Class 11 Hindi (MIL) प्रथम भाग :: आरोह (गद्य खंड) विषय – 3. अपू के साथ ढाई साल

Class 11 Hindi (MIL) प्रथम भाग :: आरोह (गद्य खंड) विषय – 3. अपू के साथ ढाई साल एचएस प्रथम वर्ष के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न हिंदी प्रश्न उत्तर आपके लिए नवीनतम NCERT/AHSEC संकेतकों के अनुसार नवीनतम प्रश्न और समाधान लाता है। छात्र इन आवश्यक अध्याय प्रश्नों को सक्रिय करके प्रत्येक अध्याय के संबंध में अपने सभी संदेहों को दूर करेंगे और हमारे विशेषज्ञों द्वारा प्रदान की गई विस्तृत व्याख्याओं को विस्तृत करेंगे ताकि आपको उच्च सहायता मिल सके। ये प्रश्न छात्रों को समय की कमी के कारण परीक्षा के लिए अच्छी तैयारी करने में मदद कर सकते हैं। Class 11 Hindi (MIL) प्रथम भाग :: आरोह (गद्य खंड) विषय – 3. अपू के साथ ढाई साल

HS First Year Hindi (MIL) प्रथम भाग :: आरोह (गद्य खंड) विषय – 3. अपू के साथ ढाई साल

प्रथम भाग :: आरोह (गद्य खंड)

सारांश :

“पथेर पांचाली” फिल्म की शुटिंग का काम ढाई साल तक चला था। उस सम लेखक एक विज्ञापन कंपनी में नौकरी भी करते थे। जब नौकरी से फुर्सत मिलती फिल्म की शूटिंगं किया जाता था। लेखक के पास उस समय पर्याप्त पैसे नहीं थे, अतः कभी-कभी पैसे न होने के कारण फिल्म स्थगित रखनी पड़ी।

फिल्म के लिए कलाकाल इकाट्ठा करने का आयोजन हुआ और इसके लिए उन्होंने | अखबार मे इश्तहार दिया तथा रासबिहारी ऐ एवेन्यु की एक विल्डिंग में एक कमरा भाड़े पर लिया गया था। अपु की भूमिका निभाने के लिए कई बच्चे आये। एक बार एक लड़का आया। नाम पुछने पर वह अपना नाम टिया बताता हैं। लड़के गर्दन की पाउडर देखकर लेखक को शक होता है। लड़की के पिता से पुछने पर पता चलता है, कि वह लड़का नहीं लड़की हैं। बिज्ञापन देकर भी जब अपू की भूमिका के लिए लड़का नहीं मिला तो लेखक बेहाल हो जाते है। एक दिन लेखक की पत्नी ने घर पर अपने पड़ीसी के लड़के को देखा और लेखक को बाताया। अंत में वही लड़का जिसका नाम सुबीर बनर्जी हैं, ‘पथेर पाचाली’ में अपु बना। फिल्म का काम ढाई साल तक चलाने वाला हैं, इस बात की लेकर लेखक को डर हुआ क्योंकि अपु और दुर्गा को भूमिका निभाने वाले बच्चे अगर ज्यादा बड़े हो गये तो फिल्म में वह दिखाई देगा। लेकिन लेखक की ही खुशकिस्मती हैं कि बच्चे जितने बढ़ने चाहिए थे, उतने बढ़े नहीं, यहां तक की इंदिरा ठाकुराइन की भूमिका निभाने वाली अस्सी साल की चुन्नीबाला देवी भी ढाई साल तक काम कर सकी।

एक बार शूटिंग के लिए अपु और चुर्गा को लेकर कलकत्ता से सत्तर मील पर पालसित नाम के गाँव जाते हैं, वहाँ रेल लाइन के पास काशकुल था। शीन था अपू और दुर्गा पहली बार रेलगाड़ी cow urine: UP govt to sell packaged bottles of cow urine as health drink | Bareilly News – Times of India buy oxymetholone online is nhs finding it hard to get medicines? देखते हैं। शीन बड़ा होने के कारण एक दिन में शुटिगं पुरी न हो सकी। एक सप्ताह बाद जब शूटिंग के लिए वहाँ पहुचते हाँ, तो वहाँ काश के फुल नही दिखते कयोंकि जानवरो ने वे सारे काशफुल खा डाले थे। अतः उन्हे शुर्टगं के लिए अगले साल की शारद ऋतु तक रुकना पड़ा।

