SEBA Class 9 Hindi (MIL) Solution| Chapter-4|पथ की पहचान

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SEBA CLASS 9 QUESTION ANSWER (ENG. MEDIUM)

SEBA Class 9 Hindi (MIL) Solution| Chapter-4|पथ की पहचान

कवि-परिचय

हरिवंश राय बच्चन’ हिंदी साहित्य के उत्तर छायावाद काल के प्रमुख कवियों में से एक हैं। बच्चन जी का जन्म 27 नवंबर, 1907 को इलाहाबाद (उत्तर प्रदेश) में हुआ। इलाहाबाद के कायस्थ पाठशाला तथा गवर्नमेंट कॉलेज से शिक्षा प्राप्त करने के बाद आपने इलाहाबाद विश्वविद्यालय तथा काशी विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त को सन् 1941 से 1952 तक आप इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अंग्रेजी के व्याख्याता रहे। 1952 से 1954 तक आप इंग्लैंड में रहकर ईट्स के काव्य पर शोधकार्य किया, जिससे कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय ने इन्हें पीएच.डी. की डिग्री प्रदान किया। स्वदेश लौटकर वे पुन: व्याख्याता का पद सुशोभित किए। कुछ समय तक आप आकाशवाणी इलाहाबाद में हिंदी के प्रोड्यूसर रहे। फिर आप विदेश मंत्रालय में हिंदी विशेषज्ञ तथा राज्यसभा के मनोनीत सदस्य भी रहे। सन् 1972 से 1982 तक आप कभी दिल्ली तथा कभी मुम्बई में रहकर अंत में स्थायी रूप से दिल्ली में रहने लगे। भारतीय फिल्म जगत के प्रख्यात अभिनेता अमिताभ बच्चन उनके सुपुत्र हैं। 18 जनवरी, 2003 को आपका स्वर्गवास हुआ।

हरिवंश राय ‘बच्चन’ हिंदी के लोकप्रिय कवि रहे । आपने आत्मानुभूति एवं आत्माभिव्यक्ति के बल पर काव्य-रचना की। जब छायावाद की कविताएँ साधारण पाठकों के लिए सहज ग्राह्य नहीं रही। ऐसी स्थिति में बच्चन जी अपनी सीधी-साधी जीवंत भाषा एवं सहज गेय शैली में अपने मन की बात कहने लगे। तब पाठकों को लगा कि उन्हीं के मन की बात गीत बनकर आ रही है इस प्रकार पाठकों के बीच बच्चन जी की लोकप्रियता बढ़ने लगी। जिन परिस्थितियों में प्रगतिवादी काव्यधारा का जन्म हुआ, उन्हीं परिस्थितियों से बच्चन का मधुकाव्य प्रस्फुटित हुआ था। बच्चन जी के काव्य में व्यक्ति का रूढ़ियों के प्रति विद्रोह मुखरित हुआ। आम आदमी के दुःख और सपनों को सहज अभिव्यक्ति मिली। सुर- बच्चन जी ने अनेक पुस्तकों की रचना की है। मधुशाला’ उनकी सबसे प्रसिद्ध कृति है। ‘मधुशाला’ में बच्चन जी ने हाला-प्याला-मधुशाला और साकीबाला के प्रतीकों के माध्यम से सामयिक परिस्थितियों एवं जीवन के विभिन्न पहलुओं को समुचित समझाने का प्रयास किया है। इसके अतिरिक्त कवि बच्चन द्वारा रचित अन्य काव्य कृतियाँ इस प्रकार हैं मधुबाला, मधुकलश, निशा-निमंत्रण, एकांत संगीत, आकुल अंतर, सतरंगिनी, हलाहल, खादी के फूल, मिलन यामिनी आदि। इसके अलावे बच्चन जी डायरी, आलोचना, निबंध आदि भी लिखते थे।

सारांश

पथ की पहचान’ कवि हरिवंश राय बच्चन की बेहद प्रेरणादायक कविता है। इसमें कवि ने लोगों को यह संदेश दिया है कि जीवन-पथ पर आगे बढ़ने से पहले अपने लिए उद्देश्यपूर्ण सुमार्ग की पहचान कर लेनी चाहिए।

