SEBA Class 9 Hindi (MIL) Solution| Chapter-11|अंधविश्वास की छीटें

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SEBA CLASS 9 QUESTION ANSWER (ENG. MEDIUM)

SEBA Class 9 Hindi (MIL) Solution| Chapter-11|अंधविश्वास की छीटें

अंधविश्वास की छींटें

जयंत माधव बरा

जयंत माधव बरा असम के एक प्रख्यात लेखक व साहित्यकार हैं। इसका जन्म गोलाघाट जिले के देरगाँव में हुआ था। इन्होंने भौतिकी में डिब्रुगढ़ विश्वविद्यालय से एम.एससी. की डिग्री हासिल की है। वर्तमान में वे असम सचिवालय में शिक्षा विभाग के अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। इनकी प्रेरणामूलक और सामाजिक पृष्ठभूमि पर रचित पुस्तकें लोगों के हृदय को स्पर्श करने में काफी सक्षम हैं। सरकारी सेवा के साथ-साथ बरा जी समानांतर रूप से अपनी लेखनी को बरकरार रखते हैं।

इनकी चर्चित पुस्तकें निम्न प्रकार हैं

कहानी संग्रह : “युद्धभूमि”, “बर भय लागिछे”, “अनुरणन”, “दोओलगा समय”, “जाकैया छोवाली”, “कालबेलार कथकता”। उपन्यास “अमृत”, “मरिया होला’ ‘आजान फकीर”, “मायंग: जादुर देशर गोपन कथा”।

पुरस्कार व सम्मान : “मरिया होला” उपन्यास के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार, , सैयद अब्दुल मलिक पुरस्कार।” अमृत” उपन्यास के लिए असम साहित्य सभा का गिरिधर शर्मा पुरस्कार। “जाकैया छोवाली” कहानी संग्रह के लिए पुनः असम साहित्य सभा का अंबिकागिरि रायचौधुरी पुरस्कार।

सारांश

कहानीकार जयंत माधव बरा द्वारा लिखित ‘अंध विश्वास की छीटें’ नामक निबंध एक प्रेरणात्मक निबंध है। इसमें लेखक ने यह बताया है कि अंधविश्वास के कारण समाज में कितने प्रकार के कुसंस्कार फैलते हैं और इनसे समाज को कितना नुकसान होता है।

किसी भी बात को आँख मूँदकर विश्वास कर लेना ही अंधविश्वास है। इसमें वैज्ञानिक तथ्यों या तर्कों का कोई महत्व नहीं होता। इसकी जड़ में अफवाह भी काम करता है। अफवाह भी एक प्रकार का अंधविश्वास ही है। इसका जड़-फुनगी नहीं होता। सच्चाई का पता चलते ही अफवाह गायब हो जाता है। परंतु इससे समाज को भारी नुकसान पहुँचता है।

विज्ञान ने जिन तथ्यों को अप्रमाणित सिद्ध कर दिया वही अंधविश्वास है। इससे समाज की प्रगति रुक जाती है। झाड़-फूंक, ओझा-गुनी, भूत-प्रेत या डायन पर विश्वास करना अंधविश्वास है। इन सबका कोई प्रमाण नहीं है। ऐसी घटनाएँ कहीं दिखाई भी नहीं पड़तीं। इसके अतिरिक्त किसी के शरीर में माता, शिव, औघर बाबा या अन्य शक्तियों का प्रवेश बताकर भी समाज में अंधविश्वास फैलाया जाता है और पढ़े-लिखों से लेकर अनपढ़-गँवार भी इस पर आँख मूँदकर विश्वास कर लेते हैं।

