SEBA Class 9 Hindi (MIL) Solution| Chapter-6|पंच परमेश्वर

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SEBA CLASS 9 QUESTION ANSWER (ENG. MEDIUM)

SEBA Class 9 Hindi (MIL) Solution| Chapter-6|पंच परमेश्वर

पंच परमेश्वर

लेखक-परिचय

मुंशी प्रेमचन्द

मुंशी प्रेमचंद का जन्म उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध नगर वाराणसी से लगभग छह किलोमीटर दूर लमही नामक गाँव में 31 जुलाई, 1880 को हुआ था। उनका वास्तविक नाम धनपत राय था। उनके पिता का नाम अजायब राय तथा माता का नाम आनन्दी था। अजायब राय कारखाने में किरानी थे उनके पिता का उर्दू भाषा के प्रति विशेष लगाव था। इसलिए प्रेमचन्द को प्रारंभ में उर्दू की शिक्षा दी गई। इसके बाद वे वाराणसी के क्वींस कॉलेज में पढ़े और वहीं से उन्होंने हाई स्कूल की परीक्षा पास की। बाद में उन्होंने बी.ए. की परीक्षा भी उत्तीर्ण की उन्होंने एक अध्यापक के रूप में अपनी जीवन यात्रा प्रारंभ की और शिक्षा विभाग के प्रतिष्ठित डिप्टी इंस्पेक्टर के पद पर आसीन हुए। महात्मा गांधी के नेतृत्व में प्रारंभ असहयोग आन्दोलन के दौरान उन्होंने सरकारी नौकरी से त्यागपत्र दे दिया और अपना जीवन साहित्य-साधना में लगा दिया। 18 अक्टूबर, 1936 को 56 वर्ष की अल्पायु में उनका देहांत हो गया

उन्होंने अपना लेखन-कार्य उर्दू भाषा से आरम्भ किया। वे उर्दू में पहले ‘धनपत राय’ फिर बाद में ‘नवाब राय’ के नाम से लिखने लगे। उनकी पहली कहानी ‘संसार का सबसे अनमोल रत्न’ उस समय की मशहूर उर्दू पत्रिका ‘जमाना’ में प्रकाशित हुई। हिन्दी में उन्होंने ‘प्रेमचंद’ के नाम से लिखना आरम्भ किया। उन्हें यह नाम उर्दू पत्रिका ‘जमाना’ के संपादक मुंशी दयानारायण निगम ने दिया था। कुछ लोगों के अनुसार पंच परमेश्वर’ हिन्दी में प्रकाशित उनकी प्रथम कहानी थी उन्होंने लगभग 300 से अधिक कहानियाँ और 13 उपन्यासों की रचना की है। इसके अतिरिक्त नाटक, निबंध, जीवनी आदि विषयों पर भी लेखन कार्य किया है। उनकी ख्याति का मूल आधार उनका कथा-साहित्य तथा उनके उपन्यास हैं। तत्कालीन उपन्यास साहित्य को उन्होंने नई दिशा प्रदान की। इसलिए वे हिन्दी-साहित्य जगत में उपन्यास-सम्राट के नाम से विख्यात हुए। हिन्दी कहानी के क्षेत्र में भी युग प्रवर्तक का महत्वपूर्ण श्रेय उन्हें प्राप्त है। शतरंज के खिलाड़ी, ठाकुर का कुआँ, नमक का दारोगा, बूढ़ी कार्की, परीक्षा, कफ़न, पूस की रात, सवा सेर गेहूँ आदि उनकी सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ हैं सेवा सदन, गबन, निर्मला, कर्मभूमि, कायाकल्प, रंगभूमि और गोदान उनके प्रसिद्ध उप्याम हैं। उनकी कहानियाँ मानसरोवर’ के आठ भागों में और ‘गुप्त धन के दो भागों में संकलित हैं। उन्होंने ‘हंस’, ‘मर्यादा’ और ‘जागरण’ नामक पत्रिकाओं का सफल संपादन भी किया।