हमारा जीवन-पथ अनेक संभावनाओं, अनिश्चितताओं एवं बाधाओं से भरा होता है। कौन-सा मार्ग हमारे लिए उपयुक्त है। इसकी जानकारी हमें खुद करनी पड़ती है। पुस्तकीय ज्ञान हमेशा उचित मार्गदर्शन नहीं कराता, परंतु हमारे पूर्वजों ने जो मार्ग दिखाया है, हम उसका भी अनुशरण करके उचित मंजिल प्राप्त कर सकते हैं। यदि एक मार्ग पर चलना असंभव लगने लगे तो उसे छोड़कर दूसरा मार्ग भी अपनाया जा सकता है। इससे हमारी यात्रा सरल होगी।

जीवन-पथ अनेक अनिश्चितताओं से भरा होता है। पथ में तरह-तरह की सुंदर चीजें दिखाई पड़ेंगी। नदी, पहाड़, झरना, बगीचे एवं पहाड़ों की हरियाली हमारा मन आकर्षित करेंगी। परंतु यह भी अनिश्चित है कि सुंदर फूलों के बदले काँटे अर्थात् बाधाओं से भी सामना करना पड़ेगा। यह भी अनिश्चित है कि कब हमारी यात्रा समाप्त हो जाए। अचानक आपका साथी आपसे बिछड़ जाए या कोई नया साथी आपसे मिल जाए। सपना देखने या कल्पना करने का सबको अधिकार है, लेकिन केवल कल्पन पर ही भरोसा मत करो। सत्य हमेशा सत्य रहता है। जीवन के यथार्थ से भी पूर्ण परिचित होना आवश्यक है। साहस, मेहनत, लगन, अनुभव एवं शुद्ध संकल्प के द्वार ही उन सपनों को साकार किया जा सकता है। जीवन की बाधाओं को हिम्मत एवं सूझ-बूझ के साथ सामना करना चाहिए। जीवन में आए संकटों से भी हम बहुत कुछ सीख सकते हैं। उन विघ्न-बाधाओं से सबक लेकर आगे बढ़ते रहना चाहिए।

पाठ्यपुस्तक संबंधित प्रश्न एवं उत्तर बोध एवं विचार

1.सही विकल्प का चयन कीजिए

(क) जीवन-पथ पर आगे बढ़ने से पहले हमें किसकी पहचान कर लेनी चाहिए?

  1. सुमार्ग
  2. मंजिल
  3. शक्ति
  4. धन-दौलत

उत्तरः (a) सुमार्ग

(ख) ‘केटकों’ की इस अनोखी

सीख का सम्मान कर ले ।’

यहाँ ‘केटक’ किसका प्रतीक है?

  1. काँटे
  2. सुख
  3. बाधाएँ
  4. जंगल

उत्तर: (c) बाधाएँ

2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर पूर्ण वाक्य में दीजिए:

(क) ‘पूर्व चलने के बटोही, बाट की पहचान कर ले।’ इसमें ‘बटोही किसे कहा गया है?

उत्तर: इसमें ‘बटोही’ जीवन-पथ पर आगे बढ़ने वाले मनुष्य को कहा गया है।

(ख) किसकी कहानी पुस्तकों में भी नहीं मिलती?

उत्तर: सुमार्ग पर चलने की कहानी (सीख) पुस्तकों में भी नहीं मिलती।

(ग) स्वप्न देखने का अधिकार किसे है ?

उत्तरः प्रत्येक व्यक्ति को स्वप्न देखने का अधिकार है।

(घ) कवि ने पथिक को किस पर मुग्ध होने से मना किया है ?

उत्तरः कवि ने पथिक को स्वप्न अर्थात् कल्पना लोक पर मुग्ध होने से मना किया है।

(ङ) ‘पाँव का दिल’ कौन चीर देता है? 

उत्तरः काँटा पाँव का दिल चीर देता है।

3. निम्नलिखित प्रश्नों के संक्षिप्त उत्तर दीजिए :

(क) कवि ने किसकी कहानी पुस्तकों में नहीं छपने की बात की है ?

उत्तरः सुमार्ग खोजने की कहानी पुस्तकों में नहीं छपी होती। मनुष्य को स्वविवेक से अपना सही जीवन-लक्ष्य चुनना पड़ता है। अर्थात् जीवन-पथ पर चलन के लिए पुस्तकीय ज्ञान हमारा सहारा नहीं बनता। इसे हमें अपने स्वाभिमान एवं अनुभव से प्राप्त करना पड़ता है।

(ख) पथ की पहचान किस प्रकार की जा सकती है ?

