SEBA Class 9 Hindi (MIL) Solution|चाय जनगोष्ठी

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SEBA CLASS 9 QUESTION ANSWER (ENG. MEDIUM)

SEBA Class 9 Hindi (MIL) Solution|चाय जनगोष्ठी

चाय जनगोष्ठी

सारांश

असम अनेक जनगोष्ठियों की मिलन-भूमि है। यहाँ विभिन्न समय में विभिन्न • प्रांतों से अनेक लोगों का आगमन हुआ है। इनमें चाय जनगोष्ठी भी है। भारत के कई प्रांतों से चाय जनगोष्ठी के लोग असम में आए थे और वे असम की समाज-संस्कृति के साथ घुल-मिलकर रहने लगे। मगर यहाँ यह उल्लेख करना उचित होगा कि जनगोष्ठी के लोगों का आगमन स्वाभाविक नहीं था। ईस्ट इंडिया कंपनी ने चाय मजदूरों की आवश्यकता की पूर्ति हेतु भारत के विभिन्न क्षेत्रों से मजदूरों को जुटाया था। कंपनी ने सन् 1835 से सबसे पहले व्यवस्थित रूप से असम के चाबुआ में चाय की खेती शुरू की थी। इसके चार साल बाद असम चाय कंपनी (द आसाम टी कंपनी) की स्थापना हुई और चाय खेती का विस्तार होने लगा। लेकिन असम में जरूरत के अनुसार स्थानीय मजदूरों का अभाव था। इसलिए चीन और भारत के विभिन्न इलाकों से मजदूर जुटाने का प्रयास किया गया। असम चाय कंपनी ने कुछ बिचौलियों को नियुक्त किया था और बिचौलियों ने पश्चिम बंगाल, उड़िसा, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, मद्रास आदि स्थानों से मजदूरों का संग्रह किया था। किंतु ये सभी मजदूर असम नहीं पहुँच पाए। इनमें से कुछ मजदूर बीमार होकर रास्ते में ही मर गए, कुछ आधे रास्ते से ही वापस चले गए। और कुछ ही मजदूर असम पहुँचने में सफल हुए थे। भारत के विभिन्न प्रांतों से आने के कारण इन मजदूरों की जाति, वर्ण, धर्म, भाषा, संस्कृति में भिन्नता थी। असम में आकर चाय बागान के एक ही माहौल में उनको काम करना पड़ रहा था। प्रारंभ में कुछ असुविधा होने पर भी वक्त बीतने के साथ-साथ उनके बीच पारस्परिक संपर्क और सौहार्द का भाव बढ़ता गया था। समझौते के तहत आए कुछ मजदूर वापस अपने इलाके में चले गए, लेकिन बाकी इसी असम को अपनी भूमि मानकर बस गए। इन मजदूरों के बीच एक संपर्क भाषा विकसित हुई, जिसे हम ‘बगनिया’ भाषा कहते हैं। असल में बगनिया भाषा एक बोली ही है, यह अभी भी भाषा के स्तर तक पहुँच नहीं पाई है। दरअसल, चाय जनगोष्ठी अब असम के समाज-जीवन का एक अनिवार्य अंग है। असम में इनकी आबादी करीब साठ लाख है। इनमें हिंदू और ईसाई धर्मावलंबी की संख्या अधिक है। चाय जनगोष्ठी के अंतर्गत अनेक जाति-उपजाति और संप्रदाय हैं। जैसे-उराँव, मुंडा, ताँती, घटवार, ग्वाला, कोइरी, तासा, तेली, कुर्मी आदि। इन लोगों की बोली, खानपान, वेशभूषा, रहन-सहन की एक अलग विशिष्टता है। असमीया भाषा-संस्कृति को अपनाकर उन्होंने अपनी पहचान को कायम रखा है। चाय जनगोष्ठी के लोगों की अपनी कला-संस्कृति, आचार-व्यवहार पूरी तरह लुप्त नहीं हुई है। करम, तुसु और शहराई इनके अत्यंत लोकप्रिय उत्सव हैं। चाय जनगोष्ठी द्वारा प्रस्तुत झुमुर गीत-नृत्य अत्यंत लोकप्रिय और आकर्षक है और इनमें उनका लोक-परंपरा और आनंद परिलक्षित होते हैं।