मुंशी प्रेमचंद जी की रचनाओं का मूल उद्देश्य समाज-सुधार रहा है। समाज के शोषित वर्ग तथा किसानों, मजदूरों आदि के प्रति उनकी विशेष सहानुभूति रही है। व उनकी रचनाओं में आदर्श एवं यथार्थ का सहज सम्मिश्रण प्राप्त होता है। अपनी इस प्रवृत्ति के कारण ही वे आदर्शवादी और यथार्थवादी कलाकार कहे जाते हैं। उनकी भाषा 8 में सजीवता तथा बोलचाल का सम्यक् पुट दृष्टिगोचर होता है। लोकोक्तियों एवं ट मुहावरों का सफल प्रयोग उनकी भाषा की उल्लेखनीय विशेषता है। उन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से भारतीय समाज में व्याप्त शोषण, निर्धनता, सामाजिक कुरीतियों नारी की दुर्दशा तथा आर्थिक विसंगतियों का सुंदर एवं प्रभावशाली चित्रण प्रस्तुत किया है।

बोध एवं विचार

1. निम्नलिखित विकल्पों में से सही विकल्प का चयन कीजिए: 

(क) हज के लिए जाते समय जुम्मन अपना घर सौंप गए थे:

  1. अलगू को        
  2. समझू को
  3. रामधन मिश्र को
  4. बटेसर को

उत्तर : (a) अलगू को।

(ख) जुम्मन ने स्थानीय कर्मचारी-गृह स्वामी के प्रबंधन में दखल देना उचित समझा’।- इसमें ‘स्थानीय कर्मचारी’ किसके लिए आया है ?

  1. खाला के लिए  
  2. करीमन के लिए
  3. अलगू के लिए
  4. जुम्मन के लिए

उत्तर : (b) करीमन के लिए।

(ग) पिछले साल अलगू चौधरी बैलों की एक सुन्दर जोड़ी लाए थे 

  1. बटेसर से
  2. समझू साहू से
  3. रामधन मिश्र से
  4. जुम्मन से

उत्तर : (a) बटेसर से।

(घ) समझू साहू ने अपनी ओर से किसे पंच चुना ? 

  1. अलगू चौधरी को
  2. जुम्मन शेख को
  3. रामधन मिश्र को
  4. झगडू साहू को

उत्तर: (a) जुम्मन शेख को।

2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक वाक्य में दीजिए : 

(क) जुम्मन के पिता का नाम क्या था ?

उत्तर : जुम्मन के पिता का नाम जुमराती शेख था।

(ख)अलगू ने बचपन में किससे शिक्षा प्राप्त की थी?

उत्तर: अलगू ने बचपन में जुम्मन शेख के पिता जुमराती शेख से शिक्षा प्राप्त की थी

(ग) ‘विद्या पढ़ने से नहीं आती; जो कुछ होता है, गुरु के आशीर्वाद से होता है।’ यह किसका कथन है ?

उत्तर: यह कथन पुराने विचारों वाले अलगू के पिता का है।

(घ) बूढ़ी खाला ने अपनी मिल्कियत किसके नाम रजिस्ट्री कर दी थी? 

उत्तर: बूढ़ी खाला ने अपनी मिल्कियत जुम्मन शेख के नाम रजिस्ट्री कर दी थी।

(ङ) अपने प्रिय बैल के मर जाने पर अलगू को किस पर संदेह हुआ ?

उत्तर: अपने प्रिय बैल के मर जाने पर अलगू को जुम्मन शेख पर संदेह हुआ।

(च) अकेले बैल को अलगू ने किसके हाथ बेच दिया ? 

उत्तर: अकेले बैल को अलगू ने समझू साहू के हाथ बेच दिया।

(छ) समझू के लिए उचित है कि बैल का पूरा नाम दें’। यह फैसला किसने सुनाया।

उत्तर: यह फैसला पंच जुम्मन शेख ने सुनाया।

3. निम्नलिखित प्रश्नों के संक्षिप्त उत्तर दीजिए :

(क) अलगू चौधरी और जुम्मन शेख में कैसी दोस्ती थी? 

उत्तर: अलगू चौधरी और जुम्मन शेख में गाड़ी दोस्ती थी। दोनों का एक-दूसरे पूरा विश्वास था। दोनों की साझे में खेती होती थी। कुछ लेन-देन में भी दोनों की हिस्सेदारी थी। एक के बाहर जाने पर दूसरा उसके घर की देखभाल करता था। किन्तु इन सबके बावजूद उन दोनों में परस्पर न तो खान-पान का व्यवहार था और नहीं धार्मिक सम्बन्ध। दोनों के विचार एक-दूसरे से मिलते थे। मित्रता का मूल मंत्र भी यही है।

(ख) अलगू ने गुरु जी की क्या सेवा की थी?

