Class 11 Hindi (MIL) प्रथम भाग | आरोह (गद्य खंड) | विषय – 6. स्पीति में बारिस

Class 11 Hindi (MIL) प्रथम भाग | आरोह (गद्य खंड) | विषय – 6. स्पीति में बारिस HS प्रथम वर्ष के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न हिंदी प्रश्न उत्तर आपके लिए नवीनतम NCERT/AHSEC संकेतकों के अनुसार नवीनतम प्रश्न और समाधान लाता है। छात्र इन आवश्यक अध्याय प्रश्नों को सक्रिय करके प्रत्येक अध्याय के संबंध में अपने सभी संदेहों को दूर करेंगे और हमारे विशेषज्ञों द्वारा प्रदान की गई विस्तृत व्याख्याओं को विस्तृत करेंगे ताकि आपको उच्च सहायता मिल सके। ये प्रश्न छात्रों को समय की कमी के कारण परीक्षा के लिए अच्छी तैयारी करने में मदद कर सकते हैं। Class 11 Hindi (MIL) प्रथम भाग | आरोह (गद्य खंड) | विषय – 6. स्पीति में बारिस

HS First Year Hindi (MIL) प्रथम भाग :: आरोह (गद्य खंड) विषय – 6. स्पीति में बारिस

प्रथम भाग :: आरोह (गद्य खंड)

सारांश :

स्पीति हिमालय प्रदेश के लाहुल-स्पीति जिले की तहसील है। परन्तु ऊँचे दरों और कठिन रास्तों के कारण दोनो में योगायोग नहीं है। वर्तमान समय में संचार में सुधार | होने पर भी लाहुल-स्पीति का योग प्रायः ‘वायरलेस सेट’ के जरिए ही होता है। | बसंत में वहाँ जाना कठिन है, परन्तु शीत मं प्रायः असंभव है।

प्राचीनकाल में स्पीति भारतीय साम्राज्यों का अनाम अंग रहा होगा। स्पीति की स्वतंत्रता भूगोल ने सिरजी हैं। वहीं इसकी रक्षा तथा संहार भी करता है।

पहले जब राजाओं का कोई हरकारा स्पीति आता था, तो आते-आते वसंत बीत जाता था। जब भी वहाँ डाइनामाइट का विस्फोट होता तो लोग एक-दूसरे पकड़कर आँख बंद कर बैठ जाते और धमाका गुजर जाने पर डरते-डरते आँख खोलते।

स्पीति का जनसंख्या बहुत कम हैं। 1901 की जनगणना के अनुसार इसकी जनसंख्या 3, 2, 31 तथा 1971 की जनगणना के अनुसार यह 7,196 हैं। इसका क्षेत्रफल भी लाहुल के साथ जोड़कर 12,0,15 वर्ग कि.मी. हैं। इस तरह स्पीति की जनसंख्या प्रति वर्गमील चार से भी कम हैं।

लाहुल-स्पीति का प्रशासन ब्रिटिश राज से भारत को मिला। सन् 1846 में लाहुल, स्पीति ब्रिटिश अधीनता में थे। लद्दाख मंडल के दिनों में स्पीति का शासन नोनो (स्थानीय शासक) द्वारा चलाया जाता था। ब्रिटिश भारत में भी कुल्लू के असिस्टेंटे कमिश्नर के समर्थन से यह नोनो ही कार्य करता था। भले ही इसका अधिकार द्वितीय दरजे के मजिस्ट्रेट के बराबर था। लेकिन स्पीति के लोग उसे अपना राजा मानते थे।

1873 में स्पीति रेगुलेशन पास हुआ जिसके तहत लाहुल और स्पीति को विशेष दरजा दिया गया। रेगुलेशन के अधीन प्रशासन के अधिकार नोनो को दिए गए जिसमें मालगुजारी इकट्ठा करना, फौजदारी के मुकदमों का फ़ैसला करना शामिल था। 1960 में लाहुल-स्पीति को पंजाब राज्य के अंतर्गत रखा गया और 1966 में हिमाचल प्रदेश के उत्तरी छोर का जिला हो गया।

स्पीति 31.42 और 32.59 अक्षांश उत्तर और 77.26 और 78.48 पूर्व देशांतर के बीच स्थित हैं। यह चारों ओर से ऊँचे-ऊँचे पहाड़ों से घिरा है। इन पहाड़ों की औसत ऊँचाई 18,000 फ़ीट हैं। यह पहाड़ उसे पूरब तिब्बत, पश्चिम में लाहुल, दक्षिण में किन्नौर और उत्तर में लद्दाख से अलग करते हैं।