अंधविश्वास के कई कारण हैं। पहला लोगों में वैज्ञानिक या औपचारिक शिक्षा की कमी है। दूसरा कारण लोगों की नाकारत्मक सोच है। लोग सुनी-सुनाई बातों पर विश्वास करते हैं। तीसरा कारण लोगों में प्रत्यक्ष ज्ञान का अभाव है। वे भ्रमणादि पर नहीं जाते और सुनी या पढ़ी चीजों पर ही विश्वास कर लेते हैं। समाज के कुछ लोग जो शातिर दिमाग के होते हैं वे अफवाहें फैलाकर समाज के लोगों को भड़काते हैं। शिक्षित लोग भी उसके प्रभाव में आकर अंधविश्वास को बढ़ावा देते हैं। इसके अतिरिक्त कुछ लोग बगैर मेहनत किए रातोंरात अमीर या शक्तिशाली या सिद्धव्यक्ति बनना चाहते हैं, वे अंधविश्वास को उचित मानते हैं। सातवाँ और अंतिम कारण हमारे मन की स्थिति है। कक्षा या पुस्तकों द्वारा पढ़ाई जाने वाली बातों पर मनुष्य को वैज्ञानिक तरीकों से सोचना चाहिए। बहुत लोग विज्ञान पढ़ना या समझना ही नहीं चाहते और अंधविश्वासी बने रहते हैं।

समाज से अंधविश्वास दूर हो इसके लिए सभी लोगों को हमेशा सजग होना आवश्यक है। अंधविश्वास समाज को अंधा-बहरा और विकलांग बना देता है। अतः शिक्षा के माध्यम से प्रत्येक विद्यार्थी को इसके बारे में पढ़ाना आवश्यक है। जागरूकता अभियान भी इस दिशा में एक कारगर उपाय सिद्ध हो सकता है। बच्चा चोर, डायन

या भूत-प्रेत से संबंधित घटनाओं या बातों को बढ़ावा न दें। अंत में मौलिक अधिकार के तहत यदि कोई अंधविश्वास का शिकार है तो उसे उचित कानूनी कार्रवाई करना चाहिए। समाज में विशेषकर महिलाओं, बच्चों और अशिक्षित गरीब लोगों को जागरूक बनाना अत्यंत आवश्यक है।

पाठ्यपुस्तक संबंधित प्रश्न एवं उत्तर बोध एवं विचार

1. सही विकल्प का चयन कीजिए:

(क) ‘अंधविश्वास या कुसंस्कार पूरे समाज के समक्ष एक बहुत बड़ी समस्या है।’ यह उक्ति किसकी है ?

  1. डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की                    
  2. डॉ. राजेन्द्र प्रसाद की
  3. महात्मा गाँधी की                                     
  4. नरेन्द्र मोदी की

उत्तर:   (1) डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की

(ख) अंधविश्वास या कुसंस्कार का तात्पर्य क्या है ?

  1. अंधों की तरह विश्वास कर लेना 
  2. दूसरे विश्वास कर लेते हैं इसलिए विश्वास कर लेना 
  3. विषय को जाने-समझे बिना ही विश्वास कर लेना 
  4. समाज के सभी विश्वास करते हैं, इसलिए विश्वास कर लेना

उत्तर: (3) विषय को जाने-समझे बिना ही विश्वास कर लेना 

(ग) अंधविश्वास हमारे समाज को-

  1. धीरे-धीरे आगे बढ़ने देते हैं
  2. ज्यों-का-त्यों रखना चाहते हैं
  3. तेजी से विकसित होने में मदद करते हैं
  4. आगे बढ़ने में बाधा पहुँचाते हैं

उत्तर:  (4) आगे बढ़ने में बाधा पहुँचाते हैं

(घ) पुराने जमाने में हमारे समाज में अंधविश्वास के  उदाहरण 

  1. बहुत कम मिलते हैं              
  2. एकदम नहीं मिलते हैं      
  3. अनेक उदाहरण मिलते हैं       
  4. बहुत ढूँढ़ने पर ही मिलते हैं

उत्तर:  (3) अनेक उदाहरण मिलते हैं    

(ङ) हमें अंधविस्वास का उन्मूलन करना चाहिए, क्योंकि –

  1. इसके कारण समाज की हानि होती है।
  2. इसके कारण समाज के लोग शांति से रह सकते 
  3.  इसके कारण समाज की प्रगति होती है।
  4.  इसके कारण केवल कुछ लोगों की भलाई होती है

उत्तर: (1) इसके कारण समाज की हानि होती है।

2. नीचे दिए गए वाक्यों को कोष्ठक में दिए गए शब्दों में से उचित शब्द द्वारा पूरा कीजिए:

(क) दरअसल ‘डायन’ का अंधविश्वास एक ________ आतंक है। (काल्पनिक, आधुनिक, वास्तविक, नागरिक)

उत्तर: काल्पनिक

(ख) किसी अंचल में ‘बच्चाचोर’ दिखाई पड़ना. ________ का उदाहरण है। (वास्तविक घटना, अंधविश्वास, झूठे समाचार, सामाजिक आतंक) 

उत्तर: झूठे समाचार

(ग) कुछ असत प्रकृति के लोग समाज को________ बनाए रखने के लिए भी अफवाहें फैलाते हैं। (प्रगतिशील, भीतिग्रस्त और अस्थिर, पिछड़ा

हुआ, आदिम व्यवस्था के)

उत्तर: भीतिग्रस्त और अस्थिर

(घ) जो व्यक्ति विस्तृत अध्ययन तथा यथार्थ अनुभवों से समृद्ध होता है वह ________ से प्रभावित नहीं होता। (डायन तथा भूर्तो, शातिर तथा बच्चाचोर, अफवाहों तथा अंधविश्वासों, ओझा तथा ऐश्वरिक व्यक्ति)

उत्तर: अफवाहों तथा अंधविश्वासों

(ङ) अंधविश्वासों तथा अफवाहों को मानव सभ्यता के लिए________ कहना उचित ही है। (अभिशाप, वरदान, प्रगति का कारण, अशांति का कारण)

उत्तर: अभिशाप

3. निम्नलिखित प्रश्नों के संक्षिप्त उत्तर दीजिए:

(क) अंधविश्वास किसे कहते हैं ?

उत्तर: किसी भी विषय या तथ्य को बिना सोचे-समझे विश्वास कर लेना ही अंधविश्वास है।

( ख ) क्या ‘भूत’ या ‘डायन’ सचमुच होते हैं ? 

उत्तर: नहीं। भय का नाम ही ‘भूत’ है तथा ‘डायन’ अंधविश्वास से उत्पन्न अफवाह डायन है। सचमुच में ये नहीं होते।

(ग) बीमार होने से डॉक्टर की दवा खाना उचित है या ओझा से झाड़-फूँक करवाना ?

उत्तरः बीमार होने से डॉक्टर की दवा खाना ही उचित है।

(घ) क्या बच्चाचोर की अफवाह पर तुरंत विश्वास कर लेना चाहिए ? 

उत्तर: नहीं। बच्चाचोर की अफवाह पर तुरंत विश्वास नहीं करना चाहिए।

(ङ) कैसे लोग समाज में अफवाह फैलते हैं ?

उत्तर: अपनी स्वार्थ सिद्धि के लिए शातिर और अपराधी प्रकृति के लोग समाज में अफवाहें फैलाकर लोगों को भड़काते हैं।

4. निम्नलिखित प्रश्नों के सम्यक् उत्तर दीजिए:

(क) अंधकार या कुसंस्कार किसे कहते हैं, अपने शब्दों में लिखिए। 

उत्तर: अंधकार या कुसंस्कार का शाब्दिक अर्थ होता है-आँखें मूंदकर किसी बात या घटना पर विश्वास कर लेना। लोग बिना सोचे-समझे बहुत-सी बातों पर विश्वास कर लेते हैं। पुरानी रुढ़िवादी विचारधारा के लोग समाज में बिना सोचे-समझे किसी भी विषय पर विश्वास कर लेते हैं। इस विषय या घटना के असली कारण का कुछ पता नहीं होता। ऐसे विषय को विज्ञान गलत साबित कर चुका है। इसके बावजूद लोग अंधों की तरह जिनका पालन करते हैं, वही अंधविश्वास है। जैसे- भूत-प्रेत में विश्वास, डायन या ओझा में विश्वास आदि।

GROUP-A पद्य खंड

Sl. NO.पाठ के नामLink
पाठ 1पदClick Here
पाठ 2भजनClick Here
पाठ 3ब्रज की संध्याClick Here
पाठ 4पथ की पहचानClick Here
पाठ 5शक्ति और क्षमाClick Here