‘पथेर पाचाली’ फिल्म में तीन अलग अलग रेल गाड़ियो का इस्तेमाल किया गया हैं। परन्तु फिल्म में दर्शक पहचान ही नहीं पाते कि अलग अलग तीन रेलहगाड़ियो का प्रयोग किया गया हैं।

आर्थिक अथाव के कारण बहुत दिनों तक अनेक समस्याओं से जुझना पड़ा। मूल अपन्यास में भूलो नामक कुत्ते का उल्लेख हैं, अतः उन्होंने गाँव से कुत्ता प्राप्त किया। सीन में दिखाना था कि अपु की माँ सर्वजया अपु को भातखिला रही हैं, परन्तु बुच्चे का ध्यान तीर कमान पर हैं। अत: अन्त में अपु की माँ सर्वजया थाली में बचे भात को भूलो कुत्ते की खिला देती हैं। लेकिन यह शाँट असी दिन नहीं लिया जा संका, पैँसे सत्म हो गये और सूरज की रोशनी खत्म हो गई।

छह माहिने बाद पेसे इकट्ठा होने पर जब बोड़ाल गाँव आते हैं, तब अन्हे पता चलता हैं, कि भूलो कत्ता मर चुका हैं, इस पर लेखक बड़ी दुविधा में पड़ जाते हैं। परन्तु बाद में पता चलता हैं, कि भूलो जेसा दिखने वाला गांव में एक और कुत्ता हैं और सीन का बाकी अंश इसी कुत्ते को लेकर सुट किया गया। कुत्ता भलो से इतना मिलता जुलता था कि कोई पहचान ही नहीं पाया।

श्रीनिवास नामक मिठाईवाले की भुमिका में जो व्यक्ति कर रहे थे उनका देहान्त हो जाता हैं, और बाद में लेखक को असके लिए दुसरे व्यक्ति को लिया जाता हैं, जिनका चेहरा पहले वाले श्रीनिवास से नहीं मिलता था परन्तु शरीर एक जैसा था। पथेर पांचाली’ फिल्म अनेक लोगों ने एक से अधिक बार देखी हैं परन्तु श्रीनिवास के मामले में यह बात किसी के ध्यान में नहीं आई हैं।

एक बार फिल्मकार को ऐसा सीन लेना था, जिसमें अपु दुर्गा के पीछे कुत्ता को भागना होता हैं। पर कुत्ता प्रशिक्षिन नही होने के कारण शुटिंग के वक्त मालिक की आज्ञा का पालन नहीं करता हैं। अतः बार बार किमती फिल्म को काटना पड़ा। अन्त मे फिल्मकार ने दुर्गा से अपने हाथ में थोड़ी मिठाई छिपाने के लिए कहा और वह कुत्ते को दिखाकर दौड़ने को। तब जाकर कुत्ता दौड़ा और फिल्मकार की इच्छा अनुसार शाँट मिला। पैसे की कमी के कारण बारिश का इश्य चित्रित करने में बहुत मुश्किल आइ थी। बरसात के दिन आये और गये परन्तु पैसे न होने के कारण शुटिगं बन्ढ रखनो पड़ी। जब हाथ में पैसे आए, तब अक्टूबर का महिना शुरु हुआ था। शरतऋतु में शायद बरसात होगी इसी आशा मे फिल्मकार अपु और दुर्गा को तथा कैमरा और तकनीशियन को साथ लेकर रोज देहात जाते थे। आकाश में एक भी बादल दिखता तो फिल्मकार को लगता की बारिस हो। आखिरकार एक दिन धुआँधार बारिस शुरु हुई। उसी बारिस में भीगकर दुर्गा भागती हुइ आती है, और पेड़ के नीचे अपने भाई के पास आसरा लेती हैं। फिर दोनो गाना गाते है। बारिश में भिगने के कारण अपु का शरीर सिहरने लगा। शाँट पुरा होने पर दोनो भाई बहन का शरीर गरम करने के लिए दुध मे ब्राडी मिलाकर