उत्तरः जीवन-पथ अनेक कठिनाइयों से भरा होता है। इसमें सफलता-असफलता दोनों मिलती है। स्वविवेक, स्वाभिमान एवं अनुभव के द्वारा हम अपना जीवन-पथ चुन सकते हैं। इस कार्य में हमारे पूर्वजों के बताए मार्ग भी बहुत हद तक हमारी सहायता करते हैं। हम अपने पूर्वजों द्वारा बताए मार्गों चलकर भी अपनी मंजिल को पा सकते हैं।

(ग) हमारे किन पूर्वजों का सुयश किन रूपों में अभी भी कायम है ?

 उत्तरः कुरुक्षेत्र की रणभूमि में भगवान श्रीकृष्ण के दिए गीता के उपदेश, भगवान बुद्ध के बताए गए सत्य एवं अहिंसा के मार्ग, कबीर, तुलसी एवं सूरदास के उपदेश तथा महात्मा गाँधी के बताए गए सत्याग्रह एवं अहिंसा के मार्ग आज भी हमारा मार्ग-दर्शन कर रहे हैं। सम्राट अशोक के द्वारा देश विदेशों में प्रचारित बौद्ध धर्म आज भी कायम है।

(घ) यात्रा सरल बनाने के लिए कवि ने क्या सुझाव दिया है ? 

उत्तर: जीवन-पथ पर आगे बढ़ने को कवि ने यहाँ जीवन-यात्रा का नाम दिया है। इस जीवन-यात्रा को सरल बनाने के लिए मनुष्य को व्यर्थ के विवादों से बचना चाहिए। यात्रा में हमें कष्ट मिलेगा या सुख प्राप्त होगा। सफलता मिलेगी या असफलता-इसकी परवाह किए बिना निरंतर आगे बढ़ते रहना चाहिए। इससे यात्रा सरल होगी।

(ङ) यात्रा में क्या-क्या अनिश्चित है?

उत्तरः हमें यात्रा में अनेक अनिश्चितताओं का सामना करना पड़ सकता है। हमारी यात्रा सरल होगी या कठिन, यात्रा में हमें कष्ट मिलेगा या सहुलियत होगी। यात्रा सफल होगी या असफल- इन सबकी कोई गारंटी नहीं है। यात्रा में अनेक बाधाओं का सामना भी करना पड़ सकता है। मार्ग में अनेक मनोरम स्थान भी मिल सकते हैं। सुंदर-सुंदर पहाड़, वन, बाग भी देखने को मिल सकते हैं तथा काँटे भी चुभ सकते हैं।

(च) कवि ने स्वप्न पर मुग्ध होने की मनाही क्यों की है?

उत्तरः कायर और कामचोर लोग ही स्वप्न पर विश्वास करते हैं तथा मुग्ध होते हैं। साहसी और पुरुषार्थी व्यक्ति सत्य का सहारा लेते हैं तथा स्वप्न अथवा कल्पना को भी साकार करने की कोशिश करते हैं । अर्थात् जीवन में यथार्थ

से परिचित होना अत्यंत आवश्यक है। इसलिए कवि ने स्वप्न पर मुग्ध होने से मना करता है।

(छ) ‘पथ की पहचान’ कविता से क्या सीख मिलती है ? अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तरः ‘पथ की पहचान’ कविता हमें जीवन में हमेशा आगे बढ़ने की सीख देती है। मनुष्य जब अपने जीवन-पथ पर आगे बढ़ता है तो उसके सामने कई प्रकार की चुनौतियाँ होती हैं। जीवन में सही मार्गदर्शन न मिले अथवा व्यक्ति कठिन परिस्थितियों में उचित मार्ग से भटकने लगे तो उसका साहस, लगन, अनुभव एवं शुद्ध संकल्प ही उसे विचलिन होने से रोकता है। अत: जीवन मार्ग में आने वाली बाधाओं से सबक लेकर आगे बढ़ने की यह कविता हमें सीख देती है।

GROUP-A पद्य खंड

Sl. NO.पाठ के नामLink
पाठ 1पदClick Here
पाठ 2भजनClick Here
पाठ 3ब्रज की संध्याClick Here
पाठ 4पथ की पहचानClick Here
पाठ 5शक्ति और क्षमाClick Here