गद्य खंड

पाठ 6पंच परमेश्वरClick Here
पाठ 7खाने खिलाने का
राष्ट्रीय शौक
Click Here
पाठ 8गिल्लूClick Here
पाठ 9दुःखClick Here
पाठ 10जीवन-संग्रामClick Here
पाठ 11अंधविश्वास की छीटेंClick Here
पाठ 12पर्वो का देश भारतClick Here

GROUP-B: पद्य खंड

पाठ 13बरगीतClick Here
पाठ 14मुक्ति की आकांक्षाClick Here

गद्य खंड

पाठ 15वे भूले नहीं जा सकतेClick Here
पाठ 16पिपलांत्री : एक आदर्श गाँवClick Here

वैचित्र्यमय असम

(ख) हमारे समाज में प्रचलित कुछ अंधविश्वासों का उदाहरण प्रस्तुत कीजिए। 

उत्तर: हमारे समाज में अंधविश्वास के अनेक उदाहरण हैं। याण्डाबू संधि के बाद जब असम पर अंग्रेजों का शासन शुरु हुआ। उस समय कुछ ईसाई मिशनरियों असम में आईं। उस समय कुछ लोग हैजे का शिकार होने लगे। तब अंग्रेजों ने उनके इलाज के लिए जो दवाएँ दी उसे लोग खाने से मना कर दिया। उनका यह विश्वास था कि किसी अपदेवता के प्रभाव से हैजा जैसी बीमारी होती है। इसलिए वे देवी-देवता की पूजा करने लगे थे तथा मंत्र पढ़ा हुआ पानी पीते थे। इसलिए पानी पीने से ज्यादा लोग मरने लगे थे। कुछ बच्चों को भूत का भय दिखाकर बच्चों को डराते हैं। कुछ कहते हैं कि लोग झाड़ियों के बीच रहने वाली ‘यखिनी’ खिलखिलाकर हँसती है। कुछ लोग डायन का अंधविश्वास फैलाकर अपना मकसद पूरा करना चाहते हैं।

(ग) कैसे लोग अफवाह फैलाते हैं और क्यों ?

उत्तर: अपनी स्वार्थ पूर्ति के लिए शातिर और अपराधी प्रकृति के कुछ लोग समाज में अंधविश्वास फैलाते हैं। उनका मकसद अफवाह फैलाकर लोगों को भड़काकर अपना उल्लू सीधा करना होता है। इससे उन लोगों को कुछ लाभ होता है। वे झूठी खबर फैलाकर लोगों को गुमराह करते हैं तथा वैसे भ्रमित लोगों की मदद के लिए आगे आते हैं और अपना मकसद पूरा करते है।

(घ) अंधविश्वास के उन्मूलन के लिए क्या-क्या किए जा सकते हैं ?

उत्तर: अंधविश्वास समाज के विकास में बाधा पहुँचाता है। इससे अनेक हानियाँ होती हैं। अतः समाज से अंधविश्वास को दूर करने के लिए सबसे पहले लोगों को जागरूक होना चाहिए। विद्यालय के पाठ्यक्रम में इस विषय को शामिल किया जाए ताकि बचपन से ही छात्र-छात्राएँ अंधविश्वास के बारे में जानकारी पा सकें। इसके अतिरिक्त छात्रों के बीच इस विषय पर निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया जाए। भूत-प्रेत या डायन का कोई अस्तित्व नहीं होता इसलिए इस पर विश्वास न करें। कानून का सहारा लेकर भी अंधविश्वास को दूर किया जा सकता है। इसके लिए पहले से ही कानून बने हुए हैं।

(ङ) अनेक शिक्षित लोग भी अंधविश्वास के शिकार होते हैं, क्यों?