दी गई। ‘पथेर पांचाली’ फिल्म में यह शीन बहुत ही अच्छा चित्रित हुआ हैं। बोड़ाल गाँव में बहुत बार जाना पड़ा। अतः वहाँ के लोगो से उनका अच्छा परिचय हो गया। गाँव मे अदभुत सज्जन थे, जिनका नाम सुबोध दा था। वे साद पैसठ साल के थे। उनका माथा गंजा था। वे अकेले बड़बड़ाते रहते है। जब भी पिल्मकार तथा बाकी लोगो को देखते थो, चिल्लाते हुए कहते थे पिल्म वाले आए हैं, मारो उनको लाठियों से बाग में सुबोध दा से उनका अच्छा परिचय हुआ। वे उन्हे वायलिन पर लोकगोतों की धुने बजाकर सुनाते थे।

जिस पर में शुटिमग किया जा रहा था, उसके पड़ोस में एक धोबी रहना था जो थोड़ा पागल था कभी भी भाइयो और बहने कहकर भाषण शुरु करता था। फुर्सत के समय फिल्म शुटिंग में कोई परेशानी नहीं होती थी, परन्तु शुटिगं के दौरान साउड़ का काम प्रभावित हो सकता था। लेकिन धोबी के रिस्तेदारी ने फिल्म शुटिंग में अनकी मदद की।

जिस घर मे पथेर पांचाली के शुटिग का काम किया जा रहा है, वह एकदम ध्वस्त अवस्था में था। उसके मालिक कलकत्ता में रहते थे। अस ध्वस्त घर को मरम्मतकर उसे शूटिंग के लिए ठीक ठाक करवाने में एक महिना लगा। मे जिस घर में फिल्म शुटिंग किया जा रहा था उसमे कुछ एक ऐसे कमरे थे जिसमे सामान रखा गया था। एक कमरे में साउंड रिकॉडिस्ट भूपेन बाबु बैठते थे। शुटिगे के वक्त उन्हें देख नही सक्ते थे केवल उनके आवाज ही सुन सकते थे। शाट के बाद जब थी उनसे पूछा जाता था कि साउंड ठीक हैं या नहीं। तो वे केवल हाँ या ना में जबाब देते।

एक दिन शाट के बाद जब उनसे साठड के बारे में पूछा गया परन्तु उत्तर नहीं मिला। कमरे में जाकर जब देखा गया तो खिड़की से एक सौप नीसे उत्तर रहा था और सौंप को देखकर भुपेन बाबु सहम गए थे। उनकी बोलती बन्द हो गई थी। सौंप को मारने की इच्छा होने पर स्थानीय लोगो ने मना कर दिया। क्योंकि वह वास्तुसर्प था और वहुत दिनो से वहा रह रहा था।

प्रश्नोत्तर

1.’पथेर पांचाली’ फिल्म को शुटिंग का काम साल तक क्यो चला ? (2015) 

उत्तर: जब ‘पथेर पांचाली’ फिल्म की शुटिंग का काम शुरु हुआ उस समय फिल्मकार विझापन कम्पानी में नौकरी करता था। नौकरी के काम से जब भी फुर्सत मिलती थी, तभी फिल्म शुटिंग किया जाता था। उस समय फिल्मकार के पास पर्याप्त पैसे थी नही थे अतः पैसे जमा होने तक शुटिंग का काम स्थगित रखनी पड़ती थी।

2.अब अगर हम उस जगह बाकी आधे सीन की शुटिंग करते, तो पहले आधे सीन के साथ उसका मेल कैसे बैठता ? उसमें से कटिन्युइटी, नदारद हो जाती है- इस कथन के पीछे क्या भाप हैं?