उत्तर : अलगू ने गुरु जी की बहुत सेवा की थी। तश्तरियाँ माजी थी, प्याले धोए थे और हुक्के जलाए थे। गुरु जी का एक चिलम जलाने के लिए उसे आधा आधा घंटा किताबों से अलग रहना पड़ता था।

(ग) दान-पत्र की रजिस्ट्री होने से पहले खाला जान का किस तरह आदर सत्कार किया गया था?

उत्तर: दान-पत्र की रजिस्ट्री होने से पहले खाला जान का खूब आदर-सत्कार किया गया था। उन्हें खूब स्वादिष्ट भोजन कराया गया था। हलवे-पुलाव की वर्षा की गई थी। उनकी सारी इच्छाएँ पूरी की गई थीं।

(घ) खालाजान को जुम्मन से क्या शिकायत थी ? उसने पंचायत करने की धमकी क्यों दी?

उत्तर: खालाजान जुम्मन की पत्नी करीमन की कड़वी बातें सुन-सुनकर तंग आ गई थी। इसलिए उसने जुम्मन से यह शिकायत की-‘बेटा! तुम्हारे साथ मेरा निर्वाह न होगा। तुम मुझे रुपए दे दिया करो, में अपना पका-खा लूंगी।’ खालाजान की शिकायत का जुम्मन पर कोई असर नहीं हुआ। वह उसे रुपए देने से तो मुकर ही गया, उलटे में उसके लिए अप्रिय वचन का भी प्रयोग किया। उससे खालाजान बिगड़ गई और उसने पंचायत करने की धमकी दी।

(ङ) पंचायत कराने की बात सुनकर जुम्मन के मन में डर के बजाय प्रसन्नता का भाव क्यों जाग्रत हुआ?

उत्तर: जुम्मन शेख एक प्रभावशाली आदमी था। अपने तथा आस-पास के गाँवों में उसका दबदबा था। कुछ लोग उसके उपकारों तले दबे हुए थे तो कुछ उससे डरते थे। किसी में उसके खिलाफ बोलने की न तो शक्ति थी और न उसका सामना करने का साहस था। वह पंचायत में अपनी जीत के प्रति आश्वस्त था। इसलिए पंचायत कराने की बात सुनकर उसके मन में डर के बजाय प्रसन्नता का भाव जाग्रत हुआ।

(च) यह जानते हुए कि अलगू जुम्मन का पुराना मित्र है फिर भी खाला ने अलगू को ही पंच क्यों चुना ?

उत्तरः खाला के मन में पंचों के प्रति गहरी आस्था थी। उनके प्रति उसकी पवित्र धारणा थी। वह जानती थी कि पंच परमेश्वर का दूसरा रूप होता है। पंच न किसी के दोस्त होते हैं, न दुश्मन उनके दिल में ईश्वर का निवास होता है। उनके मुंह से जो बात निकलती है, वह ईश्वर की वाणी होती है। इसीलिए यह जानते हुए कि अलगू जुम्मन का पुराना मित्र है फिर भी खाला ने अलगू को ही अपना पंच चुना।

(छ) अलगू चौधरी ने पंचायत में क्या फैसला सुनाया?

उत्तर: अलगू चौधरी ने पंचायत में यह फैसला सुनाया कि खालाजान को माहवार खर्च देना नीति-संगत है। खाला की जायदाद से इतना मुनाफा अवश्य होता है कि उसे माहवार खर्च दिया जा सके। अगर जुम्मन को खर्च देना मंजूर न हो, तो हिब्बानामा रद्द समझा जाए।

(ज) अलगू चौधरी और जुम्मन शेख की दोस्ती में दरार क्यों पड़ गई? 

उत्तर: अलगू चौधरी के द्वारा पंचायत में जुम्मन शेख के खिलाफ फैसला सुनाने के कारण दोनों की दोस्ती में दरार पड़ गई। यद्यपि अलगू चौधरी ने पंच की हैसियत से न्याय-संगत फैसला सुनाया था, किन्तु जुम्मन शेख को अलगू चौधरी से ऐसे फैसले की आशा नहीं थी । इस फैसले ने दोनों की गाढ़ी दोस्ती की जड़ हिला दी। उनकी मित्रता रूपी वृक्ष सत्य के झोंके से उखड़ गया।

(झ) सरपंच बनाए जाने पर जुम्मन शेख के मन में किस तरह का भाव पैदा हुआ?

