊँचा)

(घ) आजकल . पाना बहुत कठिन है। (नौकर) 

(ङ) जब मैं विनीत के घर पहुँचा, वह दीवार की..   कर रहा था। (पोतना)

(च) इस कमरे की …..सुन्दर है। (सजाना)

(छ) कारगिल की …… में भारतीय सिपाहियों ने बड़ी वीरता दिखाई। (लड़ना)

(ज) हवाई पट्टी से एक साथ कई हवाई जहाज…… भर रहे थे। ( उड़ना )

(झ) 200 मीटर रोहित को प्रथम स्थान मिला। (दौड़ना)

(ञ) उसने दो मित्रों के बीचघोल दी। (कड़वा)

उत्तर: (क) चाल।

(ग) ऊँचाई |

(ङ) पोताई।

(छ) लड़ाई |

(झ) दौड़ |

(ख) लिखावट।

(घ) नौकरी।

(च) सजावट।

(ज) उड़ान |

(ञ) कड़वाहट।

2. निम्नलिखित शब्दों की सहायता से रिक्त स्थानों को भरिए:

प्रेमपूर्वक, नियमपूर्वक, जल्दी, अचानक, ऊँचा, झटपट, सावधानी से, ध्यानपूर्वक, धीरे, प्यार से, दूर-दूर से, सहसा, धीरे-धीरे ।

(क) सोनपुर के मेले में __________ व्यापारी आते हैं।

(ख) उसकी तबीयत__________ बिगड़ गई।

(ग) बच्चों को__________ समझाओगे तो वे अवश्य मान जायेंगे। 

(घ) गंगी बड़ी__________ ठाकुर के कुएँ से पानी भरने गई थी।

(ङ) हमें__________ किसी बात का निर्णय नहीं लेना चाहिए।

(च)__________एक तीर आकर श्रवण कुमार के सीने में लगी। 

(श) __________देखो! यह उसी रम्भा का तस्वीर है।

(ज)__________ चलो, वरना गाड़ी छूट जाएगी।

(झ) तुम इतना __________क्यों बोलते हो ?

(ब) हमें सबसे__________बोलना चाहिए।

उत्तर:- 

(क) दूर-दूर से। 

(ख) अचानक ।

(ग) प्यार से । 

(ङ) झटपट ।

(घ) सावधानी 

(च) सहसा ।

(छ) ध्यानपूर्वक 

(झ) धीरे । 

(ज) जल्दी

(ञ) प्रेमपूर्वक

3.निम्नलिखित का संधि-विच्छेद कीजिए:

वेदान्त, भावार्थ, विद्यार्थी, कवीन्द्र, रवीश, भानूदय, हिमालय, रेखांकित ।

उत्तर:-

  • वेदान्त     ―  वेद  + अन्त =  वेदान्त (अ+अ =आ)
  • भावार्थ    ―  भाव  + अर्थ =  भावार्थ (अ+अ=आ)
  • विद्यार्थी    ― विद्या +अर्थी =  विद्यार्थी (आ+ अ=आ )
  • कवीन्द्र     ― कवि +इन्द्र = कवीन्द्र (इ+इ=ई)
  • रवीश      ― रवि  +  ईश  = रवीश (इ+ई=ई)
  • भानूदय    ― भानू +उदय = भानूदय (उ+ उ=ऊ)
  • हिमालय   ―  हिम +आलय = हिमालय (अ+आ=आ)
  • रेखांकित ― रेखा +अंकित = रेखांकित (आ+ अ= आ)

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