उत्तर: समाज के शातिर एवं अपराधी प्रकृति के लोग बड़ी चालाकी से अंधविश्वास फैलाते हैं। अशिक्षित लोग तो उनका शिकार बनते ही हैं, शिक्षित लोग भी उन पर विश्वास कर लेते हैं। इसका कारण है कि शिक्षित वर्ग के लोग भी तर्कशक्ति या वैज्ञानिक सोच से काम नहीं लेते और अशिक्षित या अज्ञानी लोगों की तरह वे भी उन पर विश्वास कर लेते हैं। कुछ शिक्षित लोग तो मंत्र-तंत्र या बाबाओं की शरण भी लेते हैं। इसका कारण उनमें तर्कशक्ति का अभाव तथा वैज्ञानिक सोच की कमी होती है। वे अपनी कर्मशक्ति पर विश्वास न करके अज्ञात शक्तियों पर विश्वास करते हैं।

(च) अंधविश्वास या अफवाहों से जनता प्रभावित न हो, उसके लिए क्या क्या व्यवस्था करनी चाहिए?

उत्तर: किसी भी प्रकार के अफवाह या अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देना चाहिए। बगैर सोचे-समझे अफवाहों पर ध्यान न दें और दूसरों को भी ध्यान देने से रोकें। लोगों में तर्कशक्ति विकसित करें। जिसमें तर्कशक्ति होगी वह बगैर सोचे-समझे किसी भी विषय पर विश्वास नहीं करेगा। अपने दैनिक जीवन में वैज्ञानिक धारणाओं का विकास करें। अफवाह के कारण फैली भीड़ पर नियंत्रण करने की कोशिश की जाए। इतना पर भी न हो तो संविधान में कानूनी प्रावधान तो है ही। कानूनी कार्रवाई का सहारा लेना आवश्यक है ।

5. आशय स्पष्ट कीजिए:

(क) समाज में पनप रहे ‘डायन’ अथवा ‘बच्चाचोर’ जैसे अंधविश्वासों की आड़ में कुछ शातिर और चालाक लोग अनेक अमानविक कार्य भी संघटित करते रहे हैं।

उत्तर: प्रस्तुत पंक्तियाँ ‘अंधविश्वास की छींटें’ नामक पाठ से ली गई हैं। इसके लेखक जयंत माधव बरा हैं। उक्त पंक्तियों में लेखक ने अंधविश्वास पर प्रकाश डाला है।

इन पंक्तियों का आशय यह है कि ‘डायन’ या ‘बच्चाचोर’ जैसे अंधविश्वासों की आड़ में कुछ शातिर और चालाक लोग अपने व्यक्तिगत लाभ के लिए। अफवाहें फैलाकर लोगों को भड़काते हैं। इससे समाज में हलचल मचती है और लोग अस्थिर हो जाते है। ऐसी स्थिति में चालाक शातिर लोग कुछ अमानवीय घटना को अंजाम देते हैं। इस तरह की घटना पर ध्यान नहीं देना चाहिए।

(ख) समाज में होते रहे विविध प्रकार के संघर्ष, भड़कते गिरोह के हमले आदि असामाजिक तथा अमानविक कार्यों को रोकने के लिए कानून बनाना अब जरूरी हो गया है।

उत्तर: ये पंक्तियाँ ‘ अंधविश्वास की छींटें’ नामक पाठ से ली गई हैं। उसके लेखक जयंत माधव बरा हैं। इन पंक्तियों के माध्यम से यह कहा गया है कि अंधविश्वास से जनित असामाजिक कार्यों को रोकने के लिए उचित कानून बनाया जाए।

इन पंक्तियों का आशय यह है कि अंधविश्वास और अफवाहों के कारण समाज में समय-समय पर संघर्ष, प्रदर्शन और झड़पें हो जाती हैं। यहाँ तक कि कुछ लोगों की हत्या तक कर दी जाती है। इससे समाज अस्थिर हो जाता है। अब समय आ गया है कि ऐसे कार्यों को रोकने के लिए सशक्त कानून बनाने और उसे लागू करने की आवश्यकता है।

6. सप्रसंग व्याख्या कीजिए:

(क) विज्ञान और प्रौद्योगिकी की प्रगति के इस युग में अंधविश्वास सचमुच मानव समाज के लिए अभिशाप हैं।

उत्तरः 

प्रसंग: ये पंक्तियाँ ‘ अंधविश्वास की छींटें’ नामक निबंध से ली गई हैं। इस पाठ के लेखक जयंत माधव बरा हैं। जयंत माधव बरा एक ही साथ लेखक और सरकारी कर्मचारी भी हैं। इनके द्वारा लिखे गए साहित्य पर कई पुरस्कार भी इन्हें प्रदान किया गया है।

