Class 11 Hindi (MIL) आरोह ( काव्य खंड) विषय – 9. सबसे खतरनाक

Class 11 Hindi (MIL) आरोह ( काव्य खंड) विषय – 9. सबसे खतरनाक।  HS प्रथम वर्ष के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न हिंदी प्रश्न उत्तर आपके लिए नवीनतम NCERT/AHSEC संकेतकों के अनुसार नवीनतम प्रश्न और समाधान लाता है। छात्र इन आवश्यक अध्याय प्रश्नों को सक्रिय करके प्रत्येक अध्याय के संबंध में अपने सभी संदेहों को दूर करेंगे और हमारे विशेषज्ञों द्वारा प्रदान की गई विस्तृत व्याख्याओं को विस्तृत करेंगे ताकि आपको उच्च सहायता मिल सके। ये प्रश्न छात्रों को समय की कमी के कारण परीक्षा के लिए अच्छी तैयारी करने में मदद कर सकते हैं। Class 11 Hindi (MIL) आरोह ( काव्य खंड) विषय – 9. सबसे खतरनाक

HS First Year Hindi (MIL) आरोह ( काव्य खंड) विषय – 9. सबसे खतरनाक

आरोह ( काव्य खंड)

कवि परिचय :

अवतार सिंह पाश.

कवि पाश का मूल नाम अवतार सिंह संधू था। इनका जन्म सन् 1950 ई. में जालंधर के तलवंडी सलेम गाँव में हुआ। ये पंजाबी साहित्य के महत्वपूर्ण कवि माने जाते हैं। पाश जन आंदोलनों से जुड़े रहे और विद्रोही कविता का नया सौंदर्य विधान विकसित कर उसे तीखा किंतु सृजनात्मक तेवर दिया। इनकी मृत्यु 1988 मों हुकी इनकी . इनकी प्रमुख रचनाएँ: लौह कथा, उड़दे बाजा मगर, साड़ै समिया बिच, लड़ेंगे साथी (पंजाबी), बीच का रास्ता नहीं होता, लहू हैं कि तब भी गाता हैं (हिन्दी अनुवाद)

प्रश्नोत्तर

1. कवि ने किस आशय से मेहनत की लूट, पुलिस की मार, गद्दारी-लोभ को सबसे खतरनाक नहीं माना। 2014

उत्तर: कवि ने मेहनत की लूट, पुलिस की मार, गद्दारी-लोभ को सबसे खतरनाक इसलिए नहीं माना है, क्योंकि उनके अनुसार प्रतिकुलताओं से जूझने के सकंल्प का क्षीण हो जाना ही सबसे खतरनाक है। मनुष्यों में जब प्रतिकूलताओं को बदलने की प्यास मर जाए और बेहतर भविष्य के सपनों के गुम हो जाने को कवि ने सबसे खतरनाक स्थिति माना हैं।

2.सबसे खतरनाक शब्द के बार-बार दोहराए जाने से कविता में क्या असर पैदा हुआ ?

उत्तर : ‘सबसे खतरनाक’ शब्द बार-बार दोहराए जाने से कविता प्रभावशाली बन गई। यह शब्द पाठकों को यह सोचने के लिए विवश कर देती हैं, कि समाज में वह कौन सी परिस्थिति है, जो सबसे खतरनाक होती जा रही है। किस प्रकार मनुष्य सबसे खतरनाक परिस्थितियों से न जूझकर उसके सामने विवश हो जाता है।

3. कवि ने कविता में कई बातों को बुरा हैं न कहकर बुरा तो है कहा हैं। तो के प्रयोग से कथन की भंगिमा में क्या बदलाव आया हैं, स्पष्ट कीजिए। 

उत्तर: ‘तो’ के प्रयोग से कथन की भंगिमा में बहुत ही बदलाव आया है। ‘तो’ के प्रयोग से कथन में जो असर होना चाहिए था वह कम हो गया है। उदाहरणस्वरूप बुरा है कहने पर कथन में जो प्रभाव होता है, बुरा तो है कहने में उतना प्रभाव नही होता है।

4. मुर्दा शान्ति से भर जाना और हमारे सपनों का मर जाना- इनको सबसे खतरनाक माना गया हैं। आपकी दृष्टि में इन बातों में परस्पर क्या संगति है, और ये क्यों सबसे खतरनाक हैं ? 