स्पीति में बसे लोगों की संख्या बहुत कम है। प्रति वर्गमील चार से भी कम लोग बसते हैं। लेकिन आश्चर्य इस बात पर हैं, यहाँ इतनी कठिनाई, विपत्ति में लोग रहते हैं। ये आठ-नौ महीने शेष दुनिया से कटे हुए रहते हैं। ठंड में ठिठुर रहे थे, लकड़ी भी उपलब्ध नहीं हैं। वहाँ एक ही फ़सल उगाया जाता हैं।

स्पीति नदी के साथ-साथ लेखक का पश्चिम स्पीति के पहाड़ों के साथ हुआ स्पीति के पहाड़ लाहुल से ज्यादा ऊँचे, नंगे और भव्य हैं। रोहतांग जोत के पार मध्य हिमालय में लाहुल-स्पीति की घाटियाँ अवस्थित है। श्री कनिघंम के अनुसार समुद्र की सतह से ऊँचाई स्पीति की 12,986 फ़ीट हैं।

मध्य हिमालय की जो श्रेणियाँ स्पीति को घेरे हैं, उसमें उत्तर की श्रेणियों को बारालाचा और दक्षिणी श्रेणियों को माने श्रेणी कहा जाता है। लेखक कहते हैं इन माने की चोटियाँ बूढ़े लामाओं के जाप से उदास हो गई हैं। युवक युवतियाँ किलोल करें तो यह भी हर्षित हों। यह लेखक का युवा निमंत्रण है। लाहुल की तरह स्पीति में दो ऋतुएँ हैं। बसंत ऋतु तथा शीत ऋतु। बसंत में, जुलाई में औसत तापमान 15° सेंटीग्रेड और शीत में जनवरी में औसत तापमान 8° रिकार्ड किया गया हैं।

 स्पीति में बंसत बहुत कम दिनों का होता है, इस समय फूल नहीं खिलते न हरिलायी आती है न वह गंध होती है। ठंडक बहुत ज्यादा पड़ने पर नदी नाले सब जम जाते हैं, हवाएँ तेज़ चलती हैं।

स्पीति में वर्षा भी कम होती हैं। कभी कभी बारिश होती है। यहाँ वर्षा न होने के कारण धरती सूखी, ठंडी और वंध्या रहती है।

स्पीति में साल में एक फ़सल होती है इसकी मुख्य फ़सलों में जौ, गेहूँ, मटर और सरसों है, जिसमें जौ मुख्य हैं। यहाँ कोई फल नहीं होता। ऊँचाई वायुमंडल के दबाव में कमी, ठंड की अधिकता, वर्षा की कमी वगैरह के कारण यहाँ पेड़ नहीं होते।

इसलिए स्पीति नंगी और वीरान हैं। वर्षा स्पीति के लिए सुखद संयोग हैं। जब स्पीति में लेखक थे, एक रात वहाँ वर्षा हुई। दूसरे दिन वहाँ के निवासी लेखक की यात्रा को शुभ कहने लगे। क्योंकि स्पीति में बहुत दिनों बाद बारिश हुई।

आरोहो : गद्य खंड

Sl. No.LessonsLinks
1.नमक का दारोगा Click Here
2.मियाँ नसीरुद्दीन Click Here
3.अपू के साथ ढाई साल Click Here
4.विदाई-संभाषण Click Here
5.गलता लोहा Click Here
6.स्पीति में बारिस Click Here
7.रजनी Click Here
8.जामुन का पेड़ Click Here
9.भारत माता Click Here
10.आत्मा का ताप Click Here

आरोहो : काव्य खंड

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1.हम तौ एक एक करि जाना।
संतो देखत जग बौराना।
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2.(क) मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई
(ख) पग घुंघरू बांधि मीरा नाची,
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3.पथिक Click Here
4.वे आँखें Click Here
5.घर की याद Click Here
6.चंपा काले काले अच्छर नहीं चीन्हती Click Here
7.गजल Click Here
8.1. हे भूख मत मचल
2. हे मेरे जूही के फूल जैसे ईश्वर
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9.सबसे खतरनाक Click Here
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वितान

1.भारतीय गायिकाओं में बेजोड़ – लता मंगेशकर Click Here
2.राजस्थान की रजत बूंदें Click Here
3.आलो-आंधारि  Click Here

प्रश्नोत्तर

1. इतिहास में स्पीति का वर्णन नहीं मिलता। क्यों ?