संदर्भ : इन पंक्तियों के माध्यम से लेखक यह बताना चाहते हैं कि आज विज्ञान और तकनीकी विद्या का युग है। देशवासी वैज्ञानिक प्रगति के युग में हर कार्य यंत्र एवं इंटरनेट से कर रहे हैं। आज हमारे पास सुख के सभी साधन मौजूद हैं। उत्तम तकनीकी विद्या के द्वारा देश नित्य उन्नति के शिखर पर पहुँच रहा है। आज हम चाँद और मंगल पर पहुँच रहे हैं। परंतु आज भी समाज में अंधविश्वास का प्रचलन होना हमारी असफलता को दर्शाता है। इससे समाज का विकास रुक जाता है। अंधविश्वास वास्तव में समाज के लिए अभिशाप है। इसे हर हाल में समाज से दूर करना चाहिए।

(ख) समाज में उच्छृंखल अवांछनीय परिवेश का अमानवीय कार्य-कलापों की वृद्धि होने का मुख्य कारण है वर्त्तमान समय के लोगों में आवेश के नियंत्रण की अक्षमता।

उत्तर: 

प्रसंग: ये पंक्तियाँ ‘अंधविश्वास की छींटें’ नामक पाठ से ली गई हैं। इसके लेखक जयंत माधव बरा हैं। जयंत माधव बरा एक सुप्रसिद्ध लेखक हैं। इनकी तीन रचनाओं पर तीन साहित्यिक पुरस्कार भी प्रदान किए गए हैं। संदर्भ: इन पंक्तियों के माध्यम से यह बताया गया है कि सुनी-सुनाई बातों पर लोग भड़क जाते हैं और फिर भीड़ को नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता

व्याख्या: जब समाज के लोग बगैर सोचे-समझे किसी विषय पर आँख बंदकर विश्वास कर लेते हैं तो उसे अंधविश्वास कहते हैं। इससे समाज का परिवेश अस्थिर हो जाता है। लोग दूसरों की सुनी-सुनाई बातों पर विश्वास करने लगते हैं। कोई असली कारण का पता लगाने की कोशिश नहीं करता। इसका मुख्य कारण लोगों में आवेश क नियंत्रण की अक्षमता है। परिस्थिति को नियंत्रित करने की क्षमता समाप्त हो जाती है। कोई किसी की बात नहीं सुनता। कुछ अमानवीय कार्य भी हो जाते हैं। हत्याएँ हो जाती हैं। अतः ऐसी स्थिति उत्पन्न होने पर लोगों को अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखना सीखना होगा ताकि शांत माहौल की सृष्टि हो।

भाषा एवं व्याकरण :

‘विश्वास’ शब्द के पूर्व ‘अंध’ शब्द जोड़कर ‘अंधविश्वास’ शब्द बनाया जाता है। ऐसे ही निम्नोक्त पदों के साथ ‘अंध’ शब्द जोड़कर नए शब्द बनाइए : भक्ति, अनुकरण, परंपरा, अनुसरण

उत्तर:-  भक्ति = अंध + भक्ति ― अंधभक्ति

     अनुकरण = अंध + अनुकरण ― अंधानुकरण

     परंपरा अंध + परंपरा ― अंधपरंपरा

     अनुसरण = अंध + अनुसरण ― अंधानुसरण

2. निम्नलिखित उपसर्गों से नए शब्द बनाइए: कु, सु, परि, उप, निर्, अधि, अभि, परा, वि, प्र

उत्तरः

कु = कु + मार्ग→ कुमार्ग

सु = सु + मार्ग→ सुमार्ग

परि = परि + वर्तन→परिवर्तन

उप = उप + हार →  उपहार

निर् = निर् + धन → निर्धन

अधि =  अधि + गम →अधिगम

अभि = अभि + युक्त→अभियुक्त

परा =  परा + जय→पराजय

वि = वि + हार→विहार

प्र = प्र + सिद्ध→प्रसिद्ध

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