उत्तर: सरपंच बनाए जाने पर सरपंच का उच्च स्थान ग्रहण करते ही जुम्मन शेख के मन में अपनी जिम्मेदारी का भाव पैदा हो गया। न्याय और धर्म के सर्वोच्च आसन पर बैठते ही उसने निश्चय किया कि मैं फैसला सुनाते समय अपनी वाणी में अपने मनोविकारों का समावेश नहीं होने दूंगा।मैं बिना भेदभाव के निका फैसला सुनाऊँ मैं सत्य का मार्ग अपनाऊँगा और उस मार्ग से तनिक भी विचलित नहीं होऊँगा।

(ब) जुम्मन शेख के फैसले पर समाज में क्या प्रतिक्रिया हुई ?

उत्तरः जुम्न शेख के फैसले पर समाज में बड़ी अच्छी प्रतिक्रया हुई। सब लोगों ने जुम्मन की नोति-परायणता को प्रशंसा की। चारों ओर से पंच-परमेश्वर की 1. जय-जयकार को ध्वनि सुनाई देने लगौ ।

(ट) जुम्मन शेख और अलगू चौधरी के बीच मित्रता की मुझाई लता किस प्रकार फिर से हरी हो गई ?

उत्तरः अलगू चौधरी और समझू साहू ने पंचायत बुलायी थी। उसमें साहू ने अपनी ओर से जुम्मन शेख को पंच चुना था। चौधरी ने भी जुम्मन को अपना पंच ना तो लिया था, किन्तु मन ही मन उसे इस बात का भय था कि कहीं जुम्मन शेख आज इस मौके का लाभ उठाकर अपना पुराना बदला न चुका ले। किन्तु जुम्मन ने पंच की गरिमा और मर्यादा के अनुरूप नोति-संगत और निष्पक्ष फैसला सुनाया। चौधरी को जीत हुई। फैसला उनके पक्ष में सुनाया गया। जुम्मन को भी ज्ञान हो गया कि पंच के पद पर बैठकर न कोई किसी का दोस्त होता है, न दुरमन। उसे विश्वास हो गया कि पंच के जबान से खुदा बोलता है। वहाँ न्याय के सिवा कुछ नहीं सूझता। उसे मालूम हो गया कि अलगू ने जो पंचायत की थी वह उचित था। उसने मेरे खिलाफ फैसला सुनाकर न्यायोचित कार्य किया था। इस प्रकार जुम्मन को अलगू से अब शिकायत नहीं रह गई थी।वह अलगू के पास आया और गले लिपटकर रोने लगा। अलगू भी स्वयं को रोक न सके। वे भी रोने लगे। उस जल से दोनों के दिलों का मैल धुल गया और मित्रता की मुरझाई हुई लता फिर से हरी हो गई।

(6) इस कहानी से आपको क्या शिक्षा मिलती है ? 

उत्तरः इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें एक उत्तरदायी, सचेत.

न्याय परायण एवं प्रबुद्ध नागरिक बनना चाहिए। हम चाहे जिस किसी पद पर रहें. हमें उसकी गरिमा तथा मर्यादा को रक्षा करनी चाहिए। सदैव सत्य एवं न्याय मार्ग पर चलना चाहिए। इस मार्ग से कभी विचलित नहीं होना चाहिए।

GROUP-A पद्य खंड

Sl. NO.पाठ के नामLink
पाठ 1पदClick Here
पाठ 2भजनClick Here
पाठ 3ब्रज की संध्याClick Here
पाठ 4पथ की पहचानClick Here
पाठ 5शक्ति और क्षमाClick Here

गद्य खंड

पाठ 6पंच परमेश्वरClick Here
पाठ 7खाने खिलाने का
राष्ट्रीय शौक
Click Here
पाठ 8गिल्लूClick Here
पाठ 9दुःखClick Here
पाठ 10जीवन-संग्रामClick Here
पाठ 11अंधविश्वास की छीटेंClick Here
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GROUP-B: पद्य खंड

पाठ 13बरगीतClick Here
पाठ 14मुक्ति की आकांक्षाClick Here

गद्य खंड

पाठ 15वे भूले नहीं जा सकतेClick Here
पाठ 16पिपलांत्री : एक आदर्श गाँवClick Here

वैचित्र्यमय असम

4. आशय स्पष्ट कीजिए :

(क) जुम्मन हैँसे, जिस तरह कोई शिकारी हिरन को जाल की तरफ जाने देखकर मन-ही-मन हँसता है।’