उत्तर: कवि ने जड़ स्थितियों को बदलने की प्यास के मर जाने और बेहतर भविष्य के सपनों के गुम हो जाने को सबसे खतरनाक स्थिति मानता हैं। कवि कहता है, सबसे खतरनाक स्थिति वह है, जब व्यक्ति मुर्दा शांति (मुर्दों जैसी (शान्ति ) से भर जाता है। वह बिना किसी तड़प (बैचेनी) के सब कुछ सहन करने लगता है। जब वह घर से केवल काम पर निकलता है और काम से लौटकर घर आता है। सबसे खतरनाक स्थिति वह होती है, जब व्यक्ति के सपने मर जाते हैं।

5.सबसे खतरनाक वह घड़ी होती है। आपकी कलाई पर चलती हुई भी जो आपकी निगाह मेंरूकी होती हैं। इन पंक्तियों में घड़ी शब्द की व्यंजना से अवगत कराइए।

उत्तर : यहाँ ‘घड़ी’ शब्द व्यंग्यार्थ की सृष्टि करता है। यहाँ घड़ी का रूक जाना आत्मा का मर जाना है। कवि कहते हैं कि व्यक्ति में चारों तरफ के खौफ़नाक स्थिति को देखकर भी उन जड़ स्थितियों को बदलने की प्यास मर गयी हैं। 

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6.वह चाँद सबसे खतरनाक क्यों होता हैं, जो हर हत्याकांड के बाद आपकी आँखों में मिर्ची की तरह नहीं गड़ता है।

 उत्तरः वह चाँद सबसे खतरनाक इसलिए नहीं होता हैं, क्योंकि वह आँखों में मिर्च की तरह गड़ता नहीं है। ऐसी बहुत सारी परिस्थिति है, जो इनसे भी खतरनाक होता है। सबसे खतरनाक वह परिस्थिति होती है, जो व्यक्ति के आत्मा को मार देता है।

(1) मेहनत की लूट सबसे खतरनाक नहीं होती 

पुलिस की मार सबसे खतरनाक नहीं होती

गद्धारी-लोभ की मुट्ठी सबसे खतरनाक नहीं होती

प्रसंग : प्रस्तुत पंक्तियाँ पाठ्यपुस्तक ‘आरोह’ के ‘सबसे खतरनाक’ नामक कविता से ली गई हैं। प्रस्तुत पंकितयों के माध्यम से कवि ने समाज के अव्यनस्थित परिस्थिती का वर्णना किया हैं।

कवि ने प्रस्तुत पक्तियों में दिनोंदिन अधिकाधिक नृशंस और क्रूर होती जा रही दुनिया की विद्रूपताओं के चित्रण के साथ उस खौफनाक स्थिति की ओर इशारा करती है, जहाँ प्रतिकूलताओं से जूझने के संकल्प क्षीण पड़ते जा रहे हैं। कवि कहते हैं, आज जो मेहनत की लूट रही हैं, वह खतरनाक नहीं होती हैं। पुलिस की मार सबसे खतरनाक नहीं होती है। गद्दारी या लोभ की प्रवृत्ति सबसे खतरनाक नहीं होती है।

(2) बैठे-बिठाए पकड़े जाना-बुरा तो है। 

सहमी-सी चुप में जकड़े जाना-बुरा तो है 

पर सबसे खतरनाक नहीं होता।

उत्तर: प्रस्तुत पंक्तियों में दिनोंदिन अधिकाधिक नृशंस और क्रूर होती जा रही दुनिया की विद्रूपताओं के चित्रण किया गया है। कवि कहता हैं, अनायास ही पकड़े जाना बुरा होता हैं। प्रतिकूलताओं से न जूझकर सहमी सी चुप में जकड़े जाना बुरा तो होता हैं। परंतु यह सबसे खरतरनाक नहीं होता है।