उत्तर: एक बार कलकत्ता से सत्तर मील पर अवस्थित पालसिट नाम के एक गाँव मे एक सीन की शूटिंग करनी थी। सीन में दिखाना था कि अपु और दुर्गा रेलगाड़ी दैखने जाते है, और रेललाइन के पास काशकुलों से भरा मैदान था। यह सीन बहुत ही बड़ा था, अतः एक दिन में उसकी शुटिंग पुरी होना नामुमकिन था। कम से कम दो दिन लग सकते थे। पहले दिन जगद्धात्री पुजा का प्योहार था। उस दिन शूटिंग का काम आधा ही हुआ। सात दिन बाद जब शुटिंग के लिए उस जगह गए तो वहाँ काशफुल नहीं थे। सारे जानवर खा गये थे। अब आधे सीन की शूटिंगं वहा नही हो सकती थी क्योंकि पहले आधे सीन के साथ उसका मेल नहीं बैठता। अतः उसकी कटिन्यइटी नदारढ हो जाती।

3.किन दो दृश्यों में दर्शक यह पहचान नही पाते कि उनकी शुटिंग में कोई तरकीब अपनाई गई है ?

उत्तर :भुलो नामक कुत्ते के साथ शुटिगं में तरकीब अपनाई गई थी। सीन में अपु की माँ अपू को भात खिला रही है परन्तु अपु का ध्यान तीर कमान पर है, वह तीर कमान खेलने के लिए उतावला हैं। खाने का निवाला लेकर बच्चा भी माँ के पीछे पीछे जाता हैं। परन्तु बच्चे के भाव जानकर सारा भात भूलो को खिला देती है। परन्तु यह शुटिंग उस दिन पूरी नहीं हो पायी। छह महिने बाद जब शूटिंग के लिए भूलो कुत्ते की जरुरत पड़ी परन्तु पता चला कि भूलो मर चुका हैं। अतः उसके स्थान पर उसे के जैसा दिखने वाला एक अन्य कुत्ता फिल्म में दिखाया गया हैं।

इस सीन में एक जगह और तरकीब अपनाई गई थी। श्रीनिवास नामक मिठाई वाला इस फिल्म में भूमिका निभा रहा था। फिल्म पुरी होने से पहले हो उसकी मृत्यु हो जाती है। और फिल्मकार को श्रीनिवास के स्थान पर दूसरे व्यक्ति को लिया गया जो शरीर से बिल्कुल उन्ही के जैसा दिखता था।

आरोहो : गद्य खंड

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4.’भूलो’ की जगह दुसरा कुत्ता क्यो लाया गया ? उसने फिल्म के किस दृश्य को पूरा किया ? 

उत्तर : ‘पथेर पांचाली’ फिल्म में एक सीन को पूरा करने के लिए ‘भूलो’ की जगह दुसरा कुत्ता लाया गया था।

 पथेर पांचाली में एक सीन था, जिसमे अपू की माँ सर्वजया बेटे को भात खिला रही थी, परन्तु अपू का सारा ध्यान उसके हाथ के तीर-कमान पर था। ‘भूलों’ कुत्ता भी उनके पीछे पीछे जिसका ध्यान सर्वजया के हाथ की थाली पर था। सीन में यह दिखाना होता हैं, कि अपू की माँ थाली के भात को भूलो की खिला देती है, परन्तु सुरज तथा पैसे खत्म हो जाने के कारण शुटिंग रोकनी पड़ी। छह महिने बाद जब फिल्म की शूटिंग शुरू की गई तो उन्हें पता चला कि भूलो कुत्ता मर चुका हैं। अतः उन्है फिल्म के उस सीन को पूरा करने के लिए भूलो जैसा ही दिखनेवला कुत्ते से काम लेना पड़ा।

5.फिल्म में श्रीनिवास की क्या भूमिका थी और उनसे जुड़े बाकी दृश्यो को उनके गुजर जाने के बाद किस प्रकार फिल्माया गया ?