कुल मिलाकर कहा जाए तो चाय जनगोष्ठी के लोगों की आर्थिक स्थिति मजबूत न होने के कारण उनका जीवन स्तर काफी पिछड़ा हुआ है। लेकिन सरकारी योजनाओं का लाभ अब इन्हें मिलने लगा है, जिसके कारण असम के अन्य लोगों के साथ कदम-से-कदम मिलाकर आगे बढ़ने में इन्हें कामयाबी मिल रही है।

पाठ्यपुस्तक संबंधित प्रश्न एवं उत्तर

1. असम का पहला चाय बागान कौन-सा है और कब स्थापित हुआ था ? 

उत्तर: असम का पहला चाय बागान “चाबुआ चाय बागान” है और इसे ईस्ट इंडिया कंपनी ने सन् 1835 में स्थापित किया था।

2. असम की पहली चाय कंपनी का नाम क्या था और कब स्थापित हुई। थी ? 

उत्तर: असम की पहली चाय कंपनी का नाम ‘असम चाय कंपनी’ था और इसकी स्थापना सन् 1840 में हुई थी। 

3.’गिरमिटिया’ और ‘आड़काठिया’ चालान के बारे में क्या जानते हैं? लिखिए।

उत्तर: असम चाय कंपनी की स्थापना के बाद असम में चाय की खेती का व्यापक रूप में विस्तार हो गया था, लेकिन आवश्यकतानुसार स्थानीय मजदूरों का काफी अभाव था। इसलिए चीन और भारत के विभिन्न प्रांतों से मजदूर जुटाने

पर विचार किया गया। इसके लिए कंपनी ने कुछ बिचौलियों को नियुक्त किया था। इन बिचौलियों ने पश्चिम बंगाल, उड़िसा, बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, मद्रास आदि स्थानों से मजदूरों का संग्रह किया था। इस तरह असम में मजदूरों को लाने के कार्य को मजदूर चालान कहा जाता था। मजदूर चालान दो प्रकार के होते थे-‘गिरमिटिया’ चालान और ‘आड़काठिया’ चालान । लिखित समझौते के तहत निश्चित समय के लिए मजदूरों को लाया जाना ‘गिरमिटिया’ चालान कहलाता था और समझौते के बगैर छल-बल-कौशल से लाए गए मजदूरों को ‘आड़काठिया’ चालान कहा जाता था।

4. चाय जनगोष्ठी समाज की 10 जातियों-उपजातियों के नाम लिखिए। 

उत्तरः चाय जनगोष्ठी समाज की अनेक जातियाँ- उपजातियाँ हैं, जैसे-मुंडा, साउताल, कुर्मी, ताँती, घटवार, कोइरी, तासा, तेली, धनोवार, बढ़ई आदि ।

5. चाय जनगोष्ठी के बीच कौन-कौन-से धर्म के लोग हैं ?

उत्तर: चाय जनगोष्ठी के बीच हिंदू और ईसाई धर्म के लोग अधिक हैं।

6. स्वाधीनता संग्राम में पहली महिला शहीद का नाम क्या है ?

उत्तरः स्वाधीनता संग्राम में पहली महिला शहीद का नाम है- मांगड़ी उरांव । 

7. असम आंदोलन में प्राण न्योछावर करने वाले चाय बागान के प्रथम शहीद का नाम क्या है ?