आरोहो : गद्य खंड

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आरोहो : काव्य खंड

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1.हम तौ एक एक करि जाना।
संतो देखत जग बौराना।
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2.(क) मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई
(ख) पग घुंघरू बांधि मीरा नाची,
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वितान

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(3) कपट के शेर में 

सही होते हुए भी दब जाना-बुरा तो है

किसी जुगनू की लौ में पढ़ना-बुरा तो है 

मुट्ठियाँ भींचकर बस वक्त निकाल लेना-बुरा तो है

सबसे खतरनाक नहीं होता। 

संदर्भ: कवि ने यहाँ प्रतिकूलताओं से न जुझकर सहम जाने की प्रवृत्ति को बुरा माना है। 

कवि कहते हैं कि इस कपट भरे संसार व्यक्ति सही होते हुए भी अगर दब जाए या विद्रोह न करें तो वह बुरा हैं। रात में जुगनू की लौ के तले पढ़ना भी बुरा हैं। मुट्ठियाँ भींचकर बस वक्त निकाल लेना बुरा होता है, परन्तु सबसे खतरनाक नहीं होता।

(4) सबसे खतरनाक होता है

मुर्दा शांति से भर जाना 

न होना तड़प का सब सहन कर जाना 

घर से निकलना काम पर 

और काम से लौटकर घर आना 

सबसे खतरनाक होता है 

हमारे सपनों का मर जाना

संदर्भ : : प्रस्तुत पंक्तियों में कवि ने जड़ स्थितियों को बदलने की प्यास के मर जाने और बेहतर भविष्य के सपनों के गुम हो जाने को सबसे खतरनाक स्थिति मानता हैं। कवि कहता है, सबसे खतरनाक स्थिति वह है, जब व्यक्ति मुर्दा शांति (मुर्दों जैसी (शान्ति ) से भर जाता है। वह बिना किसी तड़प (बैचेनी) के सब कुछ सहन करने लगता है। जब वह घर से केवल काम पर निकलता है और काम से लौटकर घर आता है। सबसे खतरनाक स्थिति वह होती है, जब व्यक्ति के सपने मर जाते हैं।

(5) सबसे खतरनाक वह घड़ी होती है 

आपकी कलाई पर चलती हुई भी जो 

आपकी निगाह में रुकी होती हैं।

संदर्भ: प्रस्तुत पंक्तियों में कवि ने इस प्रतिकूलता की तरफ विशेष संकेत करता है. जहाँ आत्मा के सवाल बेमानी हो जाते हैं। कवि कहता हैं, वह घड़ी सबसे खतरनाक होती हैं, जो कुलाई पर झलती हुई भी हमारी निगाह में रुकी हुई मालुम होती हैं। अर्थात वह परिस्थिती सबसे खतरनाक होती है, जहाँ मनुष्य की सोच रूक जाती हैं।

(6) सबसे खतरनाक वह आँख होती है 

जो सब कुछ देखती हुई भी जमी बर्फ होती है। 

जिसकी नजर दुनिया को महब्बत से चुमना भूल जाती है 

जो चीज़ों से उठती अंधेपन की भाप पर ठुलक जाती है जो रोजमर्रा के क्रम को पानी हुँई 

एक लक्ष्यहीन दुहराव के उलटफेर में खो जाती हैं।

संदर्भ: प्रस्तुत पक्तियों में कवि ने जड़ स्थितियों को बदलने की प्यास मर जाने और बेहतर भविष्य के सपनो के गुम हो जाने को सबसे खतरनाक स्थिति मानता हैं। कवि कहता हैं वह आँखे सबसे खतरनाक होती हैं, जो सबकुछ देखती तो है, परन्तु अनकी आँखो में बर्फ की परत जमी होती हैं। जिनकी पथरायी आँखो संसार को मुहब्बत से चूमना भूल जाती हैं। अर्थात जो संसार मे मुहब्बत फेलाना भूल जानो हैं। जो आँखे चीजों से उठती अंधेपन की भाप पर दुलक जाती हैं। जो हर दिन होने वाली विद्रपताओं को सहन करती जाती हैं। कवि कहता हैं, सबसे खतरनाक वह होता हैं, लक्ष्यहीन दुहराप के उलटफेर मे खो जाती हैं।