उत्तर: फिल्म मे ग्रीनिवास एक मिठाइ वाले की भूमिका में थे। फिल्म पूरी होले से पहले ही उनकी मृत्यु हो जाती है। तब फिल्म के उस सीन की शूटिंग करने के लिए एक दुसरे व्यक्ति को लिया गया जो चेहरे से तो श्रीनिवास जैसा नहीं था पर शरीर से बिल्कुल श्रीनिवास जैसा ही था और उन्हीं को लेकर फिल्म की शुटिंग पुरी की गई।

6.बारिश का दृश्य चित्रित करने में क्या मुश्किल आई और उसका समाधान किस प्रकार हुआ ?

उत्तर: बारिश का दृश्य चित्रित करने में बहुत समस्याए आई। पैसे के अभाव में बरसात के दिनों में भी शुटिगं का काम बदं रखना पड़ा। जब पैसे आये तो अक्टूबर का महीना शुरु हुआ। शरद ऋतु में बरसात से आशा को अपु और दुर्गा कैमरा और तकनशियन के साथ फिल्मकार हर रोज देहात जाकर बैठे रहते थे, एक दिन धुआधार बारिश हुई। उस बारिश में दोनों बच्चे इतने भीगे कि वे ठड़ से सिहरने लगे। और उनके शरीर को गरम करने के लिए उन्हें दूध में योड़ी बड़ी में मिलाकर पिलाई गई।

7.किसी फिल्म की शुटिगं करते समय फिल्मकार को जिन समस्याओं का सामना पड़ता है, उन्हें सूचीबद्ध कीजिए। 

उत्तर: किसी फिल्म की शूटिंग करते समय फिल्मकार को निम्नालिखित समस्याओ का सामना करना पड़ता है–

(क) सबसे पहले समस्या कलाकार इकाट्ठा करने में आती है। फिल्म के पात्र के लिए उपयुक्त कलाकार का आवश्यकता होती है।

(ख) फिल्मकार को फिल्म के लिए पर्याप्त पैसी की आवश्यक होती है। कभी कभी पैसो की कमी के कारण शुटिगं का काम स्थगित रखना पड़ता था।

(ग) कमी कमी एक दिन में शुटिंग का काम पुरा नहीं हो पाता और उसे पूरा करने दुसरे दिन के लिए शुटिंग स्थगित रखना पड़ता था। अगर सीन में बरसात दिखाना है, तो उसके लिए फिल्मकार को बरसात के लिए रूकना पड़ता हैं।

(घ)कथी कथी फिल्म पुरी होने से पहले ही किसी पात्र की मृत्यु हो जाती थी, और उसके बदले किसी दुसरे व्यक्ति को उसकी भुमिका के लिए इकट्ठा करना पड़ता हैं।

अति संक्षेप प्रश्न

1.’पथेर पांचाली’ फिल्म की शूटिंग कितने सालो तक चली।

उत्तर: ढाई साल तक चला।

2.फिल्मकार किस कम्पनी में काम करते थे। 

उत्तर: फिल्मकार विझापन कम्पनी में काम करते थे।

3.‘अपू’ की भुमिका कौन निभाता है ?

उत्तर: अपू की भूमिका सुबीर बनर्जी निभाता है। 

4.’पथेर पांचाली’ फिल्म में अपू की माँ का नाम क्या है ?

उत्तर : सर्वजया।

5. ‘भूलो’ कौन है ?

उत्तर: पथेर पांचाली फिल्म मे भूलो अपू और दुर्गा का पालतु कुत्ता है।

6. श्रीनिवास पथेर पाचाली फिल्म मे क्या भूमिका निभा रहे हैं ?

उत्तर : पथेर पाचाली फिल्म में श्रीनिवास मिठाईवाले की भूमिका निभा रहे है।

7.भूपेन बाबु कौन है ?

उत्तर : भुपेन बाबु साउड़ रिकार्डिस्ट भूपेन बाबू है।

8. भूपेन बाबु क्यों सहम जाते हैं ?

 उत्तर : भूपेन बाबू जिस कमरे में बैठे साउडं का काम देख रहे थे उसी कमरे की खिड़की से साँप उतरते देखवे सहम गये।

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