उत्तर: यह वाक्य हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘अंबर’ भाग-1 के ‘पंच परमेश्वर’ शीर्षक से पाठ उद्धृत है। इसका आशय निम्नलिखित है : शिकारी हिरण को जाल की तरफ जाते देखकर मन-ही-मन काफी खुश-होत है। क्योंकि उसे यकीन हो जाता है कि अब शिकार जाल में फँस जाएगा और मेरी योजना सफल होगी। पाठ के सन्दर्भ में शिकारी शब्द जुम्मन के लिए. हिरन शब्द खालाजान के लिए और जाल शब्द पंचायत के लिए प्रयुक्त हुआ है। खालाजान द्वारा पंचायत करने की धमकी दिए जाने पर जुम्मन को भी काफी प्रसन्नता हुई। क्योंकि खालाजान रूपी हिरन का पंचायत रूपी जाल में फैसना सुनिश्चित था। जुम्मन एक प्रभावशाली व्यक्ति था। अपने तथा आस पास के गाँवों में उसका वर्चस्व था। उसे यकीन था कि यदि खालाजान पंचायत बुलाती हैं तो उसमें मेरी जीत सुनिश्चित है। फैसला निश्चय ही में पक्ष में होगा और इस प्रकार खालाजान के साथ रात-दिन की खटखट से मुक्ति मिल जाएगी।

(ख) हमारे सोए हुए धर्म-ज्ञान की सारी संपत्ति लूट जाए, तो उसे खबर नहीं होती, परन्तु ललकार सुनकर वह सचेत हो जाता है’।

उत्तर: उक्त कथन हमारी पाठ्य-पुस्तक’ अंबर भाग-1 के पंच परमेश्वर’ शीर्षक पाठ से ली गई है, जिसके लेखक मुंशी प्रेमचंद हैं। उक्त कथन में लेखक का आशय यह है कि जब तक हमारा विचार संकुचित रहता है, तब तक हमें अच्छा-बुरा या सही-गलत से कुछ खास मतलब नहीं रहता है। किन्तु जैसे ही हमें अपने उत्तरदायित्व का बोध या पद की गरिमा का ज्ञान होता है, हम सचेत हो जाते हैं। फिर हमें कोई हमारे मार्ग से विचलित नही कर सकता। पाठ के संदर्भ में यही बात अलगू चौधरी को लक्ष्य करके कहा गया है। अलगू जुम्मन का मित्र है, इसलिए खाला जान द्वारा बुलायी जाने वाल पंचायत में उसकी खिलाफत करने से बचना चाहता है। परन्तु जब खालाय उसे ललकारते हुए कहती है कि-“बेटा, क्या बिगाड़ के डर से ईमान की बात नको उसे कचोटने लगती है और वह अपने उत्तरदायित्व को समझने लगता है। अपने उत्तरदायित्व का ज्ञान बहुधा हमारे संकुचित व्यवहारों का सुधारक होता है। जब हम राह भूलकर भटकने लगते हैं तब यही ज्ञान हमारा विश्वसनीय पथ-प्रदर्शक बन जाता है।

(ग) ‘पंच न किसी के दोस्त होते हैं, न किसी के दुश्मन’।

उत्तर: यह पंक्ति हमारी पाठ्य पुस्तक अंबर’ भाग-1 के ‘पंच परमेश्वर’ शीर्षक पाठ से उद्धृत की गई है। समाज में पंचों को परमेश्वर का रूप माना जाता है। पंच का आसन न्याय और धर्म का सर्वोच्च आसन होता है। इस आसन पर बैठकर वे जो वचन बोलते हैं, वे ईश्वर के वचन होते हैं। वे बिना किसी भेदभाव के, बिना पक्षपात के अपना फैसला सुनाते हैं। उस समय उनका न कोई दोस्त होता है और न कोई दुश्मन।

प्रस्तुत कहानी में अलगू चौधरी और जुम्मन शेख में गाढ़ी दोस्ती है। समयानुसार दोनों को पंच के गरिमामय उच्च आसन पर बैठने का अवसर मिलता है। पहली पंचायत में अलगू चौधरी धर्मोचित, न्याय-संगत किन्तु अपने मित्र जुम्मन शेख के विरुद्ध फैसला सुनाते हैं। इससे दोनों की दोस्ती में दरार भी पड़ जाती है। वहीं दूसरी पंचायत में जुम्मन शेख दुश्मन बने हुए अपने पुराने मित्र अलगू चौधरी के पक्ष में फैसला सुनाते हैं। उनके फैसले की सब लोग प्रशंसा करते हैं। उनकी मुरझाई हुई दोस्ती फिर से हरी जाती है। पंच के आसन पर बैठकर दोनों को पंच के दायित्व का ज्ञान हो जाता है। उन्हें ज्ञात हो जाता है कि पंच न किसी के दोस्त होते हैं, न किसी के दुश्मन।