(7) सबसे खतरनाक वह चाँद होता है 

जो हर हत्याकांड़ के बाद 

वीरान हुए आँगनों में चढ़ता है 

पर आपकी आँखो को मिर्चों की तरह नहो गड़ता हैं।

संदर्भ: प्रस्तुत पंक्तियों में कवि ने सबसे खतरनाक परिस्थिति का उल्लेश किया हैं। कवि कहता हैं, कि सबसे खतरनाक वह याँद होता हैं, जो हर हयाकांड के बाद उजड़ें 1 आँगनो में चढ़ता हैं। परन्तु आपकी आँखो मे मिर्चों की तरह नहीं गड़ती हैं।

(8) सबसे खतरनाक वह गीत होता है

आपके कानों तक पहुँचने के लिए 

जो मरसिए पढ़ता है 

आतंकित लोगो के दरवाजों पर

जो गुंड़े की तरह अकड़ता है। 

प्रसंग : प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक ‘आरोह’ के ‘सबसे खतरनाक’ कविता से ली गई है, लेखक है पारा।

कवि सबसे खतरनाक उस गीत को कहते हैं, जो लोगों के कानों तक पहुँचाने के लिए मरसिए (करुण रस की कविता जो किसी व्यक्ति की मृत्यु पर लिखी जाती है) पढ़ता है। जो गुंडे की भांति आंतंकित भयभीत लोगों के दरवाजों पर अकड़ता रहता है।

(9) सबसे खतरनाक वह शन होती है

 जो जिंदा रूह के आसमानों पर ढलती है 

जिसमें सिर्फ़ उल्लू बोलते और हुआँ हुआँ करते गीदड़

हमेशा के अँधेरे बंद दरवाज़ों-चौगाठों पर चिपक जाते हैं।

संदर्भ : कवि उस प्रतिकूलताओं की तरफ विशेष संकेत किया है, जहाँ आत्मा के सवाल बेमानी हो जाते हैं।

कवि सबसे खतरनाक उस रात को कहते हैं, जो जिंदा आत्मा के आसमान पर हमेशा ढलती है। वह रात खरतनाक होती है, जिसमें सिर्फ उल्लू बोलते हैं, और हुआँ हुआँ करते हुए गीदड़ हमेशा के अंधेरे बंददरवाजों चौखटों पर चिपक जाते हैं।

(10) सबसे खतरनाक वह दिश होती है। 

जिसमें आत्मा का सूरज डूब जाए 

और उलकी मूर्दा धूप का कोई दुकड़ा 

आपके जिस्म के पूरब में चुभ जाए।

संदर्भ: प्रस्तुत पंक्तियों में मनुष्यों में जड़ स्थितियों को बदलने की प्यास का मर जाना दिखाया है।

प्रस्तुत पंक्तियों में कवि ने सबसे खरतनाक दिशा के बारे में कहा है, वे कहते हैं, वह दिशा सबसे खतरनाक होती है, जिसमें आत्मा का सूरज डूब जाए। अर्थात जिसमें | आत्मा मर जाए और उस आत्मा के सूरज से मुर्दा धूप का कोई टुकड़ा उसकी शरीर के पूरब में चुभ जाए।

(11) मेहनत की लूट सबसे खतरनाक नहीं होकती

पुलिस की मार सबसे खतरनाक नहीं होती

गद्धारी-लोभ की मुट्ठी सबसे खतरनाक नहीं होती। 

संदर्भ: प्रस्तुत पंक्तियों में कवि ने समाज की विद्रूपताओं का चित्रण किया है। कवि कहता है, मेहनत की लूट सबसे खतरनाक नहीं होती है। पुलिस की मार सबसे खरतनाक नहीं होती है। गद्दारी लोभ भी सबसे खतरनाक नहीं होती है।

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