उत्तर: असम आंदोलन में अपने प्राणों को न्योछावर करने वाले चाय बागान के प्रथम शहीद का नाम है बाधना उरांव

6. संक्षिप में लिखिए :

(क) मेघराज कर्मकार 

उत्तर: चाय जनगोष्ठी के जिन लोगों ने असमीया भाषा-साहित्य की समृद्धि में अपना अमूल्य योगदान दिया है, उनमें मेघराज कर्मकार अन्यतम हैं। ऊपरी असम के जामिता चाय बागान के मेघराज पेशे से हाईस्कूल के शिक्षक थे। वे चाय जनगोष्ठी समाज के प्रथम साहित्यिक पेंशनर हैं। असम प्रकाशन परिषद ने ‘मेघराज कर्मकार रचनावाली’ का प्रकाशन किया है।

(ख) संतोष कुमार तप्न

उत्तरः संतोष कुमार तप्न एक असमीया भाषा साहित्य के लेखक और समाजसेवी थे। उनका जन्म सन् 1924 में शिवसागर जिले के मरान में हुआ था। वे असम चाय जनजाति छात्र संघ के संस्थापक सचिव थे। उन्होंने जोरहाट के जेबी कॉलेज से स्नातक की डिग्री हासिल की थी। असम के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में उनके लेख प्रकाशित हुए हैं। संतोष कुमार तप्न की ‘मुंडा जातिर चमु परिचय’ (मुंडा जाति का संक्षिप्त परिचय) नामक पुस्तक चाय जनगोष्ठी की पहली प्रकाशित पुस्तक है।

(ग) साइमन सिंह होर

उत्तर: साइमन सिंह होर चाय जनगोष्ठी के लोगों के लिए मसीहा थे। उन्होंने सरकारी नौकरी को ठुकरा कर समाज सेवा की ओर ध्यान दिया। उन्होंने जोरहाट के जे. बी. कॉलेज से स्नातक की डिग्री हासिल की थी। समाज के विकास में शिक्षा के महत्व को समझते हुए उन्होंने पिछड़े इलाके में स्कूल की स्थापना की। ईसाई धर्मावलंबी होते हुए भी हिंदू धर्म का नामघर बनाने के लिए उन्होंने अपनी जमीन का दान किया था। समाजसेवी साइमन सिंह होर का देहांत 26 जून, 1980 को हुआ।

अतिरिक्त प्रश्न एवं उत्तर

1. असम में सबसे पहले चाय मजदूरों को किसने लाया ? 

उत्तर: ईस्ट इंडिया कंपनी ने सबसे पहले चाय मजदूरों को असम में लाया था।

2. मजदूर चालान क्या है ?

उत्तर: असम में मजदूरों को लाने के कार्य को मजदूर चालान कहा जाता था। मजदूर चालान दो प्रकार के होते थे-गिरमिटिया और आड़काठिया ।

3. असम में सबसे पहले कहाँ से कितने मजदूरों को लाया जा रहा था ? क्या वे सभी मजदूर असम पहुँचने में सफल रहे ?

उत्तर: असम चाय कंपनी ने सबसे पहले हजारीबाग जिले से 652 मजदूरों का संग्रह किया था, किंतु वे मजदूर असम नहीं पहुँच पाए। बीमार होकर उनमें से आधे मजदूरों की मौत रास्ते में ही हो गई और बाकी लौट गए।

GROUP-A पद्य खंड

Sl. NO.पाठ के नामLink
पाठ 1पदClick Here
पाठ 2भजनClick Here
पाठ 3ब्रज की संध्याClick Here
पाठ 4पथ की पहचानClick Here
पाठ 5शक्ति और क्षमाClick Here

गद्य खंड

पाठ 6पंच परमेश्वरClick Here
पाठ 7खाने खिलाने का
राष्ट्रीय शौक
Click Here
पाठ 8गिल्लूClick Here
पाठ 9दुःखClick Here
पाठ 10जीवन-संग्रामClick Here
पाठ 11अंधविश्वास की छीटेंClick Here
पाठ 12पर्वो का देश भारतClick Here

GROUP-B: पद्य खंड

पाठ 13बरगीतClick Here
पाठ 14मुक्ति की आकांक्षाClick Here

गद्य खंड

पाठ 15वे भूले नहीं जा सकतेClick Here
पाठ 16पिपलांत्री : एक आदर्श गाँवClick Here

वैचित्र्यमय असम

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