भाषा एवं व्याकरण

1.निम्नलिखित पुलिंग शब्दों में उचित प्रत्यय लगाकर स्त्रीलिंग शब्द बनाइए:

चौधरी, जेठ, देवर, धोबी, बन्दर, प्रिय, देव, महाशय, गायक, शिक्षक।

पुलिंग शब्द प्रत्यय     स्त्रीलिंग शब्द

चौधरी _______ + आइन = चौधराईन

जेठ_________ + आनी = जेठानी

देवर_________ + आनी = देवरानी

धोबी_________ + इन = धोबिन

बन्__________ + इया = बन्दरिया

प्रिय _________ + आ = प्रिया

देव__________ + ई = देवी

महाशय_______ + आ = महाशया

गायक________ + इका = गायिका

शिक्षक________ + इका = शिक्षिका

2.निम्नलिखित वाक्यों को कर्म वाच्य एवं भाव वाच्य में बदलिए: 

(i) अलगू ने गुरु जी की खूब सेवा की।

उत्तर: (i) 

  1.  अलगू के द्वारा गुरुजी की खूब सेवा की गयी– कर्म वाच्य 
  2. अलगू से गुरुजी की खूब सेवा नहीं की गई– भाव वाच्य

(ii) खाला ने पंचायत करने की धमकी दी।

उत्तर : (ii) 

  1.  खाला के द्वारा पंचायत करने की धमकी दी गई – कर्म वाच्य
  2. खाला से पंचायत करने की धमकी नहीं दी गई – भाव वाच्य

(iii) वह बाजार जाता है।

उत्तर: (iii) 

  1.  उसके द्वारा बाजार जाया जाता है – कर्म वाच्य 
  2. उससे बाजार नहीं जाया जाता-भाव वाच्य

(iv) लड़के खेल रहे हैं।

उत्तर : (iv) 

  1. लड़कों के द्वारा खेला जा रहा है –कर्म वाच्य 
  2. लड़कों से खेला नहीं जा रहा है – भाव वाच्य

(v) जुम्मन ने फैसला सुनाया|

उत्तर : (v) 

  1. जुम्मन के द्वारा फैसला सुनाया गया – कर्म वाच्य
  2. जुम्मन से फैसला नहीं सुनाया गया – भाव वाच्य 

(vi) मैं पत्र लिखता हूँ।

उत्तर : (vi) 

  1.  मेरे द्वारा पत्र लिखा जाता है – कर्म वाच्य .
  2. मुझसे पत्र नहीं लिखा जाता – भाव वाच्य

(vii) देवजीत ने गाना गाया।

उत्तर : (vii) 

  1.  देवजीत के द्वारा गाना गाया गया – कर्म वाच्य 
  2. देवजीत से गाना नहीं गाया गया – भाव वाच्य

(viii) बह धोबी को कपड़े देता है।

उत्तर : (viii) 

  1. उसके द्वारा धोबी को कपड़े दिए जाते हैं – कर्म वाच्य
  2. उससे धोबी को कपड़े नहीं दिए जाते – भाव वाच्य

(ix) रमेश चल नहीं सकता।

उत्तर (ix) 

  1.  रमेश के द्वारा चला नहीं जा सकता – कर्म वाच्य
  2. रमेश से चला नहीं जा सकता – भाव वाच्य

(x) कुत्ते भौंकते हैं।

उतार : (x) 

  1. कुत्तों के द्वारा भौंका जाता है – कर्म वाच्य
  2. कुत्तों से भौंका नहीं जाता – भाव वाच्य

3.नीचे दिए गए समस्त पदों का विग्रह करते हुए समास का नाम लिखिए: सत्संग, यथाशक्ति, शाम-सबेरे, प्राणघातक, भलेमानस, देववाणी

उत्तर:

समस्त पद विग्रह समास

सत्संग…………-सत् (सज्जनों) का संग (साथ)…………..संबंध तत्पुरुष

यथाशक्ति…….शक्ति के अनुसार…………………….अव्ययीभाव

शाम-सबेरे…….शाम और सबेरे……………………….द्वंद्व समास 

प्राणघातक…….प्राणों के घातक……………………..संबंध तत्पुरुष

भलेमानस……भले (अच्छा) हैं जो मानस (आदमी) -…….. कर्मधारय

देववाणी……..-देवों की वाणी…………………………..संबंध तत्पुरुष

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