उत्तर: स्पीति मध्य हिमालय में अवस्थित हैं। ऊँचे दरों और कठिन रास्ते के कारण अन्य राज्यों के साथ स्पीति का संपर्क कम रहा है। अलंध्य भूगोल के कारण इतिहास में स्पीति का वर्णन नहीं मिलता हैं।

2. स्पीति के लोग जीवनयापन के लिए किन कठिनाइयों का सामना करते हैं? (2015,17) 

उत्तर: स्पीति के लोगों को जीवन-यापन के लिए विभिन्न कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। वहाँ इतनी ठंडक पड़ती है, कि लोगों को ठिठुर कर रहना पड़ता है। वहाँ लकड़ी भी उपलब्ध नहीं हैं, कि वहाँ के लोग घर को गरम कर रख सके। वहाँ फ़सलों में गेहूँ, जौ, सरसों तथा मटर आदि का उत्पादन किया जाता है।

3.लेखक माने श्रेणी का नाम बौद्धों के माने मंत्र के नाम पर करने के पक्ष क्यों हैं ? 

उत्तर: लेखक माने श्रेणी का नाम बौद्धों के माने मंत्र के नाम पर करने के पक्ष में हैं, क्योंकि इन माने श्रेणियों में बौद्धों के माने मंत्र का इतना जाप हुआ कि यह नाम उन श्रेणियों को दे दिया गया।

4.ये माने की चोटियाँ बूढ़े लमाओं के जाप से उदास हो गई हैं- इस पंक्ति के माध्यम से लेखक ने युवा वर्ग से क्या आग्रह किया है ? 

उत्तर: इस पंक्ति के माध्यम से लेखक ने युवा वर्ग से आग्रह करते हैं वे यहाँ आये। क्योंकि माने की चोटियाँ बूढ़े लामाओं के जाप से उदास हो गई हैं। वहाँ आवश्यकता हैं, युवक-युवतियों की किलोल की तभी वह चोटियाँ हर्षित हो सकते हैं।

5. वर्षा यहाँ एक घटना है, एक सुखद संयोग हैं- लेखक ने ऐसा क्यों कहा हैं ?

 उत्तर: स्पीति में कभी-कभी वर्षा होती हैं। अतः वर्षा यहाँ एक घटना हैं, एक सुखद संयोग हैं। वर्षा ऋतु यहाँ के लोगों की साध पूरी नहीं करती। वर्षा कम होने के कारण धरती सूखी, ठंडी और वंध्या रहती है।

6. स्पीति अन्य पर्वतीय स्थलों से किस प्रकार भिन्न है ?

उत्तर: स्पीति जो मध्य हिमालय में स्थित हैं। यह स्थल अपनी भौगोलिक एवं प्राकृतिक विशेषताओं के कारण अन्य पर्वतीय स्थलों से भिन्न हैं।

लघु प्रश्न

1.’स्पीति में बारिश’ नामक यात्रा वृत्तांत के लेखक कौन हैं ? 

उत्तर: इसके लेखक है कृष्णनाथ।

2.स्पीति कहाँ स्थित हैं ?

उत्तर: स्पीति हिमालय के मध्य भाग में स्थित है। 

3. स्पीति रेगुलेशन कब पास हुआ था ?

उत्तर: सन् 1873 में स्पीति रेगुलेशन पास हुआ था।

4.स्पीति को कब हिमाचल प्रदेश में मिला लिया गया ?

उत्तर: सन् 1966 में स्पीति को हिमाचल प्रदेश के उत्तरी छोर का जिला बनाया गया।

5. माने श्रेणी की ऊँचाई कितनी हैं ?

उत्तर : माने श्रेणी की ऊँचाई 21,646 फ़ीट हैं।

6. स्पीति में कितनी ऋतुएँ होती हैं ?

 उत्तर : स्पीति में दो ऋतुएँ होती है। (1) वसंत ऋतु (2) शीत ऋतु।

7. स्पीति में क्या-क्या फ़सले होती हैं ? 

उत्तर: स्पीति में दो किस्म का जौ, गेहूँ, मटर और सरसों का उत्पादन किया जाता है।

8. वर्षा यहाँ एक घटना हैं। एक सुखद संयोग हैं- ऐसा क्यों कहा गया है।

उत्तर: स्पीति में बारिश कभी-कभी होती हैं। वर्षा कम होने के कारण धरती सूखी ठंडी और वंध्या रहती हैं। अतः वर्षा को एक सुखद संयोग कहा गया हैं।

9. स्पीति में पेड़ क्यों नहीं उगते ?

उत्तर : अधिक ऊँचाई, वायुमंडल के दबाव में कमी, ठंड की अधिकता, वर्षा की कमी के कारण वहाँ पेड़ नहीं होते।

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