गद्य खंड

पाठ 6पंच परमेश्वरClick Here
पाठ 7खाने खिलाने का
राष्ट्रीय शौक
Click Here
पाठ 8गिल्लूClick Here
पाठ 9दुःखClick Here
पाठ 10जीवन-संग्रामClick Here
पाठ 11अंधविश्वास की छीटेंClick Here
पाठ 12पर्वो का देश भारतClick Here

GROUP-B: पद्य खंड

पाठ 13बरगीतClick Here
पाठ 14मुक्ति की आकांक्षाClick Here

गद्य खंड

पाठ 15वे भूले नहीं जा सकतेClick Here
पाठ 16पिपलांत्री : एक आदर्श गाँवClick Here

वैचित्र्यमय असम

4. आशय स्पष्ट कीजिए :

(क) यह निशानी मूक होकर भी बहुत कुछ बोलती है।

उत्तर: ये पंक्तियाँ पथ की पहचान’ शीर्षक कविता की है। हरिवंश राय ‘बच्चन इसके कवि हैं। इन पंक्तियों में हमारे पूर्वजों द्वारा स्थापित स्मृति-चिह्नों से सबक लेकर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी गई है। इन पंक्तियों का आशय यह है कि हमारे पूर्वजों द्वारा संचित धरोहर तथा उनके पद-चिह्न हमें जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। यद्यपि ये पद-चिह्न और निशानियाँ मूक धरोहर होती हैं तथापि उनमें सफलता के अनगिनत ज्ञान छिपे होते हैं।

(ख) स्वप्न पर ही मुग्ध मत हो,

सत्य का भी ज्ञान कर ले। 

उत्तर: ये पंक्तियाँ कवि हरिवंश राय बच्चन द्वारा रचित ‘पथ की पहचान ‘ कविता की है। इसमें कवि ने कल्पना अथवा स्वप्न पर भरोसा न करके जीवन के यथार्थ से परिचित होने की बात कही है। इन पंक्तियों का आशय यह है कि कल्पना या स्वप्न के सहारे हम जीवन में आगे नहीं बढ़ सकते। हमें प्रगति करने के लिए ठोस आधार की आवश्यकता होती है। अत: कल्पना को साकार करने पर जोर देना चाहिए।

(ग) रास्ते का एक काँटा

पाँव का दिल चीर देता।

उत्तर: ये पंक्तियाँ कवि हरिवंश राय ‘बच्चन’ द्वारा रचित कविता पथ की पहचान से ली गई हैं। इसमें कवि ने पथ में आने वाली बाधाओं के प्रति सजग किया है। इन पंक्तियों का आशय यह है कि जिस प्रकार पैरों में यदि एक कॉटा भी चुभ जाए तो हम चल नहीं सकते उसी प्रकार जीवन में आनेवाली एक भी बाधा हमारी उन्नति पर पानी फेर देती है। इसलिए हमें जीवन पथ पर आगे बढ़ते समय काफी सजग और सावधान रहना चाहिए।

भाषा एवं व्याकरण

1. निम्नलिखित शब्दों के तीन-तीन पर्यायवाची शब्द लिखिए :

बटोही, पग, नदी, पर्वत, जंगल, आँख

उत्तर: बटोही ________ पथिक, राही, यात्री

पग ________कदम, डेग, पैर

नदी________ सरिता, तटिनी, तरंगिनी

पर्वत ________पहाड़, गिरि,अचल 

जंगल________ वन, विपिन, कानन

आँख ________नेत्र, चक्षु, नयन

2. निम्नलिखित संज्ञा-शब्दों के विशेषण-रूप लिखिए: राह, यात्रा, बाट, सफलता, मुख, भूत, दिन, हृदय

उत्तरः राह________राही

बाट________ बटोही

मुख ________मुखर, मौखिक

दिन________दैनिक

यात्रा ________यात्री

सफलता________ सफल

भूत________भौतिक

हृदय ________हार्दिक

3. निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द लिखिए : असंभव, ज्ञात, मूक, बुरा, सरल, विश्वास, अनिश्चित, सफलता, सत्य, स्वर्ग, ज्ञान, सम्मान

उत्तर: 

  • असंभव ________ संभव
  • मूक________ वाचाल
  • सरल________कठिन
  • अनिश्चित ________ निश्चित
  • सत्य________ असत्य
  • ज्ञान________अज्ञान
  • ज्ञात ________अज्ञात
  • बुरा________भला
  • विश्वास ________अविश्वास
  • सफलता ________विफलता, असफलता
  • स्वर्ग________ नरक
  • सम्मान________ अपमान

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